30 Sep 2018

Are gustakh dil

Shayari

Are gustakh dil



अरे गुस्ताख़ दिल क्यों बहक रहा है।।   
अब तो जरा लगाम दे।।                         
ऊम्र हो चला है तेरा अस्सी।                   
अब तो जरा लिहाज कर।।                         
सुंदर स्त्री देखा नहीं।                           
तू भूल जाता है आयु में अंतर।।             
उसके पीछे पीछे हो लेता है।                 
बनकर उसका आशिक।।

                       
अरे माफ करना मेरे दिल।                   
तेरे को ऊम्र से क्या लेना देना।।             
तेरा तो काम है धड़कना।                     
अगर जो तू भूल गया।।                       
तो फिर है कैसा जीना।।                         
इसीलिए शायद यह कहते हैं।               
दिल तो अभी बच्चा है जी।।                         
हम शरीर से तो हो गए हैं बूढ़े।                 
पर दिल से अभी भी हैं हम बच्चे।। 








are gustaakh dil kyon bahak rahaa hai।। 

ab to jaraa lagaam de।।                       

umr ho chalaa hai teraa assi।                 

ab to jaraa lihaaj kar।।                       

sundar stri dekhaa nahin।                         

tu bhul jaataa hai aayu men antar।।           

uske pichhe pichhe ho letaa hai।               

banakar uskaa aashik।।


                     

are maaph karnaa mere dil।                 

tere ko umr se kyaa lenaa denaa।।           

teraa to kaam hai dhdaknaa।                   

agar jo tu bhul gayaa।।                     

to phir hai kaisaa jinaa।।                       

esilia shaayad yah kahte hain।             

dil to abhi bachchaa hai ji।।                       

ham sharir se to ho gaye hain budhe।               

par dil se abhi bhi hain ham bachche।


Written by sushil kumar                      

29 Sep 2018

O pyar se bhi pyare pyar

Shayari

O pyar se bhi pyare pyar




ओ प्यार से भी प्यारे प्यार।
मेरे दिलदार।।
तू साथ रहे ना रहे।
पर तेरा साथ हमेशा रहता है।।
मेरे सोच में
मेरे स्वप्न में
मैं कहीं भी रहूँ।
हर जगह बस तू ही तू है।।
बिन तेरे
मेरा एक पल भी
कहीं नहीं गुजरता है।
घर बाहर
कहीं भी रहूँ
हर सुरत में
बस तू ही तू नजर आता है।
सच कहता हूँ मेरे प्यार
मेरे दिल में
तू हमेशा रहता है।।







o pyaar se bhi pyaare pyaar।

mere dildaar।।

tu saath rahe naa rahe।

par teraa saath hameshaa rahtaa hai।।

mere soch men

mere svapn men

main kahin bhi rahun।

har jagah bas tu hi tu hai।।

bin tere

meraa ek pal bhi

kahin nahin gujartaa hai।

ghar baahar

kahin bhi rahun

har surat men

bas tu hi tu najar aataa hai।

sach kahtaa hun mere pyaar

mere dil men

tu hameshaa rahtaa hai।।



Written by sushil kumar

28 Sep 2018

Kismat tera sazda karega khud

Shayari


Kismat tera sazda karega khud


हर इम्तिहान में उत्तीर्ण हो जाएँ।
ऐसी कोई जरूरी नहीं।।
कुछ इम्तिहान होते ही हैं।
हमारी औकात दिखाने के लिए।।
जो इंसान हार का मुख
आज तक कभी देखा नहीं।
वैसे इंसान को जीत का
मजा कभी मिला नहीं।।
बेटा तू इंसान है।
हमेशा तू जमीन पर चल।।
क्यों नकली पँख लगाकर।
गगन में उड़ने की जिद्द लगाकर बैठा है तू।।
गिरेगा तू
संभलेगा तू।
पर जिद्द नहीं छोड़ेगा तू।।
और एक दिन तेरे जिद्द के आगे।
किस्मत तेरा सजदा करेगा खुद।।











har emtihaan men uttirn ho jaaan।

aisi koi jaruri nahin।।

kuchh emtihaan hote hi hain।

hamaari aukaat dikhaane ke lia।।

jo ensaan haar kaa mukh

aaj tak kabhi dekhaa nahin।

vaise ensaan ko jit kaa

majaa kabhi milaa nahin।।

betaa tu ensaan hai।

hameshaa tu jamin par chal।।

kyon nakli pnakh lagaakar।

gagan men udne ki jidd lagaakar baithaa hai tu।।

giregaa tu

sambhlegaa tu।

par jidd nahin chhodegaa tu।।

aur ek din tere jidd ke aage।

kismat teraa sajdaa karegaa khud

Written by sushil kumar

27 Sep 2018

Kuch log jimmedariyon ka aisa dhol little hain.

Shayari


कुछ लोग जिम्मेदारियों का ऐसा ढोल पीटते है।

मानो कितने कर्मठ हैं वो
जो सारे जग का बोझ
अपने कँधे पर उठाए हुए हैं।।
सारे जग को पाठ पढ़ाते हैं।
जिम्मेवार उन्हें बनाते हैं।।
पर जब बारी खुद की आई तब।
रोना धोना मचाते हैं।।
ऐसे ढकोसले लोगों से।
सारा जग यहाँ भरा पड़ा हुआ है।।
कथनी करना आसान है।
जो करनी पड़े तो फुर्र हो जाते हैं।।
हे ईश्वर मुझे इस लायक बना।
कि कथनी करने की जरूरत ना पड़े।।
करनी करता चला जाऊँ तेरे मार्ग पर।
लोग देखकर तेरे पथ की ओर बढ़ें।।










kuchh log jimmedaariyon kaa aisaa dhol pitte hai।

maano kitne karmath hain vo

jo saare jag kaa bojh

apne kndhe par uthaaa hua hain।।

saare jag ko paath pdhaate hain।

jimmevaar unhen banaate hain।।

par jab baari khud ki aai tab।

ronaa dhonaa machaate hain।।

aise dhakosle logon se।

saaraa jag yahaan bharaa pdaa huaa hai।।

kathni karnaa aasaan hai।

jo karni pde to phurr ho jaate hain।।

he ishvar mujhe es laayak banaa।

ki kathni karne ki jarurat naa pde।।

karni kartaa chalaa jaaun tere maarg par।

log dekhakar tere path ki or bdhen


Shayari
Written by sushil kumar

25 Sep 2018

Yaad hoga tumhen

Shayari

Yaad hoga tumhen



आज का दिन 2013 का तुम्हें याद होगा।
वो मधुरमय शाम
और वो चंचल हवा
स्पर्श कर मुझे वह
बेचैन कर रही थी।।
शायद तुम वैसी होगी।
नहीं नहीं
तुम वैसी होगी।
पता नहीं
जैसी भी होगी
पर बहुत ही प्यारी होगी।
मन भी कितना चंचल हो सकता है??
अनगिनत सवालों को कुछ क्षणों में
सोच सकता है।
अगर कोई गति मेरे मन की जो नापता।
सारा ब्रह्मांड कुछ क्षण में वह घूम आता।।
जैसे जैसे हमारे मिलने का समय समीप आ रहा था।
पल पल गुजारना कठिन होता जा रहा था।।
स्टेज पर बैठे बैठे मन घबरा बहुत रहा था।
सारे जन घूर रहे थे मुझे
और मैं वहाँ शरमा रहा था।।
तभी मेरी सोनपरी अपनी चाची संग जो आई।
देख उसकी सुन्दरता
मेरी आँख है चौंधियाई।
वो तीखे तीखे नाक नक्श
और बड़ी बड़ी सी आँखें
मानो पूरा समय देकर रब ने
किया हो जिसे स्थापित।।
सगाई की रस्में
फिर शुरू हुई हमारी।
जो उन्होंने स्पर्श किया हमें
मानो सारा जग हो हमने पाली।





