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मुझे अपने रंगों में मिला ले मौला।।

चैन चला गया
नींद चली गई
ना खाने का होश है
ना पीने का होश है
बस किसी की यादों में
सारा दुनिया को भूला दिया ।।
बस उनकी एक झलक पाने को
हमारा दिल यों तड़प रहा ।।
जैसे कि किसी मछली को जल से
बाहर निकाल दिया हो।।
ख्वाहिश अब फकीरे दिल की बाकी कुछ रही नहीं
मानो मौला को पा लिया हो उसने
उस शक्शियत में।।
जहाँँ भी नजर पड़ी है
अक्स उनकी वहींं नजर आई है।।
ईश्वर से हमने बस यही दुआ की है 
खुशियाँँ उनकी सलामत रहे हमेशा
बाकी दुख दर्द सारे
हमारे नसीब में आ जाए।।
या तो मेरी जान से मुझे मिला दे
या मुझे अपने रंगों में मिला ले मौला।।








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