31 Oct 2018

युवाओं जागो।भारत माँ के सपूतों जागो।माँ पुकार रहीं हैं।।

Shayari

युवाओं जागो।भारत माँ के सपूतों जागो।माँ पुकार रहीं हैं।।

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हमारी हालत खराब है।
वक्त की पुकार है।
जागो देशवासियों
नहीं तो देश कल बरबाद है।।

आज अगर नहीं जागोगे।
बिछाए गए चाल को नहीं भेदोगे।
फिर वो दिन दूर नहीं
जब अँधकार में
फिर से भटकोगे।।

खुद से तुम सवाल करो एक।
क्या कोई प्रतिनिधि बचा है देशभक्त?
जिसे देखो उसको
बस अपनी पड़ी है।
जितना लूट सकते हो
 लूट लो
कल की किसने देखी है।।

भाई आज की परिस्थिति देख
मुझे खुद पर रोना आता है।
कितना लाचार, कितना बीमार हैं
हम सभी।
जिन्हें अपनी माता की सिसकारी पर भी
दया नहीं आता है।।
हम भी उन नेताओं से कम थोड़े ना हैं।
हमें तो फेसबुक और व्हाट्सएप प्यारा है।।
देश जाए तो
जाए भाड़ में।
हमें तो बस रोज
नई नई गर्लफ्रैंड घूमाना है।।

आज समय वो आ गया है
देश की बागडोर
अपने हाथों में लेने का।
हम युवाओं के कँधों पर है
हमारे देश के सुनहरे भविष्य कल का।।
चाहे जितना खून बहे
चाहे जितनी साँसें थम जाए।।
देश को पुनर्जीवित करके ही रहेंगे।
चाहे मिट जाए निशान हमारा।

जय हिंद।।
जय भारत।।








युवाओं जागो।भारत माँ के सपूतों जागो।माँ पुकार रहीं हैं।।written by Sushil Kumar at kavitadilse.top

Shayari

30 Oct 2018

आइए आपका स्वागत है,हमारे प्यार भरे इस जहां में।

Shayari

आइए आपका स्वागत है,हमारे प्यार भरे इस जहां में।

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हर दिल का सपना है।
एक प्यारा सा जहांं बनाए।।
दुख और तकलीफ के साए से दूर कहीं।
खुशियों के बादल तले
जहाँ हर्ष और उल्लास की बूँदें बरसती हैं।।
हम सभी उन बूँदों में भींग।
एक दूसरे संग 
प्यार के महासागर में 
कहीं डूब जाएँँ।।

सारे अपने हो 
जहाँ साथ हमारे।
जिनके बिन
सम्पूर्ण नहीं हो सकती है
कोई भी खुशी हमारी।
जहाँ हर छोटे छोटे 
प्यार भरे पलों में
हम खूब खुल के 
जीने का मौका पाएँ।।

क्यों ना कोई ऐसा
प्यारा सा जहां बनाएँ।
जहाँ आप और हम मिल
खुशियों के झरने में
भींग हर्षाएँ।।


Written by sushil kumar
Shayari





29 Oct 2018

मैं बस यूँही लिखता रहूँ।।

Shayari

मैं बस यूँही लिखता रहूँ

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मैं बस यूँही लिखता रहूँ।
तुम मेरी पंक्तियों को गुनगुनाते रहो।
मैं बस यूँही गाता रहूँ
तुम उन्हें सुन सुन मुस्काती रहो।
मैं जो कभी हँसू
तब तुम खिलखिलाओ।
मैं जो कभी रोऊँ
तब तुम मुरझाओ।
मेरी हर मुश्किल घड़ी में
तुम मेरा साथ निभाओ।

सुबह का आगाज हो
या दिन की ढलान।
चिलचिलाती धूप हो
या कपकपाती ठंड।
तुम ही तो हो
जिसने है साथ निभाया।
सदा मेरा साया बन
सही राह दिखाया।
मेरे हर भाव में
है तेरी झलक।
तेरे को ही समर्पित है
मेरे  हर पंक्ति के शब्द।


मैं बस यूँही लिखता रहूँ
written by sushil kumar @ kavitadilse.top

Shayari

28 Oct 2018

मरने के बाद भी धड़कते रहो।

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मरने के बाद भी धड़कते रहो।

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मरने के बाद भी धड़कते रहो
कुछ ऐसा कर जाओ।
जीवन अगर पाए हो
तो उसे सार्थक कर
तर जाओ।
ऐसा भी क्या जीना कि
आए और अपने लिए 
जिकर निकल पड़े।
ऐसे ही अगर था जीना
कीट योनि में था जन्म लेना।
मानव अंग पाए हो तो
मानवता का धर्म निभाओ।
जीते जी
अगर कुछ भी ना कर पाओ तो
मरनोपरांत ही
जग के लिए
कुछ कर जाओ।

संसार भरा पड़ा है
दुखों और तकलीफों से।
जहाँ भी नजर पड़ी है
भाव भिवोर हो
बह निकली
अश्रुओं की गंगा
दृग से।
मंदिर जो जा रहा था
भगवन की पूजा के लिए।
बाहर खड़े नेत्रहीन और अपंगो
के घावों को देख
रो पड़ा हमारा हृदय
अंदर से।
ईश्वर का इशारा क्या था?
पता चल चुका है हमें।
हमारा दुनिया में आने का मकसद
समझ में आ चुके है हमें।
अगर हम सभी धरतीवासी
मानवता का धर्म जो अपनाएँगे।
इस धरती पर सारे अपंग
सक्षम बन पूर्ण हो जाएँगे।
अंगदान से बड़ा दान
और कोई भी दान नहीं है।
मानवता का कर्ज उतारने का
इससे बड़ा कोई कर्म नहीं है।



Written by sushil kumar
Shayari



जीवन की रेल यात्रा में

Shayari

जीवन की रेल यात्रा में 

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जीवन की रेल यात्रा में
नए राही जुड़ते रहें
और पुराने राही छुटते गए।
उनमें से कुछ लोगों ने
लंबा साथ निभाया।
तो कुछ लोगों ने
क्षणिक भर का।
पर बहुत कम लोग ही ऐसे रह गए
जो हमारे दिल में
सदा के लिए
घर कर गएँ।
और आज भी हम
उनके सकारात्मक स्पर्श को
अपने आस पास महसूस करते हैं।
जो सदा हमें
सही राह दिखाते हैं।

जीवन को उसके उम्र के
पैमाने पर ना नापो।
बल्कि उसके जिंदादिली से नापो।
जियो छोटा
पर खुल के जियो।
अपने आसपास सकारात्मकता फैलाओ
और खुशियाँ बाँटो।

