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आजाद देश की आजाद सोच।🤓

आजाद देश की आजाद सोच हैं हम।
घनघोर अंधेरा को काटता हुआ,उगते हुए सुरज की जोत हैं हम।
अपनी आजादी की कीमत को पहचानने वाले,
आज के भगत सिंह और सुभाष चंद्र बोस हैं हम।
आज हमारे देश की अखंडता को चुनौती देने वाले,
नेताओं की कूटनीति की तोड़ हैं हम।
अपनी आजादी को किसी भी हालत में दाव पे ना लगने देने वाले,
आज के चंद्रशेखर आजाद और खुदीराम बोस हैं हम।

हमारी माँ आज हमें पुकार रही है।

हमारी माँ आज हमें पुकार रही है।
जीवन की हर साँस उनके कर्ज के उधारी है।

हमारा और आपका साथ।🤓

हमारा और आपका साथ।

हर दुआ में

मेरी हर दुआ में,तेरा नाम आया है2

तू ही मेरी धड़कन में,जाने कब से समाया है।2

वह दिन मुझे याद है,जब पहली बार तुम्हें देखा था।2

दिल को मैं थाम ना सका,मन भी साथ में बहका था।2

वह पहला पहला प्यार का,अजब ही नशा था।2

आज तक उतर ना पाया,ऐसा वह चढ़ा था।

मेरी हर दुआ में,तेरा नाम आया है2

तू ही मेरी धड़कन में,जाने कब से समाया है।2

मेरा वह पहला पहला प्यार का,अजब ही नशा था।2

आज तक उतर ना पाया,ऐसा वह चढ़ा था।
मैने हर दुआ में,बस तेरी खुशी माँगी है।2

फिर मैं तुझसे कैसे पूछूं?तुम्हारी दिल की क्या चाहत है।2

मेरे इस सवाल से,कहीं तुम्हारा दिल ना दुख जाए।2

इसलिए मैं सहमा रहता हूँ ,मन में ये सवाल लिए।2

मेरी हर दुआ में,तेरा नाम आया है2

तू ही मेरी धड़कन में,जाने कब से समाया है।2


समय का पहिया

समय का पहिया,ताबड़तोड़ चलता चला जा रहा है।
हर किसी के जीवन में,कुछ खुशी तो कुछ गम के लम्हें बांटे जा रहा है।
कुछ तो ऐसे भी हैं,जो बीते समय के दुख को याद कर के रो रहे हैं।
तो कुछ ऐसे भी हैं,जो बीते हुए समय के खुशी के लम्हें को याद कर के हंस रहे हैं।
कोई ऐसा जहाँ बना ले हम,
जहाँ दुख नहीं खुशियों का साया हो।
हर कोई खुश हो,संतुष्ट हो,
किसी के मन में कोई गम की छाया ना  हो।

तुम ही मेरी ताकत हो,तुम  हो मेरी जुनून।

ओ मेरे हमराही,मेरे साथी,तुमसे ही,है मेरी वजूद।


जीवन के हर लम्हें में,है तुम्हारी मुझे जरुरत।
तुम्हारे बिना कुछ नहीं,बस तुममें ही है मेरी जन्नत।

