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आजाद हूँ और आजाद रहूँगा।।

आजाद हूँ और आजाद रहूँगा।।
किसी के बंदिश को मैं ना सहूँगा।।
स्वतंत्रत सोच के पँखों को फैलाने की है आजादी।।
आसमान की सीमाओं को आज लाँघने की है आजादी।।

आजाद हूँ और आजाद रहूँगा।।
किसी के बंदिश को मैं ना सहूँगा।।
दूसरों के नकारात्मक सोच को नकारने की है आजादी।।
सब का भला,सबका विकास हो,ऐसे सोच को है सलामी।।

आजाद हूँ और आजाद रहूँगा।।
किसी के बंदिश को मैं ना सहूँगा।।
मस्त ठंड पवन सा बहकर,सभी के दिलों को ठंडक देने की है आजादी।।
हर हताश लोगों में उमंग भर कर,उनके दिलों पर राज करने की है आजादी।।
आजाद हूँ और आजाद ही रहूँगा।।
किसी के बंदिश को मैं ना सहूँगा।।



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