Written by sushil kumar

Shayari


सुफियाना इश्क

Shayari

सुफियाना इश्क

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हमारे जिंदगी के हर सुफियाने पन्ने
गवाह हैं
कि हम कितना मोहब्बत करते हैं आपसे।
आपके साथ होने पर
हम एक अलग ही
नायाब दुनिया मे पहुँच जाते हैं।
जहाँ हर पल बड़ा खुशनुमा और
बड़ा ही सुकूनदेह होता है।
मानो जैसे कि
कोई बहुत ही हसीन सपना
देख रहें हो।
हवा में मधुरमय संगीत
बजने लगते थे।
दिल उस संगीत में
झूम कर नाच उठता है।
समय थम सा जाता है।

पर जैसे ही आप
हमारे नजरों से ओझल क्या हुए
हमारा दिल बैठ सा जाता है।
और सारा माहौल
खुशनुमा से दुखनुमा में
तब्दील हो जाता है।

सही बताएँ तो
ये माहौल क्षणिक भर के लिए ही होता है
क्योंकि अगले पल
फिर से आप हमारे सामने होते हो
और सारा माहौल मधुरमय हो जाता है।

Written by sushil kumar


Shayari

27 Oct 2018

समय राजा ।।

Shayari

समय राजा।

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जरा आहिस्ता आहिस्ता
चल ना मेरे भाई।
क्यों तू भागे भागे जा रहा है।
जरा थम जा
विश्राम कर ले।
सदियों से लगातार
चलता आ रहा है।
सतयुग, त्रेता,द्वापर,कलयुग
और कितने युगों तक
भ्रमण करता रहेगा।
तेरे कितने साथी पिछे छूट गए।
कितनो ने तो देह तक छोड़ दिए।
पर तुझे क्या पड़ी है?
 तू तो भावहीन है।
अपनी कर्तव्यनिष्ठा में तल्लीन है।

तू उस चक्रवर्ती राजा की तरह है।
जो तेरा साथ निभाता है।
उसे तू राजा बनाता है।
पर जो पीछे छूट जाता है।
उसे तू दुनिया से मिटाता है।

Written by sushil kumar

Shayari


करवाय देय शदीया अम्मा।

Shayari

करवाय देय शदीया अम्मा।

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हमर सब यार दोस्त के
ब्याह हो गईल।
हमरो के तनिक
ब्याह करवाय देय अम्मा।
हमरो के तनिक
ब्याह करवाय देय अम्मा।

ढूंढल हले ऐश्वर्या राय
अपने ला।
मिलल हले
काजल जैसन लडकी।
बड़ोंं एठिआय के
हम बोलले बानी
ओकरा से।
देखलीं हँ अपन शक्ल सूरत
ऐनवा में।
ऐनवो टूट जैते
तोर करीया चेहरवा देखके।
कहाँ हम सुंदर सुशील बानी
कहाँ तों
महा भोक्साल लागत बानी।
कोनो मेल खावत वा
हम दोनो मा।
कैसे हम तोहरा से ब्याह रचाय लेईव हो।

पर अम्मा
आज हम ओकरो से
शादी करेला तैयार बानी।
कोनो चक्कर चलाई के
हमरो शादी करवाय देय अम्मा।

सबन यार दोस्त के
चुन्नू-मुन्नू भी हो गईल।
हमरा के अबतक
शदियो नहीं होईल अम्मा।
करवाय देय शदीया अम्मा।
करवाय देय।

Written by sushil kumar

Shayari

लोग कहते हैं कि हम बड़े जिद्दी हैं।

Shayari

लोग कहते हैं कि हम बड़े जिद्दी हैं।

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लोग कहते हैं कि हम बड़े जिद्दी हैं।
सपनों को पूरा करने के लिए 
दिन रात एक कर देना
अगर जिद्द है
तो हम जिद्दी हैं।

अपनो की मदद करने के लिए 
जी जान लगा देना
अगर जिद्द है
तो हम जिद्दी हैं।

हर साँस के कश के साथ
ईश्वर के नाम की
माला जपना
अगर जिद्द है
तो हम जिद्दी हैं।

ईश्वर की दी हुई
ये शरीर रूपी मंदिर में
ईश्वर की खोज करना
अगर जिद्द है
तो हम जिद्दी हैं।

ईश्वर के बताए मार्ग पर चलना
और चलकर ईश्वर को हासिल करना
अगर जिद्द है
तो हम जिद्दी हैं।

अपने जीवन के डोर को
ईश्वर के हाथ में देकर
सार्थक बनाना
अगर जिद्द है
तो हम जिद्दी हैं।

हम जिद्दी हैं
और सदा हम
जिद्दी ही रहना चाहेंगे।

Written by sushil kumar

Shayari

26 Oct 2018

जरा सोचो!! क्या सही हूँ मैं???

Shayari

जरा सोचो!! क्या सही हूँ मैं???

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हमारे जीवन में
हर एक नई सुबह का दस्तक।
इश्वर का दिया हुआ एक नायाब तोहफा है।
वो हमें सही राह पर चलने का
एक और मौका देना चाहता है।

पर यहाँ तो
हर दिल में जागा एक नया अरमान है।
कुछ कर गुजरने का एक जुनून
दिल के रास्ते से
चलते हुए
दिमाग तक
एक पैगाम पहुँचाता है।

फिर शुरु हो जाता है
मंजूरी और नामंजूरी का सिलसिला
दिल और दीमाग के बिच।
असमंजस का दौर यूँही
चलता ही रहता है।
जब तक कि सहमति के फूल
दोनो के भावों में ना खिल जाए।
या फिर दोनो के बिच में
हुए वार्तालाप युद्ध में
कोई विजय घोषित ना हो जाए।
और फिर क्या
जीत होती है
आखिर में
दिल की।

क्या लगता है?
दिल हमेशा सही रहता है।
नहीं! नहीं!
दिल अक्सर गलती कर जाता है।
क्योंकि वो आराम पसंद है
और हमेशा कुछ भी पाने के लिए
अक्सर आसान तरीका ही
अपनाता है।

और यहीं हम धोखा खाते हैंं
और ईश्वर के पथ से
भटक जाते हैंं।
इसीलिए सुनो दिल की।
पर करो हमेशा दिमाग की।



Written by sushil kumar

Shayari


24 Oct 2018

हर मुमकिन प्रयास जारी है।

Shayari

हर मुमकिन प्रयास जारी है।

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हर मुमकिन प्रयास जारी है।
जिंदगी की जिंदगी से
जंग जारी है।
हिम्मत है जब तक
हम हार नहीं मानेंगे।
साँस की आखिरी कश तक
हम आवाज उठाते जाएँगे।
किसी भी जल्लाद के बाप से
हम नहीं डरते हैं।
अन्याय के खिलाफ जंग में
कुर्बानी तो जगजाहिर है।
सच्चाई के पथ पर
आगाज घनघोर अँधेरे से होता है।
पर दूर से
नजदीक आती सवेरे की जीत
बड़ा ही सुकूनदेह होता है।
आज फिर से
वही शब्दों की माला
हमारे हृदय में गूँज उठी है।
भगत सिंह बन हम
भारत में दुबारा क्रांति लाने की
मन में हमने ठानी है।

