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इसलिए अभी तक तू जिंदा है।।

प्रकृति हमारी माता है
बिन सोचे,बिन समझे
हमारे कर्मों को वो उठाती हैं।।
क्योंकि वो हमारी माता है ना।।

कभी हम वृक्षों को काट देते हैं
तो कभी उपजाऊ जमीन पर अपने लिए आशियाना बनवा लेते हैं।।
बिना भविष्य सोचे
बस अपनी सहुलियत के लिए
माँ को लहुलुहान कर देते हैं।।
माँ सहती रहती है
क्योंकि वो हमारी माता हैं ना।।

कब तक
कब तक माँ मितभाषी बनकर
हमेशा हमें सचेतती रहेगी।।
आँधी-बवंडर,भूकंप-ज्वालामुखी से
कब तक हमें सहेजती रहेगी।।
हमारे गलतियों को अनदेखी कर करके
कब तक अपने गोद में सुलाती रहेगी।
माँ को हमने जख्म दे देकर
उनके घाव को फिर से कुरेदा है।।
अब तो जरा संभल जा रे बंदे
माँ है
इसलिए अभी तक तू जिंदा है।।

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