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आजाद देश की आजाद धरा पर।।


आजाद देश की आजाद धरा पर।

Kavitadilse.top द्वारा आप सभी पाठकों को समर्पित है।




आजाद देश की आजाद धरा पर
क्या रहने लायक हैं हम?
खुले आसमान में अपने पंख फैला
क्या उड़ने लायक हैं हम?

हम नौजवानों की यही दिक्कत है
भावनाओं की तरंगों में बह
कुछ भी कर बैठते हैं।।
अगर हमें गुस्सा आया तो
तोड़ फोड़ मचाते हैं।।
पलक झपकते ही
कुछ क्षणों में
पूरे दृश्य को बदल दे जाते हैं।।
कुछ भ्रष्ट नेता हैं जो हमारे
इस बात का फायदा उठाते हैं।।

अरे भाईयों
कितने चंद्रशेखर आजाद और कितने इकबाल ने
अपनी खून की नदियां बहाई हैं।
फिर जाकर
हमारे सोने की चिड़िया को
उन अंग्रेजों से आजादी दिलाई है।।

शहीद आजाद और शहीद इकबाल की कसम
अब और ना इनकी सुनेंगे हम।
अपने गुस्सा और अपने जुनून को
सही दिशा दिखाएँगे हम।।
आजाद भारत को इन गद्दारों से
मुक्त किए बिना
नहीं हारेंगे हम।।
अपने मताधिकार का सही उपयोग कर
देश को आगे बढ़ाएँगे हम।।
हिंदू मुस्लिम सिख इसाई
सभी एक स्वर में गाएँगे हम।।
आजाद थे
आजाद हैं
और आजाद ही रह जाएँगे हम।
अपनी आजादी की धरोहर को
किसी भी कीमत पर
नहीं खोने देंगे हम।।

जय हिन्द।।
जय भारत।।


आजाद देश की आजाद धरा पर।

written by sushil kumar @ kavitadilse.top

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