"सरफरोशी की तमन्ना अब हमारे दिल में है।
देखना है जोर कितना बाजू-ए-कातिल में है।"
(Written by Bismil)


Written by sushil kumar
Shayari

22 Oct 2018

हर मंजिल,अपने हासिल करने वालों के योग्यता की परीक्षा लेती है।

Shayari

हर मंजिल,अपने हासिल करने वालों के योग्यता की परीक्षा लेती है।

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भले सफलता की शिखर
नजर नहीं आ रहें हो।
और दूर दूर तक प्रयासों के महासागर में
कामयाबी के किनारे दिख नहीं रहें हो।
हमें अपने हौसले की उड़ान पर
धैर्य बनाकर रखना चाहिए।
और अपने विश्वास भरे कदम को
सदा आगे बढ़ाते रहना चाहिए।
क्योंकि मंजिल भी सदा
हमारे योग्यता की परीक्षा लेती है।

Written by sushil kumar
Shayari


21 Oct 2018

प्यार के बुखार पर कल्कि प्रहार।

Shayari


प्यार के बुखार पर कल्कि प्रहार।

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जब रश्मि भास्कर की जलज पर पड़ती है
वह खिल उठता है।
ठीक वैसे ही जब तुम मेरे नजरों के सामने आते हो
मेरा दिल भी खिल उठता है।
और प्यार के भौसागर की गहराई में डूबता चला जाता है।
जहाँ सारे ख्यालों और सपनों में
बस तुम्हारा ही बसेरा होता है।
भूख और प्यास भी अपने रास्ते पर चलते चलते
कहीं गुम हो जाते हैं।
मानो कि उन्हें भी किसी ने सम्मोहित कर
सुला दिया हो।
जहाँ भी देखूँ बस तुम ही तुम नजर आती हो।

प्यार का बुखार सर चढ़कर बोल रहा था।
मेरी हालत माँ बाबू जी को बहुत परेशान कर रहा था।
तभी पापा ने पूछा
क्या तकलीफ है तुम्हें बेटा।
मेरे मूँह से निकल आया
शायरी दर्दे दिल की।
हर मर्ज की दवा है दुनिया मे
पर मर्जे इश्क की दवा
ना कभी मिला था इस दुनिया में
ना कभी मिल पाएगा।
आप तो बस पापा
मुझे मेरे हालत पर छोड़ दीजिए।
मुझे इश्क की खुमारी में जीने दीजिये।

फिर क्या
कलयुगी प्यार का भूत उतारने के लिए
कल्कि का अवतार ले
उस दिन जो पापा ने मुझे धोया था
आज तक हर स्त्री में मुझे
माता और बहने दिखाई दे रहीं हैं।





written by Sushil Kumar at kavitadilse.top

Shayari

20 Oct 2018

आज फिर से जिद्द की है।

Shayari

आज फिर से जिद्द की है।

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आज फिर से जिद्द की है।
कुछ कर गुजरने की मन में ठानी है।
माना,मैं माना
कि एक बाजी तो मैं हार चुका हूँ।
पर तुम क्या जानो?
वो हार कितनी अनमोल थी।
वो हार कितना खास था।
लगातार जीत से जीवन में आई एकरसता
आज समाप्त हो गई।
और मेरे अंदर समाई अतिविश्वास का भी
आज खंडन हो गया।
और फिर से जीत पाने के लिए
मैं प्रयासरत हो गया।
और अपनी पूरी ताकत झोंक दी।
उस जीत का जश्न मनाने के लिए।

Written by sushil kumar
Shayari

19 Oct 2018

पहला और आखिरी वो रिश्ता "पवित्र प्रेम" का।

Shayari

पहला और आखिरी वो रिश्ता "पवित्र प्रेम"  का।

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हमारे ऊपर पहला पहला
प्रेम की बरसात करने वाली थी वो।
हमारा विश्वास और भरोसे का आधार बनने वाली थी वो।
हर पग पर हमारा सहारा बन खड़े रहने वाली थी वो।
हमारे साथ पहला पहला मधुर खेल
खेलने वाली थी वो।
हमारी सभी जरूरतों को पूरा ख्याल रखने वाली थी वो।
हमारे हर जख्मों पर मरहम लगाने
वाली थी वो।
हमारे हर मुश्किलों का हल ढूंढने वाली थी वो।
हमारे चेहरे की खुशी देख हँसने वाली थी वो।
हमारे मायूसी के बादल को छाँटने वाली थी वो।
वो एकतरफा निस्वार्थ प्रेम का कर्ज आज भी नहीं उतार पाया हूँ हमारे ऊपर से।
और शायद सौ जन्म भी मिल जाए
तो भी उस कर्ज को हल्का कर पाने
में असमर्थ ही महसूस करुँगा।
वो रिश्ता पूरे ब्रह्मांड का सबसे पवित्र रिश्ता है।
जीवन की शुरूआत से
जीवन के अस्त तक
उनके दिए संस्कार ही तो काम आते हैं।
वो और कोई नहीं
वो हमारी प्यारी माँ हैं।
जिन्हें हम प्यार से माँ,मैया,मातु,मोम और पता नहीं किस किस नाम से पुकारते हैं।
और वो बहुत ही सहजता से
हमारे दिए गए नामों को
स्वीकार भी कर लेती हैं।
क्योंकि वो माँ है ना
माँ।
हमारी पहली गुरू
पहला भगवान
हमारी माँ को
सत सत नमन।

Written by sushil kumar
Shayari

18 Oct 2018

कभी भी आप हमें छोड़ के ना जाना।

Shayari

कभी भी आप हमें छोड़ के ना जाना।

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अगर कभी हमारे व्यवहार से आपको
आघात दिल पर लग जाए।
हो सकता है
हमे कोई
इसकी आभास भी ना हो पाए।
कृप्या कर
आप हमें
अपने दर्द का एहसास दिलाएँ।
अपने भावनाओं की सैलाब से
हमारी अहंकार को मिटाए।

पर कभी भी आप हमें छोड़ के ना जाएँ।
पर कभी भी आप हमें छोड़ के ना जाएँ।

आपका प्यार है
हमारी ताकत।
आपके प्यार से ही है
हमारा वजूद।
बिन आपके
मैं कुछ नहीं।
जैसे बहता हुआ तिनका
बिच समुन्द्र।

इसलिए कभी भी आप हमें छोड़ के ना जाएँ।

Written by sushil kumar
Shayari

क्या हुआ है मुझे??

