8 Aug 2018

Kya khub zindagi thi bachpan ki

Shayari

क्या खूब ज़िंदगी थी बचपन की


शिक्षक का खौफ
होमवर्क का प्रैशर
मानो पूरी दुनिया का बोझ
हमारे कंधों पर है रखा।।
जो होमवर्क कंप्लीट हो
तो किसी के बाप से ना डरता।।
पर जिस दिन होमवर्क कंप्लीट नहीं हो
तो पिछवाड़ा लाल हो जाता।।
और उस दिन अपने उम्र को
मैं खूब था कोसता।।
जो मैं भी जवान होता
तो पिछवाड़ा हमारा कौन लाल करता।।
क्या जिंदगी है जवानी की
मस्त कमाओ खाओ घूमो
और ऐश करो।।
आज मैं जवान हूँ
और अपनी स्थिति से वाकिफ हूँ।।
सौ टेंसन की दुकान
दिमाग में खोलकर बैठा हूँ।।
गर्लफ्रैंड को क्या गिफ्ट देना है।
तो कौन सा जोब मुझे लेना है।
एक टेंसन खत्म नहीं
दस और द्वार पर खड़ी हो जाती है।।
क्या खूब जिंदगी थी बचपन की
आज खूब तूझे याद करता हूँ।।




shikshak kaa khauph

homavark kaa praishar

maano puri duniyaa kaa bojh

hamaare kandhon par hai rakhaa।।

jo homavark kamplit ho

to kisi ke baap se naa dartaa।।

par jis din homavark kamplit nahin ho

to pichhvaadaa laal ho jaataa।।

aur us din apne umr ko

main khub thaa kostaa।।

jo main bhi javaan hotaa

to pichhvaadaa hamaaraa kaun laal kartaa।।

kyaa jindgi hai javaani ki

mast kamaao khaao ghumo

aur aish karo।।

aaj main javaan hun

aur apni sthiti se vaakiph hun।।

sau tensan ki dukaan

dimaag men kholakar baithaa hun।।

garlaphraind ko kyaa gipht denaa hai।

to kaun saa job mujhe lenaa hai।

ek tensan khatm nahin

das aur dvaar par khdi ho jaati hai।।

kyaa khub jindgi thi bachapan ki

aaj khub tujhe yaad kartaa hun।।


Written by sushil kumar

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