22 Oct 2017

खच्चर ,गधे और घोड़े की कहानी।khachchar gadhe aur ghode ki kahani.

Kahani

खच्चर ,गधे और घोड़े की कहानी।khachchar gadhe aur ghode ki kahani.

खच्चर किसी दुनिया पर राज कर रहे थे।गधो की संख्या वहाँ घोड़ों से  ज्यादा थी,इसलिए अगर खच्चरों को राज करना था,तो गधों को घोड़ों से ज्यादा सुविधा देना जरूरी था।वरना उनकी गद्दी छिनी जा सकती थी।गधों को सारी सुख सुविधा की व्यवस्था की गई थी।
    इनमें से कुछ गधो को खच्चरों की चाल समझ में आ गई थी। घोड़े तो हमेशा से अवाज उठाते आ ही रहे थें।अब जब इन्हें कुछ गधों का साथ मिल गया था,तो उनके आक्रोश में और भी तेजी आई थी।
   खच्चरों की गद्दी डोलने लगी थी।आखिरकार घोड़ों को भी गधों की बराबरी की सुख सुविधा प्रदान की गई।


khachchar kisi duniyaa par raaj kar rahe the।gadho ki sankhyaa vahaan ghodon se  jyaadaa thi,esalia agar khachchron ko raaj karnaa thaa,to gadhon ko ghodon se jyaadaa suvidhaa denaa jaruri thaa।varnaa unki gaddi chhini jaa sakti thi।gadhon ko saari sukh suvidhaa ki vyavasthaa ki gayi thi।

    enmen se kuchh gadho ko khachchron ki chaal samajh men aa gayi thi। ghode to hameshaa se avaaj uthaate aa hi rahe then।ab jab enhen kuchh gadhon kaa saath mil gayaa thaa,to unke aakrosh men aur bhi teji aai thi।

   khachchron ki gaddi dolne lagi thi।aakhirkaar ghodon ko bhi gadhon ki baraabri ki sukh suvidhaa prdaan ki gayi।


Written by sushil kumar

हमारा देश इतना पिछड़ा क्यों है? Hamara desh itna pichhda kyun hai?

Kahani

Hamara desh itna pichhda kyun hai?

आज हर भारतीयों को इस विषय पर गहन अध्ययन करना चाहिए, जो कि बहुत जटिल होता जा रहा है।हमारा देश हिन्दुस्तान का पिछड़ापन होने का विषय।
आज अगर हम इतने पिछड़े हैं,तो इसका केवल एक और एक ही कारण है,हमारे देश के नेता।जो देश पर राज करने के लिए,या फिर वोट बैंक के लिए देश के टूकड़े करने से भी पिछे नहीं हटते हैं।इसका सबूत हमें अजादी के समय ही दिख गया था।फिर वोट बैंक के लिए देश में आरक्षण लाया गया,और फिर से देश को  बाँटा  गया।अब आपके योग्यता के आधार पर नहीं बल्कि आपके जाति के आधार पर नौकरी पाना आसान हो गया।जिस कारण से अयोग्य व्यक्ति आज देश को चला रहे हैं।और हमारा देश बहुत ही तेजी से पिछड़ता चला जा रहा है।

aaj har bhaartiyon ko es vishay par gahan adhyayan karnaa chaahia, jo ki bahut jatil hotaa jaa rahaa hai।hamaaraa desh hindustaan kaa pichhdaapan hone kaa vishay।

aaj agar ham etne pichhde hain,to eskaa keval ek aur ek hi kaaran hai,hamaare desh ke netaa।jo desh par raaj karne ke lia,yaa phir vot baink ke lia desh ke tukde karne se bhi pichhe nahin hatte hain।eskaa sabut hamen ajaadi ke samay hi dikh gayaa thaa।phir vot baink ke lia desh men aarakshan laayaa gayaa,aur phir se desh ko  baantaa  gayaa।ab aapke yogytaa ke aadhaar par nahin balki aapke jaati ke aadhaar par naukri paanaa aasaan ho gayaa।jis kaaran se ayogy vyakti aaj desh ko chalaa rahe hain।aur hamaaraa desh bahut hi teji se pichhdtaa chalaa jaa rahaa hai।

Written by sushil kumar

जी़रो फिगर के साईड इफेक्ट्स। zero figure ke side effects.

