31 Mar 2017

जिंदगी को जीना सीख लो।zindagi ko jina sikh lo

Shayari

जिंदगी को जीना सीख लो।

kavitadilse.top द्वारा आप सभी पाठकों को समर्पित है।


जिंदगी को जीना सीख लो।
खुशी के जाम से ज्यादा,गम के जहर को पीना सीख लो।
जीवन है,तब तक संघर्ष तो  करना पड़ेगा मित्रो।
हर परिस्थिति में खुद को ढालना सीख लो।
ऐसा नहीं कि दुख के बादल नहीं छँटेगे  ।
पर नैनो की बारिश का भी आनन्द लेना सीख लो।
कुछ लोगों का तो काम ही है आपको तकलीफ देना।
ईश्वर की रजा समझ,उन्हें माफ करना सीख लो।
जिंदगी बहुत छोटी सी है मित्रों।
जीवन के हर पल में,लोगों में खुशी बाटना सीख लो।

jindgi ko jinaa sikh lo।

khushi ke jaam se jyaadaa,gam ke jahar ko pinaa sikh lo।

jivan hai,tab tak sangharsh to  karnaa pdegaa mitro।

har paristhiti men khud ko dhaalnaa sikh lo।

aisaa nahin ki dukh ke baadal nahin chhntege  ।

par naino ki baarish kaa bhi aanand lenaa sikh lo।

kuchh logon kaa to kaam hi hai aapko takliph denaa।

ishvar ki rajaa samajh,unhen maaph karnaa sikh lo।

jindgi bahut chhoti si hai mitron।

jivan ke har pal men,logon men khushi baatnaa sikh lo।



Written by sushil kumar
Shayari

28 Mar 2017

कचड़ा में हीरा kachra mein hira

Kahani

Kachra mein hira


हमारा नाम गोटी है।हम मुंबई के एक झोपड़पट्टी में रहते हैं।हमारे माँ बाप कचड़ा बुनने का काम करते हैं।कभी कभी मैं भी उनकी मदद करने चला जाता हूँ।
      पढ़ाई करना  हमें पसंद था।कोई भी विषय हो,हमें समझने में ज्यादा वक्त नहीं लगता था।सारे टीचर हमें बहुत ज्यादा पसंद करते थे।
      हमारे माँ बाबू जी भी हमसे बहुत आस लगा कर रखे हुए थे।मानो हम उनकी गरीबी दूर हटाने की आखिरी उम्मीद हैं।पर हमें गरीबी और अमीरी में कुछ फर्क नहीं दिखता था।क्योंकि हमने कभी अमीरी देखी ही नहीं थी। सुबह शाम का खाना मिल जाता था,खेलने के लिए दोस्त मिल जाते थे,माँ बाबू जी का प्यार मिल जाता था।इससे ज्यादा हमारे जैसे बच्चे को और क्या चाहिए?
      किताबों से विशेष लगाव था हमारा।हम शाम को खेल कर आते,और किताबों में डूब जाते।अपने क्लास में हमेशा हम अव्वल नंबर से पास हुए हैं।
      हमने कभी भी किसी लड़की से बात नहीं की थी।और अगर क्लास में कोई लड़की बात करने की कोशिश करती,तो हमारी अवाज लड़खड़ा जाती थी,और आँखे भी शर्म से झुक जाया करती थी।
     पता नहीं,हमें क्या हो जाया करता था,पूरे शरीर में कम्पन्न सा होने लगता था।सारे दोस्त हमारा मजाक उड़ाते थे।
   फिर हम दसवी कक्षा में पहुँचे,और हमें पता था कि ये पड़ाव हमारे जिंदगी का अहम पड़ाव हो सकता है।और अगर हमें आसमान की ऊँचाईयों को छूना है,तो ये पड़ाव हमारे जीवन का अहम पड़ाव हो सकता है।
    माँ बाबू जी के सपने को सच करना था,तो ये पड़ाव को सफलता पूर्वक पार करना अत्यंत जरूरी था।
     हमने अच्छी खाशी पढ़ाई की,और बहुत जोर सोर से मेहनत की।और दसवी कक्षा का परीक्षा दिया।पर जो विश्वास के साथ हम परीक्षा देने पहुँचते थे,उससे ज्यादा हम नर्वस हो कर हम बाहर निकलते थे।पता भी नहीं चलता था,और समय जल्दी खत्म हो जाया करता था।
   हर परीक्षा में एक दो सवाल तो छूट ही जाते थे।पर गणित के पेपर ने तो हमें हिला कर रख दिया था।एक इक्वेसन के सवाल ने हमें आगे बढ़ने ही नहीं दिया।
     दर असल वैसे सवालों का अभ्यास हमने बहुत किया था,पर ना जाने कुछ तो था,जो हमसे छुट रहा था,जिससे सवाल सुलझने की जगह उलझता जा रहा था।
     फिर हम वह सवाल को छोड़,आगे बढ़ें।अभी भी चार सवालों का जवाब देना बचा हुआ था,कि घंटी बज गई।और चार सवाल छूट ही गएँ।
     परीक्षा का दिन खत्म हो गया,पर सवाल खत्म नहीं हुए।पता नहीं कैसा रिज़ल्ट आएगा?मैं पास तो हो जाऊँगा ना?अगर मैं उस इक्वेसन के सवाल छोड़,आगे बढ़ गया होता,तो मैं ज्यादा सवाल अटेम्प्ट कर पाता।वगैरह वगैरह।
     रिज़ल्ट आने का समय जैसे जैसे नजदीक आ रहा था,वैसे वैसे ही दिल की धढ़कने तेज हुए जा रही थी।
     आज रिज़ल्ट निकलने का समय भी आ ही गया।नोटिस बोर्ड पर रिज़ल्ट लग चुका है।सभी लोग रिज़ल्ट देखने के होड़ में,एक के ऊपर एक चढ़े हुए हैं।जो आगे हैं,वह तो अपना रिज़ल्ट देख चुके हैं,(और जो पास हो गए हैं,वह अंदर से ही खुशी जाहिर कर रहें हैं(हे हे हाहा मैं पास हो गया),(और जो फैल हो गए हैं,उन पर तो मानो जैसे गाज ही गिर पड़ा हो।बिल्कुल ही कुछ देर के लिए दिमाग सुन्न पड़ जाता है।(तभी उन आवाजों में एक आवाज आती है बगल से,ओय बब्लू तू फैल हो गया है,बे),वह भले ही बब्लू को ना जानता हो,या उससे नहीं बनता हो,पर उसके अंदर अब  हिम्मत जाग आता है।उसके साथ दोस्ती वह भाईचारा,स्वतः ही मन में जाग आता है।पर अब उसे यह देखने की होड़ थी,कि कोई उसका दोस्त,इस मुश्किल घड़ी में उसका साथ दे रहा है या नहीं,या उसके यूनियन में और कितने लोग जुड़ने वाले हैं।उन्हें बाहर निकलने के लिए जगह नहीं मिलने के कारन ,वहीं फंस जाते हैं।फिर ये जिम्मेवारी उनकी हो जाती है,कि जो उनके दोस्त हैं,और क्लासमेट जो भीड़ के कारन  रिज़ल्ट नहीं देख पा रहें हैं,उनके रिज़ल्ट भी वही देखकर बताए।
        और फिर शाम में सारे फैल्यर एक साथ बैठकर अपना यूनियन बनाएँगे, और साथ में दारू पीकर फैल होने के गम को भूलाएँगे,साथ ही अपने पूराने दोस्तों को गरियाएँगे,कि साले,कमीने फलना ने उसे धोखा दे ही दिया, साले काहे का दोस्त,पढ़ाई ज्यादा की,और खेल में भी हमें नीचा दिखाया।वगैरह वगैरह।
      हमें भी अपना रिज़ल्ट पता लग ही गया था।हम पास हो गए थे।पूरे स्कूल में टोप किए थे।नब्बे प्रतिशत अंक हमने हासिल किए थे।
     हमारे स्कूल के प्रधानाध्यापक हमसे बहुत प्यार करते थे।हमारे भविष्य को लेकर वह बहुत ज्यादा चिंतामुक्त रहते थें।हमारे अच्छे अंक देख वह  बहुत खुश हुए थे।
     हमारे माँ बाप को जब हमारे रिज़ल्ट का पता चला,तो वह बहुत खुश हुए।और हमारे प्रधानाध्यापक हमारे घर माँ बाबू जी से मिलने के लिए आए।
      प्रधानाध्यापक ने हमारे माँ बाबू जी को हमारी सफलता के लिए बधाई दी और हमारी भविष्य की चिंता छोड़ने के लिए बात कही।यह सुन माँ बाबू जी सन्न रह गए।
      फिर प्रधानाध्यापक ने बात को और भी साफ करते हुए बताया,कि उनके घर में कोई बच्चा नहीं है,और वो और उनकी धर्म पत्नी को गोटी बहुत पसंद है,और वो गोटी को आगे बढ़ता देखना चाहते हैं।
      दर असल बात क्या था,कि आज से चौदह साल पहले प्रधानाध्यापक के परिवार में एक बच्चा हुआ था।प्रधानाध्यापक वह उसकी पत्नी बहुत खुश थे।पंडित जी को  बुलाया गया,ताकि उसका नामकरन किया जा सके,वह कुंडली बनवाया जा सके।पंडित जी ने उसका नाम गोटी रखा।
गोटी बढ़ता गया,और सम्बंध गहराता गया।चार साल की ऊमर में गोटी की तबीयत बहुत जोरों से खराब हो गई,और वह दुनिया छोड़ के चला गया।
    प्रधानाध्यापक व उसकी पत्नी बिल्कुल टूट गए थे।फिर से उन्होंने डाक्टर को कन्सल्ट किया।डाक्टर ने बच्चे के लिए मना कर दिया।फिर क्या,आज तक वो बच्चे से वंचित ही रहे।
    आज फिर से गोटी को देख उनके अंदर माँ का ममत्व और पिता का ख्याल जाग उठा था।
    आगे गोटी का सारा खर्चा उन्होंने उठाया।                
    और गोटी ने फिर कभी भी पीछे मुड़कर नहीं देखा।आज वह भारत का बहुत बड़ा वैज्ञानिक है।कचड़े से निकला हुआ हीरा है।


hamaaraa naam goti hai।ham mumbaayi ke ek jhopdapatti men rahte hain।hamaare maan baap kachdaa bunne kaa kaam karte hain।kabhi kabhi main bhi unki madad karne chalaa jaataa hun।

      pdhaai karnaa  hmen pasand thaa।koi bhi vishay ho,hamen samajhne men jyaadaa vakt nahin lagtaa thaa।saare tichar hamen bahut jyaadaa pasand karte the।

      hamaare maan baabu ji bhi hamse bahut aas lagaa kar rakhe hua the।maano ham unki garibi dur hataane ki aakhiri ummid hain।par hamen garibi aur amiri men kuchh phark nahin dikhtaa thaa।kyonki hamne kabhi amiri dekhi hi nahin thi। subah shaam kaa khaanaa mil jaataa thaa,khelne ke lia dost mil jaate the,maan baabu ji kaa pyaar mil jaataa thaa।esse jyaadaa hamaare jaise bachche ko aur kyaa chaahia?

      kitaabon se vishesh lagaav thaa hamaaraa।ham shaam ko khel kar aate,aur kitaabon men dub jaate।apne klaas men hameshaa ham avval nambar se paas hua hain।

      hamne kabhi bhi kisi ldki se baat nahin ki thi।aur agar klaas men koi ldki baat karne ki koshish karti,to hamaari avaaj ldakhdaa jaati thi,aur aankhe bhi sharm se jhuk jaayaa karti thi।

     ptaa nahin,hamen kyaa ho jaayaa kartaa thaa,pure sharir men kampann saa hone lagtaa thaa।saare dost hamaaraa majaak udaate the।

   phir ham dasvi kakshaa men pahunche,aur hamen pataa thaa ki ye pdaav hamaare jindgi kaa aham pdaav ho saktaa hai।aur agar hamen aasmaan ki unchaaiyon ko chhunaa hai,to ye pdaav hamaare jivan kaa aham pdaav ho saktaa hai।

    maan baabu ji ke sapne ko sach karnaa thaa,to ye pdaav ko saphaltaa purvak paar karnaa atyant jaruri thaa।

     hamne achchhi khaashi pdhaai ki,aur bahut jor sor se mehanat ki।aur dasvi kakshaa kaa parikshaa diyaa।par jo vishvaas ke saath ham parikshaa dene pahunchte the,usse jyaadaa ham narvas ho kar ham baahar nikalte the।pataa bhi nahin chaltaa thaa,aur samay jaldi khatm ho jaayaa kartaa thaa।

   har parikshaa men ek do savaal to chhut hi jaate the।par ganit ke pepar ne to hamen hilaa kar rakh diyaa thaa।ek ekvesan ke savaal ne hamen aage bdhne hi nahin diyaa।

     dar asal vaise savaalon kaa abhyaas hamne bahut kiyaa thaa,par naa jaane kuchh to thaa,jo hamse chhut rahaa thaa,jisse savaal sulajhne ki jagah ulajhtaa jaa rahaa thaa।

     phir ham vah savaal ko chhod,aage bdhen।abhi bhi chaar savaalon kaa javaab denaa bachaa huaa thaa,ki ghanti baj gayi।aur chaar savaal chhut hi gan।

     prikshaa kaa din khatm ho gayaa,par savaal khatm nahin hua।pataa nahin kaisaa rijlt aaagaa?main paas to ho jaaungaa naa?agar main us ekvesan ke savaal chhod,aage bdh gayaa hotaa,to main jyaadaa savaal atempt kar paataa।vagairah vagairah।

     rijlt aane kaa samay jaise jaise najdik aa rahaa thaa,vaise vaise hi dil ki dhdhakne tej hua jaa rahi thi।

