10 Dec 2019

Yahan kaun kiski sunta hai

Shayari


यहाँ कौन किसकी सुनता है

सब अपना फायदा सोचता है।।
किसी को किसी की फिक्र नहीं
जो फिक्र करे वह देवता है।।
हर कोई यहाँ अपने में व्यस्त है
जिम्मेदारी लेने की किसी में क्रेज नहीं है।।
कर्तव्यनिष्ठता का पाठ सभी पढ़ाते हैं
वक्त आने पर  खुद चुक वो जाते हैं।।



yahaan kaun kiski suntaa hai

sab apnaa phaaydaa sochtaa hai।।

kisi ko kisi ki phikr nahin

jo phikr kare vah devtaa hai।।

har koi yahaan apne men vyast hai

jimmedaari lene ki kisi men krej nahin hai।।

kartavyanishthtaa kaa paath sabhi pdhaate hain

vakt aane par  khud chuk vo jaate hain।।

Written by sushil kumar

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