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अरे गुस्ताख़ दिल

अरे गुस्ताख़ दिल क्यों बहक रहा है।।   
अब तो जरा लगाम दे।।                         
ऊम्र हो चला है तेरा अस्सी।                   
अब तो जरा लिहाज कर।।                         
सुंदर स्त्री देखा नहीं।                           
तू भूल जाता है आयु में अंतर।।             
उसके पीछे पीछे हो लेता है।                 
बनकर उसका आशिक।।

                       
अरे माफ करना मेरे दिल।                   
तेरे को ऊम्र से क्या लेना देना।।             
तेरा तो काम है धड़कना।                     
अगर जो तू भूल गया।।                       
तो फिर है कैसा जीना।।                         
इसीलिए शायद यह कहते हैं।               
दिल तो अभी बच्चा है जी।।                         
हम शरीर से तो हो गए हैं बूढ़े।                 
पर दिल से अभी भी हैं हम बच्चे।।                        

ओ प्यार से भी प्यारे प्यार।।

ओ प्यार से भी प्यारे प्यार।
मेरे दिलदार।।
तू साथ रहे ना रहे।
पर तेरा साथ हमेशा रहता है।।
मेरे सोच में
मेरे स्वप्न में
मैं कहीं भी रहूँ।
हर जगह बस तू ही तू है।।
बिन तेरे
मेरा एक पल भी
कहीं नहीं गुजरता है।
घर बाहर
कहीं भी रहूँ
हर सुरत में
बस तू ही तू नजर आता है।
सच कहता हूँ मेरे प्यार
मेरे दिल में
तू हमेशा रहता है।।

किस्मत तेरा सजदा करेगा खुद।।

हर इम्तिहान में उत्तीर्ण हो जाएँ।
ऐसी कोई जरूरी नहीं।।
कुछ इम्तिहान होते ही हैं।
हमारी औकात दिखाने के लिए।।
जो इंसान हार का मुख
आज तक कभी देखा नहीं।
वैसे इंसान को जीत का
मजा कभी मिला नहीं।।
बेटा तू इंसान है।
हमेशा तू जमीन पर चल।।
क्यों नकली पँख लगाकर।
गगन में उड़ने की जिद्द लगाकर बैठा है तू।।
गिरेगा तू
संभलेगा तू।
पर जिद्द नहीं छोड़ेगा तू।।
और एक दिन तेरे जिद्द के आगे।
किस्मत तेरा सजदा करेगा खुद।।




कुछ लोग जिम्मेदारियों का ऐसा ढोल पीटते है।

कुछ लोग जिम्मेदारियों का ऐसा ढोल पीटते है।
मानो कितने कर्मठ हैं वो
जो सारे जग का बोझ
अपने कँधे पर उठाए हुए हैं।।
सारे जग को पाठ पढ़ाते हैं।
जिम्मेवार उन्हें बनाते हैं।।
पर जब बारी खुद की आई तब।
रोना धोना मचाते हैं।।
ऐसे ढकोसले लोगों से।
सारा जग यहाँ भरा पड़ा हुआ है।।
कथनी करना आसान है।
जो करनी पड़े तो फुर्र हो जाते हैं।।
हे ईश्वर मुझे इस लायक बना।
कि कथनी करने की जरूरत ना पड़े।।
करनी करता चला जाऊँ तेरे मार्ग पर।
लोग देखकर तेरे पथ की ओर बढ़ें।।


याद होगा तुम्हें।।

आज का दिन 2013 का तुम्हें याद होगा।
वो मधुरमय शाम
और वो चंचल हवा
स्पर्श कर मुझे वह
बेचैन कर रही थी।।
शायद तुम वैसी होगी।
नहीं नहीं
तुम वैसी होगी।
पता नहीं
जैसी भी होगी
पर बहुत ही प्यारी होगी।
मन भी कितना चंचल हो सकता है??
अनगिनत सवालों को कुछ क्षणों में
सोच सकता है।
अगर कोई गति मेरे मन की जो नापता।
सारा ब्रह्मांड कुछ क्षण में वह घूम आता।।
जैसे जैसे हमारे मिलने का समय समीप आ रहा था।
पल पल गुजारना कठिन होता जा रहा था।।
स्टेज पर बैठे बैठे मन घबरा बहुत रहा था।
सारे जन घूर रहे थे मुझे
और मैं वहाँ शरमा रहा था।।
तभी मेरी सोनपरी अपनी चाची संग जो आई।
देख उसकी सुन्दरता
मेरी आँख है चौंधियाई।
वो तीखे तीखे नाक नक्श
और बड़ी बड़ी सी आँखें
मानो पूरा समय देकर रब ने
किया हो जिसे स्थापित।।
सगाई की रस्में
फिर शुरू हुई हमारी।
जो उन्होंने स्पर्श किया हमें
मानो सारा जग हो हमने पाली।



