8 Aug 2018

Uthne lage hain sawal

Shayari


उठने लगे हैं सवाल

आज हमारी वजूद पे।
कहीं हम गुम तो नहीं हो गए हैं।
भरे इस महफ़िल में।।
हर जगह चकाचौंध है
पैसे और हैसियत वालों की।
जिसे देखो बस गुमान में है
अपने औकात के रसूख में।।
मैं ठहरा कवि।
प्रेम और भाईचारे के
भावनाओं से ओतप्रोत।।
मुझे भी बुला लिया।
किसी रसूख वाले ने प्रेम से।।
मैं पहुँचा उनके महफ़िल में।
बड़े ही अदब से।।
सूट डाल पहुँचा था।
ब्रांडेड रेमंड से।।
मेरे संग पहुँचे थे
कुछ और कवि भाईजान।
जान लगा डाली थी
जिन्होंने
रसूखदारों के लिए
कविता बनाने में।।
हमने ज़मीर खो दी है आज।
रसूखदारों के खजाने से।।
क्या हम वाकई जिंदा हैं।
अंतःकरण के दब जाने से।।




uthne lage hain savaal

aaj hamaari vajud pe।

kahin ham gum to nahin ho gaye hain।

bhare es mahfil men।।

har jagah chakaachaundh hai

paise aur haisiyat vaalon ki।

jise dekho bas gumaan men hai

apne aukaat ke rasukh men।।

main thahraa kavi।

prem aur bhaaichaare ke

bhaavnaaon se otaprot।।

mujhe bhi bulaa liyaa।

kisi rasukh vaale ne prem se।।

main pahunchaa unke mahfil men।

bde hi adab se।।

sut daal pahunchaa thaa।

braanded remand se।।

mere sang pahunche the

kuchh aur kavi bhaaijaan।

jaan lagaa daali thi

jinhonne

rasukhdaaron ke lia

kavitaa banaane men।।

hamne jmir kho di hai aaj।

rasukhdaaron ke khajaane se।।

kyaa ham vaakaayi jindaa hain।

antahakaran ke dab jaane se।


Written by sushil kumar



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