आज सुबह से ही
मैं बहुत ही ज्यादा कश्मकश में जी रहा हूँ।
पता नहीं मैं
कब कैसे
इस शहर में आ पहुँचा हूँ।
जब होश आया तो पाया
खुद को मैं
एक अनजान रोड पर।
मोबाइल फोन भी पोकेट में नहीं है।
और मैं याद कर कर परेशान हो रहा हूँँ।
आखिर क्या हुआ था कल?
कि मैं यहाँ आ पहुँचा हूँ। 

हर मोड़ पर खड़े 
किसी अनजाने से 
अपनो का पता पूछ रहा हूँ।
पर वे पता नहीं
हमारी अनदेखी कर
अपने ही कामों में व्यस्त दिखाई दे रहे हैं।
लाख पूछने पर भी
वे हाँ नहीं में 
कुछ भी जवाब नहीं दे रहें हैं।
मानो कि मैं मुर्दों के शहर में
आ फँसा हूँ।
अनजाने लोगों के बिच में
मैं किसी अपने की खोज कर रहा हूँ।
जो मेरे सवालों का सही सही जवाब दे सके।
या फिर मैं किसी सपने में जी रहा हूँ।

अब तो बस एक ही जुनून 
दिल में सुलग रही है।
मैं कैसे अपनो के पास पहुँचूँँ
जो मेरी राह देख देख परेशान हो रहें होंगे।

तभी मुझे दिखा रेल्वे स्टेशन।
दिल्ली!दिल्ली कब पहुँचा।
मैं अंदर पहुँचा तो पाया कि
पटना के लिए ट्रेन लगी हुइ है।
मेरे पास टिकट नहीं है
पैसे भी नहीं है।
मैं ट्रेन में घूस गया।
और चुप चाप एक सीट पर जा बैठा।
तभी एक यात्री पता नहीं
सीधे मेरे पैर पर आकर बैठने लगे।।
अरे अरे अरे भाई
मैं उठ खड़ा हुआ।
क्या पागल इंसान है?
मेरे ऊपर ही बैठेगा क्या?
मैने एक अलग सीट पकड़ कर बैठ गया।

टीटी भाईसाहब को आते देख
मैं डर गया और सोने का नाटक करने लगा।
और हनुमान चलीसा पढ़ने लगा।
उसने सबसे टिकट माँगी
पर मुझपे उसका ध्यान गया ही नहीं।
मैने हनुमानजी को कोटी कोटी धन्यवाद दिया।

पटना पहुँचा
और घर पर सभी को सरप्राइज देने के लिए
मैं निकल पड़ा।
मन में भावनाओं के तरंगों का 
ऊफान उठ रहा था।
घर के बाहर जब पहुँचा
तो आंदर से रोने की आवाज आ रही थी।
अंदर पहुँचा तो पाया कि
मेरे जैसे शक्ल का एक व्यक्ति मृतसैया फर लेटा हुआ है।
और मेरे परिवार जन उसे घैर कर रोए जा रहे हैं।
मैं जिंदा हूँ 
माँ बाबूजी गीता
मैं यहाँ हूँ।
मैं गला फाड़ फाड़ कर चिल्ला रहा था।
पर कोई सुने नहीं।
और एक झटके में मुझे
सारा कुछ याद आने लगा।
अगला स्टेशन दिल्ली आने ही वाला था।
मेरा आज इंटरव्यू था।
तभी बहुत जोर का झटका लगा मुझे।
ओर मैं जख्मी हो नीचे गिर गया था।
होस्पिटल ले जाते वक्त ही 
रोड पर मेरे प्राण पखेड़ू उड़ गए थे।
और मैं खुद को 
होश में उसी रोड पर पाया था।

शरीर नश्वर है,आत्मा अमर है।

नैनं छिद्रन्ति शस्त्राणि नैनं दहति पावक: ।
न चैनं क्लेदयन्त्यापो न शोषयति मारुत ॥

इस श्लोक का अर्थ है: आत्मा को न शस्त्र  काट सकते हैं, न आग उसे जला सकती है। न पानी उसे भिगो सकता है, न हवा उसे सुखा सकती है। (यहां भगवान श्रीकृष्ण ने आत्मा के अजर-अमर और शाश्वत होने की बात की है।)



14 Oct 2018

हिमालय अभी बाकी है।

जरा सा लड़खड़ाया
और फिर गिरा धड़ाम से।
लोगों ने हमारे गिरने
का बड़ा ही लुत्फ़ उठाया।
कुछ ने तो हमारे साथ
सेल्फी तक ले ली।
अपने विद्रोहियों को
दिखाने के लिए।
कि हमारे जैसे लोग भी हैं
जो उनसे भी बड़े हारे हुए इंसान हैं।
कुछ ने तो सटांप पेपर पर तक
लिख कर दे दिया कि
इस काले चादर पर कोई रंग
नहीं चढ़ने वाला।

कोई बात नहीं
ऐसे निंदकों से ही
हमारे जीवन में
सुनहरे सवेरों का
आगमन होता है।
और हम सफलता की सीढ़ियों पे
चढ़ते हुए आसमान की ऊँचाईयों को छू लेते हैं।

एक बार गिरा क्या
लोगों ने सोचा कि
हम दौड़ से ही बाहर हो गएँँ।
पर ये भूल गएँँ
कि मैने अभी भी
दौड़ना भूला नहीं।
गिर के संभलना
भूला नहीं।

जीवन की इस डगर में
उन निंदकों से आगे
बढ़ गया हूँ।
पर अभी भी मैं
स्पर्धा में बना हुआ हूँ।
और जीत के लिए
अग्रसर हूँ।
क्योंकि हिमालय
अभी बाकी है।




कभी कभी तो लगता है, क्यों ना संयासी बन जाऊँ।

हर दिन की वही चिकचिक
सुबह से शाम हो जाती है
वही ताने उन्हीं लोगों से
सुन सुनकर।
सुबह सुबह बीवी के ताने
अरे आपसे बच्चे भी नहीं संभलते हैं।
ना ही घर का काम होता है।
आपसे कुछ बोलना ही बेकार है।
आपसे कुछ होना जाना तो नहीं है।
बस बैग उठाकर ओफिस जाओ
बैग उठाए ओफिस से चले आओ।

और उस पल में
हर पति बड़ा ही लाचार
महसूस करता है।
और मन ही सोचता है।
क्या ये बच्चें आसमान से प्रकट हुए हैं क्या?
और ये समझदार पति मनमोहन सिंह बन
मन ही मन मुस्कुराते रहते हैं।

फिर ओफिस जाओ तो
बोस का ताना।
क्या? कर क्या रहे हो?
शर्मा जी।
एक प्रोजेक्ट दिया था
तीन दिन पहले
अब क्या एक महीना लगाओगे
उसे पूरा करने में।
फिर बोलते हो
पदोन्नति नहीं मिलती है।
तुम्हारे जैसे लोगों को तो
सरकारी बाबू बनना चाहिए था।
किसी काम के लायक नहीं हो।