Soch

जी़रो फिगर के साईड इफेक्ट्स। zero figure ke side effects.


बचपन से हम जी़रो के जी़रो पर ही रह गएँ।हम बात कर रहें हैं,अपनी बाडी के बारे में।हम बचपन में रामायण में भाग लेने के लिए पहुँचे, और अपना नाम दे दिएँ।हमें हमारी सुंदरता को देख,हमें राम जी का रोल दिया गया।और जब हम जवान हुएँ,और कालेज पहुँचे और रामायण में भाग लेने के लिए दुबारा नाम दिएँ,तो हमारी जी़रो फिगर को देखते हुए, हमे सीता का रोल दिया गया।क्योंकि कालेज में कुछ एक ही लड़की थी,जिसका जी़रो फिगर था।जिन लड़कियों का जी़रो फिगर था,लेकिन वह शामली थी।हम परेशान हो गए थे,जो कि सारा कालेज हमें सीता बनाने पर तुला हुआ जो था।
  जी़रो फिगर का पहला नेगेटिव इफेक्ट हमें दिख चुका था।  हमें फिर एक लड़की से प्यार हो गया।उसकी साईज़ तो हमसे डबल थी,पर देखने में हमें बहुत सुंदर दिखती थी।पर पता नहीं क्यों लोग उसे लाईन नहीं मारते थे।
और तो और कुछ दोस्त तो हमसे ये तक बोल दिए थे,कि ' साले तेरे को उस मोटी में क्या दिखता है,जो तू उससे प्यार करने लगा है।'
हमें उसका संबोधन इतना बुरा लगा,कि हम उस दोस्त से बात करना बंद कर दिए।फिर कुछ दिन बाद वही दोस्त आकर हमसे माफी माँगा।और हमने उसे माफ कर दिया।
फिर हमने फ्रेंडशिप डे के दिन उसे फ्रेंडशिप डे कार्ड देकर उससे दोस्ती कर ली।फिर धीरे धीरे हम क्लोज़ होते चले गए।और हर दिन हम उसे फ्रेंडशिप ट्रीट देने लगें।कभी बर्गर, कभी पिज्ज़ा, तो कभी समोसा तो कभी वड़ा पाव।वह और भी फैलती ही जा रही थी,पर पता नहीं क्यों हमें वह और भी सुंदर ही दिखने लगी थी।
      एक दिन उसने हमसे मजाक मजाक में पूछ ही लिया, 'क्यों हमसे प्यार करते हो क्या?'(हमें लगा शायद वो भी हमसे प्यार करने लगी है)ऐसे में अकस्मात ही हमारे लब्ज निकल पड़े। हाँ,बहुत दिनों से,तुमसे कहना चाहते थे,कि हमें तुम बहुत अच्छी लगती हो और हम तुमसे बहुत प्यार करते हैं।
     वह हंसने लगी,बोली ' तुम मेरे लिए क्या कर सकते हो?'
हमने भी आशिकाना भाव में जवाब दे दिया।'जो तुम चाहो,वह तुम्हें हम लाकर दे सकते हैं।'