aaj kaa din 2013 kaa tumhen yaad hogaa।

vo madhuramay shaam

aur vo chanchal havaa

sparsh kar mujhe vah

bechain kar rahi thi।।

shaayad tum vaisi hogi।

nahin nahin

tum vaisi hogi।

pataa nahin

jaisi bhi hogi

par bahut hi pyaari hogi।

man bhi kitnaa chanchal ho saktaa hai??

anaginat savaalon ko kuchh kshnon men

soch saktaa hai।

agar koi gati mere man ki jo naaptaa।

saaraa brahmaand kuchh kshan men vah ghum aataa।।

jaise jaise hamaare milne kaa samay samip aa rahaa thaa।

pal pal gujaarnaa kathin hotaa jaa rahaa thaa।।

stej par baithe baithe man ghabraa bahut rahaa thaa।

saare jan ghur rahe the mujhe

aur main vahaan sharmaa rahaa thaa।।

tabhi meri sonapri apni chaachi sang jo aai।

dekh uski sundartaa

meri aankh hai chaundhiyaai।

vo tikhe tikhe naak naksh

aur bdi bdi si aankhen

maano puraa samay dekar rab ne

kiyaa ho jise sthaapit।।

sagaai ki rasmen

phir shuru hui hamaari।

jo unhonne sparsh kiyaa hamen

maano saaraa jag ho hamne paali।


Written by sushil kumar


24 Sep 2018

Aap humare urza ke sanchalak ho

Shayari

Aap humare urza ke sanchalak ho


आप हमारी ऊर्जा का संचालक हो।
जैसे
बूझते दीपक में पुनः जान डाल देने वाला घी में है।।
झुलसती धरती को पुनः ठंडा करने वाले सावन की बूंदो में है।।
काली अंधियारी रात को अपनी रोशनी से छाँटते हुए सुरज में है।।
एक हारे हुए व्यक्ति के पुनः जीत के लिए प्रयास करने वाले हौसले में है।।
आपसे बात करने के बाद जो सकारात्मक ऊर्जा हमें मिलती है।
उस ऊर्जा में है।।
आप हमारी शक्ति हैं।
आपसे ही हमारा है वजूद यहाँ।।
बिन आपके।
मैं यहाँ लहरों में
बहता हुआ एक तिनका सा हूँ।।










aap hamaari urjaa kaa sanchaalak ho।

jaise

bujhte dipak men punah jaan daal dene vaalaa ghi men hai।।

jhulasti dharti ko punah thandaa karne vaale saavan ki bundo men hai।।

kaali andhiyaari raat ko apni roshni se chhaantte hua suraj men hai।।

ek haare hua vyakti ke punah jit ke lia pryaas karne vaale hausle men hai।।

aapse baat karne ke baad jo sakaaraatmak urjaa hamen milti hai।

us urjaa men hai।।

aap hamaari shakti hain।

aapse hi hamaaraa hai vajud yahaan।।

bin aapke।

main yahaan lahron men

bahtaa huaa ek tinkaa saa hun।।


Written by sushil kumar

Har stri mein ek maa chhipi rahti hai

Shayari


हर स्त्री में एक माँ छिपी रहती है।

हर माँ सदा सम्मानित होती है।।
एक स्त्री से जन्मा
दूसरी स्त्री पर
कोई बुरी नजर कैसे डाल सकता है??
क्योंकि हर स्त्री में
एक माँ छिपी रहती है।।

ममता की खादान है वो
प्यार का भंडार है वो
हर क्षण सभी को क्षमा देने वाली वो।
नए परिवार में सभी को अपनाने वाली वो।
फिर भी ऐसी सुंदर चरित्र वाली स्त्री को
कोई कैसे अपमान कर सकता है??
क्योंकि हर स्त्री में
एक माँ छिपी रहती है।।

सभी के जीवन में ऊजाला करने वाली वो
अपनो का सदा साथ निभाने वाली वो।।
सदा सभी को सही राह दिखाने वाली वो
ऐसी स्त्री को
कैसे कोई अंधकार में फेंक सकता है??
क्योंकि हर स्त्री में
एक माँ छिपी रहती है।।







har stri men ek maan chhipi rahti hai।

har maan sadaa sammaanit hoti hai।।

ek stri se janmaa

dusri stri par

koi buri najar kaise daal saktaa hai??

kyonki har stri men

ek maan chhipi rahti hai।।


mamtaa ki khaadaan hai vo

pyaar kaa bhandaar hai vo

har kshan sabhi ko kshmaa dene vaali vo।

naye parivaar men sabhi ko apnaane vaali vo।

phir bhi aisi sundar charitr vaali stri ko

koi kaise apmaan kar saktaa hai??

kyonki har stri men

ek maan chhipi rahti hai।।


sabhi ke jivan men ujaalaa karne vaali vo

apno kaa sadaa saath nibhaane vaali vo।।

sadaa sabhi ko sahi raah dikhaane vaali vo

aisi stri ko

kaise koi andhkaar men phenk saktaa hai??

kyonki har stri men

ek maan chhipi rahti hai।।


Written by sushil kumar

Dastak diya tha humne

Shayari


दस्तक दिया था हमने

आपके दिल के दरवाजे पर।।
सुनकर अनसुना किया था।
मेरे प्यार को अहंकार वस।।
दो पल के प्यार के वास्ते
भिखारी बन खड़ा था तेरे दर पर।।
आपको प्यार नहीं आया
अपने इस आशिक़ की आशिकी पर।।
कुछ समझ नहीं आ रहा है
मैं टूट चुका पूरा अंदर से।।
साँस तो ले रहा हूँ
पर शरीर खोखला हो चुका है भीतर से।।
अब सहा नहीं जा रहा है
ईश्वर अपने इस बंदे पर कुछ रहम कर।।
ले ले अपने पनाहों में
सारे कष्टों से मुझे मुक्त कर।।