     aaj rijlt nikalne kaa samay bhi aa hi gayaa।notis bord par rijlt lag chukaa hai।sabhi log rijlt dekhne ke hod men,ek ke upar ek chdhe hua hain।jo aage hain,vah to apnaa rijlt dekh chuke hain,(aur jo paas ho gaye hain,vah andar se hi khushi jaahir kar rahen hain(he he haahaa main paas ho gayaa),(aur jo phail ho gaye hain,un par to maano jaise gaaj hi gir pdaa ho।bilkul hi kuchh der ke lia dimaag sunn pd jaataa hai।(tabhi un aavaajon men ek aavaaj aati hai bagal se,oy bablu tu phail ho gayaa hai,be),vah bhale hi bablu ko naa jaantaa ho,yaa usse nahin bantaa ho,par uske andar ab  himmat jaag aataa hai।uske saath dosti vah bhaaichaaraa,svatah hi man men jaag aataa hai।par ab use yah dekhne ki hod thi,ki koi uskaa dost,es mushkil ghdi men uskaa saath de rahaa hai yaa nahin,yaa uske yuniyan men aur kitne log judne vaale hain।unhen baahar nikalne ke lia jagah nahin milne ke kaaran ,vahin phans jaate hain।phir ye jimmevaari unki ho jaati hai,ki jo unke dost hain,aur klaasmet jo bhid ke kaaran  rijlt nahin dekh paa rahen hain,unke rijlt bhi vahi dekhakar bataaa।

        aur phir shaam men saare phailyar ek saath baithakar apnaa yuniyan banaaange, aur saath men daaru pikar phail hone ke gam ko bhulaaange,saath hi apne puraane doston ko gariyaaange,ki saale,kamine phalnaa ne use dhokhaa de hi diyaa, saale kaahe kaa dost,pdhaai jyaadaa ki,aur khel men bhi hamen nichaa dikhaayaa।vagairah vagairah।

      hamen bhi apnaa rijlt pataa lag hi gayaa thaa।ham paas ho gaye the।pure skul men top kia the।nabbe pratishat ank hamne haasil kia the।

     hmaare skul ke prdhaanaadhyaapak hamse bahut pyaar karte the।hamaare bhavishy ko lekar vah bahut jyaadaa chintaamukt rahte then।hamaare achchhe ank dekh vah  bahut khush hua the।

     hmaare maan baap ko jab hamaare rijlt kaa pataa chalaa,to vah bahut khush hua।aur hamaare prdhaanaadhyaapak hamaare ghar maan baabu ji se milne ke lia aaa।

      prdhaanaadhyaapak ne hamaare maan baabu ji ko hamaari saphaltaa ke lia badhaai di aur hamaari bhavishy ki chintaa chhodne ke lia baat kahi।yah sun maan baabu ji sann rah gaye।

      phir prdhaanaadhyaapak ne baat ko aur bhi saaph karte hua bataayaa,ki unke ghar men koi bachchaa nahin hai,aur vo aur unki dharm patni ko goti bahut pasand hai,aur vo goti ko aage bdhtaa dekhnaa chaahte hain।

      dar asal baat kyaa thaa,ki aaj se chaudah saal pahle prdhaanaadhyaapak ke parivaar men ek bachchaa huaa thaa।prdhaanaadhyaapak vah uski patni bahut khush the।pandit ji ko  bulaayaa gayaa,taaki uskaa naamakaran kiyaa jaa sake,vah kundli banvaayaa jaa sake।pandit ji ne uskaa naam goti rakhaa।

goti bdhtaa gayaa,aur sambandh gahraataa gayaa।chaar saal ki umar men goti ki tabiyat bahut joron se kharaab ho gayi,aur vah duniyaa chhod ke chalaa gayaa।

    prdhaanaadhyaapak v uski patni bilkul tut gaye the।phir se unhonne daaktar ko kansalt kiyaa।daaktar ne bachche ke lia manaa kar diyaa।phir kyaa,aaj tak vo bachche se vanchit hi rahe।

    aaj phir se goti ko dekh unke andar maan kaa mamatv aur pitaa kaa khyaal jaag uthaa thaa।

    aage goti kaa saaraa kharchaa unhonne uthaayaa।               

    aur goti ne phir kabhi bhi pichhe mudkar nahin dekhaa।aaj vah bhaarat kaa bahut bdaa vaijyaanik hai।kachde se niklaa huaa hiraa hai।

Written by sushil kumar

25 Mar 2017

नाम है मनमोहन,पर नाम में क्या रखा है?Naam hai manmohan,par naam mein kya rakha hai.

Kahani

नाम है मनमोहन,पर नाम में क्या रखा है?Naam hai manmohan,par naam mein kya rakha hai.

मेरा नाम मनमोहन है।मुझे बचपन से ही राजू काका ने पाला था।राजू काका बताते थे कि मैं उन्हें आज से करीबन सोलह साल पहले,पेसेंजर  ट्रेन में किसी टोकड़ी में पड़ा हुआ मिला था।



      मतलब आप समझ ही गये होंगे,मेरी उमर अंदाजन सोलह से सत्रह साल होगी।मेरे माँ बाप का मुझे पता नहीं था।या ये कहिए,कि मैने कुछ बहुत अच्छे कर्म किए थे,कि मुझे इस जन्म में  राजू काका और काकी मेरे माँ बाबू जी के रुप में मिले।



       राजू काका को एक बच्ची थी।उसका नाम तृप्ति था।वह मुझसे दो साल बड़ी थी।और मैं उसे कभी भी बड़ी बहन से कम नहीं माना।



        राजू काका ने मुझे अपने बेटे जैसा पाला था।कभी भी मुझे बाप की कमी महसूस  होने नहीं दिया।



     आज भी मैं सोचता हूँ,अगर मेरे माँ बाप होते,तो वह भी मुझसे इतना प्यार नहीं करते, जितना मुझसे राजू काका करते हैं।



       मेरी हर जिद को पूरी करके दी थी,राजू चाचा ने।मैं भी राजू काका,काकी और तृप्ति से बहुत प्यार करता था।



        राजू काका की आँटे की चक्की थी।आस पास में कोई चक्की नहीं होने के कारन,उनका धंधा बहुत तेजी से विकसित हुआ।आज के दिन उनके पास,एक नहीं,बल्कि तीन तीन आंटे की चक्की है।और चार मजदूर भी हैं।



         मैं भी कभी कभी धंधे पर बैठ जाया करता था।



      तृप्ति अब कोलेज जाने लगी थी।उसका सपना था,कि वह फैशन डिजाईनींग की शिक्षा ग्रहण करे।



      वह पढ़ाई में बहुत अच्छी थी,वहीं मैं उसका उल्टा।पढ़ाई में दिल कभी लगा ही नहीं।और जब भी किताब लेकर बैठता,नींद बूरे तरीके से जकड़ लिया करती थी।और मैं सो जाया करता था।



      इसलिए मैं के के के एम पी का डिग्री लेकर,बाबू जी का धंधा संभालने लगा।



   अब आप सोचते होंगे,यह कौन सी नई डिग्री मार्केट में आ गई है।उस डिग्री का मतलब था,खींच खा़ंच के मेट्रीक पास।मतलब तो आप समझ ही गये होंगे,कि मैं मेट्रीक पास था।



     मैं अपनी बहन से बहुत ज्यादा प्यार करता था,वह भी मुझपर जान छिड़कती थी।मेरी बहन कोलेज जाने लगी।फिर मेरा रोज का एक काम फिक्स हो गया।बहन को कोलेज छोड़ना,और फिर कोलेज से घर लेकर आना।



      स्कूल के दिनों में स्कूल बस से जाती थी,और अब मेरे साथ बाईक पर।



      फिर तृप्ति और भी बड़ी हुई,और उसे फैशन डिज़ाईनींग के कोर्स करने के लिए,मुंबई जाने का मन हुआ।पर घर वालो ने मना कर दिया



       मैने घर वालों को मनाया,और बहुत मनाने के बाद,तृप्ति का मुंबई जाना फिक्स हुआ।



       काका काकी का कहना था,कि लड़की जवान हो गई है,तो अब उसकी शादी करके,उसका घर बसवा देना चाहिए।पर अपनी बहन की जिद्ध को पूरा करने के लिए,मैने  काका काकी को बैठा कर अच्छे से समझाया।



       और काका काकी मान गए,पर एक शर्त पर,कि मैं भी उसके साथ मुंबई जाऊँगा।और हमेशा उसके साथ रहूँगा।



        मैने हार कर हामी भर दिया।



मैं भी तृप्ति के साथ मुंबई पहुँच गया।



मैं  जैसे ही ट्रेन से उतरा,बहुत तेज बारीश शुरू हो गई।



       हमने कैब बुक किया,और काका के बताए गए तनू बुआ के पते पर पहुँच गए।वहाँ जब पहुँचे,तो तनु बुआ ने हम दोनो को अपना अपना कमरा दिया।



       तृप्ति का फैशन डिज़ाईनींग कोर्स के लिए निफ्ट में दाखिला दिलवा दिया। और मैं भी अपने लिए कुछ जोब की तलाश करने लगा।पर मेरी डिग्री के हिसाब से,मेरे लिए जोब ढुंड पाना मुश्किल हो रहा था।



        फिर मैं ऐसे ही किसी जोब इन्टरव्यू के लिए गया हुआ था।उन्होंने उस जोब के लिए तो मना कर दिया,पर एक ओफर दिया।



      उन्होंने बताया,कि हमारे यहाँ जो प्रोडक्ट लान्च होते हैं,उसके विज्ञापन के लिए,हम मोडल हायर करते हैं।क्या तुम उन विज्ञापनों में काम करना चाहोगे।



        मैने पूछा,सैलेरी!



       उन्होंने कहा,हर विज्ञापन के पाँच से दस हजार रुप्ये मिलेंगे।



       मेरी खुशी का ठिकाना नहीं रहा,और मैने झटपट हाँ कह डाला।



       फिर उन्होंने मुझे अगली सुबह नौ बजे बुलाया।



       मैं खुशी खुशी घर पहुँचा,और घर  पहुँच कर काका काकी को फोन करके बताया,तो उनकी खुशी का ठिकाना नहीं रहा।



     बुआ भी सुनकर खुश हो गई।



    फिर मैं तृप्ति के आने का इंतजार करने लगा।तृप्ति के आते ही,उसे जब मैं अपनी आपबीति बताई,तो वह भी बहुत खुश हुई।


      फिर अगली सुबह का इंतजार करने लगा।समय तो मानो थम सा गया हो।रह रह कर मैं घड़ी को देखता,और बोलता ऊफ,अभी भी चोदह घंटे बचे हुए हैं।


       फिर मैने नौ बजे रात्री का भोजन किया और लेट गया।लेटे लेटे पता नहीं कब नींद आ गया,पता ही नहीं चला।


       सुबह छह बजे का अलार्म लगाया हुआ था।अलार्म बजते ही मैं उठ खड़ा हुआ।और फटा फट फ्रेश होकर नाश्ता तैयार किया।और तब तक मेरी बहन तृप्ति भी उठ गई थी।मुझे नाश्ता बनाते देख,तृप्ति बहुत खुश हुई।दर असल मेरे हाथ का बना खाना तृप्ति को बहुत पसंद था।नाश्ता करने के बाद  उसे मैने बाई बाई कहा,और फिर मैं अपनी जोब के लिए निकल पड़ा।


       मोडलिंग और एक्टींग करना इतना आसान नहीं था।फिर भी लगातार अभ्यास से मैं जल्दी सीख गया।और फिर मैं पीछे मुड़कर नहीं देखा।


       आज दो साल हो गए हैं,और मेरी आज पहचान है।तृप्ति का भी कोर्स कम्प्लीट हो गया है।


       तृप्ति का आज जोब इंटरव्यू था।और वह बहुत खुश थी।मैं तृप्ति को साथ लेकर जोब इंटरव्यू के लिए गया।


       उसका इंटरव्यू अच्छा गया था,वह बहुत खुश थी।फिर इस खुशी में,मैने उसे मेक्डी में ट्रीट दिया।तृप्ति को बर्गर बहुत पसंद था।


      फिर एक दो दिन बीत जाने के बाद रात में तृप्ति को एक फोन आता है।अगर तुम्हें जोब चाहिए,तो कल शाम सात बजे होटल रेडिएंस के कमरा नंबर दो सौ तीन में आकर मुझसे मिलो।और अकेले ही आना।


      तृप्ति भाग कर मेरे कमरे में आ जाती है।और फोन के बारे में बताती है।


      मुझे बहुत गुस्सा आ जाता है।और मैं उससे पूछता हूँ,क्या तुम खुद का कोई अपना धंधा नहीं  कर सकती हो?


        उसने कहा,उसके पास केपिटल नहीं है,वरना उससे अच्छा कुछ नहीं हो सकता है।


         मैने पूछा,कितना लगेगा?


          तो उसने कहा,लगभग तीस से चालिस लाख रुप्या लगेगा।


          मैने बोला,मुझसे ले लो और शुरु करो।तृप्ति खिल उठी,और बहुत खुश हुई।


     फिर उसने अपना वर्कशोप शुरू किया।और फिर क्या देखते देखते उसका काम चल पड़ा।


      आज उसके डीज़ाइन किए गए कपड़े का शो चल रहा है।बड़े बड़े एक्टर आज रेम्प वाक करने वाले हैं।मैं भी उनके साथ में रेम्प वाक करने वाला हूँ।


          आज मुझे मेरी बहन तृप्ति पर गर्व हो रहा था।आज शो के बाद कुछ न्युज़ टीवी चैनल वाले तृप्ति का इंटरव्यू लेने वाले थे।तृप्ति की कामयाबी देख मेरा दिल गद गद था।


         इंटरव्यू का समय आया तो तृप्ति ने मेरा हाथ पकड़ कर मुझे  भी अपने साथ बैठा लिया।


        सवाल आता गया,और बड़ी सहजता से सारे सवालों का जवाब देती गई।


  फिर एक सवाल आया,आपके जीवन का रोल मोडल कौन है?