आप हमारी ऊर्जा का संचालक हो।

आप हमारी ऊर्जा का संचालक हो।
जैसे
बूझते दीपक में पुनः जान डाल देने वाला घी में है।।
झुलसती धरती को पुनः ठंडा करने वाले सावन की बूंदो में है।।
काली अंधियारी रात को अपनी रोशनी से छाँटते हुए सुरज में है।।
एक हारे हुए व्यक्ति के पुनः जीत के लिए प्रयास करने वाले हौसले में है।।
आपसे बात करने के बाद जो सकारात्मक ऊर्जा हमें मिलती है।
उस ऊर्जा में है।।
आप हमारी शक्ति हैं।
आपसे ही हमारा है वजूद यहाँ।।
बिन आपके।
मैं यहाँ लहरों में
बहता हुआ एक तिनका सा हूँ।।

हर स्त्री में एक माँ छिपी रहती है।।

हर स्त्री में एक माँ छिपी रहती है।
हर माँ सदा सम्मानित होती है।।
एक स्त्री से जन्मा
दूसरी स्त्री पर
कोई बुरी नजर कैसे डाल सकता है??
क्योंकि हर स्त्री में
एक माँ छिपी रहती है।।

ममता की खादान है वो
प्यार का भंडार है वो
हर क्षण सभी को क्षमा देने वाली वो।
नए परिवार में सभी को अपनाने वाली वो।
फिर भी ऐसी सुंदर चरित्र वाली स्त्री को
कोई कैसे अपमान कर सकता है??
क्योंकि हर स्त्री में
एक माँ छिपी रहती है।।

सभी के जीवन में ऊजाला करने वाली वो
अपनो का सदा साथ निभाने वाली वो।।
सदा सभी को सही राह दिखाने वाली वो
ऐसी स्त्री को
कैसे कोई अंधकार में फेंक सकता है??
क्योंकि हर स्त्री में
एक माँ छिपी रहती है।।




दस्तक दिया था हमने

दस्तक दिया था हमने
आपके दिल के दरवाजे पर।।
सुनकर अनसुना किया था।
मेरे प्यार को अहंकार वस।।
दो पल के प्यार के वास्ते
भिखारी बन खड़ा था तेरे दर पर।।
आपको प्यार नहीं आया
अपने इस आशिक़ की आशिकी पर।।
कुछ समझ नहीं आ रहा है
मैं टूट चुका पूरा अंदर से।।
साँस तो ले रहा हूँ
पर शरीर खोखला हो चुका है भीतर से।।
अब सहा नहीं जा रहा है
ईश्वर अपने इस बंदे पर कुछ रहम कर।।
ले ले अपने पनाहों में
सारे कष्टों से मुझे मुक्त कर।।




जिंदगी से जंग।

जिंदगी कितनी दफा मुझे मारेगी।
ये मुझे पता नहीं।।
जिनसे मैं प्यार करता हूँ।
बार बार उनसे मुझे जुदा करके।
मेरे जख्मों को पुनः वह कुरेद देती है।।
मैं जितनी दफा उनसे जुदा हुआ हूँ।
उतनी दफा मेरी मौत होते होते रही है।।
अब तो मुझे ये भी खबर नहीं
क्या मैं सही में जिंदा भी हूँ या मर चुका हूँ।।

हम सभी हैं ऊर्जा से भरे।।

हम सभी हैं ऊर्जा से भरे।
उनमे कुछ ही हैं सकारात्मक
बाकी हैं सारे नकारात्मक।।
ऐसे जगह पर
कोई कहाँ तक रख पाएगा
खुद को सकारात्मक।
कुछ सकारात्मक कदम उठाएगा
पीछे से दस लोग होंगे
जो उसे नकारात्मकता के तरफ खींचेंगे।।