उसने बोला,चलो मैं तुम्हारा प्यार स्वीकार कर लूंगी,लेकिन एक शर्त पर कि तुमहें हमें अपने दोनो बाहों में भरकर उठाना पड़ेगा।
हम नर्वस हो गए, पर हिम्मत नहीं हारे।बोला,चल उठा लिया तो।
वो बोली 'फिर मैं तेरी,नहीं तो फिर कभी तू मेरे नजदीक आने की सोचना भी मत।
हमने भी बोल दिया,चल ठीक है।
हम गए,और दोनो बाहों से पकड़कर उसे उठाने लगा।उठाने का तो उठा लिया,पर बेलेंस गड़बड़ाया,और हम धड़ाम से नीचे गिर पड़े,और हमारे ऊपर वो गिरी।
उसे तो चोट नहीं लगी,पर हम जख्मी हो गए।
उसने मजाक मजाक में बोल दिया,'अरे बच्चे पहले तो तू बाडी बना ले,गर्लफ्रैंड बाद में बनाना।'
हम भी अगले ही दिन जख्मी हालत में जिमखाना पहुँच गए।और जिम इंस्ट्रक्टर से पूछ लिया'बाडी बनाने में कितना टाईम लगेगा।
उसने छह से सात महीने का हमसे टाईम माँगा।और हमने उसे दे दिया।उस समय की स्थिति ऐसी थी कि कोई बच्चा क्लास में होमवर्क करके नहीं आया है,और क्लास टीचर उसे दस मिनट का टाईम दिया हो,होमवर्क कंप्लीट करने को,वरना पनिस्मेंट पाने के लिए तैयार रहने को कहा हो।
उसने हर दिन का डायट का लिस्ट हमे दे दिया।अब हम रोज वही डायट लेने लगें।साथ में रोज का हैभी वर्कआउट।धीरे धीरे हमारी सुवह  सुवह पेट साफ होना ही बंद हो गया।
 पहले दस मिनट में निकल जाया करता था,अब कभी भी आधे घंटे से कम नहीं लगता था।कभी कभी तो आधे घंटे में भी हल्का महसूस नहीं होता था,तो एक से दो घंटे तक भी बैठना पड़ जाता था।
    हैभी वर्कआउट के कारन पूरा बदन में दर्द हो जाया करता था,जिसके कारन रात भर करवटें बदलता रहता था।और सुवह सुवह दो ढाई बजे नींद लगती थी,जिसके कारन सुवह लेट से नींद खुलती थी।
    एक महीना होने पर हमने अपना वैट नापा,जो पाया,उसे देख हमे चक्कर आ गया।हमारा वैट एक पाव घट गया था।जब हम जिम जोयन किए थे,तब हमारा वैट पच्चपन किलो था,आज हमारा वैट चौवन किलो साढ़े सात सो ग्राम था।
हम परेशान हो गए।हमने जिम इंस्ट्रक्टर को भर पैट गाली दिया,और वहाँ से निकल गएँ।
    वह एक पाव हासिल करने में हमें तीन महीना लग गया।आज भी हम जी़रो फिगर पे ही अटके हुए हैं।