तृप्ति ज़रा सा रुकी,फिर बहुत गीले हुए स्वर में बोली,मेरा भाई मनमोहन ही मेरा रोल मोडल है।

आज मेरी शादी हो गई होती,और मैं किसी का घर संभाल रही होती,अगर मेरे भाई मनमोहन ने मेरा साथ ना दिया होता।आज अगर मेरा ये वर्कशोप नहीं होता,तो मैं किसी कंपनी में अपनी काबिलियत बेच रही होती।मेरे वर्कशोप का नाम मनमोहलिया है।ये नाम भी मैने अपने भाई के नाम पर ही रखा हुआ है।


       तृप्ति की बाते सुन मेरे आँखों में आँसू भर आए थे।मेरा दिल भी भर आया था।


      मैंने काका काकी को फोन किया,और उन्हें मुंबई बुलाया।


       काका ने पूछा,सब कुछ ठीक है ना!कोई दिक्कत तो नहीं है ना!


      मैने बोला,नहीं काका तुम आओ ना,तुम्हें कुछ दिखाना है।


काका काकी ने अगले सप्ताह आने का वादा किया।


काका काकी के आने की बात,मैने तृप्ति से छिपाई हुई थी,और काका काकी को भी मना करके रखा था,कि तृप्ति को अपने आने की बात मत बताना।


      काका काकी के आने के बाद उन्हें मैने एक होटल में ठहराया।और अगले दिन तृप्ति के शो पर उन्हें लेकर गया।उन्हें आगे की सीट पर बैठाया,और साथ में मैं भी बैठ गया।फिर तृप्ति को फोन किया, आज मैं नहीं आ पाऊँगा,कुछ जरूरी काम में फँसा हूँ।


       तृप्ति जब स्टेज़ पर आई,काका काकी उसे देखकर बहुत गर्व महसूस कर रहे थे।फिर तृप्ति की नज़र हम सब पर पड़ी,तो भाग कर काका काकी से मिलने के लिए चली आई।


        और फिर शो खत्म होने के बाद हमने रात्री का भोजन फाईव स्टार होटल में लिया।वह दिन मेरे जीवन का सबसे अनमोल दिन था।


       तृप्ति बहुत सारे लोग के लिए आँखों का कांटा बन सी गयी थी।बहुत सारे लोग ,उसे अपने रास्ते से हटाना चाहते थे।उसकी क्रीएटीविटी सबसे अलग थी,इसलिए उसका डिमांड, मार्केट में बहुत ही ज्यादा हो गयी था।


       मैं और तृप्ति अपनी कार में एक शाम अपना शो ओर्गेनाईज़ करने जा रहे थे।तभी मुझे लगा,कुछ लोग हमारा पीछा कर रहें हैं।फिर कुछ दूरी के बाद वह ट्रेफिक में गायब हो गएँ।फिर मुझे लगा,कि केवल यह मेरा भ्रम होगा।


       शो ओर्गेनाईज़ करने के बाद जब हम लौट रहे थे,तो मुझे आते वक्त की घटना का याद आया।तो मैने तृप्ति को   संजना (जो हमारे घर के बगल में रहती है)आज हमारा शो देखने आई हुई थी,उसके साथ में जाने को कहा।


     और मुझे कुछ काम है,का बहाना कर वहीं रुक गया।फिर वहाँ से मैं पुलिस स्टेशन जाकर कमिश्नर साहब से मिला,और साथ में एफ आई आर कर दिया और तृप्ति के लिए पुलिस प्रोटेक्सन की माँग की।

       कमिश्नर साहब पुलिस प्रोटेक्सन के लिए मान जाते हैं।


       फिर मैं घर लौट रहा था,तो पाता हूँ,कि एक युवक रोड पर जख्मी हालत में बेहोश पड़ा हुआ है।मैं गाड़ी रोक कर उसे देखने के लिए गाड़ी से बाहर निकला।मुझे लगा,शायद किसी गाड़ी ने उसे उड़ा दिया है।जैसे ही मैं दूसरा कदम बढ़ाता हूँ कि पीछे से लगातार एक के पीछे एक गोली पीठ में आकर लगती है और मैं खून से लथपथ वहीं बेहोश होकर गिर जाता हूँ।


        फिर मेरी जब आँख खुलती है,तो मैं अपने आप को किसी होस्पिटल के इमरजेंसी रूम में पाता हूँ।


मैं इमरजेंसी रुम के बाहर निकलता हूँ,तो पाता हूँ कि काका काकी और तृप्ति गला फाड़ फाड़ कर रो रहे हैं।मेरे को लगा,शायद कोई मर गया है,इसलिए ये लोग गला फाड़ कर रो रहें हैं।फिर जब मैं उनके मुंह से मेरा नाम सुना,तो मुझे हँसी आई।


हे हे हे,

 मैं तो जिंदा हूँ,और ये लोग यहाँ रो रहे हैं।फिर मैं पीछे से जाकर तृप्ति की आँखो को बंद किया,पर उसे कुछ भी अहसास नहीं हुआ।और वह लगातार रोए जा रही थी।


     फिर मुझे विश्वास नहीं हुआ,तो मैं चिल्लाकर चिल्लाकर चाचा चाची और तृप्ति से गुस्सा करके बोलने लगा,मुझसे मजाक मत कीजिए आपलोग,मुझसे बात कीजिए।आप लोग चुप क्यों हैं?


     फिर इमरजेंसी रूम में वार्ड बोय घुसा और व्हील बेड पर किसी को लेटा कर बाहर लेकर आया।उसका मुंह सफेद चादर से ढका हुआ था।


      तृप्ति दौड़कर उस व्हील चेयर के पास गई,और चादर जैसे हटाई,मेरे नीचे से जमीन खिसक गया।


      मैं चिल्ला उठा,नहीं नहीं नहीं।




meraa naam manmohan hai।mujhe bachapan se hi raaju kaakaa ne paalaa thaa।raaju kaakaa bataate the ki main unhen aaj se kariban solah saal pahle,pesenjar  tren men kisi tokdi men pdaa huaa milaa thaa।




      matalab aap samajh hi gaye honge,meri umar andaajan solah se satrah saal hogi।mere maan baap kaa mujhe pataa nahin thaa।yaa ye kahia,ki maine kuchh bahut achchhe karm kia the,ki mujhe es janm men  raaju kaakaa aur kaaki mere maan baabu ji ke rup men mile।




       raaju kaakaa ko ek bachchi thi।uskaa naam triapti thaa।vah mujhse do saal bdi thi।aur main use kabhi bhi bdi bahan se kam nahin maanaa।




        raaju kaakaa ne mujhe apne bete jaisaa paalaa thaa।kabhi bhi mujhe baap ki kami mahsus  hone nahin diyaa।




     aaj bhi main sochtaa hun,agar mere maan baap hote,to vah bhi mujhse etnaa pyaar nahin karte, jitnaa mujhse raaju kaakaa karte hain।




       meri har jid ko puri karke di thi,raaju chaachaa ne।main bhi raaju kaakaa,kaaki aur triapti se bahut pyaar kartaa thaa।




        raaju kaakaa ki aante ki chakki thi।aas paas men koi chakki nahin hone ke kaaran,unkaa dhandhaa bahut teji se vikasit huaa।aaj ke din unke paas,ek nahin,balki tin tin aante ki chakki hai।aur chaar majdur bhi hain।




         main bhi kabhi kabhi dhandhe par baith jaayaa kartaa thaa।




      triapti ab kolej jaane lagi thi।uskaa sapnaa thaa,ki vah phaishan dijaaining ki shikshaa grahan kare।




      vah pdhaai men bahut achchhi thi,vahin main uskaa ultaa।pdhaai men dil kabhi lagaa hi nahin।aur jab bhi kitaab lekar baithtaa,nind bure tarike se jakd liyaa karti thi।aur main so jaayaa kartaa thaa।




      esalia main ke ke ke em pi kaa digri lekar,baabu ji kaa dhandhaa sambhaalne lagaa।




   ab aap sochte honge,yah kaun si nayi digri maarket men aa gayi hai।us digri kaa matalab thaa,khinch khaanch ke metrik paas।matalab to aap samajh hi gaye honge,ki main metrik paas thaa।




     main apni bahan se bahut jyaadaa pyaar kartaa thaa,vah bhi mujhapar jaan chhidkti thi।meri bahan kolej jaane lagi।phir meraa roj kaa ek kaam phiks ho gayaa।bahan ko kolej chhodnaa,aur phir kolej se ghar lekar aanaa।




      skul ke dinon men skul bas se jaati thi,aur ab mere saath baaik par।




      phir triapti aur bhi bdi hui,aur use phaishan dijaaining ke kors karne ke lia,mumbaayi jaane kaa man huaa।par ghar vaalo ne manaa kar diyaa




       maine ghar vaalon ko manaayaa,aur bahut manaane ke baad,triapti kaa mumbaayi jaanaa phiks huaa।




       kaakaa kaaki kaa kahnaa thaa,ki ldki javaan ho gayi hai,to ab uski shaadi karke,uskaa ghar basvaa denaa chaahia।par apni bahan ki jiddh ko puraa karne ke lia,maine  kaakaa kaaki ko baithaa kar achchhe se samjhaayaa।




       aur kaakaa kaaki maan gaye,par ek shart par,ki main bhi uske saath mumbaayi jaaungaa।aur hameshaa uske saath rahungaa।




        maine haar kar haami bhar diyaa।




main bhi triapti ke saath mumbaayi pahunch gayaa।




main  jaise hi tren se utraa,bahut tej baarish shuru ho gayi।




       hamne kaib buk kiyaa,aur kaakaa ke bataaa gaye tanu buaa ke pate par pahunch gaye।vahaan jab pahunche,to tanu buaa ne ham dono ko apnaa apnaa kamraa diyaa।




       triapti kaa phaishan dijaaining kors ke lia nipht men daakhilaa dilvaa diyaa। aur main bhi apne lia kuchh job ki talaash karne lagaa।par meri digri ke hisaab se,mere lia job dhund paanaa mushkil ho rahaa thaa।




        phir main aise hi kisi job entaravyu ke lia gayaa huaa thaa।unhonne us job ke lia to manaa kar diyaa,par ek ophar diyaa।




      unhonne bataayaa,ki hamaare yahaan jo prodakt laanch hote hain,uske vijyaapan ke lia,ham modal haayar karte hain।kyaa tum un vijyaapnon men kaam karnaa chaahoge।




        maine puchhaa,saileri!




       unhonne kahaa,har vijyaapan ke paanch se das hajaar rupye milenge।




       meri khushi kaa thikaanaa nahin rahaa,aur maine jhatapat haan kah daalaa।




       phir unhonne mujhe agli subah nau baje bulaayaa।




       main khushi khushi ghar pahunchaa,aur ghar  pahunch kar kaakaa kaaki ko phon karke bataayaa,to unki khushi kaa thikaanaa nahin rahaa।




     buaa bhi sunakar khush ho gayi।




    phir main triapti ke aane kaa entjaar karne lagaa।triapti ke aate hi,use jab main apni aapbiti bataai,to vah bhi bahut khush hui।



      phir agli subah kaa entjaar karne lagaa।samay to maano tham saa gayaa ho।rah rah kar main ghdi ko dekhtaa,aur boltaa uph,abhi bhi chodah ghante bache hua hain।



       phir maine nau baje raatri kaa bhojan kiyaa aur let gayaa।lete lete pataa nahin kab nind aa gayaa,pataa hi nahin chalaa।



       subah chhah baje kaa alaarm lagaayaa huaa thaa।alaarm bajte hi main uth khdaa huaa।aur phataa phat phresh hokar naashtaa taiyaar kiyaa।aur tab tak meri bahan triapti bhi uth gayi thi।mujhe naashtaa banaate dekh,triapti bahut khush hui।dar asal mere haath kaa banaa khaanaa triapti ko bahut pasand thaa।naashtaa karne ke baad  use maine baai baai kahaa,aur phir main apni job ke lia nikal pdaa।



       modaling aur ekting karnaa etnaa aasaan nahin thaa।phir bhi lagaataar abhyaas se main jaldi sikh gayaa।aur phir main pichhe mudkar nahin dekhaa।



       aaj do saal ho gaye hain,aur meri aaj pahchaan hai।triapti kaa bhi kors kamplit ho gayaa hai।



       triapti kaa aaj job entaravyu thaa।aur vah bahut khush thi।main triapti ko saath lekar job entaravyu ke lia gayaa।



       uskaa entaravyu achchhaa gayaa thaa,vah bahut khush thi।phir es khushi men,maine use mekdi men trit diyaa।triapti ko bargar bahut pasand thaa।



      phir ek do din bit jaane ke baad raat men triapti ko ek phon aataa hai।agar tumhen job chaahia,to kal shaam saat baje hotal redians ke kamraa nambar do sau tin men aakar mujhse milo।aur akele hi aanaa।



      triapti bhaag kar mere kamre men aa jaati hai।aur phon ke baare men bataati hai।



      mujhe bahut gussaa aa jaataa hai।aur main usse puchhtaa hun,kyaa tum khud kaa koi apnaa dhandhaa nahin  kar sakti ho?



        usne kahaa,uske paas kepital nahin hai,varnaa usse achchhaa kuchh nahin ho saktaa hai।



         maine puchhaa,kitnaa lagegaa?



          to usne kahaa,lagabhag tis se chaalis laakh rupyaa lagegaa।



          maine bolaa,mujhse le lo aur shuru karo।triapti khil uthi,aur bahut khush hui।



     phir usne apnaa varkshop shuru kiyaa।aur phir kyaa dekhte dekhte uskaa kaam chal pdaa।



      aaj uske dijaaen kia gaye kapde kaa sho chal rahaa hai।bde bde ektar aaj remp vaak karne vaale hain।main bhi unke saath men remp vaak karne vaalaa hun।



          aaj mujhe meri bahan triapti par garv ho rahaa thaa।aaj sho ke baad kuchh nyuj tivi chainal vaale triapti kaa entaravyu lene vaale the।triapti ki kaamyaabi dekh meraa dil gad gad thaa।



         entaravyu kaa samay aayaa to triapti ne meraa haath pakd kar mujhe  bhi apne saath baithaa liyaa।



        savaal aataa gayaa,aur bdi sahajtaa se saare savaalon kaa javaab deti gayi।



  phir ek savaal aayaa,aapke jivan kaa rol modal kaun hai?



