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प्यारी बहना।।

प्यारी बहना
तुम्हारी याद
बहुत ही मुझे सताती है।
कहीं भी रहना
खुश रहना
बस यही दुआ
लब पे आती है।।
बहुत सारी
मीठी सी यादें
मेरे मस्तिष्क में पनप कर आती है।
क्या बचपन था
हमदोनो का।
कितना हुड़दंग हम मचाते थे।।

वो किवाड़ पर चढ़ कर तुम्हारा बैठना।
और कुंडी पकड़ मेरा झूला झुलाना।।
और माँ जो देख लें हमदोनो को
बेलना लेकर हमारे पीछे भागना।।

वो दीवार फाँदकर
दूसरे के बगीचे से
अमरूद चुरा कर घर लाना।।
पके अमरूद को पाने के लिए
हमदोनो के बीच में झगड़ा होना।
और तुम्हारा मुझे धक्का देना
मेरे सर को दीवार पर पटकना।।
कितना मजा आता था मुझको।
वो तुम्हारे हाथ से मार खाना।।

और भी बहुत सारी पल हैं बहना
जो मेरे जहन में आती हैं।
रह रह कर
बस तुम्हारी ओर
मुझे खींच कर ले जाती है।।

मेरी आँख नम हो जाती हैं।
जब उन पलों को याद मैं करता हूँ।।
कभी भी जन्म लूँ
इस धरती पर,
बस तू ही चाहिए बहना
मेरी कुनबा में।।

जल्द ही आऊँगा मिलने तुमसे
साथ मे बैठ
पुराने तराने गाने को।
फिर से बचपन को जी लेंगे हम
प्यारी बहना
मिलकर हम तुम।।


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