Email subscription

Enter your email address:

Delivered by FeedBurner

माँ क्यों नहीं तुम आकर,मुझे अपने आँचल में सुलाती हो/

जीवन के पथ पर चलते चलते,मैं बहुत थक चुका हूँ माँ।
सारी जिम्मेदारियों की बोझ उठाते उठाते,मेरे कँधे भी झुक चुके हैं माँ।
जबसे बचपन छोड़,मैने जवानी में कदम रखा है माँ।
जिम्मेदारियों के बोझ तले,साँस भी ले नहीं पाता हूँ माँ।





वतना मेरे वतना वे।

वतना मेरे वतना वे kavitadilse.top द्वारा आप सभी पाठकों को समर्पित है। वतना मेरे वतना वे तेरा इश्क़ मेरे सर चढ़ चढ़कर बोल रहा है। एक जन्...