Written by sushil kumar

20 Oct 2017

मस्कुलर फिगर का क्रेज़। muscular figure ka craze.

Shayari

मस्कुलर फिगर का क्रेज़। muscular figure ka craze.


आज कल की लड़कियों की क्या बताऊँ यारों।
खुद भले ही साँवली रहे,या फिर मोटी,
पर चाहिए मस्कुलर लड़का।
मैं ठहरा जी़रो फिगर,करता था किसी लड़की को पसंद।
पहुँच गया फूल गुलाब का लेकर प्रपोज़ करने को अपनी महबूबा को।
क्या मारा था उस लड़की ने हमें अपने सैन्डल से।
सुज गया था गाल हमारा, उठ ना पाया था दो दिन तक अपने खाट से।
वह लड़की तो खुद बहुत मोटी थी,और उसे लड़का चाहिए था मस्कुलर।
मैं था साला ज़ीरो फिगर।पहुँच गया जिमखाना, सुजा हुआ मुंह लेकर।
जिम ट्रेनर ने पूछा हमसे,कैसी बाडी चाहिए आपको।
हमने कहा भाई साहब मस्कुलर बाडी लगानी है हमको।
ट्रेनर ने मजा लेकर पूछा हमसे,
क्यों गाल सुजाना है उसकी,जिसने गाल सुजाई है आपकी।
हमने जवाब दिया,बस ऐसा ही कुछ समझ लो आप।
ट्रेनर ने दिया मुझे दिन भर के डाइट का लिस्ट,और दिया एक प्रोटीन पाऊडर साथ में लेने का आदेश।
कराया पहला दिन दो घंटे का वर्कआउट, रात में जब सोया,पूरा शरीर रात भर रोया।
कराहता रहा रात भर,बस अपनी माँ को याद कर करके।
अगे मईया,पूरा शरीर दर्द कर रहा है बढ़ बढ़ के।
कोई आकर तेल से मालीश करदे जीभर के।
कुछ दिन तो फ्रेश होने में निकलना ही भूल गया।
सुवह एक घँटा से दो घँटा तक बैठता,
तब जाकर एक पाव निकलता।
एक महीना लगातार वर्कआउट और स्ट्रोंग डायट लेने के बाद ,ऐसा चैंज आया दोस्तों,कि
बनने चले थे मस्कुलर पर हम जी़रो से नेगेटिव हो गएँ।
छोड़ दिया सपना मस्कुलर बनने का,पुराने दिनचर्ये में लौट गए।
एक महीने में हम नेगेटिव हो गये यारो,पर हमें जी़रो बनने में हमें पाँच महीने लग गएँ।
आ गया हमें याद एक कहावत
,खोना आसान है,पर संजोना बहुत मुश्किल है दोस्तों।




aaj kal ki ldakiyon ki kyaa bataaun yaaron।

khud bhale hi saanvli rahe,yaa phir moti,

par chaahia maskular ldkaa।

main thahraa jiro phigar,kartaa thaa kisi ldki ko pasand।

pahunch gayaa phul gulaab kaa lekar prpoj karne ko apni mahbubaa ko।

kyaa maaraa thaa us ldki ne hamen apne saindal se।

suj gayaa thaa gaal hamaaraa, uth naa paayaa thaa do din tak apne khaat se।

vah ldki to khud bahut moti thi,aur use ldkaa chaahia thaa maskular।

main thaa saalaa jiro phigar।pahunch gayaa jimkhaanaa, sujaa huaa munh lekar।

jim trenar ne puchhaa hamse,kaisi baadi chaahia aapko।

hamne kahaa bhaai saahab maskular baadi lagaani hai hamko।

trenar ne majaa lekar puchhaa hamse,

kyon gaal sujaanaa hai uski,jisne gaal sujaai hai aapki।

hamne javaab diyaa,bas aisaa hi kuchh samajh lo aap।

trenar ne diyaa mujhe din bhar ke daaet kaa list,aur diyaa ek protin paaudar saath men lene kaa aadesh।

karaayaa pahlaa din do ghante kaa varkaaut, raat men jab soyaa,puraa sharir raat bhar royaa।

karaahtaa rahaa raat bhar,bas apni maan ko yaad kar karke।

age miyaa,puraa sharir dard kar rahaa hai bdh bdh ke।

koi aakar tel se maalish karde jibhar ke।

kuchh din to phresh hone men nikalnaa hi bhul gayaa।

suvah ek ghntaa se do ghntaa tak baithtaa,

tab jaakar ek paav nikaltaa।

ek mahinaa lagaataar varkaaut aur strong daayat lene ke baad ,aisaa chainj aayaa doston,ki

banne chale the maskular par ham jiro se negetiv ho gan।

chhod diyaa sapnaa maskular banne kaa,puraane dinacharye men laut gaye।

ek mahine men ham negetiv ho gaye yaaro,par hamen jiro banne men hamen paanch mahine lag gan।

aa gayaa hamen yaad ek kahaavat

,khonaa aasaan hai,par sanjonaa bahut mushkil hai doston।


Written by sushil kumar

14 Oct 2017

Agey maiya.

