30 Nov 2018

Kambakht kise khabar hai???

Shayari

कंबख्त किसे खबर है??

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कंबख्त किसे खबर है??
इस दुनिया में
सभी तो बेखबर हैं।

दूध वाला भैया
मिठा मिठा बोलकर
दूध में पानी मिला
दूध बेच निकल जाता है।
और हम उसके वाणी के मिठास में
असली दूध का मिठास भी भूल चुके हैं।
पर फिर भी
कंबख्त किसे खबर है??
इस दुनिया में
सभी तो बेखबर हैं।

राशन की दुकान में जाओ तो
दुकानदार हमसे रिश्ता बना
चावल और शक्कर में
कंकर मिला
हमें प्यार से बेच देता है।
पर फिर भी
कंबख्त किसे खबर है??
इस दुनिया में
सभी तो बेखबर हैं।

बस में सफर करते वक्त
कन्डक्टर को भाड़ा देने के बाद
कंडक्टर साहब मुस्कुरा कर
बोल देते हैं
भाईसाहब चैंज नहीं है।
और हम उनके मुस्कान के
साजिश में फँस जाते हैं।
पर फिर भी
कंबख्त किसे खबर है??
इस दुनिया में
सभी तो बेखबर हैं।

ओफिस में साहब का
भारी भरकम फाईल
पिउन के हाथों से भेजवाना।
और फिर फोन पर
बड़े प्यार दुलार से
फाईल के विषय में बताना।
और उसे खत्म करने का
डेडलाइन देना।
हमारा डेडलाइन से पहले
फाईल कंपलीट कर भेजवाना।
और साहब से शाबाशी पाना।
साहब का प्रोमोशन होकर
वहाँ से निकल जाना।
पर फिर भी
कंबख्त किसे खबर है??
इस दुनिया में
सभी तो बेखबर हैं।

अगर शादी हुई है
तो बीवी की प्यार भरी फरमाइश
पूरी करने हेतु
नौकरी में जी जान लगा देना।
पर फिर भी पूरा ना कर पाने पर
उसे समझाना और उसका मान जाना।
पर अगर शादी नहीं हुई है
तो भगवान ही आपका मालिक है।
प्यार प्यार में
गर्लफ्रैंड आपकी किडनी तक बेचवा देगी।
पर फिर भी
कंबख्त किसे खबर है??
इस दुनिया में
सभी तो बेखबर हैं।






kambakht kise khabar hai??

es duniyaa men

sabhi to bekhabar hain।


dudh vaalaa bhaiyaa

mithaa mithaa bolakar

dudh men paani milaa

dudh bech nikal jaataa hai।

aur ham uske vaani ke mithaas men

asli dudh kaa mithaas bhi bhul chuke hain।

par phir bhi

kambakht kise khabar hai??

es duniyaa men

sabhi to bekhabar hain।


raashan ki dukaan men jaao to

dukaandaar hamse rishtaa banaa

chaaval aur shakkar men

kankar milaa

hamen pyaar se bech detaa hai।

par phir bhi

kambakht kise khabar hai??

es duniyaa men

sabhi to bekhabar hain।


bas men saphar karte vakt

kandaktar ko bhaadaa dene ke baad

kandaktar saahab muskuraa kar

bol dete hain

bhaaisaahab chainj nahin hai।

aur ham unke muskaan ke

saajish men phnas jaate hain।

par phir bhi

kambakht kise khabar hai??

es duniyaa men

sabhi to bekhabar hain।


ophis men saahab kaa

bhaari bharakam phaail

piun ke haathon se bhejvaanaa।

aur phir phon par

bde pyaar dulaar se

phaail ke vishay men bataanaa।

aur use khatm karne kaa

dedlaaen denaa।

hamaaraa dedlaaen se pahle

phaail kamplit kar bhejvaanaa।

aur saahab se shaabaashi paanaa।

saahab kaa promoshan hokar

vahaan se nikal jaanaa।

par phir bhi

kambakht kise khabar hai??

es duniyaa men

sabhi to bekhabar hain।


agar shaadi hui hai

to bivi ki pyaar bhari pharmaaesh

puri karne hetu

naukri men ji jaan lagaa denaa।

par phir bhi puraa naa kar paane par

use samjhaanaa aur uskaa maan jaanaa।

par agar shaadi nahin hui hai

to bhagvaan hi aapkaa maalik hai।

pyaar pyaar men

garlaphraind aapki kidni tak bechvaa degi।

par phir bhi

kambakht kise khabar hai??

es duniyaa men

sabhi to bekhabar hain।


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Shayari

27 Nov 2018

Yar teri yari chahie.

Shayari

यार तेरी यारी चाहिए।

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यार तेरी यारी चाहिए।
बिन तेरे
कोई जिंदगानी हो
ऐसी कोई कहानी नहीं चाहिए।

साथ तेरे
मैं बड़ा हुआ।
साईकिल लेकर
मेरे घर के सामने
तू खड़ा हुआ।
मुझे बैठा अपने सवारी पर
स्कूल की ओर
हमारा प्रस्थान हुआ।

क्लास में मेरे संग
तेरा मूर्गा बनना।
भले सारा अध्याय
तूने कल ही
याद है किया।

जो किसी से
कभी जो पंगा हुआ
बिच में ढाल बन
हमेशा तेरा खड़ा रहना।

वो स्कूल के पीछे
आम का पेड़ रहा।
और हमदोनों का
चौकीदार से छिपकर
पेड़ पर चढ़
आम तोड़ना।
चौकीदार को
हमारा दिख जाना।
और हमारा जान बचाकर
वहाँ से भाग निकलना।
और तुम्हारी वो मिठी गाली से
मुझे संबोधित करना।
और फलों को
बराबर हिस्से में बाँटना।
और फिर उन फलों को
बड़े चाव से खाना।
ऐसा आभास होना
मानो उन आम के फलों की मिठास
दुगुनी चौगुनी बढ़ गई हो।

कितना अच्छा लगता था
वो तेरे संग समय बिताना।

कितना अच्छा लगता था
वो तेरे संग समय बिताना।

यार तेरी यारी चाहिए।
बिन तेरे
कोई जिंदगानी हो
ऐसी कोई कहानी नहीं चाहिए।

वो हमारे जीवन में
एक लड़की का आना।
और उस लड़की पर
हम दोनो का दिल धढ़कना।
और हम दोनो का
उस लड़की के लिए
एक दूसरे से लड़ना।
फिर किसी दिन
तेरा वो रास्ते से हट जाना
और मेरा उस लड़की को भूला देना।