परीक्षा के समय।

अभी दो दिन छुट्टी बाकी है।
जरा धीरे धीरे पढ़ाई कर मेरे भाई।।
जो आज ही पूरा पाठ्यक्रम समाप्त कर लिया।
तो कल कुछ पढ़ने को नहीं बचेगा विषय।।
समय बहुत बचा है अभी।
वक़्त का सही सदुपयोग कर।।
पढ़ते पढ़ते बहुत थक गएँ हैं।
चलो यारों संग खेल आए हम।।
जरा फ्रेश हो जाएगा मूड।
पढ़ने में फिर लगेगा मन।।
खेल कूद कर पहुँचे जब घर।
थक कर हो गए थे हम चूर।।
किताब लेकर बैठे जब हम।
नींद आ गई,कब सो गएँ हम।।
जैसे सुबह नींद जो खुली।
जोर का झटका लगा मन मे मुझको।।
कल रात में कुछ पढ़ नहीं पाया।
पता नहीं!कब आ गई थी नींद।।
पाठ्यक्रम जो पढ़ने हैं,वो हैं सात।
समय बचा है दो दिन,नहीं अड़तालीस घण्टे।।
प्रति पाठ्यक्रम लगभग हैं आठ घण्टे।
आराम से कवर कर लेंगे ज्यादा टेंशन मत ले यार।।
समय बीतता चला गया।
और हम समय तालिका  बैठाते रह गए।।
लो आज परीक्षा का दिन भी आ गया।
चल भाई चिठ्ठा बना ले,अगर पास करना है एग्जाम।।

पिता।।

हमेशा एक पैर पर खड़े रहने वाला वो।
तेरी हर छोटी छोटी ख्वाहिशों को पूरी करने वाला वो।
तेरी हर सपने को पूरा करने वाला वो।
तुझे तेरे पैर पर खड़े करने के लिए।
दिन रात एक करके रखी हुई हैं वो अपनी।
जब तू जो कभी उदास बैठा हो।
तो तेरे संग खेलने वाला वो।
तुझे रात में जो नींद नहीं आ रही हो।
तो नई नई कहानिया सुना कर तुम्हे सुलाने वाला वो।
तेरे हर तकलीफ और दुख के बीच
हर पल खड़ा है वो एक ढाल बनकर।।
लेकिन उसी पिता को जब ज़रूरत आन पड़ती है तेरी।
तू उन्हें उनकी किस्मत पर छोड़ आता है उनके बुढ़ापे में।।
जरा शर्म कर तू
जरा डर ऊपर वाले से।
कल समय तेरा भी आने वाला है।।







मैं चला।।

मैं चला।।
एक मकसद मन में लिए।।
ना ही कोई साथी है।।
ना ही कोई रिश्तेदार है साथ में।।
बस अकेला ही मैं निकल पड़ा।।
मेरी लगन जो सच्ची है।।
आस्था है घनिष्ट मेरे रब पर।।
कोई साथ दे ना दे।।
वो ज़रूर साथ देगा मेरा हर पल।।
बुरे वक्त में,गलत राह पर।।
कोई मुझे टोके ना टोके।।
वो ज़रूर टोकेगा।।
मंजिल पर पहुँचाए बिना।।
ईश्वर नहीं छोड़ेगा मेरा साथ।।

भरोसा।।

भरोसा पे दुनिया चल रही है।
बिन भरोसा दुनिया कब का ठप हो चुका होता।।
त्रेतायुग में राम को हनुमान पे भरोसा था।
तो कलयुग में कृष्ण को अर्जुन पे भरोसा था।
भरोसा को सदा सम्हालना चाहिए।

एक बाप को अपने बेटे पे भरोसा है
कि वो उसके बुढ़ापे का सहारा बनेगा।।

गलतफहमी प्यार की

आँखों ही आँखों में इशारा हो गया।
हम तुम्हारे हैं
तुम हमारे हो
ये वादा हो गया।।
तुम्हारी मुस्कान पर
मैं दीवाना हो गया।
देखते ही देखते
दिल तेरा परवाना हो गया।।
जो तुमने आँख मारी जो
मेरा हृदय घायल हो गया।।
जाना तेरा प्यार पाने को
मन बेकाबू हो गया।।
दोनों तरफ आग लगी है।
यह बात तो पक्का हो गया।।
मैं आगे बढ़कर हाथ बढ़ाया जो
वो गुश्शा हो गई।।
साथ में दो तीन अभद्र शब्द भी
सौगात में दे गई।।
इसी दौरान पीछे से किसी ने
मुझे पकड़ के खींचा।
दिया एक झापड़
मैं जमीन पर जा गिरा।।
मैने बोला भाई साहब
क्या गलती हो गई?
ये तुम्हारी बहन है
जो तुमने एक थप्पड़ जड़ दिया।
फिर क्या था
उसके गुस्से से आँख लाल हो गए
लातो और मुक्कों से
उसने मुझे खूब थे धोएँ।।
मैं समझ गया था
क्या मुझसे आज गलती हो गई।
उसकी गर्लफ्रैंड को
उसकी बहन जो बना दिया।।


