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भले आज हमारी पॉकेट खाली है।।

भले आज हमारी पॉकेट खाली है।
घर पर भी बदहाली है।।
खाने को राशन नहीं है।
और कपड़े नहीं हैं पहनने को।।


युवा भारत संभल जाओ।

युवा भारत संभल जाओ।
मातृभूमि के खातिर तो बदल जाओ।।
देश को तुम्हारी जरूरत है।
जरा आँखें खोल के देखो पास।।

दीमक बनकर खा रहे हैं।
देश के भ्रष्ट नेता और
कुछ गद्दार।।
केंद्र में खड़े होकर
देखो
कैसे उपद्रव मचा रहे हैं।।

अफ़ज़ल हम शर्मिंदा हैं
तेरे कातिल जिंदा हैं
के नारे
लगा लगा कर
कैसे असहिष्णुता फैला रहे हैं।।

भारत की पवित्र धरती पर
द्वेष का बीज बोए जा रहे हैं।।
अंग्रेजों के बनाए फॉर्मूले को
अब अपने नेता ही
हमपर अपना रहे हैं।।

अगर आज नहीं हम उठ खड़े होंगे।
तो कहीं शायद
कल हो जाएँ ना अपंग।।
फिर से लाखों कुर्बानियाँ देनी पड़ेगी।
कराना होगा अगर देश को स्वतंत्र।।

हिन्दू मुस्लिम सिख इसाई नहीं।
भारतीय हैं हम पहले आज।।
ब्राह्मण क्षत्रिय वैश्य शुद्रा नहीं
ना शिया,ना सुन्नी हैं हम।
हमें धर्म जाति में अब बाँटो नहीं।
हम बंध मुठ्ठी हैं अब।।
हम भारत में जन्में हैं।
हमें भारतिय कहलाने पर
होता है गर्व।।

जय हिंद।।
जय भारत।।
वन्दे मातरम।।


तेरी गोद में माँ

तेरी गोद में माँ
जब से मैं आया।।
खूब स्नेह और
भरपूर लाड़ प्यार पाया।।
धीरे धीरे लड़खड़ाकर
चलना सीख पाया।।
फिर अपने दोस्तों के संग
दौड़ भी लगाया।।
तेरी सोंधी मिट्टी का स्वाद
भी चख पाया।।
ऐसा एहसास हुआ उसदिन
अमरता का वरदान पाया।।
साईकल,मोटर साईकल
फिर कार भी चलाया।।
जब थक गया तो
तेरी वृक्ष के छाव में ऊंघाया।।
भूख जब लगी हमें
तूने खाना हमें खिलाया।।
प्यास जो लगी तो
तूने पानी से प्यास मिटाया।।
तुमसे ही मेरा वजूद है।।
तुमसे ही मेरी काया।।
चाहे जितने जन्म भी ले लूँ माँ।।
तेरा कर्ज रहेगा बकाया।।
माँ तुझे सत सत नमन।।

भारत माता की जय।।
वन्दे मातरम।।
जय हिंद।।


चुरा लें तुझे इस जमाने से कभी।

चुरा लें तुझे इस जमाने से कभी।
रख लें तुझे इसी बहाने से कभी ।

ले चलें तुझे कहीं इस दुनिया से बहुत दूर  ।
जहाँ सिर्फ तुम हो और तेरे संग निभाने को मैं ही।

ना हो उस जहाँ में तेरी कोई पहचान ।
और जहाँ मैं भी रहूँ सभी से अनजान ।

मुझसे ही हो पहचान तेरी ।
और तुझसे ही लोग जाने मुझे भी ।

हो छोटा सा कहीं अपना बसेरा ।
जहाँ हर रात के बाद हो तुझसे ही सवेरा ।

समय की परिधि की सीमा खत्म हो जाए।
जहाँ हम एक दूजे संग मिल प्यार के नगमें गुनगुनाएँ।

मुझमें कुछ यूँही समालो तुम स्वयं को ।
तुझमें कुछ यूँही बसालूँ मैं खुद को ।

बस यूँही!!!!
चुरा लें तुझे इस जमाने से कभी।
रख लें तुझे इसी बहाने से कभी ।

सत्यमेव जयते।।

जीवन में चाहे जितने उतार चढ़ाव हो।
कभी दिल खुश हो तो
कभी मन उदास हो।
हार जीत तो हमेशा लगी ही रहती है।
झूठ और सच्चाई में सदा तनी रहती है।
फर्क पड़ता है कि
आप किस तरफ खड़े हो।
क्योंकि
अंत में जीत सदा सच्चाई की  होती है।
सत्यमेव जयते।।
सत्यमेव जयते।।

झूठ का रास्ता
सदा सुहाना लगता है।
मन को हमेशा ही
लुभावना लगता है।।
वहीं
सच्चाई पर चलना
कांटो भरा होता है।
हर क्षण मुश्किलों से
सामना होता है।।
पर अंत में जीत सदा
सत्य की होती है।।
सत्यमेव जयते।।
सत्यमेव जयते।।

सतयुग से कलयुग में हम प्रवेश कर गए।
समय का चक्र
हमें कितना बदल दिए।।
लोग बदलें
उनके चाल चलन बदलें।
बदल गई उनकी सोच और सभ्यता।।
अगर कुछ नही बदला तो
वो बस
सत्यमेव जयते।।
सत्यमेव जयते।।
सत्यमेव जयते।।





बस यही होता आ रहा है।

बस यही होता आ रहा है।
निरंतर चलता जा रहा है।।
समय रहते कोई कदर नहीं करता।
मरणोपरांत ही क्यों जय जयकार होता है।।
आज जीवित है तो अभद्र व्यवहार।
हर वक़्त मिलती है यही लताड़।।
तुम निकम्मे हो
किसी काम के नहीं हो यार।
अरे भाई
कोई कितना सहेगा अत्याचार।।
मनुष्य है
कोई मशीन नहीं है।
कब तक कोई घुटन सहेगा लाचार।।
आज नहीं तो कल वो बेचारा।
सूली पर जान दे देगा लटक कर।।
फिर निकलेगी भीड़ मोमबत्ती लेकर।
उन्हें देने को श्रद्धांजलि।।
और भूला देंगे दो दिन में उन्हें।
अपने काम में व्यस्त होकर।।
पर सोचो
जिस घर का इकलौता चिराग
अपनों को
अंधरे में
धकेल कर चला गया हो।
क्या होगा उस माँ बाप का
जिनका बुढ़ापे की लाठी ही
गुम गई हो।।
क्या होगा उस पत्नी का।
जो अपने हमराही को
कहीं भीड़ में खो दी हो।।
क्या होगा उस बच्चे का
जो अछूता रह जाएगा
बाप के प्यार से।।

बस बस बस
बहुत हुआ अब।
अब कोई नहीं करेगा आत्मदाह।।
बहुत सह लिया अब तुमने।
आवाज़ उठाने का वक़्त आ गया है।।
दबे कुचले भावनाओं को मिटाकर।
शेर सा दहाड़ने का समय आ गया है।।
बहुत डर लिया इंसानों से।
अब दुनिया को मुठ्ठी में करने का वक़्त आ गया है।।

आ गया है।

आ गया है।

आ गया है।



किसी भी नारी का रविवार नहीं होता है।

किसी भी नारी का रविवार नहीं होता है।
सारे दिवस एक सा काम जरूर होता है।।
चूल्हे से शुरू
और चूल्हे पे ही
काम तमाम होता है।
घर के बड़े बुजुर्गों की जिम्मेदारियाँ
उनके हाथ में ही होता है।
अगर कोई अतिथि आ जाए
उनका इंतजाम भी उनके सर होता है।
सच बोलूँ तो
उनके पास काम बहुत सारा होता है।
किसी भी नारी का रविवार नहीं होता है।
किसी भी नारी का रविवार नहीं होता है।



आई लव यू पापा।।

आज फिर से वो दिन मुझे याद आ गए।।
पापा के द्वारा रटाए गए पहाड़े आज काम आ गए।।
भुला नहीं हूँ मैं वो बचपन के दिन।
शनि और रविवार को दोस्तों के साथ खेलते थे भरदम।।
तभी पापा एक शनिवार की रात ले लिया था हमारा टेस्ट।
बहुत कम अंक आने पर उन्होंने दे दिया था पनिशमेंट।।
पनिशमेंट से कभी टेंशन नहीं हुआ था उस दिन तक।
क्योंकि पनिशमेंट का हो गया था मैं मास्टर।।
कभी उठा बैठक
तो कभी छड़ी से पिटाई
कभी धूप में खड़ा किया
तो कभी हाथ उठा कर खड़ा किया
इन सभी पनिश्मेन्ट की हो गई थी हमें आदत
जिनसे रोज मुलाकात होती थी
हमें स्कूल में जाकर।।

रविवार के दिन निकला था हाथ में बॉल लेकर
पापा वहीं खड़े थे छड़ी हाथ में तानकर।
कहाँ जा रहे हो?
ज़रा इधर तो आ जाओ।।
एक से दस तक का पहाड़ा तो सुनाओ।।
पापा आज मैच है।
ज़रा सा खेल के मैं आऊँ।।
उसके बाद मैं आपको
वो पहाड़ा को सुनाऊँ।।
बेटा मैं तेरा बाप हूँ
नहीं हूँ तेरा बेटा।
बेवकूफ़ किसी और को बनाना
पहले सुना दे मुझे पहाड़ा।।
फिर क्या था?
हर रविवार खेलता था मैं
पापा के साथ पहाड़ा।
पापा के कारण ही
आज मुकाम ये हासिल कर पाया।।






(आई लव यू पापा।।)








रग रग हमारा करे पुकार।।

रग रग हमारा करे पुकार।
भारत माता की हो जय जयकार।।
रक्त के कतरा कतरा का यही दरकार।
हर बून्द से तेरी वजूद का रखेंगे ख्याल।।
जब कभी तेरी स्वाभिमान पर उठेंगें सवाल।
तेरी गरिमा के लिए
हम दे देंगे अपनी जान।।
देश भक्ति की भावना से
सींचेंगे हम अपना जहाँ।
सभी राष्ट्रों में अब्बल होगा
हमारा प्यार हिंदुस्तान।।