क्योंकि
यार तेरी यारी चाहिए।
बिन तेरे
कोई जिंदगानी हो
ऐसी कोई कहानी नहीं चाहिए।







yaar teri yaari chaahia।

bin tere

koi jindgaani ho

aisi koi kahaani nahin chaahia।


saath tere

main bdaa huaa।

saaikil lekar

mere ghar ke saamne

tu khdaa huaa।

mujhe baithaa apne savaari par

skul ki or

hamaaraa prasthaan huaa।


klaas men mere sang

teraa murgaa bannaa।

bhale saaraa adhyaay

tune kal hi

yaad hai kiyaa।


jo kisi se

kabhi jo pangaa huaa

bich men dhaal ban

hameshaa teraa khdaa rahnaa।


vo skul ke pichhe

aam kaa ped rahaa।

aur hamdonon kaa

chaukidaar se chhipakar

ped par chdh

aam todnaa।

chaukidaar ko

hamaaraa dikh jaanaa।

aur hamaaraa jaan bachaakar

vahaan se bhaag nikalnaa।

aur tumhaari vo mithi gaali se

mujhe sambodhit karnaa।

aur phalon ko

baraabar hisse men baantnaa।

aur phir un phalon ko

bde chaav se khaanaa।

aisaa aabhaas honaa

maano un aam ke phalon ki mithaas

duguni chauguni bdh gayi ho।


kitnaa achchhaa lagtaa thaa

vo tere sang samay bitaanaa।


kitnaa achchhaa lagtaa thaa

vo tere sang samay bitaanaa।


yaar teri yaari chaahia।

bin tere

koi jindgaani ho

aisi koi kahaani nahin chaahia।


vo hamaare jivan men

ek ldki kaa aanaa।

aur us ldki par

ham dono kaa dil dhdhaknaa।

aur ham dono kaa

us ldki ke lia

ek dusre se ldnaa।

phir kisi din

teraa vo raaste se hat jaanaa

aur meraa us ldki ko bhulaa denaa।


kyonki

yaar teri yaari chaahia।

bin tere

koi jindgaani ho

aisi koi kahaani nahin chaahia।


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Shayari

Hum sunder the,hum sunder hain aur sada hum sunder hi rahenge.

Shayari

हम सुंदर थे,  हम सुंदर हैं,  और सदा हम सुंदर ही रहेंगे।।

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दुनिया के नजरों में
भले हम कुरूप दिखते होंगे।
पर अपने दर्पण के नैनों से
कैसे कन्नी काट जाएँ हम।
वो तो चिल्ला चिल्ला कर
हमारी सुंदरता की बखान कर रही है।
मानो दुनिया का सबसे खुबसूरत
इंसान हम हीं हैं।
क्यों ना उसे ही मान ले हम।

दुनिया तो हमसे जलती है।
हमारी खुबसूरती देख वह
भूनती है।
फिर कैसे वह हमारे सौंदर्य का
ढिंढोरा पिट पाएगी।

इन दुनिया वालों से तो
अभी मिला हूँ।
दर्पण मेरे यार से तो
बचपन से मिलता आ रहा हूँ।
तो क्यों हम
इन दुनिया वालों की बात सुने।
हम सुंदर थे
हम सुंदर हैं
और सदा हम सुंदर ही रहेंगे।
क्योंकि हम अपने आईने पर
विश्वास करते हैं।

हम सुंदर थे
हम सुंदर हैं
और सदा हम सुंदर ही रहेंगे।










duniyaa ke najron men

bhale ham kurup dikhte honge।

par apne darpan ke nainon se

kaise kanni kaat jaaan ham।

vo to chillaa chillaa kar

hamaari sundartaa ki bakhaan kar rahi hai।

maano duniyaa kaa sabse khubsurat

ensaan ham hin hain।

kyon naa use hi maan le ham।


duniyaa to hamse jalti hai।

hamaari khubsurti dekh vah

bhunti hai।

phir kaise vah hamaare saundary kaa

dhindhoraa pit paaagi।


en duniyaa vaalon se to

abhi milaa hun।

darpan mere yaar se to

bachapan se miltaa aa rahaa hun।

to kyon ham

en duniyaa vaalon ki baat sune।

ham sundar the

ham sundar hain

aur sadaa ham sundar hi rahenge।

kyonki ham apne aaine par

vishvaas karte hain।


ham sundar the

ham sundar hain

aur sadaa ham sundar hi rahenge।

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Shayari

25 Nov 2018

Kitna achcha hota

Shayari

कितना अच्छा होता

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कितना अच्छा होता
ना खाने की फिक्र होती।
ना पीने की फिक्र होती।
बस तुम्हें अपनी बाँहों में ले
तुम्हारी झील सी गहरी आँखो में
गोता लगाते रहता।
कभी तुम्हारी मखमली जुल्फों को समेटता।
तो कभी प्यार से तुम्हारे सर को चुमता।
बस यूँही हम दोनो एक दूसरे मेंं खो
सदियों बिता देते।
कितना अच्छा होता।।
कितना अच्छा होता।।








kitnaa achchhaa hotaa

naa khaane ki phikr hoti।

naa pine ki phikr hoti।

bas tumhen apni baanhon men le

tumhaari jhil si gahri aankho men

gotaa lagaate rahtaa।

kabhi tumhaari makhamli julphon ko samettaa।

to kabhi pyaar se tumhaare sar ko chumtaa।

bas yunhi ham dono ek dusre menn kho

sadiyon bitaa dete।

kitnaa achchhaa hotaa।।

kitnaa achchhaa hotaa।।


कितना अच्छा होता।।
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Shayari

Fasle aur duriyan jitni badhti chali ja rahi hai।

Shayari

फासले और दूरियाँ जितनी बढ़ती चली जा रही है।

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फासले और दूरियाँ जितनी बढ़ती चली जा रही है।
हम आपके और भी उतने करीब पा रहे हैं।
वो हमारा साथ रहना
साथ में सारे काम करना
याद आ रही है तेरी घनी।
जिया नहीं जा रहा है
बिन तेरे यहाँ।

पेट का सवाल जो नहीं होता
तो तुमसे जुदा
कभी यों ना होता।
सच कहता हूँ
तेरे बिना
मेरा कहीं भी दिल नहीं लगता।

यार दोस्त बहुत हैं मेरे।
कहते हैं।
चल साथ घूमकर आएँ।
समुद्र तट पर दूर कहीं
सैर सपाटे कर
अपने मनोदशा में
कुछ बदलाव कर आएँ।
पर हमारे जद्दोजहद से
तेरा ख्याल नहीं हटता है।
तू वहाँ गुमसुम कहीं
कोने में बैठी
मुझे याद कर रही होगी।
और जुदाई के गम के
आँसू छिपा रही होगी।
और मैं यहाँ कैसे
तेरे बिन
अपने लिए
खुशियों के पलों
को सहेजूँँ।

मैं तेरा साथ निभाऊँँगा
एक कसम जो खाई थी
तेरे साथ सात फेरे लेते वक्त हमने।
तूझे अकेला नहीं छोड़ जाऊँगा
साँस की भले आखिरी कश
खींची हो हमने।
तू भले कहीं भी रहे
तेरी सोच में आ
तूझे हँसाऊँगा।
इतने मिठे पलों के गुच्छों को
मैं तेरे लिए छोड़ जाऊँगा।

अब जो फिर मिलेंगे हम
जल्दी ही
प्यार का नया आयाम
हासिल कर जाएँगे।
एक दूजे को
प्यार के लम्हों के
गुब्बारे तोहफे में
दिए जाएँगे।

