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कितने भी करीब हों

कितने भी करीब हों
                   आप हमारे दिल के।।
मिलती वही है
                  जो रहता है हमारे नसीब में।।
जितनी भी हाथ पाव मार लो
             जितना भी दिलोजान से कोशिश कर लो।।
मिलती वही है
             जो जोड़ी बनकर आई है अंबर से।। 
लाख तुम प्रेम करो
                      अपने प्रियतमा से।।
भले तुम उन्हें जानते हो
                   स्कूल से,कॉलेज से।।
मिलती वही है
                जिसका सम्बंध है आपके साथ सात जन्मों से।।

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