3 Oct 2018

Azad desh ki azad dhara par

आजाद देश की आजाद धरा पर।

Kavitadilse.top द्वारा आप सभी पाठकों को समर्पित है।




आजाद देश की आजाद धरा पर
क्या रहने लायक हैं हम?
खुले आसमान में अपने पंख फैला
क्या उड़ने लायक हैं हम?

हम नौजवानों की यही दिक्कत है
भावनाओं की तरंगों में बह
कुछ भी कर बैठते हैं।।
अगर हमें गुस्सा आया तो
तोड़ फोड़ मचाते हैं।।
पलक झपकते ही
कुछ क्षणों में
पूरे दृश्य को बदल दे जाते हैं।।
कुछ भ्रष्ट नेता हैं जो हमारे
इस बात का फायदा उठाते हैं।।

अरे भाईयों
कितने चंद्रशेखर आजाद और कितने इकबाल ने
अपनी खून की नदियां बहाई हैं।
फिर जाकर
हमारे सोने की चिड़िया को
उन अंग्रेजों से आजादी दिलाई है।।

शहीद आजाद और शहीद इकबाल की कसम
अब और ना इनकी सुनेंगे हम।
अपने गुस्सा और अपने जुनून को
सही दिशा दिखाएँगे हम।।
आजाद भारत को इन गद्दारों से
मुक्त किए बिना
नहीं हारेंगे हम।।
अपने मताधिकार का सही उपयोग कर
देश को आगे बढ़ाएँगे हम।।
हिंदू मुस्लिम सिख इसाई
सभी एक स्वर में गाएँगे हम।।
आजाद थे
आजाद हैं
और आजाद ही रह जाएँगे हम।
अपनी आजादी की धरोहर को
किसी भी कीमत पर
नहीं खोने देंगे हम।।

जय हिन्द।।
जय भारत।।









aajaad desh ki aajaad dharaa par

kyaa rahne laayak hain ham?

khule aasmaan men apne pankh phailaa

kyaa udne laayak hain ham?




ham naujvaanon ki yahi dikkat hai

bhaavnaaon ki tarangon men bah

kuchh bhi kar baithte hain।।

agar hamen gussaa aayaa to

tod phod machaate hain।।

palak jhapakte hi

kuchh kshnon men

pure driashy ko badal de jaate hain।।

kuchh bhrasht netaa hain jo hamaare

es baat kaa phaaydaa uthaate hain।।




are bhaaiyon

kitne chandrshekhar aajaad aur kitne ekbaal ne

apni khun ki nadiyaan bahaai hain।

phir jaakar

hamaare sone ki chidiyaa ko

un angrejon se aajaadi dilaai hai।।




shahid aajaad aur shahid ekbaal ki kasam

ab aur naa enki sunenge ham।

apne gussaa aur apne junun ko

sahi dishaa dikhaaange ham।।

aajaad bhaarat ko en gaddaaron se

mukt kia binaa

nahin haarenge ham।।

apne mataadhikaar kaa sahi upyog kar

desh ko aage bdhaaange ham।।

hindu muslim sikh esaai

sabhi ek svar men gaaange ham।।

aajaad the

aajaad hain

aur aajaad hi rah jaaange ham।

apni aajaadi ki dharohar ko

kisi bhi kimat par

nahin khone denge ham।।




jay hind।।

jay bhaarat।।


आजाद देश की आजाद धरा पर।

written by sushil kumar @ kavitadilse.top

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