aapke dil ke darvaaje par।।

sunakar anasunaa kiyaa thaa।

mere pyaar ko ahankaar vas।।

do pal ke pyaar ke vaaste

bhikhaari ban khdaa thaa tere dar par।।

aapko pyaar nahin aayaa

apne es aashik ki aashiki par।।

kuchh samajh nahin aa rahaa hai

main tut chukaa puraa andar se।।

saans to le rahaa hun

par sharir khokhlaa ho chukaa hai bhitar se।।

ab sahaa nahin jaa rahaa hai

ishvar apne es bande par kuchh raham kar।।

le le apne panaahon men

saare kashton se mujhe mukt kar।।

Written by sushil kumar


15 Sep 2018

Jindagi se jung

Shayari

Jindagi se jung


जिंदगी कितनी दफा मुझे मारेगी।
ये मुझे पता नहीं।।
जिनसे मैं प्यार करता हूँ।
बार बार उनसे मुझे जुदा करके।
मेरे जख्मों को पुनः वह कुरेद देती है।।
मैं जितनी दफा उनसे जुदा हुआ हूँ।
उतनी दफा मेरी मौत होते होते रही है।।
अब तो मुझे ये भी खबर नहीं
क्या मैं सही में जिंदा भी हूँ या मर चुका हूँ।।






jindgi kitni daphaa mujhe maaregi।

ye mujhe pataa nahin।।

jinse main pyaar kartaa hun।

baar baar unse mujhe judaa karke।

mere jakhmon ko punah vah kured deti hai।।

main jitni daphaa unse judaa huaa hun।

utni daphaa meri maut hote hote rahi hai।।

ab to mujhe ye bhi khabar nahin

kyaa main sahi men jindaa bhi hun yaa mar chukaa hun।।



Written by sushil kumar

13 Sep 2018

Pariksha Ke samay

Shayari


परीक्षा के समय।



अभी दो दिन छुट्टी बाकी है।
जरा धीरे धीरे पढ़ाई कर मेरे भाई।।
जो आज ही पूरा पाठ्यक्रम समाप्त कर लिया।
तो कल कुछ पढ़ने को नहीं बचेगा विषय।।
समय बहुत बचा है अभी।
वक़्त का सही सदुपयोग कर।।
पढ़ते पढ़ते बहुत थक गएँ हैं।
चलो यारों संग खेल आए हम।।
जरा फ्रेश हो जाएगा मूड।
पढ़ने में फिर लगेगा मन।।
खेल कूद कर पहुँचे जब घर।
थक कर हो गए थे हम चूर।।
किताब लेकर बैठे जब हम।
नींद आ गई,कब सो गएँ हम।।
जैसे सुबह नींद जो खुली।
जोर का झटका लगा मन मे मुझको।।
कल रात में कुछ पढ़ नहीं पाया।
पता नहीं!कब आ गई थी नींद।।
पाठ्यक्रम जो पढ़ने हैं,वो हैं सात।
समय बचा है दो दिन,नहीं अड़तालीस घण्टे।।
प्रति पाठ्यक्रम लगभग हैं आठ घण्टे।
आराम से कवर कर लेंगे ज्यादा टेंशन मत ले यार।।
समय बीतता चला गया।
और हम समय तालिका  बैठाते रह गए।।
लो आज परीक्षा का दिन भी आ गया।
चल भाई चिठ्ठा बना ले,अगर पास करना है एग्जाम।।



abhi do din chhutti baaki hai।

jaraa dhire dhire pdhaai kar mere bhaai।।

jo aaj hi puraa paathyakram samaapt kar liyaa।

to kal kuchh pdhne ko nahin bachegaa vishay।।

samay bahut bachaa hai abhi।

vkt kaa sahi sadupyog kar।।

pdhte pdhte bahut thak gan hain।

chalo yaaron sang khel aaa ham।।

jaraa phresh ho jaaagaa mud।

pdhne men phir lagegaa man।।

khel kud kar pahunche jab ghar।

thak kar ho gaye the ham chur।।

kitaab lekar baithe jab ham।

nind aa gayi,kab so gan ham।।

jaise subah nind jo khuli।

jor kaa jhatkaa lagaa man me mujhko।।

kal raat men kuchh pdh nahin paayaa।

pataa nahin!kab aa gayi thi nind।।

paathyakram jo pdhne hain,vo hain saat।

samay bachaa hai do din,nahin adtaalis ghante।।

prati paathyakram lagabhag hain aath ghante।

aaraam se kavar kar lenge jyaadaa tenshan mat le yaar।।

samay bittaa chalaa gayaa।

aur ham samay taalikaa  baithaate rah gaye।।

lo aaj parikshaa kaa din bhi aa gayaa।

chal bhaai chiththaa banaa le,agar paas karnaa hai egjaam।।

Written by sushil kumar

Pita

Shayari

Pita


हमेशा एक पैर पर खड़े रहने वाला वो।
तेरी हर छोटी छोटी ख्वाहिशों को पूरी करने वाला वो।
तेरी हर सपने को पूरा करने वाला वो।
तुझे तेरे पैर पर खड़े करने के लिए।
दिन रात एक करके रखी हुई हैं वो अपनी।
जब तू जो कभी उदास बैठा हो।
तो तेरे संग खेलने वाला वो।
तुझे रात में जो नींद नहीं आ रही हो।
तो नई नई कहानिया सुना कर तुम्हे सुलाने वाला वो।
तेरे हर तकलीफ और दुख के बीच
हर पल खड़ा है वो एक ढाल बनकर।।
लेकिन उसी पिता को जब ज़रूरत आन पड़ती है तेरी।
तू उन्हें उनकी किस्मत पर छोड़ आता है उनके बुढ़ापे में।।
जरा शर्म कर तू
जरा डर ऊपर वाले से।
कल समय तेरा भी आने वाला है।।





hameshaa ek pair par khde rahne vaalaa vo।

teri har chhoti chhoti khvaahishon ko puri karne vaalaa vo।

teri har sapne ko puraa karne vaalaa vo।

tujhe tere pair par khde karne ke lia।

din raat ek karke rakhi hui hain vo apni।

jab tu jo kabhi udaas baithaa ho।

to tere sang khelne vaalaa vo।

tujhe raat men jo nind nahin aa rahi ho।

to nayi nayi kahaaniyaa sunaa kar tumhe sulaane vaalaa vo।

tere har takliph aur dukh ke bich

har pal khdaa hai vo ek dhaal banakar।।

lekin usi pitaa ko jab jrurat aan pdti hai teri।

tu unhen unki kismat par chhod aataa hai unke budhaape men।।

jaraa sharm kar tu

jaraa dar upar vaale se।

kal samay teraa bhi aane vaalaa hai।।


Written by sushil kumar






12 Sep 2018

Main chala

Shayari


मैं चला।।

एक मकसद मन में लिए।।
ना ही कोई साथी है।।
ना ही कोई रिश्तेदार है साथ में।।
बस अकेला ही मैं निकल पड़ा।।
मेरी लगन जो सच्ची है।।
आस्था है घनिष्ट मेरे रब पर।।
कोई साथ दे ना दे।।
वो ज़रूर साथ देगा मेरा हर पल।।
बुरे वक्त में,गलत राह पर।।
कोई मुझे टोके ना टोके।।
वो ज़रूर टोकेगा।।
मंजिल पर पहुँचाए बिना।।
ईश्वर नहीं छोड़ेगा मेरा साथ।।