triapti jraa saa ruki,phir bahut gile hua svar men boli,meraa bhaai manmohan hi meraa rol modal hai।


aaj meri shaadi ho gayi hoti,aur main kisi kaa ghar sambhaal rahi hoti,agar mere bhaai manmohan ne meraa saath naa diyaa hotaa।aaj agar meraa ye varkshop nahin hotaa,to main kisi kampni men apni kaabiliyat bech rahi hoti।mere varkshop kaa naam manmohaliyaa hai।ye naam bhi maine apne bhaai ke naam par hi rakhaa huaa hai।



       triapti ki baate sun mere aankhon men aansu bhar aaa the।meraa dil bhi bhar aayaa thaa।



      mainne kaakaa kaaki ko phon kiyaa,aur unhen mumbaayi bulaayaa।



       kaakaa ne puchhaa,sab kuchh thik hai naa!koi dikkat to nahin hai naa!



      maine bolaa,nahin kaakaa tum aao naa,tumhen kuchh dikhaanaa hai।



kaakaa kaaki ne agle saptaah aane kaa vaadaa kiyaa।



kaakaa kaaki ke aane ki baat,maine triapti se chhipaai hui thi,aur kaakaa kaaki ko bhi manaa karke rakhaa thaa,ki triapti ko apne aane ki baat mat bataanaa।



      kaakaa kaaki ke aane ke baad unhen maine ek hotal men thahraayaa।aur agle din triapti ke sho par unhen lekar gayaa।unhen aage ki sit par baithaayaa,aur saath men main bhi baith gayaa।phir triapti ko phon kiyaa, aaj main nahin aa paaungaa,kuchh jaruri kaam men phnsaa hun।



       triapti jab stej par aai,kaakaa kaaki use dekhakar bahut garv mahsus kar rahe the।phir triapti ki njar ham sab par pdi,to bhaag kar kaakaa kaaki se milne ke lia chali aai।



        aur phir sho khatm hone ke baad hamne raatri kaa bhojan phaaiv staar hotal men liyaa।vah din mere jivan kaa sabse anmol din thaa।



       triapti bahut saare log ke lia aankhon kaa kaantaa ban si gayi thi।bahut saare log ,use apne raaste se hataanaa chaahte the।uski kriativiti sabse alag thi,esalia uskaa dimaand, maarket men bahut hi jyaadaa ho gayi thaa।



       main aur triapti apni kaar men ek shaam apnaa sho orgenaaij karne jaa rahe the।tabhi mujhe lagaa,kuchh log hamaaraa pichhaa kar rahen hain।phir kuchh duri ke baad vah trephik men gaayab ho gan।phir mujhe lagaa,ki keval yah meraa bhram hogaa।



       sho orgenaaij karne ke baad jab ham laut rahe the,to mujhe aate vakt ki ghatnaa kaa yaad aayaa।to maine triapti ko   sanjnaa (jo hamaare ghar ke bagal men rahti hai)aaj hamaaraa sho dekhne aai hui thi,uske saath men jaane ko kahaa।



     aur mujhe kuchh kaam hai,kaa bahaanaa kar vahin ruk gayaa।phir vahaan se main pulis steshan jaakar kamishnar saahab se milaa,aur saath men eph aai aar kar diyaa aur triapti ke lia pulis proteksan ki maang ki।


       kamishnar saahab pulis proteksan ke lia maan jaate hain।



       phir main ghar laut rahaa thaa,to paataa hun,ki ek yuvak rod par jakhmi haalat men behosh pdaa huaa hai।main gaadi rok kar use dekhne ke lia gaadi se baahar niklaa।mujhe lagaa,shaayad kisi gaadi ne use udaa diyaa hai।jaise hi main dusraa kadam bdhaataa hun ki pichhe se lagaataar ek ke pichhe ek goli pith men aakar lagti hai aur main khun se lathapath vahin behosh hokar gir jaataa hun।



        phir meri jab aankh khulti hai,to main apne aap ko kisi hospital ke emarjensi rum men paataa hun।



main emarjensi rum ke baahar nikaltaa hun,to paataa hun ki kaakaa kaaki aur triapti galaa phaad phaad kar ro rahe hain।mere ko lagaa,shaayad koi mar gayaa hai,esalia ye log galaa phaad kar ro rahen hain।phir jab main unke munh se meraa naam sunaa,to mujhe hnsi aai।



he he he,


 main to jindaa hun,aur ye log yahaan ro rahe hain।phir main pichhe se jaakar triapti ki aankho ko band kiyaa,par use kuchh bhi ahsaas nahin huaa।aur vah lagaataar roa jaa rahi thi।



     phir mujhe vishvaas nahin huaa,to main chillaakar chillaakar chaachaa chaachi aur triapti se gussaa karke bolne lagaa,mujhse majaak mat kijia aaplog,mujhse baat kijia।aap log chup kyon hain?



     phir emarjensi rum men vaard boy ghusaa aur vhil bed par kisi ko letaa kar baahar lekar aayaa।uskaa munh saphed chaadar se dhakaa huaa thaa।



      triapti daudkar us vhil cheyar ke paas gayi,aur chaadar jaise hataai,mere niche se jamin khisak gayaa।



      main chillaa uthaa,nahin nahin nahin।



   main ! main mar gayaa hun।



   yhi meri kahaani hai।

aapki bhi agar koi kahaani hai to hamse jrur sheyar karen।



 
Written by sushil kumar




   मैं ! मैं मर गया हूँ।


   यही मेरी कहानी है।
आपकी भी अगर कोई कहानी है तो हमसे ज़रुर शेयर करें।


   


18 Mar 2017

Jiwan naiya

Shayari

जीवन नइया।

Kavitadilse.top द्वारा आप सभी पाठकों को समर्पित है।

जीवन नइया की लीला है न्यारी,

दुख सुख कर रहें हैं,साथ में सवारी।

कभी दुख  मुझे और सुख को उठा कर दे पटक मारी।

तो कभी दुख को मैने और सुख ने मिलकर धोबी पछाड़ डाली।

इस उठा पटक का मजा भी अजब है मेरे भाई।

कभी हम नाव पर सवार करें,तो कभी नाव हम पर करे सवारी।

जीवन की नइया में,भरी पड़ी है खुशियाँ सारी।      

खुशी को लुटाटे चलो,और दुख को समेटते चलो मेरे हमराही।


jivan neyaa ki lilaa hai nyaari,


dukh sukh kar rahen hain,saath men savaari।


kabhi dukh  mujhe aur sukh ko uthaa kar de patak maari।


to kabhi dukh ko maine aur sukh ne milakar dhobi pachhaad daali।


es uthaa patak kaa majaa bhi ajab hai mere bhaai।


kabhi ham naav par savaar karen,to kabhi naav ham par kare savaari।


jivan ki neyaa men,bhari pdi hai khushiyaan saari।     


khushi ko lutaate chalo,aur dukh ko samette chalo mere hamraahi।



Written by sushil kumar
Shayari

17 Mar 2017

अहंकार...Ahankar......

Shayari

Ahankar


कोई भी मनुष्य का सबसे बड़ा काल,उसका अहंकार होता है।जिस दिन मनुष्य ने अहंकार पर विजय पा लिया,उस दिन समझो उसने ईश्वर को प्राप्त कर लिया।

आज मैं जो कहानी लेकर आया हूँ,इसमें आप देखेंगे कि मनुष्य कैसे ईश्वर को भी ढुंढ रहा है,और खुद को भी ईश्वर से कम नहीं आंक रहा है।

ये कहानी है,मनोहर की।मनोहर एक आम आदमी था।वह भगवान का बहुत बड़ा श्रद्धालु था।उसका बस दो ही काम था।सुबह से शाम तक कपड़े का धंधा करता था,और बाकी बचे समय में ईश्वर की भजन भक्ति में डूबा रहता था।

       फिर धीरे धीरे समय बदला।और समय के साथ साथ मनोहर का दिन भी बदला।मनोहर अब कपड़े का बहुत बड़ा व्यापारी हो गया था।

       जैसे जैसे उसका समय बदला वैसे वैसे ही वह ईश्वर से दूर होता चला गया।अहंकार ने उसे पूरी तरीके से जकड़ लिया था।अब वह किसी को नहीं बुझता था।

        मनुष्य जब तक तकलीफ में होता है,तब तक वह ईश्वर की भजन भक्ति में लगा रहता है।और ईश्वर को नहीं भूलता है।पर जैसे ही उसका समय बदलता है,और वह सुखी सम्पन्न हो जाता है,तब वह ईश्वर को भूल कर ऐश और आराम की जिन्दगी में व्यस्त हो जाता है।


koi bhi manushy kaa sabse bdaa kaal,uskaa ahankaar hotaa hai।jis din manushy ne ahankaar par vijay paa liyaa,us din samjho usne ishvar ko praapt kar liyaa।


aaj main jo kahaani lekar aayaa hun,esmen aap dekhenge ki manushy kaise ishvar ko bhi dhundh rahaa hai,aur khud ko bhi ishvar se kam nahin aank rahaa hai।


ye kahaani hai,manohar ki।manohar ek aam aadmi thaa।vah bhagvaan kaa bahut bdaa shraddhaalu thaa।uskaa bas do hi kaam thaa।subah se shaam tak kapde kaa dhandhaa kartaa thaa,aur baaki bache samay men ishvar ki bhajan bhakti men dubaa rahtaa thaa।


       phir dhire dhire samay badlaa।aur samay ke saath saath manohar kaa din bhi badlaa।manohar ab kapde kaa bahut bdaa vyaapaari ho gayaa thaa।


       jaise jaise uskaa samay badlaa vaise vaise hi vah ishvar se dur hotaa chalaa gayaa।ahankaar ne use puri tarike se jakd liyaa thaa।ab vah kisi ko nahin bujhtaa thaa।


        manushy jab tak takliph men hotaa hai,tab tak vah ishvar ki bhajan bhakti men lagaa rahtaa hai।aur ishvar ko nahin bhultaa hai।par jaise hi uskaa samay badaltaa hai,aur vah sukhi sampann ho jaataa hai,tab vah ishvar ko bhul kar aish aur aaraam ki jindgi men vyast ho jaataa hai

Written by sushil kumar

अँधियारी रात।।Andhiyari raat..

Kahani

Andhiyari raat



अँधियारी रात थी।मैं अकेला सुनसान सड़क पर रोज की भांति अपनी जोब से वापस लौट रहा था।कान में इअर फोन ठुसा हुआ था।और हनी सिंह के गाने सुनता हुआ,और उस गाने का कुछ स्टेप करता हुआ घर की ओर चला जा रहा था।
       पर  जब मैं अपनी कोलोनी में जाने के लिए सड़क पर मुड़ा,तो मुझे एक जानी पहचानी सी अवाज मेरे पीछे से सुनाई दी।मानो जैसे,किसी ने पुकारा हो,सोनू रूक ना जरा।
      मैं जब पीछे मुड़ कर देखता हूँ,तो पाता हूँ कि,बल्लू मेरा जिगरी दोस्त खड़ा है।
     मैने पूछा,क्या हुआ दोस्त,यहाँ क्यों खड़े हो?और तुम पर ये सफेद पोशाक बहुत ही जंच रहा है।बिल्कुल हीरो की तरह लग रहे हो।
      बल्लू ने कहा,कि हम अपने गाँव जा रहें हैं,तो सोचा कि तुमसे मिलते हुए चलें।
       मैने पूछा,तुम तो हमेशा गाँव अपने माँ बाबूजी के साथ जाते हो।तो आज तुम अकेले ही कैसे जा रहे हो?            बल्लू ने कहा,माँ बाबू जी जरा सा पहले निकल गये हैं,मैं तुमसे मिलने के लिए,तुम्हारा यहाँ इंतजार कर रहा था।
बल्लू की बातें सुन सुन कर पता नहीं क्यों दिल बैठा जा रहा था।मानो अगले ही पल आँसू की धारा आँखो से सैलाब बन कर निकल पड़े।
     फिर मैं बल्लू से जाकर लिपट गया,और बोला,अपना ख्याल रखना दोस्त।
फिर बल्लू ने कहा,चल यार चलता हूँ,तू भी अपना ख्याल रखना।अलविदा।


         मेरे घर से  लगभग दौ सो कदम पर बल्लू का घर आता था।
          मैं अपने घर का बेल बजाया,और तभी एक बात मेरे दिमाग में ठनका,बल्लू ने मुझे अलविदा क्यों कहा?
          मेरी बीबी शर्मिला ने गेट खोला,और मैं उसके गालों पर चुंबन देकर,हाथ पैर धोने के लिए बाथरूम में गया।
          फिर मैं डायनींग टेबल पर खाने के लिए बैठा।शर्मिला भी साथ में आकर बैठ गई।
           मैने बोला,शर्मिला तुम सो जाओ,मैं आता हूँ ,खाकर।
     शर्मिला ने कहा,मैं भी आपके साथ आज खाऊँगी।
        मैं जरा सा गुश्शा हो गया,और बोला,मेरे लिए इतनी रात तक क्यों इंतजार कर रही थी।तुम्हें खाना समय पर खा लेना चाहिए।
      शर्मिला ने हामी भर कर खाना पड़ोसा,और हमने साथ मिलकर खाना खाया।
     अगली सुबह सात बजे,मेरे मोबाईल फोन पर घंटी बजती है।मैने अधखुली आँखो से फोन के स्कृण को देखा,ये तन्मय अभी फोन क्यों कर रहा है?
      मैने फोन काट दिया।फिर से दुबारा फोन आने पर,मैं जरा सा चिड़चिड़ा कर बोला,क्या हो गया?इतनी सुबह सुबह क्यों फोन कर रहा है।
      उसने बोला,जरा सा बल्लू के घर आना,कुछ बात करनी है।
    मैं बोला,हाँ मैं आता हूँ।