जब भी याद आए
हम दोनो को
एक दूजे की
गुब्बारे फोड़ मुस्काएँगे।

जो भी हो
हम दोनो जल्द ही
एक जगह हो जाएँगे।
और सदा के लिए
एक दूजे के
प्यार में
हम दोनो
एक हसीन जहां बनाएँगे।











phaasle aur duriyaan jitni bdhti chali jaa rahi hai।

ham aapke aur bhi utne karib paa rahe hain।

vo hamaaraa saath rahnaa

saath men saare kaam karnaa

yaad aa rahi hai teri ghani।

jiyaa nahin jaa rahaa hai

bin tere yahaan।


pet kaa savaal jo nahin hotaa

to tumse judaa

kabhi yon naa hotaa।

sach kahtaa hun

tere binaa

meraa kahin bhi dil nahin lagtaa।


yaar dost bahut hain mere।

kahte hain।

chal saath ghumakar aaan।

samudr tat par dur kahin

sair sapaate kar

apne manodshaa men

kuchh badlaav kar aaan।

par hamaare jaddojahad se

teraa khyaal nahin hattaa hai।

tu vahaan gumasum kahin

kone men baithi

mujhe yaad kar rahi hogi।

aur judaai ke gam ke

aansu chhipaa rahi hogi।

aur main yahaan kaise

tere bin

apne lia

khushiyon ke palon

ko sahejunn।


main teraa saath nibhaaunngaa

ek kasam jo khaai thi

tere saath saat phere lete vakt hamne।

tujhe akelaa nahin chhod jaaungaa

saans ki bhale aakhiri kash

khinchi ho hamne।

tu bhale kahin bhi rahe

teri soch men aa

tujhe hnsaaungaa।

etne mithe palon ke guchchhon ko

main tere lia chhod jaaungaa।


ab jo phir milenge ham

jaldi hi

pyaar kaa nayaa aayaam

haasil kar jaaange।

ek duje ko

pyaar ke lamhon ke

gubbaare tohphe men

dia jaaange।


jab bhi yaad aaa

ham dono ko

ek duje ki

gubbaare phod muskaaange।


jo bhi ho

ham dono jald hi

ek jagah ho jaaange।

aur sadaa ke lia

ek duje ke

pyaar men

ham dono

ek hasin jahaan banaaange।


फासले और दूरियाँ जितनी बढ़ती चली जा रही है।
written by Sushil Kumar at kavitadilse.top

Shayari

Ravan tumhare ander hai,pahle use maar bhagao.

रावण तुम्हारे अंदर है ,पहले उसे मार भगाओ||

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मैं चाहता कुछ हूँ
होता कुछ और है।
मैं जाता कहीं हूँ
पहुँचता कहीं और हूँ।
मेरे प्रेरणास्रोत हैं
भगवान श्रीराम।
पर क्यों मैं चल पड़ता हूँ
रावण के पदचिह्न पर।
स्त्री स्त्री में
क्यों मैं भेद करता हूँ
घर पर माँ बहनें हैं।
बाहर में सभी से
रंभा सा क्यों बरतता हूँँ।

बहुत दुख होता है
अपनी इस चरित्र पर।
चले हैं रावण दहन करने
अपने अंदर में
एक रावण रख।
अपने अंदर के अंधियारे को
पहले दूर हटाओ।
रावण तुम्हारे अंदर है
पहले उसे मार भगाओ।







main chaahtaa kuchh hun

hotaa kuchh aur hai।

main jaataa kahin hun

pahunchtaa kahin aur hun।

mere prernaasrot hain

bhagvaan shriraam।

par kyon main chal pdtaa hun

raavan ke padachihn par।

stri stri men

kyon main bhed kartaa hun

ghar par maan bahnen hain।

baahar men sabhi se

rambhaa saa kyon barattaa hunn।


bahut dukh hotaa hai

apni es charitr par।

chale hain raavan dahan karne

apne andar men

ek raavan rakh।

apne andar ke andhiyaare ko

pahle dur hataao।

raavan tumhaare andar hai

pahle use maar bhagaao।


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23 Nov 2018

Nazar se nazar kya mili,mann kaid ho gaya uske pyar mein

Shayari

नजर से नजर क्या मिली,मन कैद हो गया उसके प्यार में।



चाहे जितना खुद को व्यस्त कर लूँ
चाहे जितने काम सर पर लेलूँ।
पर मेरे अन्तरमन से 
उनकी छवि मिटती ही नहीं है।

जब से उनके नजरों से
मेरी नजर जो मिली है।
ऐसा आभास हुआ है जैसे
मेरे मन ने स्वयं को 
उन्हें सौंप दिया हो।

मेरा शरीर भले ही
दिख रहा हो कहीं
पर मन
मन तो उनके प्यार में कैद हो
सदा के लिए उनके 
पास ही रूक गया है।

ये कैसा पागलपन है।
ये कैसा सुरूर है।
ना खाने में दिल लग रहा है
ना ही सोने में।
हर जगह बस 
उनकी सुंदर मूरत 
चारो तरफ दिखे जा रही हैं।

हे ईश्वर
मेरी  हालत देख 
कुछ तो रहम कीजिए।
या तो मुझे मिला देंं उनसे
या स्मृति से हटा दें
हमेशा हमेशा के लिए।








chaahe jitnaa khud ko vyast kar lun

chaahe jitne kaam sar par lelun।

par mere antaraman se

unki chhavi mitti hi nahin hai।


jab se unke najron se

meri najar jo mili hai।

aisaa aabhaas huaa hai jaise

mere man ne svayan ko

unhen saump diyaa ho।


meraa sharir bhale hi

dikh rahaa ho kahin

par man

man to unke pyaar men kaid ho

sadaa ke lia unke

paas hi ruk gayaa hai।


ye kaisaa paagalapan hai।

ye kaisaa surur hai।

naa khaane men dil lag rahaa hai

naa hi sone men।

har jagah bas

unki sundar murat

chaaro taraph dikhe jaa rahi hain।


he ishvar

meri  haalat dekh

kuchh to raham kijia।

yaa to mujhe milaa denn unse

yaa smriati se hataa den

hameshaa hameshaa ke lia।


नजर से नजर क्या मिली,मन कैद हो गया उसके प्यार में।
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Shayari

Pyar se pyar tak.

Shayari

प्यार से प्यार तक।

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हर शीतल सुबह को
गरमाहट देने वाले
सूर्य की  प्रकाश में हो तुम।

हर थके हुए दिन को
ताजगी प्रदान करने वाले
चाँदनी रात में बहती हुई
वो ठंडी हवा में हो तुम।

वो घने काले लंबी रात को
चीरती हुई
सूर्य की प्रकाश में हो तुम।

वो चिड़ियों की मधुर
चहचहाहट मेंं हो तुम।
वो कोयल की मीठी
कूक में हो तुम।

वो लंबी ठंडी कँपकपाती रात की
प्यार की गरमाहट मेंं हो तुम।
अपनी झुलसाती धरती को देख
आसमान का अपने बादल
रूपी बालों की भींगी चोटी खोल
उसे जोर से हिलाना और
बारिश की बूँदो से
अपनी धरा को ठंडक पहुँचाने वाली
वो मीठी एहसास में हो तुम।

इस धरती पर
कहीं भी
जहाँ प्यार का आगाज हुआ
वहाँ की अँकुरित हुए
प्यार में हो तुम।

मेरे दिलोदिमाग में
हो तुम।
मैं कहीं भी रहूँ
कहीं भी जाऊँ
मेरी परछाई बन
सदा मेरे साथ में
हो तुम।

आई लव यू।
दिल से।।









har shital subah ko

garmaahat dene vaale

sury ki  prkaash men ho tum।


har thake hua din ko

taajgi prdaan karne vaale

chaandni raat men bahti hui

vo thandi havaa men ho tum।


vo ghane kaale lambi raat ko

chirti hui

sury ki prkaash men ho tum।


vo chidiyon ki madhur

chahachhaahat menn ho tum।

vo koyal ki mithi

kuk men ho tum।


vo lambi thandi knapakpaati raat ki

pyaar ki garmaahat menn ho tum।

apni jhulsaati dharti ko dekh

aasmaan kaa apne baadal

rupi baalon ki bhingi choti khol

use jor se hilaanaa aur

baarish ki bundo se

apni dharaa ko thandak pahunchaane vaali

vo mithi ehsaas men ho tum।


es dharti par

kahin bhi

jahaan pyaar kaa aagaaj huaa

vahaan ki ankurit hua

pyaar men ho tum।


mere dilodimaag men

ho tum।

main kahin bhi rahun

kahin bhi jaaun

meri parchhaai ban

sadaa mere saath men

ho tum।


I love you।

dil se।।


प्यार से प्यार तक।
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Shayari

22 Nov 2018

Pyaar kabhi bhi puchh kr nahin hota.