वन्दे मातरम
जय किसान
जय विज्ञान
जय जवान

तू भले ही दूर रहै हमसे।

तू भले ही दूर रहे
हमसे।
पर हमेशा तू पास रहेगी
मेंरे दिल के।।
तू जो साँस ले रहा है
वहाँ पे।
दिल मेरा धड़क रहा है
यहाँ पे।।
तू जो खुश है वहाँ पे।
मेरे चेहरे पर सुकून है
यहाँ पे।।
तू जो गमगीन है वहाँ पे।
मेरे अश्रुओं को छिपाए हुए हूँ
मैं यहाँ पे।।
हर घड़ी बस यही दुआ है
रब से।
तेरी खैरियत बनी रहे सदा
इस जहाँ में।।



हर दिल यहाँ प्यार का भूखा है।।

हर दिल यहाँ प्यार का भूखा है।
छोटों से लेकर बड़ो तक
अमीर से लेकर गरीब तक
हर कोई यहाँ प्यार का भूखा है।
एक स्वीपर जो सुबह सुबह
आपके गली में झाड़ू मारता है।
आपके गली
आपके आसपास को साफ रखता है।
प्यार से दो शब्द बोल दो उसे।
थैंक यू सर।
जो उसका हक है।
उसका दिल गद गद हो जाएगा।
और अपने काम के प्रति उसकी निष्ठा जागेगी।।

हर दिल यहाँ प्यार का भूखा है।
छोटों से लेकर बड़ो तक
अमीर से लेकर गरीब तक
हर कोई यहाँ प्यार का भूखा है।
एक मातहत
जो आपके आफिस में काम करता है।
सुबह से शाम तक
अपने जीवन के हर दिन के
आठ घँटे आपको समर्पित करता है।
और अगर आप प्यार से शाम में
दो शब्द उसे बोल दें।
थैंक यू।
जो उसका हक है।
फिर देखिए अगले दिन
आपके मातहत का समर्पण।

हर दिल यहाँ प्यार का भूखा है।
हर दिल यहाँ प्यार का भूखा है।


तुम्हारे साथ होने पर

तुम्हारे साथ होने पर
समय का कुछ भी
पता ही नहीं चलता है।
सेकंड मिनट में और
मिनट कब घंटों में
तब्दील हो जाते हैं।
कुछ भी भनक नहीं पड़ता है।
ना ही भूख लगती है।
और ना ही प्यास लगती है।।
बस एक दूसरे की झील सी आँखों में
डूबे रहने का मन करता है।।

तुम हमें
और
हम तुम्हें
बातों का गुलदस्ता बना
यूँही देते रहें।
यादों का झूला बना
हम तुम
उसपे झूलते रहें।
कभी तुम मुझे झुलाओ
कभी हम तुम्हें  झुलाएँ।
ये सिलसिला
यूँही बस चलता रहे।।

प्यार भरे मौसम में
मोहब्बत की बरसात बस होती रहे।
हम और तुम
इश्क़ की बूंदा बाँदी में
यूँही भींगते रहें।
और एक दूसरे में
अपनी खुशी को
हम तलाशते रहें।।



अटल बिहारी वाजपेयी।।

कमाल की सादगी
मृदुल भाषी
दुश्मनों से भी दोस्तों सा व्यवहार
देश के लिए सदा सोचने वाले
खुले आसमान सा हृदय रखने वाला
हिमालय सा दृढ़ विश्वास रखने वाला
हर किसी को साथ लेकर चलने वाले
अपनी कविताओं से सकारात्मकता फैलाने वाला
और कोई नहीं
हमारे श्री अटल बिहारी वाजपेयी जी को भावभीनी श्रद्धांजलि।।

जय जवान
जय किसान
जय विज्ञान

सच कहना यारों।।

सच कहना यारों।
आजकल के बच्चे
बच्चे नहीं
बल्कि सबके बाप
निकल ले रहे हैं।।
बाप को अपने मोबाइल की
पूरी टेक्नोलॉजी पता हो
ना हो।
बच्चे को सारा कुछ पता है।।
सारी दुनिया को उसने
अपने छोटे सी,नन्ही सी मुठ्ठी में
बन्द कर रखा है।।

बीवी पूछती है पति से
क्या अपने बिजली का बिल भरवाया?
पति परेशान हो बोलता है।
अभी कहाँ समय है पाया।।
बेटा वहीं सुन रहा वार्तालाप में
तपाक से सर घुसाया।
पापा आप परेशान क्यों होते हैं?
लाइए बिल ऑनलाइन हम भर देते हैं।

तो आजकल के बच्चों के क्या कहने
बिना कोई डिग्री और
बिना कोई प्रोफेशनल कोर्स किए
अपने बी टेक होल्डर बाप को पढ़ा रहे हैं।।
सच कहना यारों।
आजकल के बच्चे
बच्चे नहीं
बल्कि सबके बाप
निकल रहे हैं।।



कुछ लोग मच्छर की तरह होते हैं

कुछ लोग मच्छर की तरह होते हैं।
देखते ही मारने का मन करता है।।
वो खुद तो नकारात्मक होते ही हैं।
हर जगह नकारात्मकता फैलाते हैं।।
खुद ही वो हताश रहते हैं।
और दूसरों को निरुत्साहित करते रहते हैं।।
चाहे जितना भी सकारात्मक आयोजन हो।
पर उसमे भी वो नकारात्मकता तलाशते हैं।।
कुछ लोग मच्छर की तरह होते हैं।
देखते ही मारने का मन करता है।।

सोच

कितना जिएँगे हम?
किसने जाना है?
कैसे जी रहें हैं हम?
सभी देख रहे हैं।।
भूत में ना भविष्य में।
अगर जीना ही है तो
जियो वर्तमान में।।
जो बीत गया
उसे बदल सकते नहीं।
आने वाले कल के लिए
वर्तमान में कार्य कर सकते हैं हम।
पर हम अपने अलबेले सोच से लाचार हैं।
कभी हमें भूत की गोद में
ले जाकर पटकता है।
और दकियानूसी ख्याल बनाता है।
तो कभी हमें भविष्य के कँधे
पर चढ़ा कर छोड़ आता है।
और ख्याली पुलाव बनाता है।।
वर्तमान को जितना है तो
सोच के जंजीर को तोड़ना
आना पड़ेगा।





हम तुम

हम तुम
तुम हम
कितने खुश रहते हैं।
जब हम एक साथ होते हैं।।
समय का पहिया
थम सा जाता है।
प्यार का नगमा
दिल गाता है।
एक पल में
कई सदियों की खुशी
सहेज कर
रखने का मन करता है।।
तुम्हारी हँसी, तुम्हारी खुशी
तुम्हारी नजाकत भरी अदाएँ।
कितना मनोहर लगता है
मन को।
जैसे सूने आसमान को मिल गया हो
सतरंगी इंद्रधनुष का साथ।।

वन्दे मातरम!!

बड़ा भाग्यशाली हूँ माँ
जो तेरे कोख से जन्म लिया था।
ईश्वर से बस यही दुआ
हर रोज किया करता हूँ।
अगर कभी जन्म लूँ धरती पर
तेरे कोख से ही जन्म लूँ माँ।।

बचपन की यादें कुछ धूमिल हो गई हैं।
पर जेहन से एक बात
आज तक नहीं हट पाई है।।
पड़ोस में राम चाचा का
पार्थिव शरीर जो आया था।
सरहद पर शहीद हुए थे वे
दुश्मनों से दो दो हाथ लिया था।।
सारा गाँव
सारा कस्बा की छाती
गर्व से चौड़ी हो गया था।
आँखों से आँसूओं का
सैलाब बह निकला था।।
तभी माँ आप मेरे सिर पर
हाथ फेर कर कुछ कहा था।
बेटा तुम भी फौज में जाना
भारत माता को तुम्हारी जरूरत है।।

आज एक बात मैं
आपसे करना चाहता हूँ।
पर एक वादा चाहता हूँ आपसे
आँखे नम नहीं होने देंगे आप।।
आज सुबह आतंकियों ने
हमारे टेंट पर हमला किया था।
हमने भी जवाबी हमला करके
उन्हें ढेर वहीं किया था।।
जवाबी कार्यवाही में दो गोली
मुझे भी आकर लग गई थी।
एक गोली छाती में अटकी थी
दूसरी गोली कंधे में जा घुसी थी।।
बड़ा मीठा मीठा दर्द हो रहा था
साँस भी धीरे धीरे
मेरा साथ छोड़ रही था।।
तभी मुंह से दो शब्द
निकल पड़े अनायास ही ।
वन्दे मातरम!!
वन्दे मातरम!!
बहुत तेज़ प्रकाश हुआ
और प्रकाश के बीच से निकली एक देवी।
तिरंगा साड़ी पहने हुई थी
हमारी प्यारी
भारत माता।।
माँ आकर बैठ गई समीप
रखा सिर अपने गोद में।
बालों पर जो हाथ फेरा उन्होंने
पता नहीं कब आ गई नींद।।

जय हिंद
जय भारत
वन्दे मातरम
जय जवान
जी किसान







हमारे पहरेदार तैनात हैं।।

धूप हो
बरसात हो
दिन हो या रात हो
देश की रक्षा के लिए
हमारे पहरेदार तैनात हैं।।

हिमालय सा दृढ़विश्वास लेकर।
हाथ में हथियार लेकर।
दुश्मनों से दो दो हाथ
करने के लिए
हमारे सैनिक तैयार हैं।।

हमारी आज़ादी सलामत रहे।
देश की अखंडता बरकरार रहे।।
देश हमारा प्रगति करे।
लोग यहाँ खुशहाल रहें।।
हमारी खैरियत के वास्ते
फौज बहा रहीं हैं खून वहाँ।।

