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खुले गगन तले।

खुले गगन तले
                हम पंक्षी कहीं उड़ चले।।
बादलों के बीचों बीच
               तो कभी तूफानों के तले।।
पँखों में हवा भर
              आसमानी छत छूने चले।।
निर्भिक हो निडर हो
             बिना किसी डर,और बिना कोई हिचक मन में रखे।।
आत्मविश्वास की डोर पकड़
                 हर डग हम सटीक चलते रहें।।
कई बार धरातल पर हम गिरेंं
                  फिर उठ खड़े हुए लड़ने को अपने किस्मत से।।



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