Shayari

प्यार कभी भी पूछ कर नहीं होता।।

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प्यार कभी भी पूछ कर नहीं होता
वो तो हो जाता है।
कभी साथ चलते चलते
जब कोई पीछे छूट जाए
और उसकी याद में
दिल आपका बेचैन सा हो जाए।
तो समझ लो कि
आपको प्यार हो चुका है।

प्यार कभी भी पूछ कर नहीं होता
वो तो बस हो जाता है।
वो हमारे ख्यालों का वश
हमसे छूट जाना।
और वो कटी पतंग की तरह
उड़ते उड़ते
उनके ही छत पर मंडराना।
ये प्यार नहीं तो क्या है।

वो रस्ते के किनारे खड़े
अकेले आम के पेड़
के अकेलेपन को दूर करना।
और हम दोनो का साथ में बैठ
किसी का इंतजार करना।
क्या ये कुछ और है??
या प्यार ही है।

वो क्लास में शिक्षक को छोड़
किसी और के शक्ल को निहारना।
और कुछ देर के लिए
सारी दुनिया भूलकर
बस उनके ख्यालों में डूबे जाना।
और शिक्षक का चौंक फेंक कर
होश में लाना।
क्या है ये?
अगर प्यार नहीं है तो।

वो किसी के भींगे आँख देख
दिल का फूट फूट कर रोना।
और ईश्वर से
उसके सारे कष्ट
खुद के लिए
भेंट में माँगना।
ये प्यार नहीं तो
क्या है??

प्यार ही है।
प्यार ही है।
प्यार ही है।








pyaar kabhi bhi puchh kar nahin hotaa

vo to ho jaataa hai।

kabhi saath chalte chalte

jab koi pichhe chhut jaaa

aur uski yaad men

dil aapkaa bechain saa ho jaaa।

to samajh lo ki

aapko pyaar ho chukaa hai।


pyaar kabhi bhi puchh kar nahin hotaa

vo to bas ho jaataa hai।

vo hamaare khyaalon kaa vash

hamse chhut jaanaa।

aur vo kati patang ki tarah

udte udte

unke hi chhat par mandraanaa।

ye pyaar nahin to kyaa hai।


vo raste ke kinaare khde

akele aam ke ped

ke akelepan ko dur karnaa।

aur ham dono kaa saath men baith

kisi kaa entjaar karnaa।

kyaa ye kuchh aur hai??

yaa pyaar hi hai।


vo klaas men shikshak ko chhod

kisi aur ke shakl ko nihaarnaa।

aur kuchh der ke lia

saari duniyaa bhulakar

bas unke khyaalon men dube jaanaa।

aur shikshak kaa chaunk phenk kar

hosh men laanaa।

kyaa hai ye?

agar pyaar nahin hai to।


vo kisi ke bhinge aankh dekh

dil kaa phut phut kar ronaa।

aur ishvar se

uske saare kasht

khud ke lia

bhent men maangnaa।

ye pyaar nahin to

kyaa hai??


pyaar hi hai।

pyaar hi hai।

pyaar hi hai।


प्यार कभी भी पूछ कर नहीं होता।।
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Shayari

21 Nov 2018

Socha nahin tha kabhi maine.

Shayari

सोचा नहीं था कभी मैने।

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सोचा नहीं था कभी मैने।
इतनी दूर चला आऊँगा।
गुनगुनाते हुए कुछ नगमों को।
दिलों में घर बसाऊँगा।

जो गाया
दिल से गाया।
मानवता को पुनः जगाने को।

प्रेम और दया से बढ़कर
और कुछ भी नहीं है
इस संसार में
जन जन में
बाँटने को।
जाति धर्म के रंग हटाकर
बन बैरागी लगा
मानवता फैलाने को।

मानव! शरीर का घमंड ना रख
तेरा उसमें कुछ नहीं है।
आज जीते जी
जो उछल रहा है।
कल भस्म बन
तैरेगा गंगा में ।।









sochaa nahin thaa kabhi maine।

etni dur chalaa aaungaa।

gunagunaate hua kuchh nagmon ko।

dilon men ghar basaaungaa।


jo gaayaa

dil se gaayaa।

maanavtaa ko punah jagaane ko।


prem aur dayaa se bdhakar

aur kuchh bhi nahin hai

es sansaar men

jan jan men

baantne ko।

jaati dharm ke rang hataakar

ban bairaagi lagaa

maanavtaa phailaane ko।


maanav! sharir kaa ghamand naa rakh

teraa usmen kuchh nahin hai।

aaj jite ji

jo uchhal rahaa hai।

kal bhasm ban

tairegaa gangaa men ।।


सोचा नहीं था कभी मैने।
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Shayari

Main! Main nahin

Shayari

मैं! मैं नहीं।

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मैं क्या सोचूँ?
मैं क्या गाऊँ?
मुझमें नहीं है कोई शक्ति।
मैं तो हूँ
बस एक कठपुतली
जो हिलती नहीं है
बिन ईश्वर की मर्जी।

जो भी लिखवा रहा है मुझसे।
लिखता चला जा रहा हूँ मैं।
उसकी आदेश से
मानवता को सींचता जा रहा हूँ मैं।

ये शरीर,ये वानि
ये मन में उठती हुई तरंगें।
ये शब्द
ये वाक्य
कुछ भी नहीं है मेरे।
जो भी है
सब उसके हैं।
सब में
उसकी है शक्ति।

मैं तो केवल एक आत्मा हूँ।
जिसका स्थान
परमात्मा के चरणों में है।

ये शरीर मेरा नहीं
ये देश मेरा नहीं
फिर किस बात का अहम
पालूँ मैं।
आज इस परदेश में रहकर
लोगों से द्वेष क्यों
रखूँ मैं।

दो दिन की जिंदगी में
क्यों ना ईश्वर के
मार्ग पर चलूँ मैं।
ईश्वर की अनमोल भेंट को
व्यर्थ में क्यों गँवाऊँ मैं।
मानव हूँ
मानवता को
क्यों ना
जग में फैलाऊँ मैं।
मैं! मैं नहीं।













main kyaa sochun?

main kyaa gaaun?

mujhmen nahin hai koi shakti।

main to hun

bas ek kathaputli

jo hilti nahin hai

bin ishvar ki marji।


jo bhi likhvaa rahaa hai mujhse।

likhtaa chalaa jaa rahaa hun main।

uski aadesh se

maanavtaa ko sinchtaa jaa rahaa hun main।


ye sharir,ye vaani

ye man men uthti hui tarangen।

ye shabd

ye vaaky

kuchh bhi nahin hai mere।

jo bhi hai

sab uske hain।

sab men

uski hai shakti।


main to keval ek aatmaa hun।

jiskaa sthaan

parmaatmaa ke charnon men hai।


ye sharir meraa nahin

ye desh meraa nahin

phir kis baat kaa aham

paalun main।

aaj es pardesh men rahakar

logon se dvesh kyon

rakhun main।


do din ki jindgi men

kyon naa ishvar ke

maarg par chalun main।

ishvar ki anmol bhent ko

vyarth men kyon gnvaaun main।

maanav hun

maanavtaa ko

kyon naa

jag men phailaaun main।

main! main nahin।



मैं! मैं नहीं।
written by Sushil Kumar at kavitadilse.top

Shayari








20 Nov 2018

Karm kie jaa.