कहकर फोन काट दिया।
फिर मुझे,कल रात की जोब से लौटते समय वाली घटना याद आ गई।
बल्लू तो गाँव गया है,फिर तन्मय उसके घर पर मुझे क्यों बुला रहा है?
क्या कल रात में बल्लू वापस आ गया?बहुत सारे सवाल मन में गूंज रहे थें।सारे सवालों को मन में लिए,मैं पहुँच गया,बल्लू के घर।वहाँ जाकर देखता हूँ,कि तन्मय बल्लू के घर के बाहर खड़ा है।
    तन्मय ने कहा कि हर रोज जब मैं जोगिंग कर के लौटता था,तब संतोष अंकल रोज सुबह  यहाँ पेपर पढ़ते दिखते थे,और अक्सर हम दोनो में गुप्तगू हो जाया करती थी।और इसी बहाने बल्लू से भी मुलाकात हो जाया करता था।

       पर आज जब मैं उन्हें यहाँ नहीं पाया,तो उन्हें फोन किया,तो फोन की घंटी की आवाज अंदर से आती हुई सुनाई दी,पर किसी ने उठाई नहीं।फिर मैने बल्लू को फोन किया,पर उसने भी फोन नहीं उठाई,और फोन की घंटी की आवाज फिर से घर के अंदर से आती हुई सुनाई दी।
    तन्मय की बाते सुन मैं जरा सा घड़बड़ा गया।और बोला कि कल रात को मैं बल्लू से कोलोनी के बाहर मिला था।वह...वह तो अपना गाँव जा रहा था।फिर मैने सोचा कि उसने जाते जाते मुझसे अलविदा क्यों कहा था?
       यह सोचते सोचते मेरी आँखें भर आई थी।मैने बोला,तन्मय,बल्लू हो सकता है,सोया हुआ हो।मैं फोन करके देखता हूँ।
      फिर अपने मन में,मैं ईश्वर से प्रर्थना करने लगा कि बल्लू जहाँ भी हो,सुरक्षित हो।
      पर बल्लू ने मेरे फोन को भी नहीं उठाया।और फोन की घंटी की आवाज घर के अंदर से आती हुई सुनाई दे रही थी।फिर मुझे उसकी चिंता होने लगी।और हमने पुलिस को फोन करके सारा हाल बयान किया।
       पुलिस आधे घंटे में वहाँ पहुँच जाती है।फोन ट्रेकर से पुलिस ने पता लगा लिया था,कि दोनो फोन अंदर में ही है।फिर ताबड़तोड़ दरवाजा तोड़ कर जब हम अंदर पहुँचे,तो पुलिस ने हम सभी को आदेश दिया,कि हम कोई भी समान नहीं छुएँ।

     फिर पुलिस ने एक एक करके सारे  कमरे की तलाशी ली।पर जब हम बल्लू के कमरे के अंदर गयें,तो वहाँ का दृश्य देखकर हम सभी के होश उड़ गयें,और मेरे आँखों से आँसू निकल पड़े।
     मेरा दोस्त पंखे पर बेजान सा लटका हुआ था।उसकी दोनो आँख बाहर निकली हुई थी।बगल में अंटी के मुंह से झाक सा कुछ निकला पड़ा था,और वह भी अचेत सी पड़ी हुइ थी।।और कोने में अंकल अपना एक हाथ छाती पर रखे,बल्लू को देख रहें थे।और वह भी बिल्कुल अचेत थे।
     पुलिस ने सभी की नसें चेक की और सभी को मरा हुआ घोषित किया।अंकल को शायद हर्ट अटैक आया था,और अंटी ज़हर खा कर मरी थी।

      बल्लू की उमर भी,मेरी जितनी ही थी,लगभग तीस साल।मैं और बल्लू बचपन से ही साथ साथ बड़े हुए थे।साथ में पढ़े,साथ में खेलें,साथ में ही हमने जोब भी हासिल की।पर बल्लू ने अपना जोब,कुछ महीनें में ही छोड़ दिया था।वो कंपनी,जहाँ बल्लू जोब कर रहा था,उसमें बहुत बड़ा घोटाला हुआ था।कंपनी दिवालिया होने की स्थिति में आ गई थी।सारे स्टाफ की निकासी की जा रही थी।मेरे दोस्त बल्लू को भी निकाल दिया गया था।मैं जिस कंपनी में काम कर रहा था,वहाँ नया होने की वजह से,मेरी पहचान उतनी तगड़ी नहीं हुई थी।फिर भी मैं एच आर में जाकर पूछताछ की थी।तो उन्होंने साफ साफ मना कर दिया था,कि अभी कोई वेकेन्सी नहीं है।बल्लू ने तो मानो जोब नहीं करने की जिद्ध ठान के रखी थी।वह बोलता था,जोब ओब मुझसे नहीं होगा,मैं तो बिझनेस करूँगा।
       जब बल्लू ने अपने पिता  से मदद माँगा,तो उसके पिता ने मना कर दिया था, कहा , जोब धूंढो,और मुझसे एक पैसे की उम्मीद मत रखना, कि तुम्हारे बिझनेस में एक पैसा भी मैं लगाऊँगा।बल्लू ने कभी भी मुझसे आकर मदद नहीं माँगा था।पता नहीं क्यों?और मैं भी,अपनी स्थिति को देखते हुए,आगे नहीं बढ़ा था।शायद बल्लू ने सोचा होगा,कि मेरी भी नई नई जोब है,और नई नई शादी हुई है।जिम्मेदारी बढ़ गई है।
        फिर कुछ दिनों के बाद बल्लू और उसके पापा में बहुत ज्यादा ताना तानी रहने लगा।बात यहाँ तक पहुँच गई थी,कि बल्लू ने बँटवारा करने को कह दिया था।
        बल्लू मुझसे सारी बातें शेयर किया करता था।किसी भी दिन जो हमारी मुलाकात नहीं हो पाती,तो वह सारी बातें व्हाट्स एप पर शेयर किया करता था।

        घटना वाले दिन  बल्लू बहुत ज्यादा ही तिलमिलाया हुआ था।और सुबह से ही बँटवारा करने के लिए झगड़ा कर रहा था।उसके पिता ने भी गुश्शे में आकर बोल दिया,कि वह सारा जमीन जायदाद,और धन दौलत किसी अनाथ आश्रम में दान कर देंगे,पर उसे एक पैसा भी नहीं देंगे।
       मैं बल्लू से मिलने हर दिन की तरह दोपहर एक बजे गया था।बल्लू बहुत गुश्शे में था,और अपनी जिन्दगी से तंग आ गया था।
        मैं उसे हर दिन की तरह आज भी उसे ढांढस बँधवा रहा था।और बोल रहा था,हिम्मत मत हार दोस्त,तेरे बाबू जी एक दिन ज़रूर मान जाएँगे।

       और तीन बजे जैसे की मुझे अपने जोब पर जाने के लिए घर से निकलना पड़ता है,मैं दो बजे बल्लू के घर से चला आया।
    उस दिन भी उसने आत्महत्या करने से पहले,सारी आपबीती मुझे व्हाट्स एप करके बताया था।पर उस दिन काम का इतना प्रेशर था,कि व्हाट्स एप खोल ही ना सका।
     अगले दिन पुलिस जब पोस्टमोर्टम के लिए अपने साथ सारी बडी ले गई,और मैने घर आकर जब मोबाईल पर नेट ओन किया,तो बल्लू का व्हाट्स एप मुझे मिला।जिसे पढ़कर मैं अवाक् सा रह गया।
     समय कुछ शाम के चार बज कर पाँच मिनट का था।बल्लू ने बोला,पापा आप बँटवारा कर रहें है या नहीं,मैं आखिरी बार पूछ रहा हूँ।

        बात बिगड़ता देख,माँ भी बिच में आ गई,और संतोष अंकल को समझाने लगी,कि जो बेटा बोलता है,कर दो ना।हमारे बुढ़ापे में,अगर इसने कुछ ऐसा वैसा कर लिया,तो हम कहीं के नहीं रहेंगे।
      संतोष अंकल ने भी चिल्ला कर कह दिया,कि ऐसा नालायक बेटा होने से अच्छा होता,कि हम निःसंतान होते।
     यह सुनकर बल्लू अपने कमरे में चला गया।पीछे पीछे माँ भी गई।बल्लू को उसकी माँ ने बहुत समझाया,कि बेटा,हम बनिये नहीं हैं,हम ठाकुर हैं।हमसे धंधा नहीं संभलेगा।देखो तुम्हारे मामा,धंधे में,घर जायदाद सबकुछ बेचकर रोड पर आ गयें हैं।
      बल्लू का मन पसंद खाना था,आलू का परांठा और टमाटर की चटनी।उसने कहा,माँ आज मुझे,आलू का परांठा खाने की बहुत इच्छा हो रही है।
       बल्लू की माँ खुशी खुशी किचन में आलू का परांठा और चटनी बनाने चली गई।बहुत दिनों के बाद बल्लू ने कुछ फरमाईश की थी,इसलिए माँ भी बहुत खुश थी।
      शाम के पाँच बज गयें थे।माँ आलू का परांठा और चटनी लिए बल्लू के कमरे में पहुँचती है।बल्लू खूब स्वाद लेकर खाता है।

       माँ पूछती है,कि रात में क्या खाएगा।तो बल्लू ने कहा,जो भी आप प्यार से बनाएँगे, वही खाएँगे।
      माँ किचन में जाकर रात के खाने की तैयारी करने लगी।
      बल्लू ने आगे लिखा,कि मैं अपनी  जिन्दगी से तंग आ गया हूँ,दोस्त।और अब जीने की आस भी नहीं रही है।मैं किसी के भी दबाव में आकर आत्महत्या नहीं कर रहा हूँ,इसके लिए  मैं खुद जिम्मेदार हूँ।मेरे माँ बाबू जी पर कोई एक्शन ना हो,इसलिए मैं ये सारी बातें, अपनी डायरी में लिखकर जा रहा हूँ।
अलविदा,मेरे दोस्त।

यह पढ़कर,मेरा दिल बैठ गया।और कल रात की मेरे दोस्त के द्वारा की गई अलविदा का मतलब अब समझ में आया।




andhiyaari raat thi।main akelaa sunsaan sdak par roj ki bhaanti apni job se vaapas laut rahaa thaa।kaan men ear phon thusaa huaa thaa।aur hani sinh ke gaane suntaa huaa,aur us gaane kaa kuchh step kartaa huaa ghar ki or chalaa jaa rahaa thaa।

       par  jab main apni koloni men jaane ke lia sdak par mudaa,to mujhe ek jaani pahchaani si avaaj mere pichhe se sunaai di।maano jaise,kisi ne pukaaraa ho,sonu ruk naa jaraa।

      main jab pichhe mud kar dekhtaa hun,to paataa hun ki,ballu meraa jigri dost khdaa hai।

     maine puchhaa,kyaa huaa dost,yahaan kyon khde ho?aur tum par ye saphed poshaak bahut hi janch rahaa hai।bilkul hiro ki tarah lag rahe ho।

      ballu ne kahaa,ki ham apne gaanv jaa rahen hain,to sochaa ki tumse milte hua chalen।

       maine puchhaa,tum to hameshaa gaanv apne maan baabuji ke saath jaate ho।to aaj tum akele hi kaise jaa rahe ho?            ballu ne kahaa,maan baabu ji jaraa saa pahle nikal gaye hain,main tumse milne ke lia,tumhaaraa yahaan entjaar kar rahaa thaa।

ballu ki baaten sun sun kar pataa nahin kyon dil baithaa jaa rahaa thaa।maano agle hi pal aansu ki dhaaraa aankho se sailaab ban kar nikal pde।

     phir main ballu se jaakar lipat gayaa,aur bolaa,apnaa khyaal rakhnaa dost।

phir ballu ne kahaa,chal yaar chaltaa hun,tu bhi apnaa khyaal rakhnaa।alavidaa।



         mere ghar se  lagabhag dau so kadam par ballu kaa ghar aataa thaa।

          main apne ghar kaa bel bajaayaa,aur tabhi ek baat mere dimaag men thankaa,ballu ne mujhe alavidaa kyon kahaa?

          meri bibi sharmilaa ne get kholaa,aur main uske gaalon par chumban dekar,haath pair dhone ke lia baathrum men gayaa।

          phir main daayning tebal par khaane ke lia baithaa।sharmilaa bhi saath men aakar baith gayi।

           maine bolaa,sharmilaa tum so jaao,main aataa hun ,khaakar।

     sharmilaa ne kahaa,main bhi aapke saath aaj khaaungi।

        main jaraa saa gushshaa ho gayaa,aur bolaa,mere lia etni raat tak kyon entjaar kar rahi thi।tumhen khaanaa samay par khaa lenaa chaahia।

      sharmilaa ne haami bhar kar khaanaa pdosaa,aur hamne saath milakar khaanaa khaayaa।

     agli subah saat baje,mere mobaail phon par ghanti bajti hai।maine adhakhuli aankho se phon ke skrian ko dekhaa,ye tanmay abhi phon kyon kar rahaa hai?

      maine phon kaat diyaa।phir se dubaaraa phon aane par,main jaraa saa chidchidaa kar bolaa,kyaa ho gayaa?etni subah subah kyon phon kar rahaa hai।

      usne bolaa,jaraa saa ballu ke ghar aanaa,kuchh baat karni hai।

    main bolaa,haan main aataa hun।


kahakar phon kaat diyaa।

phir mujhe,kal raat ki job se lautte samay vaali ghatnaa yaad aa gayi।

ballu to gaanv gayaa hai,phir tanmay uske ghar par mujhe kyon bulaa rahaa hai?