हमारी उम्र।।

कल बचपन था
आज जवानी है
कल बुढापा होगा।।
समय की धार में
ना जाने कितने लोग
जुड़ गए।।
कुछ तो साथ निभा रहे हैं
कुछ छोड़ गए।।
और कुछ नए लोग
जुड़ने अभी बाकी हैं।।

हर मनुष्य का सबसे अनमोल समय है बचपन
कितना प्यारा,कितना मनोहर
भूख लगने पर
माँ की याद आती थी
वरना दोस्तों संग
हम मैदान में पाए जाते थे।।
परीक्षा का समय निकट आने पर
माँ बाबूजी की सख्ती से
बर्ताव करना।।
कहाँ हम भूल पाते हैं।।
फिर हमारा ये कहकर माँ से
घर से निकल जाना।
अपने दोस्त संग बैठकर
कुछ विषयों पर अध्ययन करके
आता हूँ।।
और फिर क्या दोस्तों संग खेलकर
परीक्षा की कड़वी सच्चाई को कुछ देर के लिए
खेल के आनंद में भूल जाना।
माँ भोली माँ को
बेवकूफ बनाना कितना आसान होता था।
कहाँ हम भूल पाते हैं

आज बचपन की दहलीज पार कर
जवानी में कदम जो रखा है।
सारी मासूमियत और भोलेपन को
पीछे छोड़ आए हैं।।
अब नए नए शौक़ पाले हैं।
साईकल छोड़ बाबूजी से
बुलेट की जिद्द कर डाले हैं।।
रोज सुबह शाम जिम पर जाकर
खूब पसीना बहाए हैं।।
क्योंकि जो फिट है
वही हिट है।।
एक नहीं
तीन से चार गर्लफ्रैंड
सभी को
संभालना सीख पाए हैं।।
कॉलेज से बाहर निकलते ही
नौकरी डॉट कॉम पर रिज्यूम डालना।
और फिर नौकरी लगते ही
सारी पुरानी गर्लफ़्रेंड्स को त्याग कर
अपने जाति की किसी लड़की के साथ
पवित्र बन्धन में बंध जाना।।
और फिर बीवी और बच्चे में
सारी जवानी को झोंक जाना।।


और फिर आता है
जीवन का आखिरी पड़ाव बुढापा।।
रिटायरमेंट के बाद आफिस छोड़
घर पर समय बिताना।।
कितना अजीब सा महसूस होता है।
मानो संसार भी मुझे मेरी स्थिति से
अवगत कराना चाहती हो।।
ये रिटायरमेंट नाम का चीज होना ही
नहीं चाहिए।।
काम में व्यस्तता हो
तो समय आसानी से कट जाता है।।
पर अगर किसी को उसकी उम्र का दरकार दे कर
उसे घर पर बैठाना कहाँ तक सही है।।
और फिर क्या?
अकेलापन उनकी धीरे धीरे जान ले लेता है।।


जीवन की राह में
कुछ लोगों के ही
पद चिह्न आपके हृदय में स्थापित हो पाते हैं।।
बाकी तो अंकित होकर मिटते चले जाते हैं।।

अब ये आपके ऊपर है
आप स्थापित होना चाहते हैं
या अंकित हो मिट जाना चाहते हैं।।

क्रांति

भस्म होने से पहले
सभी के दिलों में वो आग जलाना चाहता हूँ मैं।।
मरने से पहले
सभी को पुनः जगाना चाहता हूँ मैं।।

इतनी विपरीत परिस्थितियों में भी
देश कैसे चैन की नींद सो सकता है।।
पहले विदेशियों ने लूट लूट कर
सोने की चिड़िया को कोयले की चिड़िया बना डाला।।
अब अपने देश में छुपे गद्दारों ने
लूटना शुरू कर दिया है।।
जाहिर सी बात है
कदम उठाने का समय अब आ चुका है।।
या गद्दारों को चुन चुन कर
उनका सर कलम कर दें ।।
या अपनी आहुति दे
देश मे क्रांति की ज्वाला को जगाएँ।।