Shayari

कर्म किए जा।।

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आज हर दिल में
एक सवाल घूम रहा है।
क्या वो आने वाली
चुनौती के लिए
तैयार हो चुका है।

तैयारी लाख
कर ली हो आज हमने।
रात दिन लगा दी हो
मुकाम को हासिल करने।
पर क्या मेहनत अपनी
रंग लाएगी।
मुकम्मल समय आने पर
क्या उचित पदर्शन
हम कर पाएँगे?

यहीं पर
हम इंसान मात खाते हैं।
ज्यादा सोच सोच कर
काम बिगाड़ते हैं।
तैयारी पूरी ना होने पर
हम हार जाते हैं।
कर्म छोड़
भविष्य के फल की
चिंता कर
पछताते हैं।
कर्म किए जा।।
कर्म किए जा।।







aaj har dil men

ek savaal ghum rahaa hai।

kyaa vo aane vaali

chunauti ke lia

taiyaar ho chukaa hai।


taiyaari laakh

kar li ho aaj hamne।

raat din lagaa di ho

mukaam ko haasil karne।

par kyaa mehanat apni

rang laaagi।

mukammal samay aane par

kyaa uchit padarshan

ham kar paaange?


yahin par

ham ensaan maat khaate hain।

jyaadaa soch soch kar

kaam bigaadte hain।

taiyaari puri naa hone par

ham haar jaate hain।

karm chhod

bhavishy ke phal ki

chintaa kar

pachhtaate hain।

karm kia jaa।।

karm kia jaa।।


कर्म किए जा।।
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Shayari

19 Nov 2018

Pyaar karlo! Pyaar ka mausam aaya hai

Shayari

प्यार करलो! प्यार का मौसम आया है।

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प्यार ने ली अंगड़ाई है
मौसम ने ली जम्हाई है।
हरी ओढ़नी ओढ़ धरती
अंबर को देख
शर्माई है।
नदियाँ महासागर में मिल
तृप्ताई है।
कोयल ने प्यार के नगमें
गाई है।
पुष्पों ने भँवरो को
बहकाई है।
तितलियों ने हवा में
कलाबाजी दिखाईं हैं।
जहाँ देखो बस वहाँ
प्यार का खुमार
छाया है।
हर कण कण में
खुशियों की ओस समाई है।
हर जर्रे जर्रे ने
एक ही आवाज उठाई है।
प्यार करलो
प्यार का मौसम आया है।










pyaar ne li angdaai hai

mausam ne li jamhaai hai।

hari odhni odh dharti

ambar ko dekh

sharmaai hai।

nadiyaan mahaasaagar men mil

triaptaai hai।

koyal ne pyaar ke nagmen

gaai hai।

pushpon ne bhnavro ko

bahkaai hai।

titaliyon ne havaa men

kalaabaaji dikhaain hain।

jahaan dekho bas vahaan

pyaar kaa khumaar

chhaayaa hai।

har kan kan men

khushiyon ki os samaai hai।

har jarre jarre ne

ek hi aavaaj uthaai hai।

pyaar karlo

pyaar kaa mausam aayaa hai।

प्यार करलो!प्यार का मौसम आया है।।
written by Sushil Kumar at kavitadilse.top

Shayari

18 Nov 2018

Mere hath mein koi hathiyar nahin.

Shayari

मेरे हाथ में कोई हथियार नहीं।

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मेरे हाथ में कोई हथियार नहीं
मेरे साथ में कोई खड़ा नहीं।
मेरा जिस्म भी फौलाद नहीं
मेरे आवाज में भी हुँकार नहीं।

फिर भी निकल पड़ा हूँ मैं
चट्टान से दो दो हाथ करने को।
उसके अहम को चकनाचूर कर
उसे धूल में पटकने को।

माना कि वो मुझसे शक्तिशाली है
मेरे हड्डियों को वो तोड़ देगा।
पटक पटक कर जमीन पर मुझे
मेरे प्राण को भी वो हर लेगा।
पर चींटी ठान ले जो अगर
तो हाथी की भी जान ले सकती है।

माना एक पल को
मैं परास्त हो जाऊँगा
एक बार नहीं
सौ बार मूँह की खाऊँगा।
पर हौसले को परास्त
कोई कैसे कर सकेगा।
वो तो सोने देगा नहीं मुझे।
हिम्मत जुटा कर
फिर से
करूँगा वार।
लगातार।
जीत का स्वाद
जब तक चख ना लूँगा।

युद्ध जीती जाती नहीं
तलवार से।
फतह की जाती है
हौसले की वार से।









mere haath men koi hathiyaar nahin

mere saath men koi khdaa nahin।

meraa jism bhi phaulaad nahin

mere aavaaj men bhi hunkaar nahin।


phir bhi nikal pdaa hun main

chattaan se do do haath karne ko।

uske aham ko chaknaachur kar

use dhul men patakne ko।


maanaa ki vo mujhse shaktishaali hai

mere haddiyon ko vo tod degaa।

patak patak kar jamin par mujhe

mere praan ko bhi vo har legaa।

par chinti thaan le jo agar

to haathi ki bhi jaan le sakti hai।


maanaa ek pal ko

main paraast ho jaaungaa

ek baar nahin

sau baar munh ki khaaungaa।

par hausle ko paraast

koi kaise kar sakegaa।

vo to sone degaa nahin mujhe।

himmat jutaa kar

phir se

karungaa vaar।

lagaataar।

jit kaa svaad

jab tak chakh naa lungaa।


yuddh jiti jaati nahin

talvaar se।

phatah ki jaati hai

hausle ki vaar se।


मेरे हाथ में कोई हथियार नहीं।
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Shayari

17 Nov 2018

Kuchh to khas hai.

Shayari

कुछ तो खास है।

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कुछ तो खास है।
जरूर कोई बात है।
जो मेरे मेहबूब ने
पत्र लिख कर भेजा है।

उस चिट्ठी की स्पर्श में
अजब सा अहसास था।
एक पल के लिए लगा जैसे
किसी को तो मेरा ख्याल था।
कोई तो है अपना
इस दुनिया में
जिसे मेरी परवाह थी।
वरना इन गैरों के बिच में
मैं खुद केअस्तित्व को
खो चुका था।

उस सुखद अहसास के तरंगों ने
सारे गम और सारे तनाव के भावों को
कहीं दूर ले जाकर फेंका।
और मन कमल की भाँति
खुशियों के किरन में
खिलखिला कर खिल उठा।

पत्र की एक एक शब्द में
अपनेपन का भाव था।
मानो हर शब्द चिल्ला चिल्ला कर
उनके प्यार की अथाह बता रहीं हों।
और हमें अपने पास
इश्क करने को
बुला रहीं हों।

कुछ तो खास है।
कुछ तो खास है।










kuchh to khaas hai।

jarur koi baat hai।

jo mere mehbub ne

patr likh kar bhejaa hai।


us chitthi ki sparsh men

ajab saa ahsaas thaa।

ek pal ke lia lagaa jaise

kisi ko to meraa khyaal thaa।

koi to hai apnaa

es duniyaa men

jise meri parvaah thi।

varnaa en gairon ke bich men

main khud keastitv ko

kho chukaa thaa।


us sukhad ahsaas ke tarangon ne

saare gam aur saare tanaav ke bhaavon ko

kahin dur le jaakar phenkaa।

aur man kamal ki bhaanti

khushiyon ke kiran men

khilakhilaa kar khil uthaa।


patr ki ek ek shabd men

apnepan kaa bhaav thaa।

maano har shabd chillaa chillaa kar

unke pyaar ki athaah bataa rahin hon।

aur hamen apne paas

eshk karne ko

bulaa rahin hon।


kuchh to khaas hai।

kuchh to khaas hai।




कुछ तो खास है।
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Shayari



15 Nov 2018

Main jo gumjaun kabhi.

