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जी़रो फिगर के साईड इफेक्ट्स।

बचपन से हम जी़रो के जी़रो पर ही रह गएँ।हम बात कर रहें हैं,अपनी बाडी के बारे में।हम बचपन में रामायण में भाग लेने के लिए पहुँचे, और अपना नाम दे दिएँ।हमें हमारी सुंदरता को देख,हमें राम जी का रोल दिया गया।और जब हम जवान हुएँ,और कालेज पहुँचे और रामायण में भाग लेने के लिए दुबारा नाम दिएँ,तो हमारी जी़रो फिगर को देखते हुए, हमे सीता का रोल दिया गया।क्योंकि कालेज में कुछ एक ही लड़की थी,जिसका जी़रो फिगर था।जिन लड़कियों का जी़रो फिगर था,लेकिन वह शामली थी।हम परेशान हो गए थे,जो कि सारा कालेज हमें सीता बनाने पर तुला हुआ जो था।
  जी़रो फिगर का पहला नेगेटिव इफेक्ट हमें दिख चुका था।  हमें फिर एक लड़की से प्यार हो गया।उसकी साईज़ तो हमसे डबल थी,पर देखने में हमें बहुत सुंदर दिखती थी।पर पता नहीं क्यों लोग उसे लाईन नहीं मारते थे।
और तो और कुछ दोस्त तो हमसे ये तक बोल दिए थे,कि ' साले तेरे को उस मोटी में क्या दिखता है,जो तू उससे प्यार करने लगा है।'
हमें उसका संबोधन इतना बुरा लगा,कि हम उस दोस्त से बात करना बंद कर दिए।फिर कुछ दिन बाद वही दोस्त आकर हमसे माफी माँगा।और हमने उसे माफ कर दिया।
फिर हमने फ्रेंडशिप डे के दिन उसे फ्रेंडशिप डे कार्ड देकर उससे दोस्ती कर ली।फिर धीरे धीरे हम क्लोज़ होते चले गए।और हर दिन हम उसे फ्रेंडशिप ट्रीट देने लगें।कभी बर्गर, कभी पिज्ज़ा, तो कभी समोसा तो कभी वड़ा पाव।वह और भी फैलती ही जा रही थी,पर पता नहीं क्यों हमें वह और भी सुंदर ही दिखने लगी थी।
      एक दिन उसने हमसे मजाक मजाक में पूछ ही लिया, 'क्यों हमसे प्यार करते हो क्या?'(हमें लगा शायद वो भी हमसे प्यार करने लगी है)ऐसे में अकस्मात ही हमारे लब्ज निकल पड़े। हाँ,बहुत दिनों से,तुमसे कहना चाहते थे,कि हमें तुम बहुत अच्छी लगती हो और हम तुमसे बहुत प्यार करते हैं।
     वह हंसने लगी,बोली ' तुम मेरे लिए क्या कर सकते हो?'
हमने भी आशिकाना भाव में जवाब दे दिया।'जो तुम चाहो,वह तुम्हें हम लाकर दे सकते हैं।'
उसने बोला,चलो मैं तुम्हारा प्यार स्वीकार कर लूंगी,लेकिन एक शर्त पर कि तुमहें हमें अपने दोनो बाहों में भरकर उठाना पड़ेगा।
हम नर्वस हो गए, पर हिम्मत नहीं हारे।बोला,चल उठा लिया तो।
वो बोली 'फिर मैं तेरी,नहीं तो फिर कभी तू मेरे नजदीक आने की सोचना भी मत।
हमने भी बोल दिया,चल ठीक है।
हम गए,और दोनो बाहों से पकड़कर उसे उठाने लगा।उठाने का तो उठा लिया,पर बेलेंस गड़बड़ाया,और हम धड़ाम से नीचे गिर पड़े,और हमारे ऊपर वो गिरी।
उसे तो चोट नहीं लगी,पर हम जख्मी हो गए।
उसने मजाक मजाक में बोल दिया,'अरे बच्चे पहले तो तू बाडी बना ले,गर्लफ्रैंड बाद में बनाना।'
हम भी अगले ही दिन जख्मी हालत में जिमखाना पहुँच गए।और जिम इंस्ट्रक्टर से पूछ लिया'बाडी बनाने में कितना टाईम लगेगा।
उसने छह से सात महीने का हमसे टाईम माँगा।और हमने उसे दे दिया।उस समय की स्थिति ऐसी थी कि कोई बच्चा क्लास में होमवर्क करके नहीं आया है,और क्लास टीचर उसे दस मिनट का टाईम दिया हो,होमवर्क कंप्लीट करने को,वरना पनिस्मेंट पाने के लिए तैयार रहने को कहा हो।
उसने हर दिन का डायट का लिस्ट हमे दे दिया।अब हम रोज वही डायट लेने लगें।साथ में रोज का हैभी वर्कआउट।धीरे धीरे हमारी सुवह  सुवह पेट साफ होना ही बंद हो गया।
 पहले दस मिनट में निकल जाया करता था,अब कभी भी आधे घंटे से कम नहीं लगता था।कभी कभी तो आधे घंटे में भी हल्का महसूस नहीं होता था,तो एक से दो घंटे तक भी बैठना पड़ जाता था।
    हैभी वर्कआउट के कारन पूरा बदन में दर्द हो जाया करता था,जिसके कारन रात भर करवटें बदलता रहता था।और सुवह सुवह दो ढाई बजे नींद लगती थी,जिसके कारन सुवह लेट से नींद खुलती थी।
    एक महीना होने पर हमने अपना वैट नापा,जो पाया,उसे देख हमे चक्कर आ गया।हमारा वैट एक पाव घट गया था।जब हम जिम जोयन किए थे,तब हमारा वैट पच्चपन किलो था,आज हमारा वैट चौवन किलो साढ़े सात सो ग्राम था।
हम परेशान हो गए।हमने जिम इंस्ट्रक्टर को भर पैट गाली दिया,और वहाँ से निकल गएँ।
    वह एक पाव हासिल करने में हमें तीन महीना लग गया।आज भी हम जी़रो फिगर पे ही अटके हुए हैं।