अब आप यहाँ भी गौर फरमाइए।
साहब ने हमारी गुणवत्ता के
बखान का ढोल पीट दिया
वो भी भरी सभा में।
मन तो किया कि
अभी के अभी इस्तीफा
उसके मूँह पर मारकर फैंक आऊँ।
फिर ख्याल आया कि
अगर भूख नाम की चीज
दुनिया में नहीं होती
तो ये दुनिया स्वर्ग से कम नहीं होता।

तभी सामने पड़े अखबार पर
भगवाधारी मशहूर बाबा की
फोटो दिखाई दी।
और मुझे एक पल के लिए
इन सारे आफतों को
हटाने का उपाय
मानो दिख सा गया।



सत्य की खोज।

हर दिन की तरह 
उस दिन भी 
माँ बाबू जी का आशिर्वाद ले
निकला था घर से।
कुछ दूर चला था नहीं
बहुत तेज दर्द हुआ छाती में।
जैसे तैसे पहुँचा था घर
जाकर लेटा अपने बेड पर।
घरवालों को हुई चिंता
फटाफट बुला लिया
अपने फेमिली डॉक्टर को।
डॉक्टर साहब आए
और जाँच की
हमारे सेहत का।
पता चला मुझे आया था
पहला पहला हर्ट अटैक।

मैंने मानो पुनर्जन्म पा लिया हो
अगले कुछ पलों में।
जब वो असहनीय दर्द
छटा था
धीरे धीरे मेरे सीने से।
एक पल के लिए तो
ऐसा लगा
मानो मौत को छका कर
चला आया हूँ।
दूसरे पल में आया कि
मृत्यु के बाद 
होता है क्या
किसी आत्मा का।
मैने मन में ठानी की
इस सच्चाई का पता लगाकर
ही दम लूँगा अब।
आखिर मौत के बाद
क्या होता है
किसी भी आत्मा का।

एक दिन समय निकाला
और पहुँचा एक भगवाधारी गुरू के पास।
मन में चल रहे प्रतिद्वंद को
प्रकट की 
उस गुरु के समक्ष।
फिर जो गुरू ने 
श्री कृष्ण बन शुरू करा
देना उपदेश।
नहीं रूके 
देते रहें लगातार 
चार घंटो तक।
और बिच बिच में
मेरे मन में
ऊपज रहे सवालों को भी
करते रहें दरकिनार।
तब जाकर समझ में आया
क्यों होते हैं
दुनिया में इतने कष्ट।
और मरने के बाद
शरीर छोड़ किधर 
चला जाता है हमारी आत्मा।

एक बात तो समझ आई कि
अगर करनी है
खुद पर कृपा।
कभी भी किसी जीव को 
दुख मत देना।
ऐसा कर्म करना है
कि सब का 
जिसमें हो भला।
वरना मृत्यु के बाद
जाना पड़ सकता है
नर्क की लंका।

अपनी सहूलियत हासिल करने को
दूसरे को 
दुख की खाई में
नहीं ढकेल सकते हैं हम।

पैसा पैसा पैसा

पैसा पैसा पैसा
बस पैसों का ही खेल है।
एक बार कभी मन किया
कहीं घूमकर आएँ हम।
मलेशिया, थाइलैंड, सिंगापुर नहीं
जरा शिमला दर्शन कर आएँ हम।
पर नजर गया
जब अपने बैंक अकाउंट पर
साला समझ में आ गया
मेरी हैसियत।
अभी तो बस इतने ही बचत हैं
जिनमें बाजार जा
अपने महीने भर का राशन ला पाएँ हम।
बड़े बड़े ज्ञानियों ने कहा है
अगर आपको कुछ बड़ा पाना है
तो सपने हमेशा बड़े बड़े देखो।
लेकिन कितने दिनो तक देखो।
और एक दिन में कितने बार देखो।
किसी ने स्पष्ट नहीं किया है।
वरना हमें पता चल जाता
अभी और कितने दूर हैं हम
अपने मंजिल को पाने में।
पर कोई बात नहीं 
अभी हिम्मत नहीं हारी है हमने।
संघर्ष जारी रहेगा
सपनों को साकार करने में



13 Oct 2018

अगर तू जीवित है तो जीवंत का प्रमाण दे।

अगर तू जीवित है
तो जीवंत का प्रमाण दे।
अँँगार पर यूँ मुस्कुरा के चल
मानो ठंडी मखमली हो जमीन।
हर वार का तू
बड़े ही प्यार से जवाब दे।
अपने मानव होने के
अस्तित्व को साकार कर।
जीवन के हर पग पर
संघर्ष खड़ा है
इम्तिहान लेने को तेरा।
हौसला अपना बनाए रख
विश्वास को जगाए रख।
भले ही तूने साँस की
आखिरी कश ली हो अभी।
हिम्मत भी जवाब
दे रहा हो तेरा तभी।
लहुलुहान शरीर तेरा
हो चला हो छलनी छलनी।
अंतिम वार तू जमकर कर।
अंतिम वार तू जमकर कर।
अगर तू जीवित है
तो जीवंत का प्रमाण दे।
अगर तू जीवित है
तो जीवंत का प्रमाण दे।



11 Oct 2018

कितना आसान हो जाता है सफर

कितना आसान हो जाता है सफर
जब मिल जाता है किसी अपने का साथ।

राह में आते हैं रोड़े बन मुसीबतें।
पर उन्हें भी
हम फुटबॉल बना
लात मार हवा में उड़ा देते हैं
चुटकियों में।

कभी भयानक राक्षस
बोस बन आते हैं
हमारे जीवन में।
उनके भी छक्के छुड़ा
उन्हें भींगी बिल्ली बना
उनकी हवा निकाल देते हैं
हम हँसते हँसते।

कुछ मुश्किलें भी आती हैं
राह में
शेर बन
खा जाने को हमें।
पर हम उन्हें भी परास्त कर
उन्हें चूहा बना
किसी बिल में घूसेड़ देते हैं कहीं।

हर विपरीत परीस्थिती सुगम बन जाता है
जब कोई अपना
साथ निभाने
हमराह बन आता है।

मैं रहूँ,ना रहूँ।

मैं रहूँ,ना रहूँ।
मेरी सोच और मेरा प्यार सदा तुम्हारे साथ रहेगा।
मेरी श्रद्धा और मेरी दुआएँ सदा तुम्हारा ख्याल रखेंगी।
मेरा प्यार तुम्हारी जरूरत नहीं।
बल्कि
सदा तुम्हारी ताकत बन खड़ी रहेगी।