main chalaa।।

ek makasad man men lia।।

naa hi koi saathi hai।।

naa hi koi rishtedaar hai saath men।।

bas akelaa hi main nikal pdaa।।

meri lagan jo sachchi hai।।

aasthaa hai ghanisht mere rab par।।

koi saath de naa de।।

vo jrur saath degaa meraa har pal।।

bure vakt men,galat raah par।।

koi mujhe toke naa toke।।

vo jrur tokegaa।।

manjil par pahunchaaa binaa।।

ishvar nahin chhodegaa meraa saath



Written by sushil kumar

9 Sep 2018

Galatfahmi pyar ki

Shayari

Galatfahmi pyar ki



आँखों ही आँखों में इशारा हो गया।
हम तुम्हारे हैं
तुम हमारे हो
ये वादा हो गया।।
तुम्हारी मुस्कान पर
मैं दीवाना हो गया।
देखते ही देखते
दिल तेरा परवाना हो गया।।
जो तुमने आँख मारी जो
मेरा हृदय घायल हो गया।।
जाना तेरा प्यार पाने को
मन बेकाबू हो गया।।
दोनों तरफ आग लगी है।
यह बात तो पक्का हो गया।।
मैं आगे बढ़कर हाथ बढ़ाया जो
वो गुश्शा हो गई।।
साथ में दो तीन अभद्र शब्द भी
सौगात में दे गई।।
इसी दौरान पीछे से किसी ने
मुझे पकड़ के खींचा।
दिया एक झापड़
मैं जमीन पर जा गिरा।।
मैने बोला भाई साहब
क्या गलती हो गई?
ये तुम्हारी बहन है
जो तुमने एक थप्पड़ जड़ दिया।
फिर क्या था
उसके गुस्से से आँख लाल हो गए
लातो और मुक्कों से
उसने मुझे खूब थे धोएँ।।
मैं समझ गया था
क्या मुझसे आज गलती हो गई।
उसकी गर्लफ्रैंड को
उसकी बहन जो बना दिया।।






aankhon hi aankhon men eshaaraa ho gayaa।

ham tumhaare hain

tum hamaare ho

ye vaadaa ho gayaa।।

tumhaari muskaan par

main divaanaa ho gayaa।

dekhte hi dekhte

dil teraa parvaanaa ho gayaa।।

jo tumne aankh maari jo

meraa hriaday ghaayal ho gayaa।।

jaanaa teraa pyaar paane ko

man bekaabu ho gayaa।।

donon taraph aag lagi hai।

yah baat to pakkaa ho gayaa।।

main aage bdhakar haath bdhaayaa jo

vo gushshaa ho gayi।।

saath men do tin abhadr shabd bhi

saugaat men de gayi।।

esi dauraan pichhe se kisi ne

mujhe pakd ke khinchaa।

diyaa ek jhaapd

main jamin par jaa giraa।।

maine bolaa bhaai saahab

kyaa galti ho gayi?

ye tumhaari bahan hai

jo tumne ek thappd jd diyaa।

phir kyaa thaa

uske gusse se aankh laal ho gaye

laato aur mukkon se

usne mujhe khub the dhoan।।

main samajh gayaa thaa

kyaa mujhse aaj galti ho gayi।

uski garlaphraind ko

uski bahan jo banaa diyaa।।



Written by sushil kumar


Hamari umr

Shayari

Hamari umr


कल बचपन था
आज जवानी है
कल बुढापा होगा।।
समय की धार में
ना जाने कितने लोग
जुड़ गए।।
कुछ तो साथ निभा रहे हैं
कुछ छोड़ गए।।
और कुछ नए लोग
जुड़ने अभी बाकी हैं।।

हर मनुष्य का सबसे अनमोल समय है बचपन
कितना प्यारा,कितना मनोहर
भूख लगने पर
माँ की याद आती थी
वरना दोस्तों संग
हम मैदान में पाए जाते थे।।
परीक्षा का समय निकट आने पर
माँ बाबूजी की सख्ती से
बर्ताव करना।।
कहाँ हम भूल पाते हैं।।
फिर हमारा ये कहकर माँ से
घर से निकल जाना।
अपने दोस्त संग बैठकर
कुछ विषयों पर अध्ययन करके
आता हूँ।।
और फिर क्या दोस्तों संग खेलकर
परीक्षा की कड़वी सच्चाई को कुछ देर के लिए
खेल के आनंद में भूल जाना।
माँ भोली माँ को
बेवकूफ बनाना कितना आसान होता था।
कहाँ हम भूल पाते हैं

आज बचपन की दहलीज पार कर
जवानी में कदम जो रखा है।
सारी मासूमियत और भोलेपन को
पीछे छोड़ आए हैं।।
अब नए नए शौक़ पाले हैं।
साईकल छोड़ बाबूजी से
बुलेट की जिद्द कर डाले हैं।।
रोज सुबह शाम जिम पर जाकर
खूब पसीना बहाए हैं।।
क्योंकि जो फिट है
वही हिट है।।
एक नहीं
तीन से चार गर्लफ्रैंड
सभी को
संभालना सीख पाए हैं।।
कॉलेज से बाहर निकलते ही
नौकरी डॉट कॉम पर रिज्यूम डालना।
और फिर नौकरी लगते ही
सारी पुरानी गर्लफ़्रेंड्स को त्याग कर
अपने जाति की किसी लड़की के साथ
पवित्र बन्धन में बंध जाना।।
और फिर बीवी और बच्चे में
सारी जवानी को झोंक जाना।।


और फिर आता है
जीवन का आखिरी पड़ाव बुढापा।।
रिटायरमेंट के बाद आफिस छोड़
घर पर समय बिताना।।
कितना अजीब सा महसूस होता है।
मानो संसार भी मुझे मेरी स्थिति से
अवगत कराना चाहती हो।।
ये रिटायरमेंट नाम का चीज होना ही
नहीं चाहिए।।
काम में व्यस्तता हो
तो समय आसानी से कट जाता है।।
पर अगर किसी को उसकी उम्र का दरकार दे कर
उसे घर पर बैठाना कहाँ तक सही है।।
और फिर क्या?
अकेलापन उनकी धीरे धीरे जान ले लेता है।।


जीवन की राह में
कुछ लोगों के ही
पद चिह्न आपके हृदय में स्थापित हो पाते हैं।।
बाकी तो अंकित होकर मिटते चले जाते हैं।।