माँ बाबूजी,आप हमारे साथ आकर क्यों नहीं रहते हैं।

माँ बाबूजी,आप हमारे साथ आकर क्यों नहीं रहते हैं।


हम यहाँ बहुत ही परेशान हैं।


आपके साथ के बिना हैरान हैं ।


आपके प्यार और आशिर्वाद के बिना


हम बिन कश्ती मझधार में हैं।




माँ बाबू जी,आप हमारे साथ आकर क्यों नहीं रहते हैं।


बचपन से जवानी तक आपने हमारा साथ दिया।


सही संस्कार और सही दिशा सदा हमें प्रदान किया।


जब गिरे और रोये,तो साहस और विश्वास दिया।


और जब अव्वल नंबर से पास हुए,


तो प्रोत्साहन और लाकर हमें चोकलट दिया।


आज आपके साथ के बिना,


हम अधूरा अधूरा सा महसूस करते हैं।


जिंदगी के हर खुशी के लम्हे को,


नीरस हो कर जीते हैं।


सच कहते हैं,माँ बाबू जी हम


जल बिन मछली तड़पते हैं।




माँ बाबू जी,आप हमारे साथ आकर क्यों नहीं रहते हैं।


आज भी जब कोई तकलीफ होती है।
आपको याद हम  सदा करते हैं।

हम भूले नहीं,वह बचपन के दिन,
जब सारे तकलीफ , आपके गोद में आकर बिसरते थे।


आज भी हम तकलीफ में हैं,जिंदगी बड़ी नासूर सी बन गयी है।
आपके साथ के बिना हर महफिल,यहाँ मातम सा लगता है।

बस रोम रोम आज यही गुजारिश कर रहा है हमसे।
ऋण चुका लो अपना,वरना समय निकल जाएगा कल तुमसे।


माँ पापा जी,आप हमारे साथ आकर क्यों नहीं रहते हैं।


आज भले ही हम आसमान की ऊँचाईयों को छू रहे हैं  यहाँ।

हर सुख,हर सुविधा आज हमारे आशियाने में  है।

पर दिल मे असंतुष्टी  भरा,और मन बहूत बेचैन है।

क्योंकि हमारी खुशियों के पल में,आप हमारे साथ नहीं हो।

माँ बाबू जी,आपके साथ के बिना,हर पल यहाँ निरर्थक है।

माँ पापा जी,आप हमारे साथ आकर क्यों नहीं रहते हैं।

खैरीयत

हर साँस के साथ,बस एक ही आवाज दिल में गुंजता है।
तुम्हारी खैरीयत रहे,मैं तो यहाँ जिंदा हूँ।
आज भी हर हर सुबह,तुम्हारी खैरीयत के लिए दुआ करता हूँ।
हमारा दिन भले खराब जाए, पर तुम्हारी झोली में केवल खुशियों की सौगात आए।
मेरी जिंदगी है बहुत ही छोटी सी,
यह हमें पता है।
पर जिंदगी के हर पन्ने को तेरे नाम से लिखा है।

दिल है बेचैन

दिल है बेचैन,
मेरे रस्ते पर नैन
आज दिखी नहीं मेरी जान
मैं हो गया हूँ परेशान
कहाँ गया मेरा चाँद
मेरा सूना है,दिल का आसमान

मेरे सपनो को कर चकनाचूर


मेरे सपनो को कर चकनाचूर,
हो के मगरुर,
जिन्दगी से हो गयी हो दूर।
मैने क्या गुनाह किया।

पहली बार जब मिला तुमसे हूर,
तुमने इश्क करने को,कर दिया था मजबूर
आज जब छाया है दिल पे सुरूर
कहाँ तुम चले गये।

वह दिन है आज भी मुझे याद
जब तुम आई थी मेरे पास
किया था मुझे तुमने जब प्रपोज़
उड़ गये थे मेरे होश।
क्यों नहीं ,संभाला था दिल को तब
यह मुझे हो रहा है आज अफसोस

गली गली भटक रहा हूँ मैं आज
बस छोटी सी,दिल में लिए हुए आस
कि मेरी महबूबा,कब होगी मेरे पास
बस यही सवाल कर रहा है मन हर बार
पर मेरे दिल को है ये विश्वास
कि मेरी जिन्दगी की खत्म होगी अब तलाश।



ललक

लहरों का लहरों से मिलने की तड़प
गगन चुम्बी आसमान का,समुन्द्र को चुमने की ललक
फतिंगो का अग्णि में समाने की हठ
यह क्या है,यह एक जुनून है,
अपने प्यार को हासिल करने का।
आओ हम भी वही जुनून
अपने प्यार को हासिल करने के लिए
अपने दिल में जगा लें।

बहुत सह लिया है हमने

बहुत सह लिया है हमने kavitadilse.top द्वारा आपस अभी पाठको को समर्पित है। बहुत सह लिया है हमने खून की नदियां बहा दी तुमने। पूरा भ...