Shayari

Agey maiya

पति-काहे जी,कहाँ से आ रहील बानी।
पत्नी-काहे...घूमे लगी भी तोहरा से पूछ के जावे पड़ी की।
पति-नाहीं,हमरा के ई सोच के टैन्सन रहिल,कि तोहरा पास पैसा आईल ता आईल कहाँ से।
पत्नी-इल्लो,कले राते तो तोहरा से दस हजार रूपया लेईल रहिल।
पति-का बोलत बानी,कले कब हम तोहरा के पैसा देईल बानी।
पत्नी-ये ला,कर ला बात,कले अपने तो शराब के नशे में बोलत रहिल,कि ये ला दस हजार रुपये और कर ला अपन दिल के शौक पूरी।
पति-अगे मईया,हम ता तोहरा के दस हजार, इकरे लगी देईल रहिल,कि तोहरा के बड़ी शौक रहिल कि तो भी के बनिल करोड़पति में जाईब और करोड़पति बन के आईब।
पत्नी-काहे के झूठ बोलत बानी।
पति-नन्दूआ,हमर ड्राइवर के पत्नी दुई लाख, के बनिल करोड़पति से जीत कर आईल बानी।जेकरा के बोलत नहीं आवत है,उई दुई लाख जीत करके आईल बानी।तू तो बोले में ईतता एक्सपर्ट है,के हमरा के चूप करा देवत है।तो कम से कम तू अगर गईले रहिल तो करोड़पति बनके अईले रहिल।


pati-kaahe ji,kahaan se aa rahil baani।

patni-kaahe...ghume lagi bhi tohraa se puchh ke jaave pdi ki।

pati-naahin,hamraa ke ayi soch ke tainsan rahil,ki tohraa paas paisaa aail taa aail kahaan se।

patni-ello,kale raate to tohraa se das hajaar rupyaa leil rahil।

pati-kaa bolat baani,kale kab ham tohraa ke paisaa deil baani।

patni-ye laa,kar laa baat,kale apne to sharaab ke nashe men bolat rahil,ki ye laa das hajaar rupye aur kar laa apan dil ke shauk puri।

pati-age miyaa,ham taa tohraa ke das hajaar, ekre lagi deil rahil,ki tohraa ke bdi shauk rahil ki to bhi ke banil karodpati men jaaib aur karodpati ban ke aaib।

patni-kaahe ke jhuth bolat baani।

pati-nanduaa,hamar draaevar ke patni dui laakh, ke banil karodpati se jit kar aail baani।jekraa ke bolat nahin aavat hai,ui dui laakh jit karke aail baani।tu to bole men ittaa eksapart hai,ke hamraa ke chup karaa devat hai।to kam se kam tu agar gile rahil to karodpati banke aile rahil।

Written by sushil kumar

2 Oct 2017

गांधीगिरी या गांडीगिरी। gandhi giri ya gandi giri

Shayari

गांधीगिरी या गांडीगिरी।

kavitadilse.top द्वारा आप सभी पाठकों को समर्पित है।

गांधीगिरी
अगर कोई आपको एक थप्पड़ मारे,तो आप उसके सामने दूसरे गाल को आगे कर दीजिए।

गांडीगिरी
अगर किसी ने एक थप्पड़ जड़ा,तो उसके दोनो गाल को तो लाल कर ही देंगे,साथ में उसके बेस को भी लातो घूंसों से मार मार कर पकोड़े बना देंगे।



gaandhigiri

agar koi aapko ek thappd maare,to aap uske saamne dusre gaal ko aage kar dijia।


gaandigiri

agar kisi ne ek thappd jdaa,to uske dono gaal ko to laal kar hi denge,saath men uske bes ko bhi laato ghunson se maar maar kar pakode banaa denge।


Written by sushil kumar
Shayari

कोई जीते जी निर्वाणा कैसे पा सकता है???Koi jite ji nirvana kaise paa sakta hai??

मैं चलता हूँ बैठता हूँ बोलता हूँ सुनता हूँ सोता हूँ जागता हूँ पर माँ तुझे कभी नहीं भूलता हूँ। कुछ यादें आती जाती रहती हैं। कुछ ब...