देश की सेवा करते करते
कुछ सैनिक शहिद हो जाते हैं।
उनके पार्थिव शरीर तिरंगे में
लिपटकर घर पर जब आते हैं।।
सारा गाँव
सारा देश
देशभक्ति से ओतप्रोत हो जाता है।
हर घर से माँ
अपने बच्चे को
देश के लिए तैयार करती है।।
सरहद की रक्षा के लिए
देश को अपना पूत समर्पित करती है।।

जय हिंद
जय भारत
जय जवान
जय किसान
जय विज्ञान








हम हैं हिंदुस्तान के।।

हम ना बिहार के
ना ही हम गुजरात के।
ना ही हम बंगाल के
और ना ही हम महाराष्ट्र के।
हम हैं भारतीय
हम हैं हिंदुस्तान के।।

ना ही हम हिन्दू हैं
ना ही हम मुसलमान।
ना ही हम सिख हैं
ना ही हम इसाई।
हम हैं मानव
मानवता ही हमारा धर्म है।।

हम भारतीयों की कुछ बात खास है।
हमारी संस्कृति भी सभी से लाजवाब है।।
घर पर आए अतिथि
हमारे लिए भगवान है।
सारी पृथ्वी
हमारा एक परिवार है।।

आज जबकि हरेक की
जीवन शैली आधुनिक है।
हम भारतीयों का जीवन
परंपरा और मूल्यों के
आधार पर चल रही है।।

अपनी पुरानी सभ्यता पर
हमें बड़ा अभिमान है।।
गौतम बुद्ध और महावीर जैन आकर
हमें राह दिखा रहें हैं।।








भारतीय होने पर हमें गर्व है।।

हमारी संस्कृति का विश्व धरातल पर उच्चतम स्थान है।
अतिथि देवो भवः और वसुधैव कुटुम्बकम पर
हमें सदा अभिमान है।।
अनेकता में एकता के लिए
हम विश्व विख्यात हैं।
मुस्लिम फटाखे फोड़ते हैं दीवाली में
और हिन्दू ईद मुबारक कहते हैं ईद में।
'अहिंसा परमो धर्म' के भाव वाले
ऐसे राष्ट्र में जन्म लेना
हमारा सौभाग्य है।।
स्वयं में सम्पूर्ण को समेटे हमारी संस्कृति महान है।।
हमारी संस्कृति महान है।।
जय हिंद।।
जय भारत।।

आ जाओ माँ

आज जब भी तकलीफ़ होती है।
दुनिया की बातें कचोटती है।।
घर बाहर
हर जगह से
जब
केवल तनाव ही महसूस होती है।।

बहुत याद आती हो माँ
जब तुम ढाल बनकर बीच
में आती थी।
मेरे अंदर के आत्मविश्वास को
पुनः तुम
श्री कृष्णा बनकर जगाती थी।।
और मैं अर्जुन उठ खड़ा होता था।
दुनिया से लोहा लेने को।।

आ जाओ माँ
आ जाओ फिर से
बहुत याद तुम्हारी आती है।।
आज फिर से अर्जुन दुविधा में है
फँस कर अपने ही चक्रव्यूह में।।

हे ईश्वर!

हे ईश्वर!
आप मुझे सामर्थ्य बना दो।।
अपना नहीं।
दूसरों के सपनों को पूर्ण कर सकूँ
इतना योग्य बना दो।।

बेरोजगारों को रोजगार दिलाकर
उनका पेट पाल सकूँ।।

किसानों को उनके फसलों का
सही मूल्य दिला सकूँ।।

दुनिया के अराजक तत्वों को
सही राह दिखा सकूँ।।

हर मानव के दिल में
प्यार इश्क और मोहब्बत के
जज़्बात जगा सकूँ।।

हर कोई निःस्वार्थ होकर
हर दूसरे की मदद करे
ऐसा संसार बना सकूँ।।

जरूरतमंदों का पेट भर के
जो अपना पेट भरे
ऐसे भाव जगा सकूँ।

प्रतिस्पर्धा का भावना को छोड़कर।
सबका साथ
सबका विकास
के भावना को अपनाने
सभी मानव में दृढ़ निश्चय करवा सकूँ।।

हर मानव के मन के
सकारात्मक सोच के रोशनी से
सारे ब्रह्मांड को जगमगा सकूँ।।

हे ईश्वर!
आप मुझे सामर्थ्य बना दो।।
अपना नहीं।
दूसरों के सपनों को पूर्ण कर सकूँ
इतना योग्य बना दो।।







जिम्मेदारियाँ हमेशा ख्वाहिशों पर भारी पड़ जाती हैं।।

बचपन में ही
जिम्मेदारियों से मेरे कँधे झुक गए थे।
मम्मी पापा के कंधे तो हमारी जिम्मेदारी लेकर झुक गया।।
सारी ख्वाहिशों को ताख पर रख कर
मेरी भविष्य को साकार करने में जुट गए।।
आज जो कुछ भी बन पाया हूँ
उन ख्वाहिशों के कुर्बानी के कारण ही पाया हूँ।।
ख्वाहिशें तो मेरी भी थी।
मेरे पापा मुझे कार में स्कूल छोड़ने आए।।
पर उसके लिए
घर पर कार तो होनी चाहिए।।
पापा का मिडिल क्लास जॉब
स्कूल फीस मुश्किल से जुट पाता था।
पर वे अपना सपना भूलकर
हमारा भविष्य बनाने में लग गए।।
क्या इतना काफी नहीं था?
मेरा भी उनके बारे में सोचना।।
अब मेरी जिम्मेदारी थी कि
ज्यादा उन पर बोझ ना बनूँ।
अपनी जिम्मेदारी समझकर
उनके ख्वाहिशों को पूर्ण करूँ।।





कैसी रात थी वो।।

कैसी रात थी वो।।
हम जब पहली बार मिले
कितना कंफ्यूज था।।
कितना नर्वस था।।
तुम्हें जो अभी तक देखा नहीं था।।
माँ बाबू जी ने
तुम्हारी नाक नक्श का तो कुछ ज्यादा ही बखान किया था।।
मेरी बहना भी कहाँ पिछे थी।
तुम्हारी सुंदरता की बड़ाई करते नहीं थकती थी।।
मुझे
पर बड़ा मन था ।।
इंगेजमेंट के पहले तुमसे एक बार मिल लूँ।
और तुम्हारे सुंदरता को मैं भी जरा आंक लूँ।।
पर ईश्वर को कुछ और ही मंजूर था।।
आज मन मेरा इतना नर्वस था।
इतना तो बोर्ड एग्जाम के रिजल्ट
आने वाले दिन भी नहीं था।।
जो तुम अपने भैया के साथ
स्टेज पर जो आई।
एक पल के लिए तो
सारा ब्रह्मांड ही रुक गया था।।
और मेरी आँखें तो जैसे
तुम्हारे चेहरे पर ही जम गई थी।।
मानो जैसे कोइ सुंदर सी अप्सरा
धीरे धीरे चली आ रही हो
समीप मेरे।।
अगले क्षणों में
अपने होशोहवास सम्हालते हुए।
अपने नजरों को जरा विश्राम देते हुए।।
पर दिल
मेरा अब काबू से बाहर जा रहा था।
और बेशर्म आँखो को क्या कहना
वो तो छुप छुप कर
तिरछी निगाहों से
जासूसी किए जा रही थी।
और दिल को ठंडक पहुँचा रही थी।।
मेरा दिल खुशी से जम्प पे जम्प मारे जा रहा था
और मैं उस खुशी का लिमिट
आज भी नाप पाने में असमर्थ हूँ।।
माँ पापा और बहना को
थम्प्स अप करके
उनकी पसंद पर
अपना ठप्पा लगा दिया।।
और हमारा इंगेजमेंट हो गया।।

तुम्हें जब भी वक्त मिले तुम चले आओ।।

तुम्हें जब भी वक्त मिले
                     तुम चले आओ।।
अगर वक्त ना मिले
                      इतलाह हमें जरूर कर जाओ।।
तुम्हारी राह में हर घड़ी
                       ताकती रहती है ये अँखिया।।
तुम्हारी अक्स के दीदार में
                       धड़कता रहता है दिल हर पल।।
वो पल,वो घड़ी
                      कितनी अनमोल होती है मेरे लिए।।
जिस वक्त
              तुम होते हो मेरे साथ में।।
पूछो मेरे दिल से
                      जो अभी बहुत बेचैन था तुम्हारी यादों में।
हमारी आँखों के मिलन से ही
                      कैसे ठंडक मिली है मेरे हृदय को।।

लोग कहते हैं।।

लोग कहते हैं
बिन जान पहचान के
कोई आपसे बात नहीं करता है।।
पर हमारी पहचान कब हुई
कि हम लिखते गए
और आप हमारी बात समझते गए।।
आप हमसे
और हम आपसे
कब जुड़ गए।।
और हमारा कारवाँ
कब निकल पड़ा
अपने मंजिल के तलाश में।।
भावनाओं के तार हमारे
कब जुड़ गए
कि हम
बिन कहे सुने ही
एक दूसरे के दिल को
चुटकियों में समझने लगें।

मैं जितना भी दूर तुमसे होता चला जाऊँ।।

मैं जितना भी दूर
तुमसे होता चला जाऊँ।
उतना ही मैं खुद को 
तेरे पास पाऊँ।।
मैं कहीं भी रहूँ।
किसी भी कोने में जा बस जाऊँ।।
मेरे नाफरमानी सोच को ।
कहाँ से रोक पाऊँ।।
भरी महफ़िल में लोग हमसे
पूछ पूछ थक जाएँ।
खोए खोए रहते हैं बहुत
कुछ बात है तो बताएँ।।
मेरी जो अवस्था है
मैं क्या उनसे बताऊँ।
हर क्षण डूबा रहता हूँ
तेरे सुनहरे यादों में प्राणप्यारे।।

