8 Aug 2018

Insaan hun

Shayari



इंसान हूँ।

इंसानियत से हमें जीना सीखने दो।।
दो पल की है
ये जिंदगी।
इसमें मिठास भरने दो।।
बेरंग सी जीवन को।
खुशियों के रंगों से रंगने दो।।
हर कष्ट से लाचार जिंदगानी से।
दुख के बादल को छांटने दो।।
मानव को मानवता से।
आज मिलाप करवाने दो।।
हर दिल में
एक दूसरे के लिए।
प्यार इश्क़ और मोहब्बत के
जज्बात को जगाने दो।।
इंसान हूँ।
इंसानियत से हमें जीना सीखने दो।।





ensaan hun।

ensaaniyat se hamen jinaa sikhne do।।

do pal ki hai

ye jindgi।

esmen mithaas bharne do।।

berang si jivan ko।

khushiyon ke rangon se rangne do।।

har kasht se laachaar jindgaani se।

dukh ke baadal ko chhaantne do।।

maanav ko maanavtaa se।

aaj milaap karvaane do।।

har dil men

ek dusre ke lia।

pyaar eshk aur mohabbat ke

jajbaat ko jagaane do।।

ensaan hun।

ensaaniyat se hamen jinaa sikhne do।



Written by sushil kumar

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