Shayari

मैं जो गुम जाऊँ कभी

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मैं जो गुम जाऊँ कभी
चलते चलते जीवन के
मझधार में।
और जो कभी
छूट जाए साथ हमारा
बिच भरे मेले बाजार में।

और जो कभी
तुम्हें याद आए मेरी बहुत
जीवन की धार में।
तुम लौट आना
जरा पीछे
मैं खड़ा मिलूँगा
उन पंक्तियों के भाव में।

मैं सदा हूँ
सदा रहूँगा
तुम्हारे हृदय के आवास में।
जो तुम कभी उदास रहे तो
मैं गुदगुदी बन
तुम्हें हँसाऊँगा।
जो तुम पथ से
अपथ हुए तो
सहयात्री बन
सही मार्ग दिखाऊँगा।
मैं यहीं
तेरे सदा साथ रहूँगा
एक दोस्त बन
यारी निभाऊँगा।







main jo gum jaaun kabhi

chalte chalte jivan ke

majhdhaar men।

aur jo kabhi

chhut jaaa saath hamaaraa

bich bhare mele baajaar men।


aur jo kabhi

tumhen yaad aaa meri bahut

jivan ki dhaar men।

tum laut aanaa

jaraa pichhe

main khdaa milungaa

un panktiyon ke bhaav men।


main sadaa hun

sadaa rahungaa

tumhaare hriaday ke aavaas men।

jo tum kabhi udaas rahe to

main gudagudi ban

tumhen hnsaaungaa।

jo tum path se

apath hua to

sahyaatri ban

sahi maarg dikhaaungaa।

main yahin

tere sadaa saath rahungaa

ek dost ban

yaari nibhaaungaa।


मैं जो गुम जाऊँ कभी
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Shayari

13 Nov 2018

Beinteha pyaar karte hain aapse.

Shayari

बेइंतहा प्यार करते हैं आपसे।।

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तुम्हारे बिना हर लम्हें में
उदासी सी छाई है।
जब से ओझल हुए हो नजरों से
मेरे दिल ने चैन कहाँ पाई है।
हर वक्त तेरी खैरियत की
रब से दुहाई माँगी है।

कुछ पल बितने के बाद
तेरी स्मृति ने
दिल को ठंडक पहुँचाई है।
तेरी मिठी यादों के झरनों में भींग
हमने समय बिताई है।
कभी हँसा तो कभी मुस्काया
जो तूने गुदगुदी लगाई है।
तेरे टेढ़े मेढ़े सवालों में
तेरी मासूमियत की झलक पाई है।

मेरे निकट आते ही
तेरी बेफिक्री से
मेरी तरफ बहती चली आना।
और मुझे अपने सीने से लगाकर
सदा के लिए
मुझे अपने दिल में रखने की इच्छा रखना।
ठीक वैसे ही
जैसे कोई नदी की धारा
महासागर में मिल
हमेशा हमेशा के लिए एक हो जाते हैं।

कितना अद्भुत लगता है वह पल
जब हम निकट यों रहते हैं।
समय थम सा जाता है
और वातावरण मधुरमय सी लगती है।

और बिछुड़ने के पल निकट आते ही
हमारा दिल बेचैन सा हो जाता है।
साँसें तेज हो जाती हैं।
नैन भी छलक से जाते हैं।

कैसे अलग रह पाएँगे
हम एक दूजे के बिना।
हमारी साँस थम ना जाए कहीं
जो समय ने हमारा
साथ ना दिया।

बेइंतहा प्यार करते हैं आपसे।।









tumhaare binaa har lamhen men

udaasi si chhaai hai।

jab se ojhal hua ho najron se

mere dil ne chain kahaan paai hai।

har vakt teri khairiyat ki

rab se duhaai maangi hai।


kuchh pal bitne ke baad

teri smriati ne

dil ko thandak pahunchaai hai।

teri mithi yaadon ke jharnon men bhing

hamne samay bitaai hai।

kabhi hnsaa to kabhi muskaayaa

jo tune gudagudi lagaai hai।

tere tedhe medhe savaalon men

teri maasumiyat ki jhalak paai hai।


mere nikat aate hi

teri bephikri se

meri taraph bahti chali aanaa।

aur mujhe apne sine se lagaakar

sadaa ke lia

mujhe apne dil men rakhne ki echchhaa rakhnaa।

thik vaise hi

jaise koi nadi ki dhaaraa

mahaasaagar men mil

hameshaa hameshaa ke lia ek ho jaate hain।


kitnaa adbhut lagtaa hai vah pal

jab ham nikat yon rahte hain।

samay tham saa jaataa hai

aur vaataavaran madhuramay si lagti hai।


aur bichhudne ke pal nikat aate hi

hamaaraa dil bechain saa ho jaataa hai।

saansen tej ho jaati hain।

nain bhi chhalak se jaate hain।


kaise alag rah paaange

ham ek duje ke binaa।

hamaari saans tham naa jaaa kahin

jo samay ne hamaaraa

saath naa diyaa।


beenthaa pyaar karte hain aapse।।




बेइंतहा प्यार करते हैं आपसे।।
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Shayari

Kya sahi hai?Kya galat hai?

Shayari

क्या सही है? क्या गलत है? 

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क्या सही है?
क्या गलत है?
किसी को कुछ नहीं खबर है।
मदहोशी की समा है।
मनमानी बेपनाह है।
बस जिसे देखो
स्वार्थ की चादर ओढ़े।
अपना काम बना रहा है।
एक मानव दूसरे मानव के हक का
भोग किए जा रहा है।
मानव के संस्कार के दिये की लौ
आज बुझती चली जा रही है।
जो आज उस पर लगाम ना लग पाया।
तो कल का शायद आखिरी शाम है।

इसलिए सुधर जा मानव।
मानवता के पथ पर लौट आ।










kyaa sahi hai?

kyaa galat hai?

kisi ko kuchh nahin khabar hai।

madhoshi ki samaa hai।

manmaani bepnaah hai।

bas jise dekho

svaarth ki chaadar odhe।

apnaa kaam banaa rahaa hai।

ek maanav dusre maanav ke hak kaa

bhog kia jaa rahaa hai।

maanav ke sanskaar ke diye ki lau

aaj bujhti chali jaa rahi hai।

jo aaj us par lagaam naa lag paayaa।

to kal kaa shaayad aakhiri shaam hai।


esalia sudhar jaa maanav।

maanavtaa ke path par laut aa।



क्या सही है? क्या गलत है?
 written by Sushil Kumar at kavitadilse.top

Shayari

11 Nov 2018

Main chala tha kabhi akela

Shayari

मैं चला था कभी अकेला

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मैं चला था कभी अकेला
एक क्रांति लाने के लिए।
दर दर को भटका था मैं
समर्थन पाने के लिए।
कुछ ने हामी भरी
तो कुछ ने
धक्का मार निकाला था
घर से।