kyaa kal raat men ballu vaapas aa gayaa?bahut saare savaal man men gunj rahe then।saare savaalon ko man men lia,main pahunch gayaa,ballu ke ghar।vahaan jaakar dekhtaa hun,ki tanmay ballu ke ghar ke baahar khdaa hai।

    tanmay ne kahaa ki har roj jab main joging kar ke lauttaa thaa,tab santosh ankal roj subah  yhaan pepar pdhte dikhte the,aur aksar ham dono men guptgu ho jaayaa karti thi।aur esi bahaane ballu se bhi mulaakaat ho jaayaa kartaa thaa।


       par aaj jab main unhen yahaan nahin paayaa,to unhen phon kiyaa,to phon ki ghanti ki aavaaj andar se aati hui sunaai di,par kisi ne uthaai nahin।phir maine ballu ko phon kiyaa,par usne bhi phon nahin uthaai,aur phon ki ghanti ki aavaaj phir se ghar ke andar se aati hui sunaai di।

    tanmay ki baate sun main jaraa saa ghdabdaa gayaa।aur bolaa ki kal raat ko main ballu se koloni ke baahar milaa thaa।vah...vah to apnaa gaanv jaa rahaa thaa।phir maine sochaa ki usne jaate jaate mujhse alavidaa kyon kahaa thaa?

       yah sochte sochte meri aankhen bhar aai thi।maine bolaa,tanmay,ballu ho saktaa hai,soyaa huaa ho।main phon karke dekhtaa hun।

      phir apne man men,main ishvar se prarthnaa karne lagaa ki ballu jahaan bhi ho,surakshit ho।

      par ballu ne mere phon ko bhi nahin uthaayaa।aur phon ki ghanti ki aavaaj ghar ke andar se aati hui sunaai de rahi thi।phir mujhe uski chintaa hone lagi।aur hamne pulis ko phon karke saaraa haal bayaan kiyaa।

       pulis aadhe ghante men vahaan pahunch jaati hai।phon trekar se pulis ne pataa lagaa liyaa thaa,ki dono phon andar men hi hai।phir taabdtod darvaajaa tod kar jab ham andar pahunche,to pulis ne ham sabhi ko aadesh diyaa,ki ham koi bhi samaan nahin chhuan।


     phir pulis ne ek ek karke saare  kamre ki talaashi li।par jab ham ballu ke kamre ke andar gayen,to vahaan kaa driashy dekhakar ham sabhi ke hosh ud gayen,aur mere aankhon se aansu nikal pde।

     meraa dost pankhe par bejaan saa latkaa huaa thaa।uski dono aankh baahar nikli hui thi।bagal men anti ke munh se jhaak saa kuchh niklaa pdaa thaa,aur vah bhi achet si pdi hue thi।।aur kone men ankal apnaa ek haath chhaati par rakhe,ballu ko dekh rahen the।aur vah bhi bilkul achet the।

     pulis ne sabhi ki nasen chek ki aur sabhi ko maraa huaa ghoshit kiyaa।ankal ko shaayad hart ataik aayaa thaa,aur anti jhar khaa kar mari thi।


      ballu ki umar bhi,meri jitni hi thi,lagabhag tis saal।main aur ballu bachapan se hi saath saath bde hua the।saath men pdhe,saath men khelen,saath men hi hamne job bhi haasil ki।par ballu ne apnaa job,kuchh mahinen men hi chhod diyaa thaa।vo kampni,jahaan ballu job kar rahaa thaa,usmen bahut bdaa ghotaalaa huaa thaa।kampni divaaliyaa hone ki sthiti men aa gayi thi।saare staaph ki nikaasi ki jaa rahi thi।mere dost ballu ko bhi nikaal diyaa gayaa thaa।main jis kampni men kaam kar rahaa thaa,vahaan nayaa hone ki vajah se,meri pahchaan utni tagdi nahin hui thi।phir bhi main ech aar men jaakar puchhtaachh ki thi।to unhonne saaph saaph manaa kar diyaa thaa,ki abhi koi vekensi nahin hai।ballu ne to maano job nahin karne ki jiddh thaan ke rakhi thi।vah boltaa thaa,job ob mujhse nahin hogaa,main to bijhnes karungaa।

       jab ballu ne apne pitaa  se madad maangaa,to uske pitaa ne manaa kar diyaa thaa, kahaa , job dhundho,aur mujhse ek paise ki ummid mat rakhnaa, ki tumhaare bijhnes men ek paisaa bhi main lagaaungaa।ballu ne kabhi bhi mujhse aakar madad nahin maangaa thaa।pataa nahin kyon?aur main bhi,apni sthiti ko dekhte hua,aage nahin bdhaa thaa।shaayad ballu ne sochaa hogaa,ki meri bhi nayi nayi job hai,aur nayi nayi shaadi hui hai।jimmedaari bdh gayi hai।

        phir kuchh dinon ke baad ballu aur uske paapaa men bahut jyaadaa taanaa taani rahne lagaa।baat yahaan tak pahunch gayi thi,ki ballu ne bnatvaaraa karne ko kah diyaa thaa।

        ballu mujhse saari baaten sheyar kiyaa kartaa thaa।kisi bhi din jo hamaari mulaakaat nahin ho paati,to vah saari baaten vhaats ep par sheyar kiyaa kartaa thaa।


        ghatnaa vaale din  ballu bahut jyaadaa hi tilamilaayaa huaa thaa।aur subah se hi bnatvaaraa karne ke lia jhagdaa kar rahaa thaa।uske pitaa ne bhi gushshe men aakar bol diyaa,ki vah saaraa jamin jaaydaad,aur dhan daulat kisi anaath aashram men daan kar denge,par use ek paisaa bhi nahin denge।

       main ballu se milne har din ki tarah dopahar ek baje gayaa thaa।ballu bahut gushshe men thaa,aur apni jindgi se tang aa gayaa thaa।

        main use har din ki tarah aaj bhi use dhaandhas bnadhvaa rahaa thaa।aur bol rahaa thaa,himmat mat haar dost,tere baabu ji ek din jrur maan jaaange।


       aur tin baje jaise ki mujhe apne job par jaane ke lia ghar se nikalnaa pdtaa hai,main do baje ballu ke ghar se chalaa aayaa।

    us din bhi usne aatmahatyaa karne se pahle,saari aapbiti mujhe vhaats ep karke bataayaa thaa।par us din kaam kaa etnaa preshar thaa,ki vhaats ep khol hi naa sakaa।

     agle din pulis jab postmortam ke lia apne saath saari badi le gayi,aur maine ghar aakar jab mobaail par net on kiyaa,to ballu kaa vhaats ep mujhe milaa।jise pdhakar main avaak saa rah gayaa।

     samay kuchh shaam ke chaar baj kar paanch minat kaa thaa।ballu ne bolaa,paapaa aap bnatvaaraa kar rahen hai yaa nahin,main aakhiri baar puchh rahaa hun।


        baat bigdtaa dekh,maan bhi bich men aa gayi,aur santosh ankal ko samjhaane lagi,ki jo betaa boltaa hai,kar do naa।hamaare budhaape men,agar esne kuchh aisaa vaisaa kar liyaa,to ham kahin ke nahin rahenge।

      santosh ankal ne bhi chillaa kar kah diyaa,ki aisaa naalaayak betaa hone se achchhaa hotaa,ki ham niahsantaan hote।

     yah sunakar ballu apne kamre men chalaa gayaa।pichhe pichhe maan bhi gayi।ballu ko uski maan ne bahut samjhaayaa,ki betaa,ham baniye nahin hain,ham thaakur hain।hamse dhandhaa nahin sambhlegaa।dekho tumhaare maamaa,dhandhe men,ghar jaaydaad sabakuchh bechakar rod par aa gayen hain।

      ballu kaa man pasand khaanaa thaa,aalu kaa paraanthaa aur tamaatar ki chatni।usne kahaa,maan aaj mujhe,aalu kaa paraanthaa khaane ki bahut echchhaa ho rahi hai।

       ballu ki maan khushi khushi kichan men aalu kaa paraanthaa aur chatni banaane chali gayi।bahut dinon ke baad ballu ne kuchh pharmaaish ki thi,esalia maan bhi bahut khush thi।

      shaam ke paanch baj gayen the।maan aalu kaa paraanthaa aur chatni lia ballu ke kamre men pahunchti hai।ballu khub svaad lekar khaataa hai।


       maan puchhti hai,ki raat men kyaa khaaagaa।to ballu ne kahaa,jo bhi aap pyaar se banaaange, vahi khaaange।

      maan kichan men jaakar raat ke khaane ki taiyaari karne lagi।

      ballu ne aage likhaa,ki main apni  jindgi se tang aa gayaa hun,dost।aur ab jine ki aas bhi nahin rahi hai।main kisi ke bhi dabaav men aakar aatmahatyaa nahin kar rahaa hun,eske lia  main khud jimmedaar hun।mere maan baabu ji par koi ekshan naa ho,esalia main ye saari baaten, apni daayri men likhakar jaa rahaa hun।

alavidaa,mere dost।


yah pdhakar,meraa dil baith gayaa।aur kal raat ki mere dost ke dvaaraa ki gayi alavidaa kaa matalab ab samajh men aayaa।

Written by sushil kumar

13 Mar 2017

जंगल का राजा।jungle ka raja

Shayari

Jungle ka raja


किसी जंगल में एक शेर राज किया करता था।उसके राज्य में हर जगह शांति और खुशहाली फैली हुई थी।उसके फैसले भी सदा न्याय पूर्वक ही रहा करते थे।सारी जंगल की प्रजा,उनके राजा से अत्यधिक प्यार करते थे।

       फिर समय बिता,और इस जंगल के राजा और जंगल की खुशहाली भरा जीवन की खबर दूर दूर तक पहुँच गई।सभी जगह इस जंगल के चर्चे छाए हुए थे।

      कुछ जंगल के राजा तो उस जंगल को हथियाना चाहते थे।पर वह जंगल तीन तरफ से प्राकृतिक संरचनाओं से घिरी पड़ी थी।
     उत्तर में पहाड़ और पूर्व और दक्षिण में नदी।बचा पक्षिम, तो पक्षिम में पूरे तरीके से चोकसी बढ़ा कर रखी हुई थी।
     तभी खबर आई कि पक्षिम में हमला हुआ है।वहाँ तैनात सैनीकों ने हमले का करारा जवाब दिया और दुश्मनों को खदेड़ कर भगाने में सफल हुए।
      उस हमले में कुछ सैनीक शहीद हुए,उन सैनीकों के परिवार को पर्याप्त मुआवजा दिया गया,साथ ही उस शहीद सैनीक को मरनोप्रांत वीर सम्मान,(जो उस राज्य का सबसे बड़ा सम्मान था) से सम्मानित किया गया।
       राजा ने नया कानून बनाया,और ऐलान किया कि,आज से हमारे सीमा पे जो  भी सैनीक तैनात रहेंगे,उनके परिवार का खर्चा राज्य उठाएगा।और सैनीकों की वेतन में हर वर्ष ढेड़ गुणा बढ़ोत्तरी की जाएगी।
       ऐसी खबर सुनते ही सैनीक की भर्ति में तेजी से इजाफा हुआ। राज्य और भी शक्तिशाली और सुदृढ़ हो गया।
        उस शेर राजा को समझ आ गया थी,कि अगर राज्य में शांति और खुशहाली बरकरार रखना है,तो उसके लिए हमारी सीमा को और भी मजबूत बनाना पड़ेगा,ताकि हमारी अजादी बरकरार रहे।वरना हमारी अजादी और मन की शान्ति दोनो खतरे में आ जाएंगे,और हमारी जनता भी तकलीफ में आ जाएगी।


kisi jangal men ek sher raaj kiyaa kartaa thaa।uske raajy men har jagah shaanti aur khushhaali phaili hui thi।uske phaisle bhi sadaa nyaay purvak hi rahaa karte the।saari jangal ki prjaa,unke raajaa se atyadhik pyaar karte the।


       phir samay bitaa,aur es jangal ke raajaa aur jangal ki khushhaali bharaa jivan ki khabar dur dur tak pahunch gayi।sabhi jagah es jangal ke charche chhaaa hua the।


      kuchh jangal ke raajaa to us jangal ko hathiyaanaa chaahte the।par vah jangal tin taraph se praakriatik sanrachnaaon se ghiri pdi thi।

     uttar men pahaad aur purv aur dakshin men nadi।bachaa pakshim, to pakshim men pure tarike se choksi bdhaa kar rakhi hui thi।

     tbhi khabar aai ki pakshim men hamlaa huaa hai।vahaan tainaat sainikon ne hamle kaa karaaraa javaab diyaa aur dushmnon ko khaded kar bhagaane men saphal hua।

      us hamle men kuchh sainik shahid hua,un sainikon ke parivaar ko paryaapt muaavjaa diyaa gayaa,saath hi us shahid sainik ko marnopraant vir sammaan,(jo us raajy kaa sabse bdaa sammaan thaa) se sammaanit kiyaa gayaa।

       raajaa ne nayaa kaanun banaayaa,aur ailaan kiyaa ki,aaj se hamaare simaa pe jo  bhi sainik tainaat rahenge,unke parivaar kaa kharchaa raajy uthaaagaa।aur sainikon ki vetan men har varsh dhed gunaa bdhottri ki jaaagi।

       aisi khabar sunte hi sainik ki bharti men teji se ejaaphaa huaa। raajy aur bhi shaktishaali aur sudridh ho gayaa।

        us sher raajaa ko samajh aa gayaa thi,ki agar raajy men shaanti aur khushhaali barakraar rakhnaa hai,to uske lia hamaari simaa ko aur bhi majbut banaanaa pdegaa,taaki hamaari ajaadi barakraar rahe।varnaa hamaari ajaadi aur man ki shaanti dono khatre men aa jaaange,aur hamaari jantaa bhi takliph men aa jaaagi।


Written by sushil kumar

6 Mar 2017

भारत है हमारी जान। bharat hai hamari jaan.