अब ये आपके ऊपर है
आप स्थापित होना चाहते हैं
या अंकित हो मिट जाना चाहते हैं।।






kal bachapan thaa

aaj javaani hai

kal budhaapaa hogaa।।

samay ki dhaar men

naa jaane kitne log

jud gaye।।

kuchh to saath nibhaa rahe hain

kuchh chhod gaye।।

aur kuchh naye log

judne abhi baaki hain।।


har manushy kaa sabse anmol samay hai bachapan

kitnaa pyaaraa,kitnaa manohar

bhukh lagne par

maan ki yaad aati thi

varnaa doston sang

ham maidaan men paaa jaate the।।

parikshaa kaa samay nikat aane par

maan baabuji ki sakhti se

bartaav karnaa।।

kahaan ham bhul paate hain।।

phir hamaaraa ye kahakar maan se

ghar se nikal jaanaa।

apne dost sang baithakar

kuchh vishyon par adhyayan karke

aataa hun।।

aur phir kyaa doston sang khelakar

parikshaa ki kdvi sachchaai ko kuchh der ke lia

khel ke aanand men bhul jaanaa।

maan bholi maan ko

bevkuph banaanaa kitnaa aasaan hotaa thaa।

kahaan ham bhul paate hain


aaj bachapan ki dahlij paar kar

javaani men kadam jo rakhaa hai।

saari maasumiyat aur bholepan ko

pichhe chhod aaa hain।।

ab naye naye shauk paale hain।

saaikal chhod baabuji se

bulet ki jidd kar daale hain।।

roj subah shaam jim par jaakar

khub pasinaa bahaaa hain।।

kyonki jo phit hai

vahi hit hai।।

ek nahin

tin se chaar garlaphraind

sabhi ko

sambhaalnaa sikh paaa hain।।

kalej se baahar nikalte hi

naukri dat kam par rijyum daalnaa।

aur phir naukri lagte hi

saari puraani garlfrends ko tyaag kar

apne jaati ki kisi ldki ke saath

pavitr bandhan men bandh jaanaa।।

aur phir bivi aur bachche men

saari javaani ko jhonk jaanaa।।



aur phir aataa hai

jivan kaa aakhiri pdaav budhaapaa।।

ritaayarment ke baad aaphis chhod

ghar par samay bitaanaa।।

kitnaa ajib saa mahsus hotaa hai।

maano sansaar bhi mujhe meri sthiti se

avagat karaanaa chaahti ho।।

ye ritaayarment naam kaa chij honaa hi

nahin chaahia।।

kaam men vyasttaa ho

to samay aasaani se kat jaataa hai।।

par agar kisi ko uski umr kaa darkaar de kar

use ghar par baithaanaa kahaan tak sahi hai।।

aur phir kyaa?

akelaapan unki dhire dhire jaan le letaa hai।।



jivan ki raah men

kuchh logon ke hi

pad chihn aapke hriaday men sthaapit ho paate hain।।

baaki to ankit hokar mitte chale jaate hain।।


ab ye aapke upar hai

aap sthaapit honaa chaahte hain

yaa ankit ho mit jaanaa chaahte hain।


Written by sushil kumar

8 Sep 2018

Kranti

Shayari

Kranti


भस्म होने से पहले
सभी के दिलों में वो आग जलाना चाहता हूँ मैं।।
मरने से पहले
सभी को पुनः जगाना चाहता हूँ मैं।।

इतनी विपरीत परिस्थितियों में भी
देश कैसे चैन की नींद सो सकता है।।
पहले विदेशियों ने लूट लूट कर
सोने की चिड़िया को कोयले की चिड़िया बना डाला।।
अब अपने देश में छुपे गद्दारों ने
लूटना शुरू कर दिया है।।
जाहिर सी बात है
कदम उठाने का समय अब आ चुका है।।
या गद्दारों को चुन चुन कर
उनका सर कलम कर दें ।।
या अपनी आहुति दे
देश मे क्रांति की ज्वाला को जगाएँ।।

जय हिंद
जय भारत







bhasm hone se pahle

sabhi ke dilon men vo aag jalaanaa chaahtaa hun main।।

marne se pahle

sabhi ko punah jagaanaa chaahtaa hun main।।


etni viprit paristhitiyon men bhi

desh kaise chain ki nind so saktaa hai।।

pahle videshiyon ne lut lut kar

sone ki chidiyaa ko koyle ki chidiyaa banaa daalaa।।

ab apne desh men chhupe gaddaaron ne

lutnaa shuru kar diyaa hai।।

jaahir si baat hai

kadam uthaane kaa samay ab aa chukaa hai।।

yaa gaddaaron ko chun chun kar

unkaa sar kalam kar den ।।

yaa apni aahuti de

desh me kraanti ki jvaalaa ko jagaaan।।


jay hind

jay bhaarat

Main sidha sadha hun insan

Shayari


मैं सीधा साधा हूँ इंसान।

नहीं है मुझमे कुछ अभिमान।।
सब को साथ लेकर चलने का।
लिया है मैंने आज प्रण।।
हर किसी का बात मैं मान जाऊँ।
ना किसी का कभी अपमान कर पाऊँ।।
बड़े बुजुर्गो का करूँ सम्मान।
छोटों पे प्यार और मोहब्बत बरसाऊँ।।
जो कोई मदद माँगने को मेरे पास आए।
खाली हाथ कभी ना दर से जाए।।




main sidhaa saadhaa hun ensaan।

nahin hai mujhme kuchh abhimaan।।

sab ko saath lekar chalne kaa।

liyaa hai mainne aaj pran।।

har kisi kaa baat main maan jaaun।

naa kisi kaa kabhi apmaan kar paaun।।

bde bujurgo kaa karun sammaan।

chhoton pe pyaar aur mohabbat barsaaun।।

jo koi madad maangne ko mere paas aaa।

khaali haath kabhi naa dar se jaaa।।


Written by sushil kumar

7 Sep 2018

Padav

Shayari

Padav

आज दिल मेरा उत्सुक हो उठा है एकाएक।
जाने क्यों।।
किसी की आहट जो सुनी है।
फिरसे से कुछ यों।।
हवा में आई है
बहती हुई
कोई जानी पहचानी सी खुशबू।।
हृदय मेरा उत्साहित हो
ढूंढने लगा
उस महक के
श्रोत को।।
जो सिर घुमा के जो देखा
मुझे नज़र आई वो
कुछ मिलती जुलती सी शक्ल।।
वही प्यारी सी सूरत
वही तीखे नाक नक्श देखकर
मुझे याद आई कोई
पुरानी संगी।।
पर मैं झिझक रहा था
पूछने में उसको
उसका परिचय।।
तभी उसकी देख जवाबी हँसी
मन को मेरे
ज़रा हिम्मत बढ़ी।।
आगे झुका और
पूछा कुछ यूँ उसका नाम।
तुम्हारा नाम कहीं
नही तो है सूर्यलता।।
वो उठी
और निकल पड़ी।।
क्योंकि आ गया था
उसका अपना पड़ाव।।





aaj dil meraa utsuk ho uthaa hai ekaaak।

jaane kyon।।

kisi ki aahat jo suni hai।

phirse se kuchh yon।।

havaa men aai hai

bahti hui

koi jaani pahchaani si khushbu।।

hriaday meraa utsaahit ho

dhundhne lagaa

us mahak ke

shrot ko।।

jo sir ghumaa ke jo dekhaa

mujhe njar aai vo

kuchh milti julti si shakl।।

vahi pyaari si surat

vahi tikhe naak naksh dekhakar

mujhe yaad aai koi

puraani sangi।।

par main jhijhak rahaa thaa

puchhne men usko

uskaa parichay।।

tabhi uski dekh javaabi hnsi

man ko mere

jraa himmat bdhi।।

aage jhukaa aur

puchhaa kuchh yun uskaa naam।

tumhaaraa naam kahin

nahi to hai suryaltaa।।

vo uthi

aur nikal pdi।।

kyonki aa gayaa thaa

uskaa apnaa pdaav।।


Written by sushil kumar






6 Sep 2018

Aaj kal kya ho gaya hai mujhe

Shayari




आज कल क्या हो गया है मुझे?