मस्कुलर फिगर का क्रेज़।

आज कल की लड़कियों की क्या बताऊँ यारों।
खुद भले ही साँवली रहे,या फिर मोटी,
पर चाहिए मस्कुलर लड़का।
मैं ठहरा जी़रो फिगर,करता था किसी लड़की को पसंद।
पहुँच गया फूल गुलाब का लेकर प्रपोज़ करने को अपनी महबूबा को।
क्या मारा था उस लड़की ने हमें अपने सैन्डल से।
सुज गया था गाल हमारा, उठ ना पाया था दो दिन तक अपने खाट से।
वह लड़की तो खुद बहुत मोटी थी,और उसे लड़का चाहिए था मस्कुलर।
मैं था साला ज़ीरो फिगर।पहुँच गया जिमखाना, सुजा हुआ मुंह लेकर।
जिम ट्रेनर ने पूछा हमसे,कैसी बाडी चाहिए आपको।
हमने कहा भाई साहब मस्कुलर बाडी लगानी है हमको।
ट्रेनर ने मजा लेकर पूछा हमसे,
क्यों गाल सुजाना है उसकी,जिसने गाल सुजाई है आपकी।
हमने जवाब दिया,बस ऐसा ही कुछ समझ लो आप।
ट्रेनर ने दिया मुझे दिन भर के डाइट का लिस्ट,और दिया एक प्रोटीन पाऊडर साथ में लेने का आदेश।
कराया पहला दिन दो घंटे का वर्कआउट, रात में जब सोया,पूरा शरीर रात भर रोया।
कराहता रहा रात भर,बस अपनी माँ को याद कर करके।
अगे मईया,पूरा शरीर दर्द कर रहा है बढ़ बढ़ के।
कोई आकर तेल से मालीश करदे जीभर के।
कुछ दिन तो फ्रेश होने में निकलना ही भूल गया।
सुवह एक घँटा से दो घँटा तक बैठता,
तब जाकर एक पाव निकलता।
एक महीना लगातार वर्कआउट और स्ट्रोंग डायट लेने के बाद ,ऐसा चैंज आया दोस्तों,कि
बनने चले थे मस्कुलर पर हम जी़रो से नेगेटिव हो गएँ।
छोड़ दिया सपना मस्कुलर बनने का,पुराने दिनचर्ये में लौट गए।
एक महीने में हम नेगेटिव हो गये यारो,पर हमें जी़रो बनने में हमें पाँच महीने लग गएँ।
आ गया हमें याद एक कहावत
,खोना आसान है,पर संजोना बहुत मुश्किल है दोस्तों।