Kahani


Bharat hai hamari jaan



यह मानो कल की ही बात हो जैसे,मैं अपने दोस्तों के साथ अपने घर के सामने वाले मैदान में क्रिकेट खेल रहा था।तभी हमें बहुत ही तेज,झकझोर कर रख देने वाली आवाज सुनाई दी।
     मेरी तो जैसे एक पल के लिए दिल की धड़कन ही बंद हो गई।हम सभी सहम गये।



फिर वैसी ही तेज आवाज लगातार सुनाई देने लगी।हम बहुत ज्यादा डर गये।तभी मेरी और मेरे दोस्तों के मोबाईल फोन एक साथ बजे।
माँ का फोन आया था।बेटा जल्दी घर आजा,शहर में आतंकवादियों ने हमला किया है।


हम सभी अपने अपने घर चल पड़े।घर पहुँचने पर देखता हूँ कि मेरी माँ बहुत परेशान है।पापा के घर आने का समय शाम सात से आठ बजे का था।माँ पापा को इस आधे घंटे में दस बारह बार फोन कर चुकी थी।
   पापा ने माहौल जरा शाँत होने तक ओफिस में ही रुकने का प्लान बनाया था।आतंकवादियों को पूरे जोर शोर से ढूँडा जा रहा था।हमारे पूरे शहर में तनाव का माहौल था।सारे शहर में नाका बंदी कर दी गयी थी।सभी गाड़ियों की तलाशी ली जा रही थी।

सात बजे के आसपास में सक्षम (मेरे दोस्त का नाम)की माँ का मेरे पास फोन आता है ,"बेटा,सक्षम तुम्हारे साथ में है क्या?" मैने  कहा,"नहीं अन्टी,क्या वो अभी तक वह घर नहीं पहुँचा?"
अन्टी ने बोला,"नहीं आया है।पता नहीं कहाँ है।फोन भी नहीं लग रहा है।"
मैने बोला,"अन्टी रूकीये,मैं जरा संजय और विनोद से बात कर लेता हूँ,वह उसके साथ में निकला था।"
मैने संजय और विनोद को फोन किया,तो पता चला कि सक्षम को रास्ते में सही सलामत छोड़ा था,जहाँ से वह अपने घर की तरफ चला।
मैने अन्टी को फोन कर के सब कुछ बता दिया।
अन्टी काफि परेशान हो गयीं।
मैने बोला,"अन्टी परेशान मत होइये,सक्षम हो सकता है,आस पास में गया हो।"
अन्टी ने बोला, "चलो बेटा,मैं देखकर आती हूँ,सक्षम को।"
 रात के नौ बज गये थे।पापा घर पर थे।हम सभी टीवी पर न्युज़ देख रहे थे।तभी कुछ ब्रेकींग न्युज़ आ रही थी कि कुछ बच्चों को ढाल बनाकर आतंकवादी किसी फ्लैट में छिप कर बैठे हुए हैं।जब मैंने ध्यान से देखा तो पाता हूँ कि वह अपार्टमेंट सक्षम के अपार्टमेंट के पास वाली अपार्टमेंट है।
जिस फ्लेट पर कब्जा किया हुआ था आतंकवादियों ने,उस बिल्डींग को पुलीस ने चारो तरफ से घेर कर रखा हुआ था।और बार बार ध्वनि-विस्तारक यंत्र से घोषणा किये जा रहा था,कि पुलीस तुम सभी लोगों को चारो तरफ से घेर लिया है,अगर तुम सलामती चाहते हो तो सारे बच्चों को छोड़ दो,और खुद को हमारे हवाले कर दो।
 आतंकवादियों ने कागज  के उपर लिख कर नीचे फेंका।उस पर लिखा हुआ था,अगर कोई चलाकी की गयी,तो तुमलोग बच्चों से हाथ धो बैठोगे।आगे उन्होंने उनके नेता गद्दाफ खान को छोड़ने की डीमांड कर डाली।
ये गद्दाफ खान वही है,जिसकी फाँसी की सजा आने वाले सोमवार को तय की गयी है।इसने हजारों बेकसूर लोगों की जान ली हुई है।उसे छोड़ना,मतलब मौत के फरिश्ते को छोड़ना।
मैं समझ गया,सक्षम बता रहा था,कि उसके बगल वाले अपार्टमेंट में उसके किसी दोस्त का बर्थडे सेलिब्रेशन था।वहाँ सक्षम जाने वाला था। ऐसा तो नहीं कि सक्षम की जान खतरे में हो।यह सोचकर मैं डर गया। मैने पापा को बताया, कि हो सकता है सक्षम उसी फ्लैट में फँसा हुआ हो।मेरी माँ ने सक्षम की माँ को फोन लगाया।और जैसा कि मैने सोचा था,वैसा ही हुआ।सक्षम की माँ फोन पर फूट फूट कर रोने लगीं।मेरी माँ ने उन्हें ढ़ांढ़स बंधाया,और धीरज रखने को कहा।
       फिर हमसभी सक्षम के परिवार से मिलने के लिए,घर से निकले।रास्ते भर बस मैं यही सोचता रहा,'सक्षम मेरा सबसे अच्छा दोस्त है,अगर उसे कुछ हो जाएगा,तो मैं तो बिल्कुल अकेला हो जाऊँगा।मैं किससे होमवर्क कौपी करुँगा,मैं किसके साथ टीफीन शेयर करूँगा,और किसके साथ खेलूँगा।"
         फिर हम सक्षम के अपार्टमेंट के पास पहुँचे,वहाँ मैने जो देखा,वह देखकर दंग रह गया।इतनी ज्यादा पुलीस फोर्स और कमांडोज़,मैने केवल फिल्मों में ही देखा था।पाँच बच्चे आतंकवादियों के कैद में हैं।उनके माँ बाप बिलख-बिलख  के रो रहे थे।
     सक्षम की माँ  और पिता भी वहीं थे।फिर हम उनके पास गये।और हमें पास आते देख,सक्षम की माँ की आँखों से आसुओं की धारा के बह निकली।

   भारत सरकार की तरफ से नोटीस आई कि उन्हें दस घंटे का समय चाहिए।आतंकवादियों को घोषणा करके बता दिया गया कि भारत सरकार ने सोचने के लिए दस घंटे का समय माँगा है।इस पर आतंकवादियों ने  एक और पेपर का टुकड़ा उपर से फेंका।इस पर लिखा था,हम पाँच घंटे से ज्यादा समय नहीं दे पाएँगे।अगर हमारी डीमांड पूरी नहीं हुई,तो एक एक बच्चे की उंग्ली हर आधे आधे घंटे पर काट कर हम नीचे फेंकेंगे।इसमें तुम लोगों के बच्चों को कितना दर्द होगा,यह तो तुम लोगों को पता ही होगा।इसकी जिम्मेदार केवल और केवल तुम्हारी सरकार होगी।
      फिर सरकार को आतंकवादियों की डीमांड की जानकारी भेज दी गयी।हम सभी सरकार के फैसले का इंतजार कर रहे  थें।तभी मेरे दिमाग में एक आइडीया आया।अभी रात के खाने का डीमांड आएगा,अगर उनके खाने में कोई ऐसी दवा मिला दें,जिससे उन्हें धीरे धीरे आधे से एक घंटे में नीन्द आ जाए,तो कैसा रहेगा।
      मैने अपना आइडिया वहाँ खड़ी पुलीस कमिश्नर को बताया।पुलीस कमिश्नर ने मेरे कंधे पर हाथ रखते हुए कहा,शाबास बेटे,लेकिन आज कल के मुजरिम बड़े शातीर हो गये है हमारे द्वारा भेजे गये कोई भी समान को पहले बच्चों पर अपनाएगें।
      हम सभी परेशान थे,तभी कुछ लोगों को बात करते सुना कि गद्दाफ खान को यहाँ लाया जा रहा है।मैं बड़ा डरा हुआ था,कि कितना खतरनाक लगता होगा वह आतंकवादी।
😱बहुत सारा सवाल मन में लगातार उठने लगे।
     फिर पुलिस ने घोषणा कर के आतंकवादियों को बताया, कि तुमसे मिलने गद्दाफी खुद आ रहा है।वह तुम लोगों से मिलने के लिए जिद्ध कर रहा था।
      आतंकवादियों ने अपना संदेश हमें भेजा।'हमसे मजाक ना करना,वरना तुम लोगों पर बहुत भाड़ी पड़ेगा।
      फिर से पुलिस ने घोषणा करके आतंकवादियों को बताया कि ,अगर तुमलोगों को विश्वास नहीं है तो नेशनल टीवी पर देख लो।नेशनल टीवी पर न्युज देखकर आतंकवादियों को विश्वास आ गया।
      गद्दाफ खान को पूरे पुलिस फोर्स के सिक्योरिटी में वहाँ लाया गया।गद्दाफ खान फिर वहाँ से अकेले ही उस अपार्टमेंट में गया।फिर कुछ आधे घंटे बाद,कुछ ऐसा हुआ,जिसका हमें अंदेशा भी नहीं था।पहले गद्दाफ खान नीचे आया,और उसने पुलिस ओफिसर से कुछ गुफ्तगू  किया।
      ओर फिर गद्दाफ ने तीन बार ताली बजाई,और फिर धीरे धीरे बारी बारी से सारे आतंकवादी नीचे आने लगें।सभी अपने हाथ उठाकर आ रहे थें।और किन्हीं के हाथ में कोई भी हथियार नहीं था।
        सभी को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया।गद्दाफ के साथ सभी को अपने साथ ले गएँ।
       हमारे आँख खुले के खुले रह गयें।ये आतंकवादी गद्दाफ खान को छुड़वाने आए थे।पर ये क्या हुआ?और कैसे हुआ?
सक्षम बाहर भाग के आया,और अपने पापा मम्मी से लिपट कर रोने लगा।मेरा दिल भी खुशी के मारे गद गद  हो गया।मेरा दोस्त मेरे सामने सही सलामत खड़ा था।
         फिर मैं भी अपने दोस्त से गले लग गया।और पता नहीं आँखें मेरी क्यों नम हो गयी।हम सभी ने एक दूसरे गुड नाईट कहा,और हम अपने अपने घर के लिए निकल पड़े।
         रात के दो बज गये थे।और एक नया दिन शुरू हो गया था।नई सोच और नई रोशनी हमारे दरवाजे पर दस्तक दे रहा था।
          हम सभी घर पहुँचे और चैन से चादर तानकर सोएँ।
          फिर नेशनल टीवी पर न्युज़ फ्लेश हो रहा था,गद्दाफ खान ने आतंकवादियों से जाकर  क्या कहा?और क्यों सारे आतंकवादियों ने आत्म समर्पण किया।
          दर असल पाँच साल पहले जब गद्दाफी को गिरफ्तार किया गया,तो जेल में किसी सुफी संत का प्रवचन होने वाला था।गद्दाफी सुफी संत के प्रवचनों से इतना प्रभावित हुआ,कि उसे अपने आप से ही घृणा हो गया।और उसने ना जाने कितनी बार सुसाईड करने की कोशिश की।लेकिन हर बार वह बच निकला।
      वह चिल्ला चिल्ला कर रब से अपनी मौत के लिए फर्याद करता।फिर वह हारकर कुछ सुफी संतो की किताबें मंगवाई।और लगातार दिन रात अध्ययन किया।
      अब वह बिल्कुल ही अब बदल गया था।हमेशा शाँत शाँत सा रहने लगा।उसने अपने सारे गुनाह कबूल लिये।
       फिर जब उसे छुड़ाने के लिए आतंकवादी हमला हुआ।और जब उसे पता चला,कि उसे छुड़ाने के लिए कुछ बच्चों को कैद कर लिया गया है,वह बहुत दुखी हुआ,और चिल्ला कर गिड़गिड़ा कर रब से माफी माँगने लगा।
        फिर जैलर से मिलने के लिए जोर जोर से आवाज लगाने लगा।जैलर तक खबर पहुँची।जैलर उससे मिलने पहुँचा।गद्दाफ खान रोते हुए कहा,मुझे जहन्नुम में जगह मिलेगी,अगर एक भी बच्चे पर मेरे चलते एक भी खरोच आया तो।मेरे साथी तो भटके हुए हैं।
अगर वह आत्म समर्पण कर देंगे,तो आप उनपर गोली नहीं चलाओगे ना।जैलर ने कहा,नहीं चलाएँगे।मुझे मेरे साथियों से मुझे मिलवादो,मैं विश्वास दिलाता हूँ,सारे आतंकवादी आत्म समर्पण कर देंगे।
       जैलर ने सारी बात पुलिस कमिश्नर को विस्तार से बताया,फिर जो कुछ भी हुआ,वह तो आपको पता ही है।
भारत की मिट्टी की बात ही निराली है।यहाँ की हवा में प्यार और मोहब्बत की सुगंध फैली हुई है।




yah maano kal ki hi baat ho jaise,main apne doston ke saath apne ghar ke saamne vaale maidaan men kriket khel rahaa thaa।tabhi hamen bahut hi tej,jhakjhor kar rakh dene vaali aavaaj sunaai di।

     meri to jaise ek pal ke lia dil ki dhdakan hi band ho gayi।ham sabhi saham gaye।






phir vaisi hi tej aavaaj lagaataar sunaai dene lagi।ham bahut jyaadaa dar gaye।tabhi meri aur mere doston ke mobaail phon ek saath baje।

maan kaa phon aayaa thaa।betaa jaldi ghar aajaa,shahar men aatankvaadiyon ne hamlaa kiyaa hai।





ham sabhi apne apne ghar chal pde।ghar pahunchne par dekhtaa hun ki meri maan bahut pareshaan hai।paapaa ke ghar aane kaa samay shaam saat se aath baje kaa thaa।maan paapaa ko es aadhe ghante men das baarah baar phon kar chuki thi।

   paapaa ne maahaul jaraa shaant hone tak ophis men hi rukne kaa plaan banaayaa thaa।aatankvaadiyon ko pure jor shor se dhundaa jaa rahaa thaa।hamaare pure shahar men tanaav kaa maahaul thaa।saare shahar men naakaa bandi kar di gayi thi।sabhi gaadiyon ki talaashi li jaa rahi thi।




saat baje ke aaspaas men saksham (mere dost kaa naam)ki maan kaa mere paas phon aataa hai ,"betaa,saksham tumhaare saath men hai kyaa?" maine  khaa,"nahin anti,kyaa vo abhi tak vah ghar nahin pahunchaa?"

