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पुरुष होने की लाचारी

शादीशुदा हूँ यारों।
ऊपर से पत्नीव्रता।।
कल ही टीवी पर
आई थी एक खबर।
चार महिलाओं ने मिल
लूटी थी एक अबला पुरूष की इज्जत।।
घर से बाहर निकलने में भी
अब लगता है बड़ा डर।
पता नहीं
कहाँ पे भेड़िये घात लगाकर बैठे हों
लूटने को हमारी इज्ज़त।।

जहाँ भी जाता हूँ।
पत्नी पीछे से चली आती हैं।।
आखिर हूँ तो एक सुंदर पुरूष ना।
और हमारी जीवन भर रक्षा करने की
उन्होंने कसम जो खाई है।।
जमाना बहुत ही खराब हो गया है यारों।
वो तो धन्य है ईश्वर का
जो इस जन्म में हमने ऐसी पत्नी पाई है।

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