गांधीगिरी या गांडीगिरी।

गांधीगिरी
अगर कोई आपको एक थप्पड़ मारे,तो आप उसके सामने दूसरे गाल को आगे कर दीजिए।

गांडीगिरी
अगर किसी ने एक थप्पड़ जड़ा,तो उसके दोनो गाल को तो लाल कर ही देंगे,साथ में दोनो बेस को भी लातो घूंसों से मार मार कर पकोड़े बना देंगे।


अपनी आजादी.....

कैसे हम भूल गए हैं.  ..
अपनी  आजादी(2)
 स्वदेश की आजादी में छिपी है
अपनी आजादी...... (2)
अपनी जान से प्यारा इस जगत मे
हैं  अपनी आजादी
अपनी आजादी...
अपने  झमेलों में भूले
हैं अपनी  आजादी
अपनी  आजादी... 

माँ क्यों नहीं तुम आकर,मुझे अपने आँचल में सुलाती हो/

जीवन के पथ पर चलते चलते,मैं बहुत थक चुका हूँ माँ।
सारी जिम्मेदारियों की बोझ उठाते उठाते,मेरे कँधे भी झुक चुके हैं माँ।
जबसे बचपन छोड़,मैने जवानी में कदम रखा है माँ।
जिम्मेदारियों के बोझ तले,साँस भी ले नहीं पाता हूँ माँ।





जिंदगी को जीना सीख लो।

जिंदगी को जीना सीख लो।
खुशी के जाम से ज्यादा,गम के जहर को पीना सीख लो।
जीवन है,तब तक संघर्ष तो  करना पड़ेगा मित्रो।
हर परिस्थिति में खुद को ढालना सीख लो।
ऐसा नहीं कि दुख के बादल नहीं छँटेगे  ।
पर नैनो की बारिश का भी आनन्द लेना सीख लो।
कुछ लोगों का तो काम ही है आपको तकलीफ देना।
ईश्वर की रजा समझ,उन्हें माफ करना सीख लो।
जिंदगी बहुत छोटी सी है मित्रों।
जीवन के हर पल में,लोगों में खुशी बाटना सीख लो।

जीवन नइया

जीवन नइया की लीला है न्यारी,

दुख सुख कर रहें हैं,साथ में सवारी।

कभी दुख  मुझे और सुख को उठा कर दे पटक मारी।

तो कभी दुख को मैने और सुख ने मिलकर धोबी पछाड़ डाली।

इस उठा पटक का मजा भी अजब है मेरे भाई।

कभी हम नाव पर सवार करें,तो कभी नाव हम पर करे सवारी।

जीवन की नइया में,भरी पड़ी है खुशियाँ सारी।      

खुशी को लुटाटे चलो,और दुख को समेटते चलो मेरे हमराही।

आजाद देश की आजाद सोच।🤓

आजाद देश की आजाद सोच हैं हम।
घनघोर अंधेरा को काटता हुआ,उगते हुए सुरज की जोत हैं हम।
अपनी आजादी की कीमत को पहचानने वाले,
आज के भगत सिंह और सुभाष चंद्र बोस हैं हम।
आज हमारे देश की अखंडता को चुनौती देने वाले,
नेताओं की कूटनीति की तोड़ हैं हम।
अपनी आजादी को किसी भी हालत में दाव पे ना लगने देने वाले,
आज के चंद्रशेखर आजाद और खुदीराम बोस हैं हम।

