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मैं जन्मा तेरा अंश लेकर

मैं जन्मा तेरा अंश लेकर
             संस्कार दिए थे तूने भर भर।।
बड़ों को आदर और छोटों से प्यार
              किसी का दिल दुखे नहीं सूत।।
मधुर वाणी और मृदुल स्वभाव से
              जीत लो तुम सारा संसार।।
सिकंदर ने जीता था जग
              उठाकर भाला और तलवार।।
तन जीता पर मन नहीं जीता
               करके जग पर अत्याचार।।
सबका भला,सबका विकास
                ऐसा रखना तुम मन में विश्वास।।
सभी दिलों की धड़कन बनकर
                 करना तुम हर दिल पर राज।।
                            

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