8 Aug 2018

Apni safalta par itna bhi mat aitra

Shayari


अपनी सफलता पर इतना भी मत इतरा

ए बन्दे।
पता नहीं
कितनों की दुआओं का असर है ये।।
तू तो समझता है
अकेले तेरी मेहनत ने करिश्मा कर दिखाया है।
यहाँ तेरी माता ने
पता नहीं कितना उपवास और
कितना पूजा-पाठ
तेरी सफलता के लिए करवाया है।।
तेरे पिता ने भी पता नहीं
कितने पसीने बहाएँ हैं।
दो दो शिफ्ट कर के
तेरे एड्मिसन फ़ीस और क़िताबों के
खर्चे उठाएँ हैं।।
तेरी सफलता पे
तेरे माता पिता का
उतना ही हक़ है।
तू जानता है
उनके बिना शामिल हुए
तेरी खुशियाँ निरर्थक है।।




apni saphaltaa par etnaa bhi mat etraa

aye bande।

pataa nahin

kitnon ki duaaon kaa asar hai ye।।

tu to samajhtaa hai

akele teri mehanat ne karishmaa kar dikhaayaa hai।

yahaan teri maataa ne

pataa nahin kitnaa upvaas aur

kitnaa pujaa-paath

teri saphaltaa ke lia karvaayaa hai।।

tere pitaa ne bhi pataa nahin

kitne pasine bahaaan hain।

do do shipht kar ke

tere edmisan fis aur kitaabon ke

kharche uthaaan hain।।

teri saphaltaa pe

tere maataa pitaa kaa

utnaa hi hk hai।

tu jaantaa hai

unke binaa shaamil hua

teri khushiyaan nirarthak hai।।


Written by sushil kumar

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