anti ne bolaa,"nahin aayaa hai।pataa nahin kahaan hai।phon bhi nahin lag rahaa hai।"

maine bolaa,"anti rukiye,main jaraa sanjay aur vinod se baat kar letaa hun,vah uske saath men niklaa thaa।"

maine sanjay aur vinod ko phon kiyaa,to pataa chalaa ki saksham ko raaste men sahi salaamat chhodaa thaa,jahaan se vah apne ghar ki taraph chalaa।

maine anti ko phon kar ke sab kuchh bataa diyaa।

anti kaaphi pareshaan ho gayin।

maine bolaa,"anti pareshaan mat hoeye,saksham ho saktaa hai,aas paas men gayaa ho।"

anti ne bolaa, "chalo betaa,main dekhakar aati hun,saksham ko।"

 raat ke nau baj gaye the।paapaa ghar par the।ham sabhi tivi par nyuj dekh rahe the।tabhi kuchh breking nyuj aa rahi thi ki kuchh bachchon ko dhaal banaakar aatankvaadi kisi phlait men chhip kar baithe hua hain।jab mainne dhyaan se dekhaa to paataa hun ki vah apaartment saksham ke apaartment ke paas vaali apaartment hai।

jis phlet par kabjaa kiyaa huaa thaa aatankvaadiyon ne,us bilding ko pulis ne chaaro taraph se gher kar rakhaa huaa thaa।aur baar baar adhvani-vistaarak yantr se ghoshnaa kiye jaa rahaa thaa,ki pulis tum sabhi logon ko chaaro taraph se gher liyaa hai,agar tum salaamti chaahte ho to saare bachchon ko chhod do,aur khud ko hamaare havaale kar do।

 aatankvaadiyon ne kaagaj  ke upar likh kar niche phenkaa।us par likhaa huaa thaa,agar koi chalaaki ki gayi,to tumlog bachchon se haath dho baithoge।aage unhonne unke netaa gaddaaph khaan ko chhodne ki dimaand kar daali।

ye gaddaaph khaan vahi hai,jiski phaansi ki sajaa aane vaale somvaar ko tay ki gayi hai।esne hajaaron beksur logon ki jaan li hui hai।use chhodnaa,matalab maut ke pharishte ko chhodnaa।

main samajh gayaa,saksham bataa rahaa thaa,ki uske bagal vaale apaartment men uske kisi dost kaa barthde selibreshan thaa।vahaan saksham jaane vaalaa thaa। aisaa to nahin ki saksham ki jaan khatre men ho।yah sochakar main dar gayaa। maine paapaa ko bataayaa, ki ho saktaa hai saksham usi phlait men phnsaa huaa ho।meri maan ne saksham ki maan ko phon lagaayaa।aur jaisaa ki maine sochaa thaa,vaisaa hi huaa।saksham ki maan phon par phut phut kar rone lagin।meri maan ne unhen dhaandhs bandhaayaa,aur dhiraj rakhne ko kahaa।

       phir hamasbhi saksham ke parivaar se milne ke lia,ghar se nikle।raaste bhar bas main yahi sochtaa rahaa,'saksham meraa sabse achchhaa dost hai,agar use kuchh ho jaaagaa,to main to bilkul akelaa ho jaaungaa।main kisse homavark kaupi karungaa,main kiske saath tiphin sheyar karungaa,aur kiske saath khelungaa।"

         phir ham saksham ke apaartment ke paas pahunche,vahaan maine jo dekhaa,vah dekhakar dang rah gayaa।etni jyaadaa pulis phors aur kamaandoj,maine keval philmon men hi dekhaa thaa।paanch bachche aatankvaadiyon ke kaid men hain।unke maan baap bilakh-bilakh  ke ro rahe the।

     saksham ki maan  aur pitaa bhi vahin the।phir ham unke paas gaye।aur hamen paas aate dekh,saksham ki maan ki aankhon se aasuon ki dhaaraa ke bah nikli।


   bhaarat sarkaar ki taraph se notis aai ki unhen das ghante kaa samay chaahia।aatankvaadiyon ko ghoshnaa karke bataa diyaa gayaa ki bhaarat sarkaar ne sochne ke lia das ghante kaa samay maangaa hai।es par aatankvaadiyon ne  ak aur pepar kaa tukdaa upar se phenkaa।es par likhaa thaa,ham paanch ghante se jyaadaa samay nahin de paaange।agar hamaari dimaand puri nahin hui,to ek ek bachche ki ungli har aadhe aadhe ghante par kaat kar ham niche phenkenge।esmen tum logon ke bachchon ko kitnaa dard hogaa,yah to tum logon ko pataa hi hogaa।eski jimmedaar keval aur keval tumhaari sarkaar hogi।

      phir sarkaar ko aatankvaadiyon ki dimaand ki jaankaari bhej di gayi।ham sabhi sarkaar ke phaisle kaa entjaar kar rahe  then।tabhi mere dimaag men ek aaediyaa aayaa।abhi raat ke khaane kaa dimaand aaagaa,agar unke khaane men koi aisi davaa milaa den,jisse unhen dhire dhire aadhe se ek ghante men nind aa jaaa,to kaisaa rahegaa।

      maine apnaa aaediyaa vahaan khdi pulis kamishnar ko bataayaa।pulis kamishnar ne mere kandhe par haath rakhte hua kahaa,shaabaas bete,lekin aaj kal ke mujarim bde shaatir ho gaye hai hamaare dvaaraa bheje gaye koi bhi samaan ko pahle bachchon par apnaaagen।

      ham sabhi pareshaan the,tabhi kuchh logon ko baat karte sunaa ki gaddaaph khaan ko yahaan laayaa jaa rahaa hai।main bdaa daraa huaa thaa,ki kitnaa khatarnaak lagtaa hogaa vah aatankvaadi।

😱bahut saaraa savaal man men lagaataar uthne lage।

     phir pulis ne ghoshnaa kar ke aatankvaadiyon ko bataayaa, ki tumse milne gaddaaphi khud aa rahaa hai।vah tum logon se milne ke lia jiddh kar rahaa thaa।

      aatankvaadiyon ne apnaa sandesh hamen bhejaa।'hamse majaak naa karnaa,varnaa tum logon par bahut bhaadi pdegaa।

      phir se pulis ne ghoshnaa karke aatankvaadiyon ko bataayaa ki ,agar tumlogon ko vishvaas nahin hai to neshanal tivi par dekh lo।neshanal tivi par nyuj dekhakar aatankvaadiyon ko vishvaas aa gayaa।

      gaddaaph khaan ko pure pulis phors ke sikyoriti men vahaan laayaa gayaa।gaddaaph khaan phir vahaan se akele hi us apaartment men gayaa।phir kuchh aadhe ghante baad,kuchh aisaa huaa,jiskaa hamen andeshaa bhi nahin thaa।pahle gaddaaph khaan niche aayaa,aur usne pulis ophisar se kuchh guphtgu  kiyaa।

      or phir gaddaaph ne tin baar taali bajaai,aur phir dhire dhire baari baari se saare aatankvaadi niche aane lagen।sabhi apne haath uthaakar aa rahe then।aur kinhin ke haath men koi bhi hathiyaar nahin thaa।

        sabhi ko pulis ne giraphtaar kar liyaa।gaddaaph ke saath sabhi ko apne saath le gan।

       hmaare aankh khule ke khule rah gayen।ye aatankvaadi gaddaaph khaan ko chhudvaane aaa the।par ye kyaa huaa?aur kaise huaa?

saksham baahar bhaag ke aayaa,aur apne paapaa mammi se lipat kar rone lagaa।meraa dil bhi khushi ke maare gad gad  ho gayaa।meraa dost mere saamne sahi salaamat khdaa thaa।

         phir main bhi apne dost se gale lag gayaa।aur pataa nahin aankhen meri kyon nam ho gayi।ham sabhi ne ek dusre gud naait kahaa,aur ham apne apne ghar ke lia nikal pde।

         raat ke do baj gaye the।aur ek nayaa din shuru ho gayaa thaa।nayi soch aur nayi roshni hamaare darvaaje par dastak de rahaa thaa।

          ham sabhi ghar pahunche aur chain se chaadar taanakar soan।

          phir neshanal tivi par nyuj phlesh ho rahaa thaa,gaddaaph khaan ne aatankvaadiyon se jaakar  kyaa kahaa?aur kyon saare aatankvaadiyon ne aatm samarpan kiyaa।

          dar asal paanch saal pahle jab gaddaaphi ko giraphtaar kiyaa gayaa,to jel men kisi suphi sant kaa pravachan hone vaalaa thaa।gaddaaphi suphi sant ke pravachnon se etnaa prbhaavit huaa,ki use apne aap se hi ghrinaa ho gayaa।aur usne naa jaane kitni baar susaaid karne ki koshish ki।lekin har baar vah bach niklaa।

      vah chillaa chillaa kar rab se apni maut ke lia pharyaad kartaa।phir vah haarakar kuchh suphi santo ki kitaaben mangvaai।aur lagaataar din raat adhyayan kiyaa।

      ab vah bilkul hi ab badal gayaa thaa।hameshaa shaant shaant saa rahne lagaa।usne apne saare gunaah kabul liye।

       phir jab use chhudaane ke lia aatankvaadi hamlaa huaa।aur jab use pataa chalaa,ki use chhudaane ke lia kuchh bachchon ko kaid kar liyaa gayaa hai,vah bahut dukhi huaa,aur chillaa kar gidgidaa kar rab se maaphi maangne lagaa।

        phir jailar se milne ke lia jor jor se aavaaj lagaane lagaa।jailar tak khabar pahunchi।jailar usse milne pahunchaa।gaddaaph khaan rote hua kahaa,mujhe jahannum men jagah milegi,agar ek bhi bachche par mere chalte ek bhi kharoch aayaa to।mere saathi to bhatke hua hain।

agar vah aatm samarpan kar denge,to aap unapar goli nahin chalaaoge naa।jailar ne kahaa,nahin chalaaange।mujhe mere saathiyon se mujhe milvaado,main vishvaas dilaataa hun,saare aatankvaadi aatm samarpan kar denge।

       jailar ne saari baat pulis kamishnar ko vistaar se bataayaa,phir jo kuchh bhi huaa,vah to aapko pataa hi hai।

bhaarat ki mitti ki baat hi niraali hai।yahaan ki havaa men pyaar aur mohabbat ki sugandh phaili hui hai।

     
Written by sushil kumar
       

1 Mar 2017

सोच बदलो। soch badlo

Shayari

Soch badlo




एक घोसले में गोरइया अपने परिवार के साथ खुशी खुशी रहता था।वहीं पास में ही कौआ अपने परिवार के साथ में रहता था।कौआ गोरइया के घोसले की  सुंदरता को देख,उसे हथियाना चाहता था।
        कौआ ने अपने साथियों के साथ मिलकर गोरइया पे हमला कर दिया।गोरइया ने भी अपनी पूरी ताकत के साथ,अपना घोसला बचाने के लिए उसका मुंंहतोड़ जवाब दिया।और कौए को परास्त किया।इस हमले में गोरइया बुरी तरह घायल हो गया,और शहीद हो गया।
        शरीर को त्यागने के समय,जो गोरइया ने अपने भाईयों को सीख दी,वह हम मनुष्यों के लिए भी सीखने जोग्य बाते थी।।        
        हम शांतिप्रिय पक्षि हैं,और सदा रहेंगे।लेकिन अगर कोई हमारे घर पर कब्जा करने के लिए,हम पर हमला करेगा,तो फिर हम उससे युद्ध करेंगे,और उसे कभी ना भूलने वाला मुंहतोड़ जवाब भी देंगे,ना कि युद्ध टालेंगे।जहाँ हमारी वजुद पर बन आती है,वहाँ हम पीछे नहीं हट सकते हैं।


ek ghosle men goreyaa apne parivaar ke saath khushi khushi rahtaa thaa।vahin paas men hi kauaa apne parivaar ke saath men rahtaa thaa।kauaa goreyaa ke ghosle ki  sundartaa ko dekh,use hathiyaanaa chaahtaa thaa।

        kauaa ne apne saathiyon ke saath milakar goreyaa pe hamlaa kar diyaa।goreyaa ne bhi apni puri taakat ke saath,apnaa ghoslaa bachaane ke lia uskaa munnhtod javaab diyaa।aur kaua ko paraast kiyaa।es hamle men goreyaa buri tarah ghaayal ho gayaa,aur shahid ho gayaa।

        sharir ko tyaagne ke samay,jo goreyaa ne apne bhaaiyon ko sikh di,vah ham manushyon ke lia bhi sikhne jogy baate thi।।         

        ham shaantipriy pakshi hain,aur sadaa rahenge।lekin agar koi hamaare ghar par kabjaa karne ke lia,ham par hamlaa karegaa,to phir ham usse yuddh karenge,aur use kabhi naa bhulne vaalaa munhtod javaab bhi denge,naa ki yuddh taalenge।jahaan hamaari vajud par ban aati hai,vahaan ham pichhe nahin hat sakte hain।

Written by sushil kumar

तू ही मेरी दुनिया है। tu hi meri duniya hai.

Tu hi meri duniya hai. Shayari तकलीफ मेरे हिस्से की तू मुझे ही सहने दे। आँसू मेरे बादल के तू मुझ पर ही बरसने दे। सारे मुसीबतों क...