जो साथ चले थे हमारे
वो इंकलाब को घर घर पहुँचाने।
बहुत धन्यवाद है उन महानुभावों का
जिन्होंने हर विपरीत घड़ी में
हमारा साथ निभाएँ।

अज्ञानता के चिराग को
जो हम ना बुझा पाएँगे।
संपूर्ण साक्षरता के बिना
हम भारतवासी
विकसित कैसे कहलाएँगे।
आज हमारे देश में
वो इंकलाब साकार हुआ है।
हर घर साक्षर योजना का सफर
आज कामयाब हुआ है।

जय हिन्द।।
जय भारत।।








main chalaa thaa kabhi akelaa

ek kraanti laane ke lia।

dar dar ko bhatkaa thaa main

samarthan paane ke lia।

kuchh ne haami bhari

to kuchh ne

dhakkaa maar nikaalaa thaa

ghar se।


jo saath chale the hamaare

vo enklaab ko ghar ghar pahunchaane।

bahut dhanyvaad hai un mahaanubhaavon kaa

jinhonne har viprit ghdi men

hamaaraa saath nibhaaan।


ajyaantaa ke chiraag ko

jo ham naa bujhaa paaange।

sampurn saakshartaa ke binaa

ham bhaaratvaasi

vikasit kaise kahlaaange।

aaj hamaare desh men

vo enklaab saakaar huaa hai।

har ghar saakshar yojnaa kaa saphar

aaj kaamyaab huaa hai।


jay hind।।

jay bhaarat।।

Shayari






मैं चला था कभी अकेला
written by Sushil Kumar at kavitadilse.top

Aaj fir se dipon ke mahotsav ne hamare jiwan mein dastak diya hai।

Shayari

आज फिर से दीपों के महोत्सव ने

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आज फिर से दीपों के महोत्सव ने
हमारे जीवन में दस्तक दिया है।
और फिर वही अतुल्य उत्साह और खुशी ने
हमारे दिल में एक नई उमंग और नई चाह को
पैदा किया है।
क्या बताएँ?
लग रहा था मानो
कि कब रात हो
और हम दीयों से
सारे जग को जगमगाएँ।

एक वर्ष की बिछड़न के गम का दर्द
मानो आज दिल में भर आई है।
इतनी देर क्यों लगा दिए
ओ पिया
मैने तो तेरी याद भी मिटाई थी
जद्दोजेहद से।

एक एक पल कठिन हो रहा था बिताना
शाम कब हो
कि हम अपने घर को
दिए से जगमगाएँ।
पर क्या बताएँ
मानो सूरज भी आज
ढलने को तैयार नहीं हो रहा हो।
समय तो मानो आज जैसे
चलना ही भूल चुका है।

समय बीता
आई फिर से
हमारे मधुर मिलन की बेला।
ईश्वर की वंदना कर
हाथों में
दियों की थाली ले
चलें हम रोशन करने
अपने प्यारे घोसले को।

कितना मनोहर
कितना प्यारा
लग रहा था वह सुरम्य दृश्य।
दूर दूर तक टिमटिमा रहे थे सभी के घर
मानो तारों ने बदला हो
आज अपना देश।

बाहर के अँधियारे को
हमने तो भगा दिया।
पर क्या
अपने अंदर विरजमान अंधियारे पर भी
हमने सही प्रहार किया।
आइए आज हम मिल
एक प्रण करे
अपने अंदर बैठे तम को
मिटा देंगे हम सभी।










aaj phir se dipon ke mahotsav ne

hamaare jivan men dastak diyaa hai।

aur phir vahi atuly utsaah aur khushi ne

hamaare dil men ek nayi umang aur nayi chaah ko

paidaa kiyaa hai।

kyaa bataaan?

lag rahaa thaa maano

ki kab raat ho

aur ham diyon se

saare jag ko jagamgaaan।


ek varsh ki bichhdan ke gam kaa dard

maano aaj dil men bhar aai hai।

etni der kyon lagaa dia

o piyaa

maine to teri yaad bhi mitaai thi

jaddojehad se।


ek ek pal kathin ho rahaa thaa bitaanaa

shaam kab ho

ki ham apne ghar ko

dia se jagamgaaan।

par kyaa bataaan

maano suraj bhi aaj

dhalne ko taiyaar nahin ho rahaa ho।

samay to maano aaj jaise

chalnaa hi bhul chukaa hai।


samay bitaa

aai phir se

hamaare madhur milan ki belaa।

ishvar ki vandnaa kar

haathon men

diyon ki thaali le

chalen ham roshan karne

apne pyaare ghosle ko।


kitnaa manohar

kitnaa pyaaraa

lag rahaa thaa vah suramy driashy।

dur dur tak timatimaa rahe the sabhi ke ghar

maano taaron ne badlaa ho

aaj apnaa desh।


baahar ke andhiyaare ko

hamne to bhagaa diyaa।

par kyaa

apne andar virajmaan andhiyaare par bhi

hamne sahi prhaar kiyaa।

aaea aaj ham mil

ek pran kare

apne andar baithe tam ko

mitaa denge ham sabhi।




आज फिर से दीपों के महोत्सव ने  हमारे जीवन में दस्तक दिया है।
written by Sushil Kumar at kavitadilse.top

Shayari

दीवाली शायरी
दीपावली शायरी



10 Nov 2018

Aaj koi bata de ye mujhe.

Shayari

आज कोई बता दे ये मुझे।

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आज कोई बता दे ये मुझे।
किस बात का अहम
दिल में बसा कर रखे हैं हम सभी।

जिसे देखो बस
वो घमंड में चूर है
किसी को किसी से
बात करने की नहीं तमीज है।

भला कोई बाप के ऊमर के इंसान को
उसके नाम से बुलाता है।
और कभी कभी तो उन्हें भद्दी गाली देकर
वो अपना संस्कार भी बताता है।

भले ही तुमने अच्छी पढ़ाई करके
अच्छी तालीम हासिल की हो।
पर मानवता के इम्तिहान में
तुम आज फैल हो चुके हो।

क्या अच्छी तालीम ही
इंसान को ऊँचाइयों तक पहुँचाता है?
बिना अच्छे संस्कार के
कोई कितनी भी अच्छी तालीम हासिल करले
वो हमेशा गर्त में ही जाता है।

अपने से बड़ों की इज्ज़त
छोटों से प्यार
अरे भाई!
क्या नहीं होने चाहिए
अपने ये संस्कार।








aaj koi bataa de ye mujhe।

kis baat kaa aham

dil men basaa kar rakhe hain ham sabhi।


jise dekho bas

vo ghamand men chur hai

kisi ko kisi se

baat karne ki nahin tamij hai।


bhalaa koi baap ke umar ke ensaan ko

uske naam se bulaataa hai।

aur kabhi kabhi to unhen bhaddi gaali dekar

vo apnaa sanskaar bhi bataataa hai।


bhale hi tumne achchhi pdhaai karke

achchhi taalim haasil ki ho।

par maanavtaa ke emtihaan men

tum aaj phail ho chuke ho।


kyaa achchhi taalim hi

ensaan ko unchaaeyon tak pahunchaataa hai?

binaa achchhe sanskaar ke

koi kitni bhi achchhi taalim haasil karle

vo hameshaa gart men hi jaataa hai।


apne se bdon ki ejjt

chhoton se pyaar

are bhaai!

kyaa nahin hone chaahia

apne ye sanskaar।



आज कोई बता दे ये मुझे।
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Shayari

6 Nov 2018

Mujhe achcha lagta hai.

