Email subscription

Enter your email address:

Delivered by FeedBurner

पानी की मोटी मोटी बूँदें

पानी की मोटी मोटी बूँदें
जब हमारे गालों को छू जाती है।।
ऐसा एहसास होता है
मानो कूदरत ने हमें चूम लिया हो।।
जब ठंडी ठंडी हवाएँ
हमारे बदन को सहलाती है
ऐसा एहसास होता है
जैसे मानो पूरे शरीर में ताजगी भर गई हो।।
जब खुले आसमान के तले
हम तन्हा तन्हा बैठे आघाते हैं
और फिर दूर से टिमटिमाते तारें
मानो हमें नजर मार जाते हैं।।
ऐसा आभास होता है
जैसे मानो कि कोई दोस्त ने चिढ़ाया हो।।
समुंद्र तट पर लहरें जो
हमें छूकर वापस जाती है।।
ऐसा एहसास होता है
जैसे मेरी महबूबा
अपने आगोश में मुझे बुलाती हो।।
और अपने सारे गहरे दफन राज को
मुझे बताना चाहती हो।।


No comments:

तुम लिखो कुछ ऐसा

तुम लिखो कुछ ऐसा kavitadilse.top द्वारा आप सभी पाठकों को समर्पित है। तुम लिखो कुछ ऐसा जिससे शांत सरोवर की शिथिल लहरों में एक उफान ...