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हर कोई हो रहा है यहाँ डिप्रैशन का शिकार।।

हर कोई हो रहा है यहाँ डिप्रैशन का शिकार।।
क्या शिक्षक,क्या बैंकर
जिसे देखो बस अंदर ही अंदर
वह घूट रहा है।।
जी रहा है मसला मसला
सभी लोगों में वह पिछड़ा पिछड़ा।।
हिनता की भावना दिल में लिए
मानो कूचला हुआ हो
किस्मत का मारा।।
कोई भी यहाँ संतुष्ट नहीं है
दिल में किसी के सुकून नहीं है।।
किसी को गाड़ी घोड़ा चाहिए
तो कोई बंगले के लिए है परेशान।।
हर किसी के चेहरे से गुम हो गई हँसी
कोई ढूंढ कर लादे उसकी खोई हुई खुशी।।
अगर ऐसी ही स्थिति बनी रही हमारी
शायद ही कोई मनुष्य बचेंगे
जिनमें नहीं होगी कोई बिमारी।।
इसलिए हँसना सीख ले मेरे भाई।।

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