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माँ! कहाँ हो माँ?

माँ आपके गोद में
जन्नत सा महसूस होता था
जितनी भी तनाव रहे हृदय में
छू मंतर सा हो जाता था
यहाँ अकेला दूर आपसे
आपकी कमी महसूस बहुत करता हूँ
तनाव तो इतना है यहाँ पे
सर फट फट सा जाता है
कितना भी मरहम और दवाई लेलूँ
चैन नहीं अब दिल को आता है
आ जाइए माँ 
आ जाइए फिर से
अपने लल्ले को गोद में सुलाने को
वरना मैं निकलता हूँ 
इस जहाँ से
ईश्वर के गोद में सो जाने को।

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