पुरुष होने की लाचारी

शादीशुदा हूँ यारों।
ऊपर से पत्नीव्रता।।
कल ही टीवी पर
आई थी एक खबर।
चार महिलाओं ने मिल
लूटी थी एक अबला पुरूष की इज्जत।।
घर से बाहर निकलने में भी
अब लगता है बड़ा डर।
पता नहीं
कहाँ पे भेड़िये घात लगाकर बैठे हों
लूटने को हमारी इज्ज़त।।

जहाँ भी जाता हूँ।
पत्नी पीछे से चली आती हैं।।
आखिर हूँ तो एक सुंदर पुरूष ना।
और हमारी जीवन भर रक्षा करने की
उन्होंने कसम जो खाई है।।
जमाना बहुत ही खराब हो गया है यारों।
वो तो धन्य है ईश्वर का
जो इस जन्म में हमने ऐसी पत्नी पाई है।

मैं खामोश बैठा था अपने तस्व्वुर में

मैं खामोश बैठा था अपने तस्व्वुर में।
कुछ नया विषय मिल जाए मुझे
लिखने को।।
तभी खुले बीच पर जाकर लेटा
उन रेतों पर।
जहाँ सागर की लहरें उठ रहीं थी
कुछ कहने को।।
मानो कह रहीं हों
ज़रा पास आ जाओ आज।
बहुत अकेला महसूस कर रहीं हूँ
मेरे कोई नहीं है पास।।
मैंने पाया कि
लहरें होने लगी हैं विक्राल।
मानो वो बस हमें
अपने हृदय की गहराई में
समाने को है तैयार।।
सागर का भयावह रूप देख
मेरे रोंगटे खड़े हो गए।
निकल भागा कल्पना की मृगतृष्णा से
जो मुझे निगलने को तैयार हुई।।

मानवता के छाव तले।।

मानवता के छाव तले।
कोई ऐसा जहाँ हम बनाए।।
प्यार के बरसात के सावन में।
भींग भींग
हम मन्द ही मन्द मुस्काए।।

खुशियों की गुलदस्तों से।
झोली सब की भर भर जाए।।
हर दिल आनंद में हो।
क्यों ना इस पल को
साथ मिलकर जी जाएँ।।

सारी सृष्टि पुलकित हो उठी हो।
काक भी मधुर स्वर में गीत गाए।।
जिसे देखो
बस खुल के जी रहा हो।
हर पल में खुशियों को
सिंच रहा हो।।

हम भी कोई भेद ना पालें।
दिल मे कोई द्वेष ना राखें।।
बस प्यार ही प्यार हो
एक दूजे के लिए।
क्यों ना
हम तुम मिलकर
खुशियों भरा एक बगिया बना लें।।


उठने लगे हैं सवाल

उठने लगे हैं सवाल
आज हमारी वजूद पे।
कहीं हम गुम तो नहीं हो गए हैं।
भरे इस महफ़िल में।।
हर जगह चकाचौंध है
पैसे और हैसियत वालों की।
जिसे देखो बस गुमान में है
अपने औकात के रसूख में।।
मैं ठहरा कवि।
प्रेम और भाईचारे के
भावनाओं से ओतप्रोत।।
मुझे भी बुला लिया।
किसी रसूख वाले ने प्रेम से।।
मैं पहुँचा उनके महफ़िल में।
बड़े ही अदब से।।
सूट डाल पहुँचा था।
ब्रांडेड रेमंड से।।
मेरे संग पहुँचे थे
कुछ और कवि भाईजान।
जान लगा डाली थी
जिन्होंने
रसूखदारों के लिए
कविता बनाने में।।
हमने ज़मीर खो दी है आज।
रसूखदारों के खजाने से।।
क्या हम वाकई जिंदा हैं।
अंतःकरण के दब जाने से।।


अपनी सफलता पर इतना भी मत इतरा।

अपनी सफलता पर इतना भी मत इतरा
ए बन्दे।
पता नहीं
कितनों की दुआओं का असर है ये।।
तू तो समझता है
अकेले तेरी मेहनत ने करिश्मा कर दिखाया है।
यहाँ तेरी माता ने
पता नहीं कितना उपवास और
कितना पूजा-पाठ
तेरी सफलता के लिए करवाया है।।
तेरे पिता ने भी पता नहीं
कितने पसीने बहाएँ हैं।
दो दो शिफ्ट कर के
तेरे एड्मिसन फ़ीस और क़िताबों के
खर्चे उठाएँ हैं।।
तेरी सफलता पे
तेरे माता पिता का
उतना ही हक़ है।
तू जानता है
उनके बिना शामिल हुए
तेरी खुशियाँ निरर्थक है।।

भविष्य का सोच सोच कर।।

भविष्य का सोच सोच कर।
वर्तमान को खराब कर रहा है।।
हर मनुष्य अपने आदत से।
अपना आज बर्बाद कर रहा है।।
कल वह काम कैसे होगा?
अगर हुआ
तो सब कुछ अच्छा हो जाएगा।
अगर नहीं हुआ तो फिर क्या होगा?
कल की क्या परिस्थिति होगी?
कल का किसने देखा है?
आज के खुशनुमा माहौल को छोड़।
कल में खुशियों को क्यों ढूंढ रहा है।।

अहंकार को त्याग दो

अहंकार को त्याग दो।
और भावनाओं को बहने दो।।
एक दो पग हम चलें आगे।
तुम पीछे-पीछे हमारे हो लो।।
कुछ होंगे दुख भरे पल।
जिसे सिंचा होगा अपने अश्कों के धारा से।।
कल हमारे आँखों में नमी थी।
आज तुम अपने आँसुओं को ना थमने दो।।
फिर कुछ तो होंगे कुछ खुशी भरे पल।
जिसे पिरोया गया होगा उल्लास के मोतियों से।।
जो आनंद और हर्ष कल हमने अपने दिल में महसूस किया था।
आज तुम उस खुशी को अपने चेहरे पर झलकने दो।।
कवि हूँ ना यारो।
अपनी भावनाओं का तुम्हारे भावनाओं से मिलाप करवाने दो।।
अहंकार को त्याग दो।
और भावनाओं को बहने दो।।

गुरु वाचाल।।

मैं अवगुण दूसरों की बताता रहा।
दूसरों को सदाचार सिखाता रहा।।
मानो मैं सर्व गुण निपुण हो।
और दुनिया सारी दुर्गुणों से भरी ।।
आत्मसुख बड़ा मिलता है।
दूसरों को सही राह दिखाकर।।
गुरु बनना आसान है।
पर उतना ही मुश्किल है
सही राह पर चल पाना।।
आज मैं भी भटक गया था।
तभी मुझे भी मिल गएँ एक गुरु वाचाल।।
और दिया भाषण बड़ा सा।
और कराया मेरे अवगुण से मुझे अवगत।।
फिर मैंने जब झाँका स्वयं में।
पाया खुद को अवगुणों का भंडार।।
फिर क्या
पहले खुद को सुधारने का मैने किया प्रण।
वरना गुरू बन नहीं दूँगा किसी को प्रवचन।।

लोग कहते हैं

लोग कहते हैं ।
आप बहुत सीधे हैं।।
जरा सा टेढ़े हो जाएँँ।
वरना लूट जाएँँगे कभी।।
में सोचा
मैं तो ठहरा कवि।
मेरे पास मेरी सोच है।।
जो देशभक्ति,भाईचारे,और प्यार के भावनाओं से ओतप्रोत है।।
बड़े बुजुर्गों के आशीष है।
छोटों का प्यार है।।
अगर कोई लूटेगा भी
तो मेरे विचार ही लूटेगा ना।
लूटने दो।।
अभी अकेला ही अपने  विचार की
धारा को फैला रहा था।
बाद में हम मिलकर अपनी सोच को लोगों तक पहुंचाएँँगे


और लोगों के जीवन को सरल बनाएँँगे।।

मेरे हमसफ़र।।

तेरा साथ चाहिए।
जीवन के हर मोड़ पर।।
बिन तेरे मुश्किल है।
एक कदम बढ़ाना।।
कैसा भी सफ़र हो।
कितने भी मुश्किलें हों राह में।।
हर सफ़र सुहाना सा हो जाता है  ।
जो तेरा साथ नसीब हो जाता है मेरे हमराही।।
मेरे पग एक पल के लिए डगमगा से जाते हैं।
जो तू कभी आँखों से ओझल जो हो जाता है मेरे समारोही।।
कभी तू मेरा साथ ना छोड़ना ।
वरना मैं कहीं गुम ना हो जाऊँ इस भीड़ में मेरे हमसफऱ।।

माँ! कहाँ हो माँ?