जय हिंद
जय भारत

मैं सीधा साधा हूँ इंसान।।

मैं सीधा साधा हूँ इंसान।
नहीं है मुझमे कुछ अभिमान।।
सब को साथ लेकर चलने का।
लिया है मैंने आज प्रण।।
हर किसी का बात मैं मान जाऊँ।
ना किसी का कभी अपमान कर पाऊँ।।
बड़े बुजुर्गो का करूँ सम्मान।
छोटों पे प्यार और मोहब्बत बरसाऊँ।।
जो कोई मदद माँगने को मेरे पास आए।
खाली हाथ कभी ना दर से जाए।।


पड़ाव।।

आज दिल मेरा उत्सुक हो उठा है एकाएक।
जाने क्यों।।
किसी की आहट जो सुनी है।
फिरसे से कुछ यों।।
हवा में आई है
बहती हुई
कोई जानी पहचानी सी खुशबू।।
हृदय मेरा उत्साहित हो
ढूंढने लगा
उस महक के
श्रोत को।।
जो सिर घुमा के जो देखा
मुझे नज़र आई वो
कुछ मिलती जुलती सी शक्ल।।
वही प्यारी सी सूरत
वही तीखे नाक नक्श देखकर
मुझे याद आई कोई
पुरानी संगी।।
पर मैं झिझक रहा था
पूछने में उसको
उसका परिचय।।
तभी उसकी देख जवाबी हँसी
मन को मेरे
ज़रा हिम्मत बढ़ी।।
आगे झुका और
पूछा कुछ यूँ उसका नाम।
तुम्हारा नाम कहीं
नही तो है सूर्यलता।।
वो उठी
और निकल पड़ी।।
क्योंकि आ गया था
उसका अपना पड़ाव।।









आज कल क्या हो गया है मुझे?

आज कल क्या हो गया है मुझे?
पता नहीं
कहाँ गुम हो गया हूँ?
बस अंतहीन सवालों के जवाब ढूंढते ढूंढते
अपनी ही अस्तित्व को भूल चुका हूँ मैं।।

एक स्त्री के कोख से जन्में
उसी स्त्री ने तुम्हें पाला पोसा।
पहला शब्द माँ तुमने बोला
पहला डेग उसी माँ ने सिखाया चलना।।
सबसे ज्यादा विश्वास जिस पर था।
पर आज विश्वास क्यों खो दिया तुमने।।
एक स्त्री के वास्ते।
 अपनी माँ को
अंधियारे में कहीं छोड़ आए तुमने।।

वो माँ
जिसने तुम्हें सहारा दिया
उस पल में।
जब तुम लड़खड़ा कर गिर रहे थे।।
उँगली पकड़कर चलना सिखाया।
आज तुम उनसे से ही
दौड़ लगा रहे हो
उनकी वृद्धावस्था में।।
बुढ़ापे की लाठी बनना छोड़।
उनके कमजोर कँधे पर
दुख का पहाड़ लादे जा रहे हो तुम।।

बस बहुत हो गया।
हे ईश्वर।।
अब और सहा नहीं जा रहा है मुझको।।
हर स्त्री मेरी माँ सी है।
उनकी तकलीफ नहीं देखी जा रही है मुझको।।
हे ईश्वर मुझे तू इस लायक बना।
हर माँ का सपूत बन सकूँ मैं।।
हर माँ के जीवन से दुख मिटा
रंग बिरंगे खुशियों से भर सकूँ मैं।।

हे ईश्वर।।

आपका हमारा साथ यूँही बनता रहे।।

आपका हमारा साथ यूँही बनता रहे।
हमारा कारवां सफर में यूँही बढ़ता रहे।।
नए लोग हमारे भावनाओं के साथ
यूँही जुड़ते रहे।
एक नई स्वर्ग सी दुनिया बनाने के लिए
हम तत्तपर रहें।।
जहान कोई ऐसा बनाए।
जहाँ दुख दर्द का निशान ना रहे।।
सब का साथ
सब का विकास का मंत्र लेकर।
हम सदैव आगे बढ़े।।
हम सारे मानव एक हैं।
हमारा धर्म मानवता का रहे।।
एक दूजे के वास्ते।
हम जीएँ, हम मरें।।
आओ हम सभी मिलकर।
एक दूसरे के जीवन को खुशियों से भर दें।।

