Email subscription

Enter your email address:

Delivered by FeedBurner

यहाँ कौन किसकी सुनता है।।

यहाँ कौन किसकी सुनता है
सब अपना फायदा सोचता है।।
किसी को किसी की फिक्र नहीं
जो फिक्र करे वह देवता है।।
हर कोई यहाँ अपने में व्यस्त है
जिम्मेदारी लेने की किसी में क्रेज नहीं है।।
कर्तव्यनिष्ठता का पाठ सभी पढ़ाते हैं
वक्त आने पर  खुद चुक वो जाते हैं।।

No comments:

वतना मेरे वतना वे।

वतना मेरे वतना वे kavitadilse.top द्वारा आप सभी पाठकों को समर्पित है। वतना मेरे वतना वे तेरा इश्क़ मेरे सर चढ़ चढ़कर बोल रहा है। एक जन्...