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अहंकार को त्याग दो

अहंकार को त्याग दो।
और भावनाओं को बहने दो।।
एक दो पग हम चलें आगे।
तुम पीछे-पीछे हमारे हो लो।।
कुछ होंगे दुख भरे पल।
जिसे सिंचा होगा अपने अश्कों के धारा से।।
कल हमारे आँखों में नमी थी।
आज तुम अपने आँसुओं को ना थमने दो।।
फिर कुछ तो होंगे कुछ खुशी भरे पल।
जिसे पिरोया गया होगा उल्लास के मोतियों से।।
जो आनंद और हर्ष कल हमने अपने दिल में महसूस किया था।
आज तुम उस खुशी को अपने चेहरे पर झलकने दो।।
कवि हूँ ना यारो।
अपनी भावनाओं का तुम्हारे भावनाओं से मिलाप करवाने दो।।
अहंकार को त्याग दो।
और भावनाओं को बहने दो।।

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