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मन तरंगें।

मन तरंगें उठ रहीं है हमेशा।।
दिन हो या हो रात।।
जागें हो या हो सोएं।।
कभी थमती नहीं हैं ये तरंगे।।
बस लगातार बहती रहती है।।
जैसे बहती रहती है नदी में धार।।

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