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आई लव यू पापा।।

आज फिर से वो दिन मुझे याद आ गए।।
पापा के द्वारा रटाए गए पहाड़े आज काम आ गए।।
भुला नहीं हूँ मैं वो बचपन के दिन।
शनि और रविवार को दोस्तों के साथ खेलते थे भरदम।।
तभी पापा एक शनिवार की रात ले लिया था हमारा टेस्ट।
बहुत कम अंक आने पर उन्होंने दे दिया था पनिशमेंट।।
पनिशमेंट से कभी टेंशन नहीं हुआ था उस दिन तक।
क्योंकि पनिशमेंट का हो गया था मैं मास्टर।।
कभी उठा बैठक
तो कभी छड़ी से पिटाई
कभी धूप में खड़ा किया
तो कभी हाथ उठा कर खड़ा किया
इन सभी पनिश्मेन्ट की हो गई थी हमें आदत
जिनसे रोज मुलाकात होती थी
हमें स्कूल में जाकर।।

रविवार के दिन निकला था हाथ में बॉल लेकर
पापा वहीं खड़े थे छड़ी हाथ में तानकर।
कहाँ जा रहे हो?
ज़रा इधर तो आ जाओ।।
एक से दस तक का पहाड़ा तो सुनाओ।।
पापा आज मैच है।
ज़रा सा खेल के मैं आऊँ।।
उसके बाद मैं आपको
वो पहाड़ा को सुनाऊँ।।
बेटा मैं तेरा बाप हूँ
नहीं हूँ तेरा बेटा।
बेवकूफ़ किसी और को बनाना
पहले सुना दे मुझे पहाड़ा।।
फिर क्या था?
हर रविवार खेलता था मैं
पापा के साथ पहाड़ा।
पापा के कारण ही
आज मुकाम ये हासिल कर पाया।।






(आई लव यू पापा।।)








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