जय मानव।।
मानवता ही हमारा धर्म है।।

हार जीत से कुछ फर्क मुझे पड़ता नहीं।।

हार जीत से कुछ फर्क मुझे पड़ता नहीं।।
प्रयास किए बिना बैठ जाऊँ।
ये हमसे होगा नहीं।।
मुश्किलों के पहाड़ देख
मैं घबड़ाता नहीं।
पर्वत से भी ऊँचा है
मेरा हौसला अभी।।

एक क्या!
दस बार भी किस्मत निचे गिरा दे कभी।।
लहू लुहान हो जाऊँ।
हो जाए मेरा शरीर छलनी।।
मैं पुनः उठ खड़ा हो जाऊँगा।
दुबारा चलने को तभी।।
मंजिल मेरी निकट नहीं।
अभी तय करना है दूरी बड़ी।।

हार कर बैठ जाने वालों में।
मैं नहीं।।
मौकापरस्त बन
जीत हासिल करने वालों में।
मैं नहीं।।
पूरी ताकत झौंक।
हिमालय से टक्कर लेने का
जज़्बा है बाकी।।





तुम्हारे बिना

तुम्हारे बिना
यहाँ अधूरा अधूरा सा महसूस करता हूँ।।
सुबह सुबह तुम्हारी अधखुली आँखो
से मुझे देखना।।
और फिर तुम्हारा लम्बी सी
जम्हाई लेना।।
अपना सिर मेरे छाती पर रखकर
मुझे कसके जकड़ना।।
और मेरा तुम्हें
अपने बाहों में समेटना।।
बहुत कमी खलती है
सुबह सुबह उठने के वक़्त।।
बहुत कमी खलती है
सुबह सुबह उठने के वक़्त।।

तुम्हारे बिना
यहाँ अधूरा अधूरा सा महसूस करता हूँ।।
फिर तुम्हारा फटाफट कर के
सुबह सुबह का नाश्ता बनाना।।
और टिफिन पैक करके
मुझे आफिस के लिए तैयार करना।।
बहुत कमी खलती है
सुबह सुबह उठने के बाद।।
बहुत कमी खलती है
सुबह सुबह उठने के बाद।।
तुम्हारे बिना
यहाँ अधूरा अधूरा सा महसूस करता हूँ।।

शाम में लेट होने के बाद
वो तुम्हारा फ़ोन आना।।
कहाँ हैं?जल्दी आइए।।
खाना तैयार हो गया है।।
बहुत कमी खलती है
जब शाम में लेट होता हूँ।।
बहुत कमी खलती है
जब शाम में लेट होता हूँ।।
तुम्हारे बिना
यहाँ अधूरा अधूरा सा महसूस करता हूँ।।

रात में सोने के वक़्त
नींद नहीं आती है।।
करवटें बदल बदल कर
समय हम बिताते हैं।।
वो तुम्हारा सर सहलाना
और हमारा नींद आ जाना।।
बहुत कमी खलती है
जब रात में नींद नहीं आती है।।
बहुत कमी खलती है
जब रात में नींद नहीं आती है।।
तुम्हारे बिना
यहाँ अधूरा अधूरा सा महसूस करता हूँ।।