घनघोर अंधियारे रात में
मैं जुगनू बन तुम्हें सही राह दिखाऊँगा।
हर मायूसी भरे पलों में
मैं चुटकुला बन
तुम्हें गुदगुदाऊँगा।
हर मुश्किल से मुश्किल घड़ी में
मैं एक तरकीब बन
तुम्हारे दीमाग के दरवाजे पर
खटखटाऊँगा।
जब तुम सो जाओगे
तब स्वप्न में आकर
तुमसे मैं प्यार जताऊँगा।

जीते जी क्या
मरने के बाद भी।
चाहे कोई भी घड़ी हो
तुम्हारे जीवन में
कभी भी तुम्हें
अकेला नहीं छोड़ पाऊँगा।

10 Oct 2018

आज दिल उदास है

आज दिल उदास है
मन भी उचाट है।
कुछ खोया तो नहीं है?
कहीं चोट तो नहीं खाई है?
बहुत यत्न करने के बाद भी
कुछ याद नहीं आ रहा है।
फिर भी कुछ तो हुआ है
जो कि
मन में एक ठहराव है।
अजब सी शांति है मन में।
अजब सी स्थिरता है।
जैसे मानो कोई आने वाला
महा प्रचंड तुफान है।


जिंदगी तेरा साथ मैं निभाता चला जाऊँ।

जिंदगी तेरा साथ मैं निभाता चला जाऊँ।
दुख और गम के गीतों को
तेरे संग गाता जाऊँ।
बचपन में
माँ की लोरी सुन
उनकी गोद में
तेरे संग सो जाऊँ।
दोस्तों के संग हम दोनो
मैदान में खूब धूम मचाएँ।
हर मौसम
हर त्योहार को
तेरे संग मैं मनाऊँ।
तू जहाँ मुझे ले जाए
मैं वहाँ चलता जाऊँ।
हर धड़कन और साँस में
तेरे नाम की माला जपता जाऊँ।
जिंदगी तेरा साथ मैं निभाता चला जाऊँ।
जिंदगी तेरा साथ मैं निभाता चला जाऊँ।






9 Oct 2018

कभी आपने सोचा है???

कभी आपने सोचा है???

प्रेमिका ने कुछ अनुरोध किया।
तो उसकी ख्वाहिश पूरी करने को
हम जमीन आसमान एक कर देते हैं।
अगर कभी जो उसने चाँद भी माँगा।
तो शायद चाँद भी हम आसमान से तोड़
उसे ला देंगे।
पर उसकी इन्द्रधनुषी चेहरे पर कभी भी
दुख के बादल नहीं दिखने देंगे।

पर पत्नी अगर कुछ माँगती है तो
दस बहाने हमारे
पहले से ही 
तैयार मिलते हैं।
और सती सावित्री पत्नी 
अपने पति के बातों पर
गंधारी बन 
विश्वास भी कर लेती हैं।

ऐसा क्यों???

प्रेमिका के आस पास 
मंडराते हुए 
दस बारह भँवरे हमेशा को मिल जाएँगे।
अगर उन्हें नही संभाल पाएँगे तो
वो सरक कर 
कहीं और निकल जाएँगी।
इस कोप से हम भयभीत हो
हम अपने प्रेमिका की
आवाभगत करते हैं।

पर उनमें भी कुछ अपवाद मिल ही जाती हैं
जो अपने प्रेमी के दुख को 
अपना दुख समझती हैं।
वैसी प्रेमिका अपने प्रेमी संग
ब्याह रचाकर ही
चैन की साँस ले पाती हैं।

और पत्नी शादी के पवित्र बंधन में 
बंध कर पति के 
दुख और सुख में सहभागी बन
साथ रहने के लिए ही आईंं हैं।
इसीलिए शायद वो हमेशा
अपने पति के हामि में
सदा हामि भरती हैं।
जीवन के हर दुख सुख में
साया बन सदा साथ निभाती हैं।।

मैं तो कहता हूँ
साल का एक दिवस 
पत्नी को भी समर्पित होना चाहिए।
हर स्त्री पूज्यनीय हैं।



8 Oct 2018

वो देखो निकला जा रहा है समय।

वो देखो निकला जा रहा है समय
फुर्र फुर्र कर अपनी पहियो पर।
वो नहीं रूक रहा है
किसी के लिए।
चाहे करलो लाख जतन।
उसकी कोई पड़ाव नहीं।
उसका कोई मुकाम नहीं।
ना कोई मंजिल पाने की खुशी है
ना किसी को खोने का दुख।
निरंतर
चलते आ रहा है सदियों से
बनकर साक्षी चारो युग।
अभी भी वह थका नहीं
जो साथ चला उसे रोका नहीं।
कुछ राहगीर आएँ
साथ चलने को कुछ पल।
वे थकें
फिर कुछ अन्य आएँ
साथ निभाने को कुछ अन्य पल।
ऐसे ही चलता आ रहा समय
युगों से।
कुछ मिठे
कुख तीखे पलों को
अपने में संजोए हुए।
युग बदला
मनुष्य बदला
बदल गई सारी पृथ्वी।
अगर कुछ नहीं बदला है तो
वो है समय के चलने की गति।

समय से हारकर युग,मनुष्य और पृथ्वी लगातार बदलती जा रही है।



जिंदगी बहुत ही सरल है।

जिंदगी बहुत ही सरल है।
हम इसे पेंचीदा बना देते हैं।।
इम्तिहान की घड़ी आने पर
हमारी नींद खुल जाती है।
उससे पहले मस्ती में
समय कहीं लुप्त हो जाता है।
पता नहीं
समय के जाते ही
तनाव कहाँ से भागा भागा आता है।
और परीक्षा की तैयारी
तनाव के साथ
यारों कहाँ हो पाता है।
भले ही तैयारी पूरी हो
पर तनाव से दिल भारी हो जाता है।
याद किए हुए विषयों को
भूला भटकाकर
पता नहीं
तनाव कहाँ लिए जाता है।
कसौटी पर खरा उतरना है तो
तनाव को लात मार
भगाओ घर से।
विशेष अध्यायों को पलट पलट कर
जरा सा ध्यान दे
एक बार अध्ययन कर लो दिल से।
अगर तुमने सारे विषयों की क्लास में
आँख और दीमाग खोलकर लगाई होगी।
दो घंटे काफी होते हैं
किसी भी विषय की तैयारी
पूरी करने को।
तुम्हें पचहत्तर प्रतिशत से पास होने में
कोई माई का लाल नहीं रोक पाएगा फिर।





7 Oct 2018

अपने तो अपने होते हैं।।

कुछ पन्ने क्या फटे हमारे जिंदगी से
लोगो ने अपने जीवन की पुस्तकालय से ही
बाहर निकाल फेंका हमें।।
हमने प्रयास किया
उनसे रिश्ते सुधारने के लिए।
पर हमारे पहल का
कुछ जवाब ना आया
सामने से कभी।।

पर कुछ लोग अभी भी हैं
जो हमे
अभी भी संभाल कर अपने दिल के पास रखे हुए हैं।
और हमारे जीवन के ऊबड़-खाबड़ पथ को
समतल बनाने में व्यस्त हैं।।
हमारे दुख के लम्हों में
वो बैसाखी बन
हमारे साथ खड़े रहते हैं।
और खुशी के पलों में
हमारे महफिल में
शरीक हो
हमारे खुशियों को
दुगुना कर देते हैं।।
इसलिए शायद सही ही कहते हैं।
अपने तो अपने होते हैं।।
अपने तो अपने होते हैं।।

6 Oct 2018

वाह क्या बात हो गई!