माँ आपके गोद में
जन्नत सा महसूस होता था
जितनी भी तनाव रहे हृदय में
छू मंतर सा हो जाता था
यहाँ अकेला दूर आपसे
आपकी कमी महसूस बहुत करता हूँ
तनाव तो इतना है यहाँ पे
सर फट फट सा जाता है
कितना भी मरहम और दवाई लेलूँ
चैन नहीं अब दिल को आता है
आ जाइए माँ 
आ जाइए फिर से
अपने लल्ले को गोद में सुलाने को
वरना मैं निकलता हूँ 
इस जहाँ से
ईश्वर के गोद में सो जाने को।

इंसान हूँ

इंसान हूँ।
इंसानियत से हमें जीना सीखने दो।।
दो पल की है
ये जिंदगी।
इसमें मिठास भरने दो।।
बेरंग सी जीवन को।
खुशियों के रंगों से रंगने दो।।
हर कष्ट से लाचार जिंदगानी से।
दुख के बादल को छांटने दो।।
मानव को मानवता से।
आज मिलाप करवाने दो।।
हर दिल में
एक दूसरे के लिए।
प्यार इश्क़ और मोहब्बत के
जज्बात को जगाने दो।।
इंसान हूँ।
इंसानियत से हमें जीना सीखने दो।।

हम कवि हैं

हम कवि हैं
हमारे भावनाओं को बहने दो
हम आजाद गगन के पंक्षी हैं
हमें मस्त नीले अम्बर में उड़ने दो
हम आज की आवाज़ हैं
हमें हर धड़कन में धड़कने दो
हम लोगों के जज्बात में हैं
हर सपने को सार्थक करने दो
हम देश की आवाज में हैं
हर देशवासियों के दिल में देशभक्ति भरने दो
हम हर माँ के आशीर्वाद में हैं
हर बच्चे की तक़दीर हमें बदलने दो
हम कवि हैं
हमारे भावनाओं को बहने दो



आज हमारा मन बहुत उचाट पड़ा है

आज हमारा मन बहुत उचाट पड़ा है
कहीं घूम कर आएँ हम।।
कोई नई फिल्म आई क्या थिएटर में
जरा समाचार पत्र को पलटाए हम।।
संजू कैसी फिल्म है
जरा आलोचकों को पढ़ जाएँ हम।।
अच्छी आलोचना मिली है इसको
तो चलो फिल्म देखकर आएँ हम।।
पहुँचे थिएटर खरीदें टिकट
साथ में आलू चिप्स और एक ठंडा भी लिए।।
ट्रेलर खत्म हुआ,फिल्म शुरु हुई
रनवीर कपूर की एन्ट्री आई जो।।
पूरा ठिएटर सीटीयों से गूँज गया
क्या खूब संजू की नकल निकाली वो।।
कब शुरू और कब समाप्त हो गई
समय का पता नहीं चल पाया था।।
पूरी फिल्म में एहसास हुआ यों
खुद संजय दत्त ने अभिनय निभाया था।।
मन जो उचाट था सुबह में
सकारात्मक उर्जा से अब भर आया था।।

इसलिए अभी तक तू जिंदा है।।

प्रकृति हमारी माता है
बिन सोचे,बिन समझे
हमारे कर्मों को वो उठाती हैं।।
क्योंकि वो हमारी माता है ना।।

कभी हम वृक्षों को काट देते हैं
तो कभी उपजाऊ जमीन पर अपने लिए आशियाना बनवा लेते हैं।।
बिना भविष्य सोचे
बस अपनी सहुलियत के लिए
माँ को लहुलुहान कर देते हैं।।
माँ सहती रहती है
क्योंकि वो हमारी माता हैं ना।।

कब तक
कब तक माँ मितभाषी बनकर
हमेशा हमें सचेतती रहेगी।।
आँधी-बवंडर,भूकंप-ज्वालामुखी से
कब तक हमें सहेजती रहेगी।।
हमारे गलतियों को अनदेखी कर करके
कब तक अपने गोद में सुलाती रहेगी।
माँ को हमने जख्म दे देकर
उनके घाव को फिर से कुरेदा है।।
अब तो जरा संभल जा रे बंदे
माँ है
इसलिए अभी तक तू जिंदा है।।

जान से प्यारे हो आप

जान से प्यारे हो आप
दिल के चहिते हो आप।।
आपके पास रहने से
हर मुश्किल से मुश्किल घड़ी
बड़ी सुगमता से कट जाता है यों।।
मानो कि पिछले जन्म में
हमने कुछ अच्छे कर्म किए होंं
जिसके फल स्वरूप इस जन्म में मिले हो आप।।
जीवन धारा के मझधार में
ऊतार चढ़ाव तो भरा हुआ होता ही है।।
पर आप जैसा नाविक मिल जाए तो
किनारे तक पहुँचना बड़ा सहज हो जाता है।।

हर कोई हो रहा है यहाँ डिप्रैशन का शिकार।।

हर कोई हो रहा है यहाँ डिप्रैशन का शिकार।।
क्या शिक्षक,क्या बैंकर
जिसे देखो बस अंदर ही अंदर
वह घूट रहा है।।
जी रहा है मसला मसला
सभी लोगों में वह पिछड़ा पिछड़ा।।
हिनता की भावना दिल में लिए
मानो कूचला हुआ हो
किस्मत का मारा।।
कोई भी यहाँ संतुष्ट नहीं है
दिल में किसी के सुकून नहीं है।।
किसी को गाड़ी घोड़ा चाहिए
तो कोई बंगले के लिए है परेशान।।
हर किसी के चेहरे से गुम हो गई हँसी
कोई ढूंढ कर लादे उसकी खोई हुई खुशी।।
अगर ऐसी ही स्थिति बनी रही हमारी
शायद ही कोई मनुष्य बचेंगे
जिनमें नहीं होगी कोई बिमारी।।
इसलिए हँसना सीख ले मेरे भाई।।

मुझे अपने रंगों में मिला ले मौला।।

चैन चला गया
नींद चली गई
ना खाने का होश है
ना पीने का होश है
बस किसी की यादों में
सारा दुनिया को भूला दिया ।।
बस उनकी एक झलक पाने को
हमारा दिल यों तड़प रहा ।।
जैसे कि किसी मछली को जल से
बाहर निकाल दिया हो।।
ख्वाहिश अब फकीरे दिल की बाकी कुछ रही नहीं
मानो मौला को पा लिया हो उसने
उस शक्शियत में।।
जहाँँ भी नजर पड़ी है
अक्स उनकी वहींं नजर आई है।।
ईश्वर से हमने बस यही दुआ की है 
खुशियाँँ उनकी सलामत रहे हमेशा
बाकी दुख दर्द सारे
हमारे नसीब में आ जाए।।
या तो मेरी जान से मुझे मिला दे
या मुझे अपने रंगों में मिला ले मौला।।








पानी की मोटी मोटी बूँदें

पानी की मोटी मोटी बूँदें
जब हमारे गालों को छू जाती है।।
ऐसा एहसास होता है
मानो कूदरत ने हमें चूम लिया हो।।
जब ठंडी ठंडी हवाएँ
हमारे बदन को सहलाती है
ऐसा एहसास होता है
जैसे मानो पूरे शरीर में ताजगी भर गई हो।।
जब खुले आसमान के तले
हम तन्हा तन्हा बैठे आघाते हैं
और फिर दूर से टिमटिमाते तारें
मानो हमें नजर मार जाते हैं।।
ऐसा आभास होता है
जैसे मानो कि कोई दोस्त ने चिढ़ाया हो।।
समुंद्र तट पर लहरें जो
हमें छूकर वापस जाती है।।
ऐसा एहसास होता है
जैसे मेरी महबूबा
अपने आगोश में मुझे बुलाती हो।।
और अपने सारे गहरे दफन राज को
मुझे बताना चाहती हो।।


जीत अपनी पक्की कर।।

जीत अपनी सुनिश्चित कर
कुछ करना है, तो डटकर चल,
           थोड़ा दुनियां से हटकर चल,
लीक पर तो सभी चल लेते है,
          कभी इतिहास को बदलकर चल,
बिना काम के मुकाम कैसा ?
          बिना मेहनत के, दाम कैसा ?
जब तक ना हासिल हो मंज़िल
          तो राह में, राही का आराम कैसा ?
अर्जुन सा निशाना रख
          ना कोई बहाना रख !
लक्ष्य सामने है तुम्हारे
           उसी पर अपना उद्देश्य रख !!
ज्यादा सोच मत, कर्म कर,
             सपने को साकार कर !
मिलेगा तेरा मेहनत का फल,
             किसी ओर का ना इंतज़ार कर !!
जो चले थे अकेले
             उनके पीछे आज हैं मेले  ...
जो कर रहे थे इंतज़ार
             उनकी जिंदगी में आज भी हैं झमेले !!

क्या खूब जिंदगी थी बचपन की आज खूब तूझे याद करता हूँ।।

शिक्षक का खौफ
होमवर्क का प्रैशर
मानो पूरी दुनिया का बोझ
हमारे कंधों पर है रखा।।
जो होमवर्क कंप्लीट हो
तो किसी के बाप से ना डरता।।
पर जिस दिन होमवर्क कंप्लीट नहीं हो
तो पिछवाड़ा लाल हो जाता।।
और उस दिन अपने उम्र को
मैं खूब था कोसता।।
जो मैं भी जवान होता
तो पिछवाड़ा हमारा कौन लाल करता।।
क्या जिंदगी है जवानी की
मस्त कमाओ खाओ घूमो
और ऐश करो।।
आज मैं जवान हूँ
और अपनी स्थिति से वाकिफ हूँ।।
सौ टेंसन की दुकान
दिमाग में खोलकर बैठा हूँ।।
गर्लफ्रैंड को क्या गिफ्ट देना है।
तो कौन सा जोब मुझे लेना है।
एक टेंसन खत्म नहीं
दस और द्वार पर खड़ी हो जाती है।।
क्या खूब जिंदगी थी बचपन की
आज खूब तूझे याद करता हूँ।।

मन तू हार मत।।

मन तू हार मत
           असफलता से डगमगा मत।।
अभी तो तेरी शुरूआत है
            महा जंग अभी बाकी है।।
प्रयास तू जारी रख
             अपनी हार का समालोचना कर।।
खुद को मजबूत कर
              अपनी कमजोर नस में रक्त भर।।
स्वयं को जला अग्नि में
               सूर्य सा प्रखर बन।।
योजना तू बना ऐसा
                लक्ष्य को ध्यान में रख।।
वीर शिवाजी सा तू
                 अपने उद्देश्य पर अडिग बन।।
औरंगजेब पर चढ़ाई कर
                   ले किला अपना वापस।।
मैदान में ऊतर जा तू
                   अपने हौसले को मजबूत रख।।
जीत अपनी कर ले पक्की
                 चाहे जितनी आए आज राह मे रुकावट।।

         

