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मैं चला था कभी अकेला।

मैं चला था कभी अकेला।

Kavitadilse.top द्वारा आप सभी पाठकों को समर्पित है।



मैं चला🚶 था कभी अकेला।
लड़खड़ाया😧
कभी संभला😳
तो कभी गिरा धड़ाम से😵।



कुछ लोगों को बड़ा मजा आया😄।
किसी ने मुंह पर हाथ रख
अपनी हँसी छिपानी चाही🤗।
तो किसी ने ठहाके मार कर हँसा😂।



पर कुछ लोग वैसे भी थे👮
जो आगे बढ़कर
हमें उठाने को आए।
और हमें उठा
हिम्मत बाँध💪
अपने अपने रस्ते पर बढ़ गए।



जीवन आपका है।
पथ भी आपका है।
इसमें मिलने वाले
खुशी😀 और गम😪 भी आपके ही हैं।
इसे सहज स्वीकार कर
अपने पथ को पूरी करो।



आपको अकेले ही
अपनी पूरी जिंदगानी लिखनी है ।
लिखो!🖋
लिखते जाओ🖋
लिखते जाओ🖋
जब तक जीवन की स्याही
खत्म नहीं हो जाती है।
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मैं चला था कभी अकेला।
By Sushil Kumar
      (kavitadilse.top)

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