दिल बेचारा।।

दिल बेचारा
प्यार का मारा।।

इसे चाहिए था
साथ तुम्हारा।।

तुम्हारी खूबसूरती देखते ही
तुम्हारा कायल हो चला था।।

हमारी लफ्ज़ो ने भी तुम्हारी तारीफ़ में
खूब पूल बाँधा था।।

पर किस्मत में हमारे
कुछ और ही लिखा था।।

दिल को उसके प्यार से
जुदा जो होना था।।

जुदाई के लम्हों को
वो सह ना पाया था।।

फूट फूट कर वो रोया
सखा नैनो ने भी साथ निभाया था।।

कुछ दिनों तक रोया
फिर चेहरा धुंधला होने को आया था।।

मित्र नेत्र ने फिर से
नए प्यार से मिलाया था।।

फिर से वही पुराना अध्याय
दुहराने का वक़्त आया था।।


कुछ गुंडे पिछे पड़े हैं हमारे।

कुछ गुंडे पिछे पड़े हैं हमारे।
मानो जान लेकर छोड़ेंगे
वो आज हमारी।।
मैं भागा जा रहा हूँ गली गली।।
पर गुंडे भी पीछा
नहीं छोड़ रहें हैं हमारी।।
कभी  नदी पे दौड़कर
पार किया जा रहा हूँ।।
कभी हवा में तैरकर
चोटी पे पहुँचा जा रहा हूँ।।
फिर किया शुरू
गुंडों ने गोली बारी।।
मैं भी कितना बचता।।
लगी दो तीन गोली
छाती में हमारी।।
एक गोली हमारी छाती को
चीरती निकल जा रही।।
वही दो गोली अंदर फँसकर
हमें दर्द का एहसास करा रही।।
एक धक्के से उठ बैठा।
नींद टूटी है हमारी।।
ईश्वर को दिया धन्यवाद
ये सपना है
इसमें नहीं है कोई सच्चाई।।



मेरी सोच ही मेरी ताकत है।

मेरी सोच ही मेरी ताकत है।
ना उलझो
मिट जाओगे तुम।।
मेरा विश्वास ही मेरी ऊर्जा है।
ना परखो
भस्म हो जाओगे तुम।।
मेरा लगन और मेहनत ही
मेरी पूजा है।।
तुम चाह कर भी
बदल ना पाओगे तुम।।

कभी कभी आता है मुझे हल्का हल्का सा सुरूर।।

कभी कभी आता है मुझे
हल्का हल्का सा सुरूर।।
तुम्हें अपने पनाहों में बन्दकर के रख लूँ
अपने दिल के करीब कुछ यूँ।।
हर बला और परेशानी से
तुम्हें रखूँ दूर।।
दुनियाभर की सारी खुशियों को
तुम्हारी झोली में ला भर दूँ।।
सारे रिश्ते,सारे नातों से
तुम्हें लेकर चलूँ कहीं दूर।।
जहाँ समय का सीमा ना हो।
बस तुम हो
और एक मैं तुम्हारे पास रहूँ।।
फिर मीठी बातों का सिलसिला
कुछ इस प्रकार चले
हम दोनों के बीच।।
हम तुममे और तुम हममें
एक दूजे की
खुशियों को तलाशने में हो जाएँ व्यस्त।।
दिन और रात का कुछ पता ना चले।।
भूख और प्यास का एहसास ना होवे।।
बस प्यार का गुलदस्ता बना
एक दूसरे को सौगात हम देते रहें।।

कभी कभी आता है मुझे
हल्का हल्का सा सुरूर।।
तुम्हें अपने पनाहों में बन्दकर के रख लूँ
अपने दिल के करीब कुछ यूँ।।

मेरे प्यार से मिला दे मेरे रब।

सकारात्मकता अपनाओ और फैलाओ।।

जीवन की धार जो
यूँही बहती जा रही है।।
समय का पहिया भी
नहीं थमता नज़र आ रहा है।।
कल भी मैं प्यासा था
आज भी मैं प्यासा ही हूँ।।
कल भी मैं भूखा था
आज भी मैं भूखा ही हूँ।।
उम्र बदल गई है
पर दिल से
अभी भी बच्चा हूँ।।
बहुत लोग संग आए
कुछ दूर साथ निभाए।।
फिर धीरे धीरे
हमारा साथ
सभी छोड़
कहीं गुम गएँ।।
उनमें से कुछ लोग
हमारे जहन में समाए।।
जिनकी अच्छाई और सादगी ने
हमारे दिल में घर बसाए।।
आज भी उनकी याद आते ही
रक्त का संचार तेज़ हो जाए।।
उनकी सकरात्मक ऊर्जा से
हमारी आयु में वृद्धि हो जाए।।
छोटी सी आयु है
छोटा सा जीवन है
क्यों ना सकारात्मकता अपनाकर
स्वयं को दीर्घायु बनाए।।
सभी के लिए अच्छा सोचे
सभी को साथ लेकर चलें।।
छोटी सी दुनिया है
क्यों ना खुशियों के रंग से
सभी के जीवन को रंग दे।।

वतना मेरे वतना वे।

वतना मेरे वतना वे kavitadilse.top द्वारा आप सभी पाठकों को समर्पित है। वतना मेरे वतना वे तेरा इश्क़ मेरे सर चढ़ चढ़कर बोल रहा है। एक जन्...