चुनौतियाँ हमारे जिंदा होने का प्रमाण देती है।।

चुनौतियाँ हमारे जिंदा होने का प्रमाण देती है
वरना मरणोपरांत कौन सी बाधाएं हमारे पास आती हैं।।
जीवन की बहती धारा हमेशा एक संदेश दे जाती है
संघर्ष करने वालों की ही जीत हमेशा होती है।।
असफलता से डर कर बैठ जाने वालों की हार हो जाती है
वैसे कायर लोगों की मौत भी बड़ी दुर्गति से आती है।।
जोश और उत्साह के साथ
मुसीबत के लहरोंं का तू सामना कर
जिंदा रहना है तूझे
तो जीत के लिए सदा प्रयास कर।।

हम आपसे बेइंतहा मोहब्बत करते हैं।

हम आपसे बेइंतहा मोहब्बत करते हैं।
हर वक्त बस आपके साथ बिताए पलों को संजोये रहते हैं।।
वो मीठी मीठी नोंक झोंक
और हमारा रूठ के कोने में बैठ जाना।
खाने के वक्त
वो आपका हमें खाने पर बुलाना।।
बेडरूम में आ जाने पर
 हमारा सोने का बहाना करना।।
फिर आपका आकर हमें पेट में गुदगुदी लगाना
और आपके स्पर्श मात्र से ही
हमारा गुश्शा का शाँँत हो जाना।।
बहुत याद करता हूँ
आपके साथ बिताए पल।।
बिना इन यादों असंभव है
हमारा कर पाना जीवन बसर।।
फिर हमारा ओफिस में बोस के साथ झगड़ना
और घर पहुँचने पर
हमारा ऊतरा हुआ चेहरे को देखना।।
फिर हमारे सर पर आपका हाथ का यों फेरना
और सर दर्द का देखते देखते छू मंतर हो जाना।।
बड़ा शुकुन दे जाता है
वह पल को याद करना।।
बिना इन यादों के असंभव है
हमारा कर पाना जीवन बसर।।




तेरी हँसी में बसी है मेरी जान।।

तेरी हँसी में बसी है मेरी जान।।
जो तू ना हँसे निकल जाएगा मेरा प्राण।।
कभी खुशी तो कभी गम के साये करते रहते हैं जीवन में दस्तक।।
हर सफर आसान हो जाता है जो तू साथ में होता है मेरे हमदम।।
ईश्वर की कृपा है जो तूझे पत्नी बनाकर भेजा है मेरे प्रीतम।।
ये बंधन है सात जन्मों का,अब जुदा ना होंगे कभी हम -तुम तुम-हम।।

देश से बढ़कर कुछ नहींं है।।

जातिवाद धर्मवाद की राजनीति से
हमें आगे पग बढ़ाना है।।
देशहित में जो हो सके
वैसे कार्य हमें करते जाना है।।
क्योंकि देश से बढ़कर कुछ नहीं है।।

पड़ोसी देश के बहकावे में
हम देश भक्तों को नहीं आना है।।
उनके पास कुछ काम नहीं
बस पड़ोसी देश में आतंक फैलाना है।।
हम शांति प्रिय विकासशील देश हैं
हमें विकसित देश कहलाना है।।
हर क्षेत्र में हमें एक
सुनहरा आयाम पाना है।।
क्योंकि देश से बढ़कर कुछ नहीं है।।

हम बढ़े,सब बढ़े
ऐसे विचार को आगे फैलाना है।।
सारे जग में शान्ति और खुशी का वर्चस्व हो
अपने अंदर ऐसा बदलाव लाना है।।
क्योंकि देश और मानवता से बढ़कर कुछ नहीं है।।

जय हिन्द।।
जय भारत।।

मानवता की जय हो।।

क्योंकि पापा हैं ना साथ में।।

खिलौने की जिद हो या फिर
प्रिंटेड टीशर्ट पहनने का शौक।।
हमारे हर जिद और शौक
कभी रहते नहीं अधूरे।।
क्योंकि पापा हैं ना साथ में
तो फिर क्या फिक्र है हमारे जीवन में।।
घर का खाना खाकर हो गएँँ हो ऊब
समोसे और मिठाई खाने का दिल करे खूब।।
फिर क्या? लगे पापा को मिलकर हम मनाने
पापा चलो ना क्यों ना आज बाहर जाकर खाना खाए।।
माँ का भी अब जब मिल जाए साथ
हार कर पापा बोलें
चलो बाहर किसी अच्छे होटल में खाना खाएँ साथ।।
क्योंकि पापा हैं ना साथ में
तो फिर क्या फिक्र है हमारे जीवन में।।
पापा के घर में शाम में आते ही
हम खेल छोड़ लग जाते हैं पढ़ाई में।।
पापा साथ में आकर होमवर्क करवाते
और छुट्टी वाले दिन हमें पहाड़ा रटवाते।।
अगर पापा हैं तभी तो वर्ग में हमारे अच्छे मार्क्स आते।।
क्योंकि पापा हैं ना साथ में
तो फिर क्या फिक्र है हमारे जीवन में।।
समर वेकेशन के आते ही हम घर पर बोर हो जाते
पापा के साथ मिलकर हम कहीं बाहर घूमने का ट्रीप बनाते।।
समर वेकेशन में हम सभी खूब धूम मचाते।।
क्योंकि पापा हैं ना साथ में
तो फिर क्या फिक्र है हमारे जीवन में।।





मात पिता के प्यार से बढ़कर हो नहीं सकता कोई वस्तु अमूल्य।।

झूठी काया झूठी माया के पीछे
बावली हुई फिर रही है दुनिया।।
कभी सुन्दरता तो कभी धन की व्यथा ने
बस में कर रखा है मन को।।
धोखा लगातार मिल रहा है इनसे
फिर भी मन भाग रहा है पीछे।।
छूट रहा है अगर कुछ अपना
वह है अपने मात पिता का साथ।।
जिन्होंने हमारे बचपन को संजोया
देकर हमें कुछ खास संस्कार।।
आज जब उड़ना सीख लिया हमने
छोड़ दिया उन्हें वृद्ध लाचार।।
ऐसी दुविधा में क्यों फँसा है मानुष
जाकर ले आ अपने माँ बाप को साथ।।
बिना जिनके आशिर्वाद के
कोई सपना नहीं हो पाएगा कभी साकार।।
मात पिता के प्यार से बढ़कर
हो नहीं सकता कोई वस्तु अमूल्य।।
बस उनका साथ और आशीर्वाद रहे हमपर
इससे ज्यादा कुछ चाहिए नहीं हे परमेश्वर।।

टिमटिमाती तारों के बीच

टिमटिमाती तारों के बीच
                           जब चाँद नजर आ जाता है।।
मनमोहनी शीतल पवन
                           जब चेहरे को चूम जाती है।।
एक एहसास दिल में फिर से
                           आज जगा जाता है।।
जैसे दूर कहीं से मेरी महबूबा ने
                            एक प्यार भरा संदेशा भेजा है।।

आप सभी का साथ चाहिए

आप सभी का साथ चाहिए
                              एक सुंदर दुनिया बनाने में।।
जहाँ हर जगह खुशहाली हो
                               किसी दिल में दुख के ना साए हों।।
हर सुबह की उजाले में
                               मस्त शीतल पवन ताजगी भर दे।।
सूर्य की किरणें ऐसी हों
                               जैसे ऊर्जा भर दे सारे शरीर में।।
 हर किसी का साथ हो
                              जहाँ हर कोई विकास की राह पर हो।।
हम बढ़े और साथ बढ़े
                            जहाँ हर कोई हर दूसरे पर मरे।।
मानवता का मिसाल कायम कर
                           हम एक खुशहाल विश्व का निर्माण करें।।

ब्रह्मांड के हर कण कण में

ब्रह्मांड के हर कण कण में
                   तुम प्यार का मिठास भर दो।।
हर छोटे छोटे पलों में
                  तुम सतरंगी खुशियों का हुलास भर दो।।
दुख सुख की परिभाषा से
                  हम तुम हो जाएँ ऐसे अचेत।।
खुशियों के समुंदर में चलो
         एक बार फिर से जीवन के आनंद का जलपान ले लो।।


जीवन के यह पल

जीवन के यह पल
                      बड़े अनमोल है यारों।।
हर छोटे छोटे पलों में
                       तुम बटोर लो अपनी खुशी।।
गम के पल अभी आते ही होंगे
                   निकाल लेना तब अपनी खुशी की पोटली।।
हर पल को तुम ऐसे जी लो
        मानो जी रहे हो तुम लाखों जन्मों की खुशी।।
चलो आओ मिलकर हम तुम
                        बाँटले अपने जीवन की खुशी।।

मैं जन्मा तेरा अंश लेकर

मैं जन्मा तेरा अंश लेकर
             संस्कार दिए थे तूने भर भर।।
बड़ों को आदर और छोटों से प्यार
              किसी का दिल दुखे नहीं सूत।।
मधुर वाणी और मृदुल स्वभाव से
              जीत लो तुम सारा संसार।।
सिकंदर ने जीता था जग
              उठाकर भाला और तलवार।।
तन जीता पर मन नहीं जीता
               करके जग पर अत्याचार।।
सबका भला,सबका विकास
                ऐसा रखना तुम मन में विश्वास।।
सभी दिलों की धड़कन बनकर
                 करना तुम हर दिल पर राज।।
                            

तुम्हारी बाहों में आकर

तुम्हारी बाहों में आकर
                       मैं सारा जहाँ भूल जाता हूँ।।
सारा तनाव और सारे दुख को भूल
                       मैं तुममें खो सा जाता हूँ।।
बस अपनी आगोश में
                       तुम यूहीं समेटे रखना मुझे।।
सारे जग को भूलकर
                        मैं ढूंढूं अस्तित्व अपना तुममें।।
बस यूहीं तुम टूट टूट कर
                       प्यार करो जी भर कर मुझसे।।
हम-तुम तुम-हम एक हो जाएँ
                       मिटाकर अपने जिस्मों का भेद।।

कितने भी करीब हों

कितने भी करीब हों
                   आप हमारे दिल के।।
मिलती वही है
                  जो रहता है हमारे नसीब में।।
जितनी भी हाथ पाव मार लो
             जितना भी दिलोजान से कोशिश कर लो।।
मिलती वही है
             जो जोड़ी बनकर आई है अंबर से।। 
लाख तुम प्रेम करो
                      अपने प्रियतमा से।।
भले तुम उन्हें जानते हो
                   स्कूल से,कॉलेज से।।
मिलती वही है
                जिसका सम्बंध है आपके साथ सात जन्मों से।।

माँ बाबू जी आप पुनः आकर क्यों नहीं मेरा कान खींचते हो ?