पता नहीं
कहाँ गुम हो गया हूँ?
बस अंतहीन सवालों के जवाब ढूंढते ढूंढते
अपनी ही अस्तित्व को भूल चुका हूँ मैं।।

एक स्त्री के कोख से जन्में
उसी स्त्री ने तुम्हें पाला पोसा।
पहला शब्द माँ तुमने बोला
पहला डेग उसी माँ ने सिखाया चलना।।
सबसे ज्यादा विश्वास जिस पर था।
पर आज विश्वास क्यों खो दिया तुमने।।
एक स्त्री के वास्ते।
 अपनी माँ को
अंधियारे में कहीं छोड़ आए तुमने।।

वो माँ
जिसने तुम्हें सहारा दिया
उस पल में।
जब तुम लड़खड़ा कर गिर रहे थे।।
उँगली पकड़कर चलना सिखाया।
आज तुम उनसे से ही
दौड़ लगा रहे हो
उनकी वृद्धावस्था में।।
बुढ़ापे की लाठी बनना छोड़।
उनके कमजोर कँधे पर
दुख का पहाड़ लादे जा रहे हो तुम।।

बस बहुत हो गया।
हे ईश्वर।।
अब और सहा नहीं जा रहा है मुझको।।
हर स्त्री मेरी माँ सी है।
उनकी तकलीफ नहीं देखी जा रही है मुझको।।
हे ईश्वर मुझे तू इस लायक बना।
हर माँ का सपूत बन सकूँ मैं।।
हर माँ के जीवन से दुख मिटा
रंग बिरंगे खुशियों से भर सकूँ मैं।।

हे ईश्वर।।







aaj kal kyaa ho gayaa hai mujhe?

pataa nahin

kahaan gum ho gayaa hun?

bas anthin savaalon ke javaab dhundhte dhundhte

apni hi astitv ko bhul chukaa hun main।।


ek stri ke kokh se janmen

usi stri ne tumhen paalaa posaa।

pahlaa shabd maan tumne bolaa

pahlaa deg usi maan ne sikhaayaa chalnaa।।

sabse jyaadaa vishvaas jis par thaa।

par aaj vishvaas kyon kho diyaa tumne।।

ek stri ke vaaste।

 apni maan ko

andhiyaare men kahin chhod aaa tumne।।


vo maan

jisne tumhen sahaaraa diyaa

us pal men।

jab tum ldakhdaa kar gir rahe the।।

ungli pakdakar chalnaa sikhaayaa।

aaj tum unse se hi

daud lagaa rahe ho

unki vriaddhaavasthaa men।।

budhaape ki laathi bannaa chhod।

unke kamjor kndhe par

dukh kaa pahaad laade jaa rahe ho tum।।


bas bahut ho gayaa।

he ishvar।।

ab aur sahaa nahin jaa rahaa hai mujhko।।

har stri meri maan si hai।

unki takliph nahin dekhi jaa rahi hai mujhko।।

he ishvar mujhe tu es laayak banaa।

har maan kaa saput ban sakun main।।

har maan ke jivan se dukh mitaa

rang birange khushiyon se bhar sakun main।।

He ishvar।।



Written by sushil kumar




Aapka hamara sath yunhi banta rahe

Shayari




आपका हमारा साथ यूँही बनता रहे।

हमारा कारवां सफर में यूँही बढ़ता रहे।।
नए लोग हमारे भावनाओं के साथ
यूँही जुड़ते रहे।
एक नई स्वर्ग सी दुनिया बनाने के लिए
हम तत्तपर रहें।।
जहान कोई ऐसा बनाए।
जहाँ दुख दर्द का निशान ना रहे।।
सब का साथ
सब का विकास का मंत्र लेकर।
हम सदैव आगे बढ़े।।
हम सारे मानव एक हैं।
हमारा धर्म मानवता का रहे।।
एक दूजे के वास्ते।
हम जीएँ, हम मरें।।
आओ हम सभी मिलकर।
एक दूसरे के जीवन को खुशियों से भर दें।।

जय मानव।।
मानवता ही हमारा धर्म है।।








aapkaa hamaaraa saath yunhi bantaa rahe।

hamaaraa kaarvaan saphar men yunhi bdhtaa rahe।।

naye log hamaare bhaavnaaon ke saath

yunhi judte rahe।

ek nayi svarg si duniyaa banaane ke lia

ham tattapar rahen।।

jahaan koi aisaa banaaa।

jahaan dukh dard kaa nishaan naa rahe।।

sab kaa saath

sab kaa vikaas kaa mantr lekar।

ham sadaiv aage bdhe।।

ham saare maanav ek hain।

hamaaraa dharm maanavtaa kaa rahe।।

ek duje ke vaaste।

ham jian, ham maren।।

aao ham sabhi milakar।

ek dusre ke jivan ko khushiyon se bhar den।।


jay maanav।।

maanavtaa hi hamaaraa dharm hai।


Written by sushil kumar

5 Sep 2018

Haar jit se kuchh fark mujhe padta nahin

Shayari




हार जीत से कुछ फर्क मुझे पड़ता नहीं।।

प्रयास किए बिना बैठ जाऊँ।
ये हमसे होगा नहीं।।
मुश्किलों के पहाड़ देख
मैं घबड़ाता नहीं।
पर्वत से भी ऊँचा है
मेरा हौसला अभी।।

एक क्या!
दस बार भी किस्मत निचे गिरा दे कभी।।
लहू लुहान हो जाऊँ।
हो जाए मेरा शरीर छलनी।।
मैं पुनः उठ खड़ा हो जाऊँगा।
दुबारा चलने को तभी।।
मंजिल मेरी निकट नहीं।
अभी तय करना है दूरी बड़ी।।

हार कर बैठ जाने वालों में।
मैं नहीं।।
मौकापरस्त बन
जीत हासिल करने वालों में।
मैं नहीं।।
पूरी ताकत झौंक।
हिमालय से टक्कर लेने का
जज़्बा है बाकी।।




haar jit se kuchh phark mujhe pdtaa nahin।।

pryaas kia binaa baith jaaun।

ye hamse hogaa nahin।।

mushkilon ke pahaad dekh

main ghabdaataa nahin।

parvat se bhi unchaa hai

meraa hauslaa abhi।।


ek kyaa!

