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डर डर के जी रहे हैं हम यहाँ।।

डर डर के जी रहे हैं हम यहाँ।।
कहीं हमसे कोई छीन ना ले प्यारा सा ये मेरा जहाँ।।
मेरे सपने और मेरे प्यारे रिश्ते सजे हैं यहाँ।।
बिन इनके ना रह पाऊँगा मैं किसी और जहाँ।।
हर छोटे छोटे पलों में खुशियों की झड़ी सी लगी है यहाँ।।
गम के पल भी सुगमता से कट जाते हैं,जब ये रिश्ते साथ खड़े रहते हैं वहाँ।।
मेरी वजूद आज इनसे ही है इस जहाँ।।
वरना कौन सार्थक बना पाएगा मेरे जीवन को यहाँ।।

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