ये उन दिनों की बात है।
जब मैं हाफ पैंट में रहता था।।
स्कूल में छुट्टी थी।
मौसम में सुस्ती थी।।
सुबह तो हो चला था।
पर मेरी मेहबूबा आलस ने
अपने बाहों में
जकड़ कर मुझे रखी थी।।
बहुत बार नींद खुली थी।
करवटे बदल बदल कर
नींद पूरी हो रही थी।।

तभी माँ ने आवाज लगाया।
नौ बज गए
अब तो उठ जा।।
दिमाग में घंटी बजी एक
प्रिया मेडेम का क्लास है
आज दस बजे से।।

आइए अब आपको प्रिया मेडेम के बारे में कुछ बताएँ।
जिनकी सरलता के हम सब कायल थे।।
कभी भी उन्होंने आज तक
छड़ी नहीं उठाई थी।
डाँटना होता क्या है?
ये उन्हें समझ नहीं आई थी।।
ये हमें पढ़ाती थी सोसल स्टडी।
पर हमें समझ नहीं आती थी उनकी
कभी कोई लोजिक।।
इसलिए कभी कभी वो एक्सट्रा क्लास भी लेती थी।
छुट्टी वाले दिन भी
छुट्टी कहाँ होती थी।।
इतनी प्रयासों के बाद भी हमें समझ नहीं आता था।
सबसे पेंचीदा विषय हमें सोसल स्टडी कभी नहीं भाता था।।

पिछले वर्ष फाईनल एक्जाम से पहले
उनका एक्सट्रा क्लास होना था।
हम सभी क्लास में बैठे बैठे
गप्पे मार रहे थे एक दूसरे संग।।
तभी मेडेम की आवाज आई।
हम सभी शाँत हो
बैठ गए अपने सीट पर।।
उन्होने आने के बाद
जरा मुस्कुराकर
हाल चाल हम सभी से पूछे यों।
मानो कि उनका आखिरी दिन हो
कल से अब दिखेंगी नहीं स्कूल में वो।।
फिर जो बताया उन्होंने
होश हवास खो दिए  हम सबने।।
"ये आखिरी साल हो सकता है हमारा
अगर हमारे विषय में
नहीं आएँगे अच्छे नंबर तुम्हारे।।"

हमारे चेहरे के रंग उड़ गए।
क्या अगले साल से
मेडेम नहीं दिखेंगी स्कूल में।।
कुछ बच्चे जज्बाती हो
यहाँ तक बोल गए।
अगर आप नहीं आओगी
तो हम पढ़ना लिखना भी छोड़ देंगे।।

"बच्चों अगर तुम चाहते हो
मैं अगले साल भी यहाँ ही पढ़ाऊँ।
तुम्हें दिल लगाकर पढ़ना होगा
जो भी मैं पढ़ाऊँ अभी वो।।

फिर क्या
हम सभी ने मिल
जी जान लगा दिया उस दिन से।
फाईनल एक्जाम के पेपर में
हम सबने हिला दिया उस पेपर में।।
सोसल स्टडी में हम सभी के अच्छे मार्क्स आ गएँ थे।
मेडेम कहीं नहीं गई।
और हम दिल ही दिल हर्षाएँ थे।।

आज फिर से मेडेम की क्लास है।
और मेडेम हमारी जिंदाबाद है।।
विषय जो था पेंचीदा।
आज हम सब उसके बाप हैं।।
मेडेम जिंदाबाद है।।
मेडेम जिंदाबाद है।।






5 Oct 2018

हर लम्हा बहुत ही प्यारा है।।

हर लम्हा बहुत ही प्यारा है।
जिसे रब ने सहेज कर पिरोया है।।
कुछ खट्टे
कुछ मिठे
कुछ नमकीन
तो कुछ तीखे।
पर सारों का एहसास
बहुत ही निराला है।।

आखिर परमेश्वर परमपिता है वो।
प्रेम और दया के भंडार है जो।।
कितनी भी बड़ी मुश्किल की घड़ी हो।
कितना भी बड़ा इम्तिहान देना हो।
अगर तुम्हारी कोशिश सच्ची है।
दिल से मेहनत तुमने की है।
सच्चे हृदय से परमपिता को
एक बार याद कर लेना तुम।
वो अपनी गोद में उठाकर
तुम्हें मझधार से बाहर निकालेंगे।।
और फिर तुम्हारे मस्तिष्क पर
जीत का तिलक भी लगाएँगे।।




3 Oct 2018

आजाद देश की आजाद धरा पर।।


आजाद देश की आजाद धरा पर।

Kavitadilse.top द्वारा आप सभी पाठकों को समर्पित है।




आजाद देश की आजाद धरा पर
क्या रहने लायक हैं हम?
खुले आसमान में अपने पंख फैला
क्या उड़ने लायक हैं हम?

हम नौजवानों की यही दिक्कत है
भावनाओं की तरंगों में बह
कुछ भी कर बैठते हैं।।
अगर हमें गुस्सा आया तो
तोड़ फोड़ मचाते हैं।।
पलक झपकते ही
कुछ क्षणों में
पूरे दृश्य को बदल दे जाते हैं।।
कुछ भ्रष्ट नेता हैं जो हमारे
इस बात का फायदा उठाते हैं।।

अरे भाईयों
कितने चंद्रशेखर आजाद और कितने इकबाल ने
अपनी खून की नदियां बहाई हैं।
फिर जाकर
हमारे सोने की चिड़िया को
उन अंग्रेजों से आजादी दिलाई है।।

शहीद आजाद और शहीद इकबाल की कसम
अब और ना इनकी सुनेंगे हम।
अपने गुस्सा और अपने जुनून को
सही दिशा दिखाएँगे हम।।
आजाद भारत को इन गद्दारों से
मुक्त किए बिना
नहीं हारेंगे हम।।
अपने मताधिकार का सही उपयोग कर
देश को आगे बढ़ाएँगे हम।।
हिंदू मुस्लिम सिख इसाई
सभी एक स्वर में गाएँगे हम।।
आजाद थे
आजाद हैं
और आजाद ही रह जाएँगे हम।
अपनी आजादी की धरोहर को
किसी भी कीमत पर
नहीं खोने देंगे हम।।