माना मैं जवान हो गया
               नौकरी लग गई और ब्याह हो गया।।
पर अगर आज फिर से कोई नादानी करता हूँ
            तो आप पुनः आकर क्यों नहीं मेरा कान खींचते हो?
यों अपने से क्यों मुझे अनजान करते हो?
माँ बाबू जी आप पुनः आकर क्यों नहीं मेरा कान खींचते हो ?
माना मैं दो बच्चों का बाप हो गया
                             पर हूँ अभी भी आपही का बच्चा।
जैसे छोटे में गलती होती था
                             वैसे ही आज भी गलती होती है।।
आप क्यो नहीं आकर मुझे पुनः दंड देते हो?
                       मुझे अपने से क्यों अलग-थलग करते हो?
माँ बाबू जी आप पुनः आकर क्यों नहीं मेरा कान खींचते हो ?
माँ बाबू जी आप पुनः आकर क्यों नहीं मेरा कान खींचते हो ?

सुरज की तेज गरमी हो

सुरज की तेज गरमी हो
या हो मुसलाधार झमाझम बारिश।।
पड़ोसी वाले शर्मा अंकल की काँच टूटे
शर्मा अंटी गरियाते हुए बाहर निकले।।
या फिर हम कोई शोट खेलें
और प्रसाद अंकल का सर फूट जाए।।
पर किसी में कहाँ था इतना दम
जो कोई रोक पाए खेलने से हमें।।
बचपन के वो पल कौन भूल पाया है यहाँ
दिल के किसी कोने में आज भी जिंदा है वह पल।।
क्यों ना हम तुम अपने जीवन से
एक दो ऐसे पल निकालें।।
जी लें उन बचपन के पल
जो हम बचपन के दहलीज पार कर भूल आएँ।।

आपकी कुछ मीठी यादों को मैं समेटे जा रहा हूँ।

आपकी कुछ मीठी यादों को मैं समेटे जा रहा हूँ।
दिल में कुछ प्यारे एहसासों को मैं सहेजे जा रहा हूँ।।
कभी तकरार होता था तो कभी सुव्यवहार होता था,
हर दिन हमारे जीवन में कुछ खास होता था।।
हर कोई यहाँ है मेरे दिल के करीब
मैं अपने दिल का एक हिस्सा आप लोगों को सौंपे जा रहा हूँ।।

प्यारी बहना।।

प्यारी बहना
तुम्हारी याद
बहुत ही मुझे सताती है।
कहीं भी रहना
खुश रहना
बस यही दुआ
लब पे आती है।।
बहुत सारी
मीठी सी यादें
मेरे मस्तिष्क में पनप कर आती है।
क्या बचपन था
हमदोनो का।
कितना हुड़दंग हम मचाते थे।।

वो किवाड़ पर चढ़ कर तुम्हारा बैठना।
और कुंडी पकड़ मेरा झूला झुलाना।।
और माँ जो देख लें हमदोनो को
बेलना लेकर हमारे पीछे भागना।।

वो दीवार फाँदकर
दूसरे के बगीचे से
अमरूद चुरा कर घर लाना।।
पके अमरूद को पाने के लिए
हमदोनो के बीच में झगड़ा होना।
और तुम्हारा मुझे धक्का देना
मेरे सर को दीवार पर पटकना।।
कितना मजा आता था मुझको।
वो तुम्हारे हाथ से मार खाना।।

और भी बहुत सारी पल हैं बहना
जो मेरे जहन में आती हैं।
रह रह कर
बस तुम्हारी ओर
मुझे खींच कर ले जाती है।।

मेरी आँख नम हो जाती हैं।
जब उन पलों को याद मैं करता हूँ।।
कभी भी जन्म लूँ
इस धरती पर,
बस तू ही चाहिए बहना
मेरी कुनबा में।।

जल्द ही आऊँगा मिलने तुमसे
साथ मे बैठ
पुराने तराने गाने को।
फिर से बचपन को जी लेंगे हम
प्यारी बहना
मिलकर हम तुम।।


घूट घूट कर क्यों जी रहा है।

घूट घूट कर क्यों जी रहा है।
गम के आँसू क्यों पी रहा है।।
डर डर कर बहुत जी लिया तुमने।
दहाड़ मार कँपा दे दुनिया को।।
अपने अंदर के आग को भड़का।
चट्टान चीड़
ज्वालामुखी सा बाहर निकल।।
अगर कोई तेरे अस्तित्व को ललकारे।
भस्म कर वहीं
उसे राख बना।।
जगाले अपने आत्म सम्मान को।
कर ले दुनिया को आज मुठ्ठी में।।



किताबें और उनका अकेलापन।।

हर शाम मैं ताकती रहती हूँ।
बन्द शीशों से झाँकती रहती हूँ।।
कब आओगे तुम पास हमारे?
बस यही सोच में डूबी रहती हूँ।।
फिर कौन मुझे अपनाएगा?
अपने बाहों में लेकर सो जाएगा।।
अपने स्पर्श से मेरे हर पन्नों को पलटेगा।
मेरे जीवन के अध्याय को पढ़ जाएगा।।
हर कोई आज अपने में व्यस्त दिख रहा है।
हमें छोड़
मोबाइल में व्हाट्सएप पढ़ रहा है।।
बिताए गएँ हमारे साथ मीठे पलों को भूल।
अब सभी कोई ऑनलाइन स्लाइड्स पढ़ रहा है।।
हर रिश्ते का अपना महत्व है।
सभी को निभाना हमारा कर्तव्य है।।
क्या पता?
अब और मैं कितना दिन जी पाऊँ?
अकेलेपन के दीमक ने मेरे हर पन्ने को
जो खाना शुरू दिया है।।




इतनी नफरत से ना देखा कीजिए हमसे।

इतनी नफरत से ना देखा कीजिए हमें।
कहीं प्यार ना हो जाए हमसे।।
आज आप हमसे दूर भाग रहीं हैं।
कहीं कल भीड़ में न ढूंढे हमें।।
मानता हूँ।
कि मैं एक आम इंसान हुँ
ज्यादा स्टाइलिश नहीं हूँ
एक गरीब बाप का बेटा हूँ।
प्यार में खर्च तो नहीं कर पाउँगा।।
शाहजहां के जैसा
मरणोपरांत
ताज महल भी नहीं बनवा पाउँगा।।
पर हाँ एके बात का देता हूँ यकीन।
जब तक साँसे चलती रहेगी।
प्यार में नही आने दूँगा
कभी कमी।।



दोस्त,दोस्ती और दोस्ताना।।

बिना झिझक,बिना संकोच के
तुम हमेशा चले आते हो मेरे पास।
जैसे गोरैया चली आती है रोज
हमारे आँगन में
चुगने दाना को।
और पूरा घर
उसके चीउँ चीउँ के मधुर आवाज से
गूँज उठता है।।
मानो की वो कोई गीत गुनगुना रही हो।
और सुना रही हो
हमारी दोस्ती का तराना।।
ठीक वैसे ही तुम भी
चले आते हो हमारे पास।
बिना घंटी बजाए
दरवाजा खोल
घर के अंदर
लेकर अपना समय।।
फिर हम और तुम मिल
बना लेते हैं।
एक दूसरे के समय को मिला
मस्ती भरी बातों का गुलदस्ता।।
बातों का सिलसिला चल पड़ता है।।
कभी तुम मुझे खींच
भूत में ले जाकर गुदगुदाते हो।
कभी मैं तुम्हें अपने साथ भविष्य में
सैर करवा कर हँसवाता हुँ।।
इन बातों के सिलसिले में
पता ही नहीं चला।
समय कब आ गया
हम दोनों के बिछुड़ने का।।
हम दोनों अलग हुए
एक दूसरे से।
कुछ मीठी यादों के साथ
फिर से कल मिलने के लिए।।




इतना प्यार नहीं किया कीजिए हमसे।

इतना प्यार नहीं किया कीजिए हमसे।
हमारा दिल बहुत तेज़ धड़कता है।।
जो आप कभी आँखो से ओझल हो जाओ।
हमारा मन बेचैन सा हो जाता है।।
भूलकर भी हमसे दूर ना जाना हमारे सनम।
वरना आप खो देंगे अपने हमराही को इस भौसागर में।।

यहाँ कौन किसकी सुनता है।।

यहाँ कौन किसकी सुनता है
सब अपना फायदा सोचता है।।
किसी को किसी की फिक्र नहीं
जो फिक्र करे वह देवता है।।
हर कोई यहाँ अपने में व्यस्त है
जिम्मेदारी लेने की किसी में क्रेज नहीं है।।
कर्तव्यनिष्ठता का पाठ सभी पढ़ाते हैं
वक्त आने पर  खुद चुक वो जाते हैं।।

डर डर के जी रहे हैं हम यहाँ।।

डर डर के जी रहे हैं हम यहाँ।।
कहीं हमसे कोई छीन ना ले प्यारा सा ये मेरा जहाँ।।
मेरे सपने और मेरे प्यारे रिश्ते सजे हैं यहाँ।।
बिन इनके ना रह पाऊँगा मैं किसी और जहाँ।।
हर छोटे छोटे पलों में खुशियों की झड़ी सी लगी है यहाँ।।
गम के पल भी सुगमता से कट जाते हैं,जब ये रिश्ते साथ खड़े रहते हैं वहाँ।।
मेरी वजूद आज इनसे ही है इस जहाँ।।
वरना कौन सार्थक बना पाएगा मेरे जीवन को यहाँ।।