das baar bhi kismat niche giraa de kabhi।।

lahu luhaan ho jaaun।

ho jaaa meraa sharir chhalni।।

main punah uth khdaa ho jaaungaa।

dubaaraa chalne ko tabhi।।

manjil meri nikat nahin।

abhi tay karnaa hai duri bdi।।


haar kar baith jaane vaalon men।

main nahin।।

maukaaparast ban

jit haasil karne vaalon men।

main nahin।।

puri taakat jhaunk।

himaalay se takkar lene kaa

jjbaa hai baaki।।



Written by sushil kumar




3 Sep 2018

Tumhare bina

Shayari




तुम्हारे बिना

यहाँ अधूरा अधूरा सा महसूस करता हूँ।।
सुबह सुबह तुम्हारी अधखुली आँखो
से मुझे देखना।।
और फिर तुम्हारा लम्बी सी
जम्हाई लेना।।
अपना सिर मेरे छाती पर रखकर
मुझे कसके जकड़ना।।
और मेरा तुम्हें
अपने बाहों में समेटना।।
बहुत कमी खलती है
सुबह सुबह उठने के वक़्त।।
बहुत कमी खलती है
सुबह सुबह उठने के वक़्त।।

तुम्हारे बिना
यहाँ अधूरा अधूरा सा महसूस करता हूँ।।
फिर तुम्हारा फटाफट कर के
सुबह सुबह का नाश्ता बनाना।।
और टिफिन पैक करके
मुझे आफिस के लिए तैयार करना।।
बहुत कमी खलती है
सुबह सुबह उठने के बाद।।
बहुत कमी खलती है
सुबह सुबह उठने के बाद।।
तुम्हारे बिना
यहाँ अधूरा अधूरा सा महसूस करता हूँ।।

शाम में लेट होने के बाद
वो तुम्हारा फ़ोन आना।।
कहाँ हैं?जल्दी आइए।।
खाना तैयार हो गया है।।
बहुत कमी खलती है
जब शाम में लेट होता हूँ।।
बहुत कमी खलती है
जब शाम में लेट होता हूँ।।
तुम्हारे बिना
यहाँ अधूरा अधूरा सा महसूस करता हूँ।।

रात में सोने के वक़्त
नींद नहीं आती है।।
करवटें बदल बदल कर
समय हम बिताते हैं।।
वो तुम्हारा सर सहलाना
और हमारा नींद आ जाना।।
बहुत कमी खलती है
जब रात में नींद नहीं आती है।।
बहुत कमी खलती है
जब रात में नींद नहीं आती है।।
तुम्हारे बिना
यहाँ अधूरा अधूरा सा महसूस करता हूँ।।








tumhaare binaa

yahaan adhuraa adhuraa saa mahsus kartaa hun।।

subah subah tumhaari adhakhuli aankho

se mujhe dekhnaa।।

aur phir tumhaaraa lambi si

jamhaai lenaa।।

apnaa sir mere chhaati par rakhakar

mujhe kaske jakdnaa।।

aur meraa tumhen

apne baahon men sametnaa।।

bahut kami khalti hai

subah subah uthne ke vkt।।

bahut kami khalti hai

subah subah uthne ke vkt।।


tumhaare binaa

yahaan adhuraa adhuraa saa mahsus kartaa hun।।

phir tumhaaraa phataaphat kar ke

subah subah kaa naashtaa banaanaa।।

aur tiphin paik karke

mujhe aaphis ke lia taiyaar karnaa।।

bahut kami khalti hai

subah subah uthne ke baad।।

bahut kami khalti hai

subah subah uthne ke baad।।

tumhaare binaa

yahaan adhuraa adhuraa saa mahsus kartaa hun।।


shaam men let hone ke baad

vo tumhaaraa fon aanaa।।

kahaan hain?jaldi aaea।।

khaanaa taiyaar ho gayaa hai।।

bahut kami khalti hai

jab shaam men let hotaa hun।।

bahut kami khalti hai

jab shaam men let hotaa hun।।

tumhaare binaa

yahaan adhuraa adhuraa saa mahsus kartaa hun।।


raat men sone ke vkt

nind nahin aati hai।।

karavten badal badal kar

samay ham bitaate hain।।

vo tumhaaraa sar sahlaanaa

aur hamaaraa nind aa jaanaa।।

bahut kami khalti hai

jab raat men nind nahin aati hai।।

bahut kami khalti hai

jab raat men nind nahin aati hai।।

tumhaare binaa

yahaan adhuraa adhuraa saa mahsus kartaa hun।।


Written by sushil kumar

2 Sep 2018

Dil bechara

Shayari




दिल बेचारा

प्यार का मारा।।

इसे चाहिए था
साथ तुम्हारा।।

तुम्हारी खूबसूरती देखते ही
तुम्हारा कायल हो चला था।।

हमारी लफ्ज़ो ने भी तुम्हारी तारीफ़ में
खूब पूल बाँधा था।।

पर किस्मत में हमारे
कुछ और ही लिखा था।।

दिल को उसके प्यार से
जुदा जो होना था।।

जुदाई के लम्हों को
वो सह ना पाया था।।

फूट फूट कर वो रोया
सखा नैनो ने भी साथ निभाया था।।

कुछ दिनों तक रोया
फिर चेहरा धुंधला होने को आया था।।

मित्र नेत्र ने फिर से
नए प्यार से मिलाया था।।

फिर से वही पुराना अध्याय
दुहराने का वक़्त आया था।।







dil bechaaraa

pyaar kaa maaraa।।


ese chaahia thaa

saath tumhaaraa।।


tumhaari khubsurti dekhte hi

tumhaaraa kaayal ho chalaa thaa।।


hamaari laphjo ne bhi tumhaari taarif men

khub pul baandhaa thaa।।


par kismat men hamaare

kuchh aur hi likhaa thaa।।


dil ko uske pyaar se

judaa jo honaa thaa।।


judaai ke lamhon ko

vo sah naa paayaa thaa।।


phut phut kar vo royaa

sakhaa naino ne bhi saath nibhaayaa thaa।।


kuchh dinon tak royaa

phir chehraa dhundhlaa hone ko aayaa thaa।।


mitr netr ne phir se

naye pyaar se milaayaa thaa।।


phir se vahi puraanaa adhyaay

duhraane kaa vkt aayaa thaa।।



Written by sushil kumar

Kuchh gunde pichhe pade hain hamare

Shayari


कुछ गुंडे पिछे पड़े हैं हमारे।

मानो जान लेकर छोड़ेंगे
वो आज हमारी।।
मैं भागा जा रहा हूँ गली गली।।
पर गुंडे भी पीछा
नहीं छोड़ रहें हैं हमारी।।
कभी  नदी पे दौड़कर
पार किया जा रहा हूँ।।
कभी हवा में तैरकर
चोटी पे पहुँचा जा रहा हूँ।।
फिर किया शुरू
गुंडों ने गोली बारी।।
मैं भी कितना बचता।।
लगी दो तीन गोली
छाती में हमारी।।
एक गोली हमारी छाती को
चीरती निकल जा रही।।
वही दो गोली अंदर फँसकर
हमें दर्द का एहसास करा रही।।
एक धक्के से उठ बैठा।
नींद टूटी है हमारी।।
ईश्वर को दिया धन्यवाद
ये सपना है
इसमें नहीं है कोई सच्चाई।।