Shayari

मुझे अच्छा लगता है।

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तुम्हारे कदम के साथ कदम मिलाकर चलना
मुझे अच्छा लगता है।
तुम्हारे स्वर में स्वर मिलाकर गुनगुनाना
मुझे अच्छा लगता है।
तुम्हारी राह में पलके बिछाए तुम्हारा इंतजार करना
मुझे अच्छा लगता है।
तुम्हारी छोटी छोटी बातों पर जिद्द करना
मुझे अच्छा लगता है।
तुम्हारी हर छोटी बड़ी ख्वाहिशों को पूर्ण करना
मुझे अच्छा लगता है।
तुम्हारा हम पर हक जताना
मुझे अच्छा लगता है।
तुम्हारा हमारे माँ बाबू जी पर अपना हक जताना
मुझे अच्छा लगता है।
तुम्हारा मेरे भाई बहन को सही दिशा दिखाना
मुझे अच्छा लगता है।
तुम्हारा मेरे जीवन में आना
मानो ईश्वर को पाना है।
तुम्हारा मेरे जीवनपट को
विभिन्न रंगों के खुशियों से रंगना
मुझे अच्छा लगता है।
आई लव यू!
दिल से
बहु..उ...त ज्यादा।।😍








tumhaare kadam ke saath kadam milaakar chalnaa

mujhe achchhaa lagtaa hai।

tumhaare svar men svar milaakar gunagunaanaa

mujhe achchhaa lagtaa hai।

tumhaari raah men palke bichhaaa tumhaaraa entjaar karnaa

mujhe achchhaa lagtaa hai।

tumhaari chhoti chhoti baaton par jidd karnaa

mujhe achchhaa lagtaa hai।

tumhaari har chhoti bdi khvaahishon ko purn karnaa

mujhe achchhaa lagtaa hai।

tumhaaraa ham par hak jataanaa

mujhe achchhaa lagtaa hai।

tumhaaraa hamaare maan baabu ji par apnaa hak jataanaa

mujhe achchhaa lagtaa hai।

tumhaaraa mere bhaai bahan ko sahi dishaa dikhaanaa

mujhe achchhaa lagtaa hai।

tumhaaraa mere jivan men aanaa

maano ishvar ko paanaa hai।

tumhaaraa mere jivanapat ko

vibhinn rangon ke khushiyon se rangnaa

mujhe achchhaa lagtaa hai।

aai lav yu!

dil se

bahu..u...t jyaadaa।।😍


मुझे अच्छा लगता है।
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Shayari

Aaj kal ek nai ichcha mann bhandare ne jatai hai.

Shayari

आज कल एक नई इच्छा

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आज कल एक नई इच्छा
मन भँवरे ने जताई है।
और पहली दफा ऐसा हुआ है
आत्मा की भी स्वीकृती उसमें पाई  है।।

घर से बहुत दूर बैठा था
अनजान शहर में
अनजान लोगों के बिच।
जान पहचान तो थी
बहुत लोगों से
पर कहाँ  मिला था
कोई अपना मित।

दीवाली का मौसम था
सर पर।
पट-पटाक,धम धड़ाम की आवाजों
से गूंज रहा था सारा आसमान।
तभी मोबाइल की घंटी बजी
उठाया तो पाया
माँ का फोन आया था उस शाम।

दीवाली की शुभकामनाएं देने को
किया था माँ ने फोन।
और बार बार बस
एक ही चीज रट रही थी।
माँ बाबूजी से मिलने का
नहीं करता है मन।

मैं महसूस कर रहा था अपनी लाचारी
क्या रिश्तों पर पड़ गई हमारी नौकरी भारी।
खोखले रिश्तों को निभाने के लिए
पवित्र रिश्तों की बलि
और कब तक चढ़ाएँगे।
इस बार हर कीमत पर हम
अपने परिवार संग छठ मनाएँगे।












aaj kal ek nayi echchhaa

man bhnavre ne jataai hai।

aur pahli daphaa aisaa huaa hai

aatmaa ki bhi svikriti usmen paai  hai।।


ghar se bahut dur baithaa thaa

anjaan shahar men

anjaan logon ke bich।

jaan pahchaan to thi

bahut logon se

par kahaan  milaa thaa

koi apnaa mit।


divaali kaa mausam thaa

sar par।

pat-pataak,dham dhdaam ki aavaajon

se gunj rahaa thaa saaraa aasmaan।

tabhi mobaael ki ghanti baji

uthaayaa to paayaa

maan kaa phon aayaa thaa us shaam।


divaali ki shubhkaamnaaan dene ko

kiyaa thaa maan ne phon।

aur baar baar bas

ek hi chij rat rahi thi।

maan baabuji se milne kaa

nahin kartaa hai man।


main mahsus kar rahaa thaa apni laachaari

kyaa rishton par pd gayi hamaari naukri bhaari।

khokhle rishton ko nibhaane ke lia

pavitr rishton ki bali

aur kab tak chdhaaange।

es baar har kimat par ham

apne parivaar sang chhath manaaange।


आज कल एक नई इच्छा मन भँवरे ने जताई है।
written by Sushil Kumar at kavitadilse.top

Shayari

Main bhale tumhen apne zuban se ikrar nahin kar pata.

Shayari

मैं भले तुम्हें अपने जुबान से इकरार नहींं कर पाता।

Kavitadilse.top द्वारा आप सभी पाठकों को समर्पित है।


मैं भले तुम्हें अपने जुबान से
इकरार नहींं कर पाता।
पर हमारी नजरें
धोखा दे जातींं हैं अक्सर।
ना चाहते हुए भी ये शरारती आँखें
पल पल
बस तेरे अक्स के खोज में
बावरी सी
दौड़ी चली जाती है इधर उधर।
कुछ तो जादू किया है तुमने
या तो पिछले जन्म का
है कोई चक्कर।
हो सकता है
हमारी पिछली अधूरी कहानी को
इस जन्म में पूर्ण करने को
दी हो
रब ने अवसर।


main bhale tumhen apne jubaan se

ekraar nahinn kar paataa।

par hamaari najren

dhokhaa de jaatinn hain aksar।

naa chaahte hua bhi ye sharaarti aankhen

pal pal

bas tere aks ke khoj men

baavri si

daudi chali jaati hai edhar udhar।

kuchh to jaadu kiyaa hai tumne

yaa to pichhle janm kaa

hai koi chakkar।

ho saktaa hai

hamaari pichhli adhuri kahaani ko

es janm men purn karne ko

di ho

rab ne avasar।




मैं भले तुम्हें अपने जुबान से इकरार नहींं कर पाता।
written by Sushil Kumar at kavitadilse.top

Shayari

अभिमान है मुझे:abhimaan hai mujhe

अभिमान है मुझे। Shayari मेरे भारत देश के मिट्टी की  बात बड़ी ही निराली है। यहाँ जन्म लेने वाले हर शख्स के खून में छिपी हुई एक...