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क्योंकि पापा हैं ना साथ में।।

खिलौने की जिद हो या फिर
प्रिंटेड टीशर्ट पहनने का शौक।।
हमारे हर जिद और शौक
कभी रहते नहीं अधूरे।।
क्योंकि पापा हैं ना साथ में
तो फिर क्या फिक्र है हमारे जीवन में।।
घर का खाना खाकर हो गएँँ हो ऊब
समोसे और मिठाई खाने का दिल करे खूब।।
फिर क्या? लगे पापा को मिलकर हम मनाने
पापा चलो ना क्यों ना आज बाहर जाकर खाना खाए।।
माँ का भी अब जब मिल जाए साथ
हार कर पापा बोलें
चलो बाहर किसी अच्छे होटल में खाना खाएँ साथ।।
क्योंकि पापा हैं ना साथ में
तो फिर क्या फिक्र है हमारे जीवन में।।
पापा के घर में शाम में आते ही
हम खेल छोड़ लग जाते हैं पढ़ाई में।।
पापा साथ में आकर होमवर्क करवाते
और छुट्टी वाले दिन हमें पहाड़ा रटवाते।।
अगर पापा हैं तभी तो वर्ग में हमारे अच्छे मार्क्स आते।।
क्योंकि पापा हैं ना साथ में
तो फिर क्या फिक्र है हमारे जीवन में।।
समर वेकेशन के आते ही हम घर पर बोर हो जाते
पापा के साथ मिलकर हम कहीं बाहर घूमने का ट्रीप बनाते।।
समर वेकेशन में हम सभी खूब धूम मचाते।।
क्योंकि पापा हैं ना साथ में
तो फिर क्या फिक्र है हमारे जीवन में।।





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