kuchh gunde pichhe pde hain hamaare।

maano jaan lekar chhodenge

vo aaj hamaari।।

main bhaagaa jaa rahaa hun gali gali।।

par gunde bhi pichhaa

nahin chhod rahen hain hamaari।।

kabhi  nadi pe daudkar

paar kiyaa jaa rahaa hun।।

kabhi havaa men tairakar

choti pe pahunchaa jaa rahaa hun।।

phir kiyaa shuru

gundon ne goli baari।।

main bhi kitnaa bachtaa।।

lagi do tin goli

chhaati men hamaari।।

ek goli hamaari chhaati ko

chirti nikal jaa rahi।।

vahi do goli andar phnasakar

hamen dard kaa ehsaas karaa rahi।।

ek dhakke se uth baithaa।

nind tuti hai hamaari।।

ishvar ko diyaa dhanyvaad

ye sapnaa hai

esmen nahin hai koi sachchaai।।


Written by sushil kumar





Meri soch hi meri taqat hai

Shayari


मेरी सोच ही मेरी ताकत है।

ना उलझो
मिट जाओगे तुम।।
मेरा विश्वास ही मेरी ऊर्जा है।
ना परखो
भस्म हो जाओगे तुम।।
मेरा लगन और मेहनत ही
मेरी पूजा है।।
तुम चाह कर भी
बदल ना पाओगे तुम।।







meri soch hi meri taakat hai।

naa uljho

mit jaaoge tum।।

meraa vishvaas hi meri urjaa hai।

naa parkho

bhasm ho jaaoge tum।।

meraa lagan aur mehanat hi

meri pujaa hai।।

tum chaah kar bhi

badal naa paaoge tum।।


Written by sushil kumar

Kabhi kabhi aata hai mujhe halka halka sa suroor

Shayari


कभी कभी आता है मुझे
हल्का हल्का सा सुरूर।।

तुम्हें अपने पनाहों में बन्दकर के रख लूँ
अपने दिल के करीब कुछ यूँ।।
हर बला और परेशानी से
तुम्हें रखूँ दूर।।
दुनियाभर की सारी खुशियों को
तुम्हारी झोली में ला भर दूँ।।
सारे रिश्ते,सारे नातों से
तुम्हें लेकर चलूँ कहीं दूर।।
जहाँ समय का सीमा ना हो।
बस तुम हो
और एक मैं तुम्हारे पास रहूँ।।
फिर मीठी बातों का सिलसिला
कुछ इस प्रकार चले
हम दोनों के बीच।।
हम तुममे और तुम हममें
एक दूजे की
खुशियों को तलाशने में हो जाएँ व्यस्त।।
दिन और रात का कुछ पता ना चले।।
भूख और प्यास का एहसास ना होवे।।
बस प्यार का गुलदस्ता बना
एक दूसरे को सौगात हम देते रहें।।

कभी कभी आता है मुझे
हल्का हल्का सा सुरूर।।
तुम्हें अपने पनाहों में बन्दकर के रख लूँ
अपने दिल के करीब कुछ यूँ।।







kabhi kabhi aataa hai mujhe
halkaa halkaa saa surur।।

tumhen apne panaahon men bandakar ke rakh lun

apne dil ke karib kuchh yun।।

har balaa aur pareshaani se

tumhen rakhun dur।।

duniyaabhar ki saari khushiyon ko

tumhaari jholi men laa bhar dun।।

saare rishte,saare naaton se

tumhen lekar chalun kahin dur।।

jahaan samay kaa simaa naa ho।

bas tum ho

aur ek main tumhaare paas rahun।।

phir mithi baaton kaa silasilaa

kuchh es prkaar chale

ham donon ke bich।।

ham tumme aur tum hammen

ek duje ki

khushiyon ko talaashne men ho jaaan vyast।।

din aur raat kaa kuchh pataa naa chale।।

bhukh aur pyaas kaa ehsaas naa hove।।

bas pyaar kaa guladastaa banaa

ek dusre ko saugaat ham dete rahen।।


kabhi kabhi aataa hai mujhe

halkaa halkaa saa surur।।

tumhen apne panaahon men bandakar ke rakh lun

apne dil ke karib kuchh yun।।



Written by sushil kumar

1 Sep 2018

Sakaratmakta apnao aur failao

Shayari

Sakaratmakta apnao aur failao


जीवन की धार जो
यूँही बहती जा रही है।।
समय का पहिया भी
नहीं थमता नज़र आ रहा है।।
कल भी मैं प्यासा था
आज भी मैं प्यासा ही हूँ।।
कल भी मैं भूखा था
आज भी मैं भूखा ही हूँ।।
उम्र बदल गई है
पर दिल से
अभी भी बच्चा हूँ।।
बहुत लोग संग आए
कुछ दूर साथ निभाए।।
फिर धीरे धीरे
हमारा साथ
सभी छोड़
कहीं गुम गएँ।।
उनमें से कुछ लोग
हमारे जहन में समाए।।
जिनकी अच्छाई और सादगी ने
हमारे दिल में घर बसाए।।
आज भी उनकी याद आते ही
रक्त का संचार तेज़ हो जाए।।
उनकी सकरात्मक ऊर्जा से
हमारी आयु में वृद्धि हो जाए।।
छोटी सी आयु है
छोटा सा जीवन है
क्यों ना सकारात्मकता अपनाकर
स्वयं को दीर्घायु बनाए।।
सभी के लिए अच्छा सोचे
सभी को साथ लेकर चलें।।
छोटी सी दुनिया है
क्यों ना खुशियों के रंग से
सभी के जीवन को रंग दे।।






jivan ki dhaar jo

yunhi bahti jaa rahi hai।।

samay kaa pahiyaa bhi

nahin thamtaa njar aa rahaa hai।।

kal bhi main pyaasaa thaa

aaj bhi main pyaasaa hi hun।।

kal bhi main bhukhaa thaa

aaj bhi main bhukhaa hi hun।।

umr badal gayi hai

par dil se

abhi bhi bachchaa hun।।

bahut log sang aaa

kuchh dur saath nibhaaa।।

phir dhire dhire

hamaaraa saath

sabhi chhod

kahin gum gan।।

unmen se kuchh log

hamaare jahan men samaaa।।

jinki achchhaai aur saadgi ne

hamaare dil men ghar basaaa।।

aaj bhi unki yaad aate hi

rakt kaa sanchaar tej ho jaaa।।

unki sakraatmak urjaa se

hamaari aayu men vriaddhi ho jaaa।।

chhoti si aayu hai

chhotaa saa jivan hai

kyon naa sakaaraatmaktaa apnaakar

svayan ko dirghaayu banaaa।।

sabhi ke lia achchhaa soche

sabhi ko saath lekar chalen।।

chhoti si duniyaa hai

kyon naa khushiyon ke rang se

sabhi ke jivan ko rang de।।


Written by sushil kumar

अभिमान है मुझे:abhimaan hai mujhe

अभिमान है मुझे। Shayari मेरे भारत देश के मिट्टी की  बात बड़ी ही निराली है। यहाँ जन्म लेने वाले हर शख्स के खून में छिपी हुई एक...