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कैसी रात थी वो।।

कैसी रात थी वो।।
हम जब पहली बार मिले
कितना कंफ्यूज था।।
कितना नर्वस था।।
तुम्हें जो अभी तक देखा नहीं था।।
माँ बाबू जी ने
तुम्हारी नाक नक्श का तो कुछ ज्यादा ही बखान किया था।।
मेरी बहना भी कहाँ पिछे थी।
तुम्हारी सुंदरता की बड़ाई करते नहीं थकती थी।।
मुझे
पर बड़ा मन था ।।
इंगेजमेंट के पहले तुमसे एक बार मिल लूँ।
और तुम्हारे सुंदरता को मैं भी जरा आंक लूँ।।
पर ईश्वर को कुछ और ही मंजूर था।।
आज मन मेरा इतना नर्वस था।
इतना तो बोर्ड एग्जाम के रिजल्ट
आने वाले दिन भी नहीं था।।
जो तुम अपने भैया के साथ
स्टेज पर जो आई।
एक पल के लिए तो
सारा ब्रह्मांड ही रुक गया था।।
और मेरी आँखें तो जैसे
तुम्हारे चेहरे पर ही जम गई थी।।
मानो जैसे कोइ सुंदर सी अप्सरा
धीरे धीरे चली आ रही हो
समीप मेरे।।
अगले क्षणों में
अपने होशोहवास सम्हालते हुए।
अपने नजरों को जरा विश्राम देते हुए।।
पर दिल
मेरा अब काबू से बाहर जा रहा था।
और बेशर्म आँखो को क्या कहना
वो तो छुप छुप कर
तिरछी निगाहों से
जासूसी किए जा रही थी।
और दिल को ठंडक पहुँचा रही थी।।
मेरा दिल खुशी से जम्प पे जम्प मारे जा रहा था
और मैं उस खुशी का लिमिट
आज भी नाप पाने में असमर्थ हूँ।।
माँ पापा और बहना को
थम्प्स अप करके
उनकी पसंद पर
अपना ठप्पा लगा दिया।।
और हमारा इंगेजमेंट हो गया।।

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