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सोच

कितना जिएँगे हम?
किसने जाना है?
कैसे जी रहें हैं हम?
सभी देख रहे हैं।।
भूत में ना भविष्य में।
अगर जीना ही है तो
जियो वर्तमान में।।
जो बीत गया
उसे बदल सकते नहीं।
आने वाले कल के लिए
वर्तमान में कार्य कर सकते हैं हम।
पर हम अपने अलबेले सोच से लाचार हैं।
कभी हमें भूत की गोद में
ले जाकर पटकता है।
और दकियानूसी ख्याल बनाता है।
तो कभी हमें भविष्य के कँधे
पर चढ़ा कर छोड़ आता है।
और ख्याली पुलाव बनाता है।।
वर्तमान को जितना है तो
सोच के जंजीर को तोड़ना
आना पड़ेगा।





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