मन तरंगें।

मन तरंगें उठ रहीं है हमेशा।।
दिन हो या हो रात।।
जागें हो या हो सोएं।।
कभी थमती नहीं हैं ये तरंगे।।
बस लगातार बहती रहती है।।
जैसे बहती रहती है नदी में धार।।

खुले गगन तले।

खुले गगन तले
                हम पंक्षी कहीं उड़ चले।।
बादलों के बीचों बीच
               तो कभी तूफानों के तले।।
पँखों में हवा भर
              आसमानी छत छूने चले।।
निर्भिक हो निडर हो
             बिना किसी डर,और बिना कोई हिचक मन में रखे।।
आत्मविश्वास की डोर पकड़
                 हर डग हम सटीक चलते रहें।।
कई बार धरातल पर हम गिरेंं
                  फिर उठ खड़े हुए लड़ने को अपने किस्मत से।।



झुलसाती गरमी में।।

झुलसाती गरमी में
                   जब सारा जन जीवन बदहाल हो जाए।
 पेड़ पौधे सूखने लगे
                   और मनुष्यों का जीवन बेहाल हो जाए।
फिर कहीं दूर आसमान में
                    मस्त मौला बादल नजर आ जाए।
और मन में एक आस की किरण
                     फूट फूट कर बाहर आ जाए।

तेरी सुंदरता की क्या करुँ बखान।।

तेरी सुंदरता की क्या करुँ बखान।।
मानो बनाने वाले ने लगा दी है सारी जान।।
आँखों की सुंदरता को कैसे करूँ शब्दों में बयान।।
बस तुम मुझे देखते रहो,और मैं पीता रहूँ तुम्हारे आँखों से जाम।।
क्या खूब तराशा है ईश्वर ने तुम्हारे नाक नक्श को।।
मानो जर्रे जर्रे से हो रहा हो नूर की बौछार।।

शादी के दिन।।

शादी के दिन पत्नी हमारी होट दिखती है।।
बाद में वही हमारे जीवन पर बोझ लगती है।।
दूसरे की बीबी हमेशा हमें खास लगती है।।
क्योंकि वो हमेशा हमारे साथ नहीं रहती है।।
दूसरे के नलायक बच्चे भी हमें समझदार दिखते हैं।।
अपने होनहार बच्चे हमें निखट्टू ही नजर आते हैं।।
साल भर हम पढ़ाई छोड़ खेलते कूदते हैं।।
इम्तिहान के समय क्रीड़ा छोड़ हम बड़े अध्ययनकर्ता बन जाते हैं।।


हर दिन के नये सवेरे में हो तुम।।

हर दिन के नये सवेरे में हो तुम।।
उगते हुए सुरज की रोशनी हो तुम।।
किलकारी मारते हुए नवजात के मुस्कान में हो तुम।।
बच्चों के लिए माँ के प्यार में हो तुम।।
सब का भला हो वैसे विचारों में हो तुम।।
हर सकारात्मक जज्बातों में हो तुम।।
हे ईश्वर मेरे हृदय में हो तुम।।
हे ईश्वर मेरे हृदय में हो तुम।।


मैं किसी का गुलाम नहीं।

मैं किसी का गुलाम नहीं।।
      मैं आजाद पंक्षी हूँ नीले गगन का।।
मस्त उड़ता हूँ बेफिक्र होकर।।   
             आसमान में बस इधर उधर।।
मुझे तुम जिम्मेदारियों से मत बाँधो।।
      मैं तो बहती हवा सा हूँ जो ठंडक देता है हर दिल को।

कोशिश करने वालों की कभी हार नहीं होती।।

कोशिश करने वालों की कभी हार नहीं होती।।
थक कर बैठ जाने वालों को कभी जीत नहीं होती।।
हवा के साथ तो मीर कासिम जैसे कायर चलते हैं।।
मजा तो तब है जब आप वीर भगत सिंह बन आँधी के विरुद्ध चलते हैं।।

सही काम करना गुनाह हो गया।।

सही काम करना गुनाह हो गया।।
गलत काम करने वालो का राज हो गया।।
पैसा बोलता है,पैसा तोलता है।।
जो ना रंगे उसके रंग में,उसे जमीन में गड़ना है।।
सच्चाई के राह पर चलना दुस्वार हो गया।।
बुराई के राह पर चलने वालो की जयजयकार हो गया।।
कलयुगी रावण ने संसार में हाहाकार मचा दिया।।
भगवान राम के प्रकट होने का समय निकट आ गया।।
सही काम करना गुनाह हो गया।।
गलत काम करने वालो का राज हो गया।।

हमारे सोच में आपकी सोच मिल जाए।।

हमारे सोच में आपकी सोच मिल जाए।।
हमारे विचार में आपका विचार मिल जाए।।
ये जहान और समय कहीं थम ना जाए।।
जो हमदोनों के धड़कन एक हो जाएँ।।

मेरे प्यार को बदनाम ना कर।

मेरे प्यार को बदनाम ना कर।
मेरे विश्वास को ताड़ ताड़ ना कर।
किया है मोहब्बत तुझसे दिलोजान से।
दिल तोड़ इस आशिक की जान ना ले।

तेरे ना मिलने से

तेरे ना मिलने से,मेरा दिल है इतना बेकरार।
जो तू मिले तो,मैं हो जाऊँ फनाह बार बार।।
तेरे एक झलक पाने को करता रहता हूँ इंतजार।
जो तूझे पालूँ,तो पालूँगा सारा आज संसार।।

बदहाली

ऐसी बदहाली आज दिल पे जो छाई है।
मन  है बदहवास और आँखों में नमी आई है।
हर वक्त बस ईश्वर से यही दुहाई है।
खैर रखना उनकी, मेरी जान उनमे समाई है।

आजाद हूँ और आजाद रहूँगा।।

आजाद हूँ और आजाद रहूँगा।।
किसी के बंदिश को मैं ना सहूँगा।।
स्वतंत्रत सोच के पँखों को फैलाने की है आजादी।।
आसमान की सीमाओं को आज लाँघने की है आजादी।।

आजाद हूँ और आजाद रहूँगा।।
किसी के बंदिश को मैं ना सहूँगा।।
दूसरों के नकारात्मक सोच को नकारने की है आजादी।।
सब का भला,सबका विकास हो,ऐसे सोच को है सलामी।।

आजाद हूँ और आजाद रहूँगा।।
किसी के बंदिश को मैं ना सहूँगा।।
मस्त ठंड पवन सा बहकर,सभी के दिलों को ठंडक देने की है आजादी।।
हर हताश लोगों में उमंग भर कर,उनके दिलों पर राज करने की है आजादी।।
आजाद हूँ और आजाद ही रहूँगा।।
किसी के बंदिश को मैं ना सहूँगा।।



कोशिश जारी रखना चाहिए

कोशिश करने वालों को ही हार कभी कभी मिलती है।
जीत की प्रयास करनेवाले को ही मुस्कान नसीब होती है।
आम के पेड़ के छाव में सोए रहने वालों को आम का स्वाद पता नहीं चलता।
बल्कि लगातार पत्थरों से निशाना लगाने वाले को ही आमरस का मिठास पता चलता है।

आज हर दिल तूझे देख है बहका

आज हर दिल तूझे देख है बहका
               मेरा दिल भी कहाँ से आज संभला।।
क्या खूब तूझे बनाया है रब ने
               क्या नाक नक्श तूझे ईश्वर ने है बख्शा।।

गरमी से हुआ मेरा जीना बेहाल।।

गरमी से हुआ मेरा जीना बेहाल।।
एसी और कूलर का हुआ चलना बेकार।।
पसीने से भींगा हमारा शर्ट और बनियान।।
कपड़े उतारने के बाद भी नहीं सुधरा है हाल।।
तीसरी बार नहाकर निकला हूँ मेरे यार।।
पर कब मिलेगी छुट्टी गरमी से इस साल।।

तेरे हर धडकन को

तेरे हर धडकन को
                   आज जरा मुझे सुनने दो।
गरम साँसों को
                आज जरा स्पर्श करने दो।
भौरे को आज
                फूलोंं का रस लेने दो।
मैं बहका हूँ
               जरा खुद को तुम बहकने दो।
लो आ गया है
                  आज फिर से प्यार का मौसम।
सावन को इजाजत देदो
                      आज फिर से बरसने को।

हर दिल की ख्वाहिश होती है।।

हर दिल की ख्वाहिश होती है।।
कुछ पाने की तो किसी को अपनाने की।।
पर हर ख्वाहिश नसीब नहीं होती है।।
और जो होती है तो दिल को बड़ा सुकुन दे जाती है।।
जीवन की धार में ख्वाहिश की तरंगे उठती ही रहेंगी।
मानव के इतिहास में,हमारे कर्मों से हमें याद किया जाएगा।


मन की टीस।।

मन में एक टीस लिए,
                   ना जाने कब से जी रहा।
दुखों के पहाड़ तले
                    ना जाने कब से दबा रहा।
खुशियों की तलाश हमारी
                   पता नहीं कब से जारी है।
जिम्मेदारियों की बोझ तले
                   मंजिल धूमिल होती चली जा रही है।
कसक तो कल भी थी
                   और आज भी है खुशियों को समेटने का।
दुख बस इस बात की है,
         खुशी नाम मात्र,और दुख बहुत ज्यादा है इस जीवन में।

मैं तन्हा सा बैठा हूँ ..

मैं तन्हा सा बैठा हूँ
                   भरी महफिल में।।
मन डूबा सा है
                   तेरी यादों के समुंदर में।।
व्याकुल नैना हर चेहरे में
                    तेरी मुरत तलाश रही है।
तू मिल जा मुझे
                    बस यही रब से दुआ की है।।

तेरी किस्मत तेरे हाथ में है।

तेरी किस्मत तेरे हाथ में है। kavitadilse.top द्वारा आप सभी पाठकों को समर्पित है। मैं चला जा रहा था अकेले,झुंझलाते हुए खुद से। कभी खु...