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युवा भारत संभल जाओ।

युवा भारत संभल जाओ।
मातृभूमि के खातिर तो बदल जाओ।।
देश को तुम्हारी जरूरत है।
जरा आँखें खोल के देखो पास।।

दीमक बनकर खा रहे हैं।
देश के भ्रष्ट नेता और
कुछ गद्दार।।
केंद्र में खड़े होकर
देखो
कैसे उपद्रव मचा रहे हैं।।

अफ़ज़ल हम शर्मिंदा हैं
तेरे कातिल जिंदा हैं
के नारे
लगा लगा कर
कैसे असहिष्णुता फैला रहे हैं।।

भारत की पवित्र धरती पर
द्वेष का बीज बोए जा रहे हैं।।
अंग्रेजों के बनाए फॉर्मूले को
अब अपने नेता ही
हमपर अपना रहे हैं।।

अगर आज नहीं हम उठ खड़े होंगे।
तो कहीं शायद
कल हो जाएँ ना अपंग।।
फिर से लाखों कुर्बानियाँ देनी पड़ेगी।
कराना होगा अगर देश को स्वतंत्र।।

हिन्दू मुस्लिम सिख इसाई नहीं।
भारतीय हैं हम पहले आज।।
ब्राह्मण क्षत्रिय वैश्य शुद्रा नहीं
ना शिया,ना सुन्नी हैं हम।
हमें धर्म जाति में अब बाँटो नहीं।
हम बंध मुठ्ठी हैं अब।।
हम भारत में जन्में हैं।
हमें भारतिय कहलाने पर
होता है गर्व।।

जय हिंद।।
जय भारत।।
वन्दे मातरम।।


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