जय हिन्द।।
जय भारत।।


आजाद देश की आजाद धरा पर।

written by sushil kumar @ kavitadilse.top

मेरी प्यारी माँ।।

आज फिर से दिल मेरा
ऊफान मार रहा है यहाँ।
क्यों एक माँ को
नहीं मिलती है निवृत्ति इस जहाँ।।
सुबह से शाम हो जाता है
परिवार को संभालते हुए उसे।।
क्यों नहीं उनका भी रविवार होता है
और वो क्यों नहीं लेती है आराम।।


पूरे घर की साफ सफाई
और चूल्हा चौका में
खुद को व्यस्त रखती है
मेरी प्यारी माँ।।
एक पैर पर सारा दिन
खड़े होकर भी
नहीं ऊफ करती है
मेरी प्यारी माँ।।
कभी किसी बात की शिकायत भी
कहाँ करती है?
मेरी प्यारी माँ।।
शाम होने पर
किताब खोल
हमें पढ़ाती है
मेरी प्यारी माँ।।
सारे परिवार को
प्यार और ममता की धागे में
एक जुट कर रखती है
मेरी प्यारी माँ।।
एक परिवार को सम्पूर्ण और खशहाल बनाती है
हर घर की
वो प्यारी माँ।।


2 Oct 2018

एक और अग्नि परीक्षा।।

रोजमर्रा की जिंदगी में
ये तो आम सी बात हो गई है।
अखबार लेकर बैठता हूँ
एक खुदकुशी की समाचार तो
तय है।।

क्या हो गया है
आजकल के नौजवानों को।
मुश्किलों से दो दो हाथ करके
खुद को साबित करने के बजाय।
कायर बन
अपनाते हैं खुदकुशी के पैमाने को।।

कल का हँसता खेलता परिवार को
आज अंधकार में धकेल दिया है
उस मातम ने।।
बीवी का तो हाल बुरा है
रो रोकर
आँसू सूख गएँँ हैं उसके।
जिसके भरोसे वह आई थी इस घर में
जिसने कसम खाई थी
साथ निभाने की
सात जन्मों तक।
आज उसे बेसहारा कर
ना जाने कहाँ गुम गया है वो।।
किसके भरोसे उसे छोड़ गया है वो।
यह सोच सोच कर
ना जाने कितनी बार वह बेसुध हुई है।
होश में आने के बाद भी
आँसू भी कहाँ थम रहे हैं ।।

माँ बाप भी बदहवास कहीं कोने में पड़े हैं।
रो रोकर
उनके भी हाल बुरे हुए हैं।।
इकलौता बेटा था
बुढ़ापे का सहारा।
आँखों का तारा था
वह लाडला दुलारा।।
जिसके सहारे बिताना था
बाकी की बची खुची जिंदगी।
आज उन्हें अँधकार में धकेल
खुद चिरनिद्रा में सो चुका था।।
कैसी विपदा आज इस परिवार पर
आन पड़ी है।
वृद्ध लाचार पिता के कँधे पर
चली मृत बेटे की सैया की सवारी है।।

अरे दोस्तों
कुछ तो रहम करो।
खुद तो चैन की निद्रा में सो जाओगे।।
पर अपने परिवार को
किसके सहारे छोड़ जाओगे।।

बनो वीर
बनो निडर तुम।
मुश्किलों से ना मूँह फेरो तुम।।
जीवन की हर बाजी को
पूरे दम खम लगा कर जीतो तुम।।
अगर मान लो
एक बार हार भी गए तो।
नहीं रहेगी मन में कोई दुविधा।।
हमने तो अपना दिया था सत प्रतिशत।
कोई बात नहीं
फिर से देंगे
एक और अग्नि परीक्षा।।



आप जब चैन की नींद सोई रहती हैं।

आप जब चैन की नींद सोई रहती हैं।
आपके चेहरे पे सुकून का भाव देख
कितना आनंद आता है।।
मानो जैसे मस्त चाँदनी रात में
कोई नदी
अपने धारा के वेग को नियंत्रित कर
विराम की अवस्था में
धीरे धीरे
गहरी नींद पाने को
बही जा रही हो।।

जब आप नींद में मुस्काती हो।
आपके चेहरे का नूर देख
हमें ऐसा प्रतीत होता है
जैसे कोई बंद कली अंगड़ाई लेकर
फूल बनकर
खिलने को बेकरार हो रही है।

जब आप नींद में करवटे बदलती हो।
हमें ऐसा आभास होता है
जैसे कि
कोई फूल अपनी टहनियों पर
मस्त हवा के झोंके में
गोते खा
झूमी जा रही हो।







आज क्यों नहीं हम और तुम साथ में बिताते हैं।

आज क्यों नहीं हम और तुम साथ में बिताते हैं।
साथ में कहीं
क्यों नहीं !
हम तुम घूम कर आते हैं।।
गोलगप्पे वाले भैया के पास
खड़े होकर
पानी पूरी खाते हैं।।
साथ में बैठकर हम दोनो
समून्द्र तट पर
आइस गोला का लुत्फ उठाते हैं।।
समून्द्र तट पर एक लंबा सा
सैर कर आते हैं।।
लहरों और पैरों के बीच की
दूरी को मिटाते हैं।।
कितना सुकून
कितनी शांति हमें मिलती है।
प्रकृति के गोद में आकर।।
ये हर किसी को अपनाती है
बिना किसी भेद भाव
और बिना किसी द्वेष के।।
और सभी पर एक समान
प्यार की बरसा करती हैं निरंतर।।
आओ हम तुम क्यों नहीं
उस ममता की बरसात में भींग
वह अद्वितीय आनंद का
मजा उठाते हैं।।
आज क्यों नहीं हम और तुम साथ में बिताते हैं।
साथ में कहीं
क्यों नहीं !
हम तुम घूम कर आते हैं।।



1 Oct 2018

घूट घूट कर क्यों जी रहा है यहाँ।।

घूट घूट कर क्यों जी रहा है यहाँ।
रुक रुककर क्यों चल रही है तेरी नब्ज।।
साँसे तो चल रही है।
पर वह भी बहुत धीमे धीमे।।

किससे खौफ खाया हुआ है?
किसने लूट ली है तेरी अस्मत।।
बहुत सहा
अब और कितना सहेगा।
अपने दर्द को कब तक ढकेगा।।

उठ!
जाग!
हो जा तैयार तू।
लेने को एक बड़ा कदम।।
खून के आँसू अब वो रोएगा।
जिसने लूटी है तेरा चैन और बरकत।।


Meri khamoshi mein ek sandesh hai.

Shayari मेरी खामोशी में एक संदेश है। kavitadilse.top द्वारा आप सभी पाठकों को समर्पित है। मेरी खामोशी देख तुम्हें तो आज बड़ा ही सुकून...