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मात पिता के प्यार से बढ़कर हो नहीं सकता कोई वस्तु अमूल्य।।

झूठी काया झूठी माया के पीछे
बावली हुई फिर रही है दुनिया।।
कभी सुन्दरता तो कभी धन की व्यथा ने
बस में कर रखा है मन को।।
धोखा लगातार मिल रहा है इनसे
फिर भी मन भाग रहा है पीछे।।
छूट रहा है अगर कुछ अपना
वह है अपने मात पिता का साथ।।
जिन्होंने हमारे बचपन को संजोया
देकर हमें कुछ खास संस्कार।।
आज जब उड़ना सीख लिया हमने
छोड़ दिया उन्हें वृद्ध लाचार।।
ऐसी दुविधा में क्यों फँसा है मानुष
जाकर ले आ अपने माँ बाप को साथ।।
बिना जिनके आशिर्वाद के
कोई सपना नहीं हो पाएगा कभी साकार।।
मात पिता के प्यार से बढ़कर
हो नहीं सकता कोई वस्तु अमूल्य।।
बस उनका साथ और आशीर्वाद रहे हमपर
इससे ज्यादा कुछ चाहिए नहीं हे परमेश्वर।।

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