हमारी माँ आज हमें पुकार रही है।

हमारी माँ आज हमें पुकार रही है।
जीवन की हर साँस उनके कर्ज के उधारी है।

हमारा और आपका साथ।🤓

हमारा और आपका साथ।

हर दुआ में

मेरी हर दुआ में,तेरा नाम आया है2

तू ही मेरी धड़कन में,जाने कब से समाया है।2

वह दिन मुझे याद है,जब पहली बार तुम्हें देखा था।2

दिल को मैं थाम ना सका,मन भी साथ में बहका था।2

वह पहला पहला प्यार का,अजब ही नशा था।2

आज तक उतर ना पाया,ऐसा वह चढ़ा था।

मेरी हर दुआ में,तेरा नाम आया है2

तू ही मेरी धड़कन में,जाने कब से समाया है।2

मेरा वह पहला पहला प्यार का,अजब ही नशा था।2

आज तक उतर ना पाया,ऐसा वह चढ़ा था।
मैने हर दुआ में,बस तेरी खुशी माँगी है।2

फिर मैं तुझसे कैसे पूछूं?तुम्हारी दिल की क्या चाहत है।2

मेरे इस सवाल से,कहीं तुम्हारा दिल ना दुख जाए।2

इसलिए मैं सहमा रहता हूँ ,मन में ये सवाल लिए।2

मेरी हर दुआ में,तेरा नाम आया है2

तू ही मेरी धड़कन में,जाने कब से समाया है।2


समय का पहिया

समय का पहिया,ताबड़तोड़ चलता चला जा रहा है।
हर किसी के जीवन में,कुछ खुशी तो कुछ गम के लम्हें बांटे जा रहा है।
कुछ तो ऐसे भी हैं,जो बीते समय के दुख को याद कर के रो रहे हैं।
तो कुछ ऐसे भी हैं,जो बीते हुए समय के खुशी के लम्हें को याद कर के हंस रहे हैं।
कोई ऐसा जहाँ बना ले हम,
जहाँ दुख नहीं खुशियों का साया हो।
हर कोई खुश हो,संतुष्ट हो,
किसी के मन में कोई गम की छाया ना  हो।

तुम ही मेरी ताकत हो,तुम  हो मेरी जुनून।

ओ मेरे हमराही,मेरे साथी,तुमसे ही,है मेरी वजूद।


जीवन के हर लम्हें में,है तुम्हारी मुझे जरुरत।
तुम्हारे बिना कुछ नहीं,बस तुममें ही है मेरी जन्नत।

माँ बाबूजी,आप हमारे साथ आकर क्यों नहीं रहते हैं।

माँ बाबूजी,आप हमारे साथ आकर क्यों नहीं रहते हैं।


हम यहाँ बहुत ही परेशान हैं।


आपके साथ के बिना हैरान हैं ।


आपके प्यार और आशिर्वाद के बिना


हम बिन कश्ती मझधार में हैं।




माँ बाबू जी,आप हमारे साथ आकर क्यों नहीं रहते हैं।


बचपन से जवानी तक आपने हमारा साथ दिया।


सही संस्कार और सही दिशा सदा हमें प्रदान किया।


जब गिरे और रोये,तो साहस और विश्वास दिया।


और जब अव्वल नंबर से पास हुए,


तो प्रोत्साहन और लाकर हमें चोकलट दिया।


आज आपके साथ के बिना,


हम अधूरा अधूरा सा महसूस करते हैं।


जिंदगी के हर खुशी के लम्हे को,


नीरस हो कर जीते हैं।


सच कहते हैं,माँ बाबू जी हम


जल बिन मछली तड़पते हैं।




माँ बाबू जी,आप हमारे साथ आकर क्यों नहीं रहते हैं।


आज भी जब कोई तकलीफ होती है।
आपको याद हम  सदा करते हैं।

हम भूले नहीं,वह बचपन के दिन,
जब सारे तकलीफ , आपके गोद में आकर बिसरते थे।


आज भी हम तकलीफ में हैं,जिंदगी बड़ी नासूर सी बन गयी है।
आपके साथ के बिना हर महफिल,यहाँ मातम सा लगता है।

बस रोम रोम आज यही गुजारिश कर रहा है हमसे।
ऋण चुका लो अपना,वरना समय निकल जाएगा कल तुमसे।


माँ पापा जी,आप हमारे साथ आकर क्यों नहीं रहते हैं।


आज भले ही हम आसमान की ऊँचाईयों को छू रहे हैं  यहाँ।

हर सुख,हर सुविधा आज हमारे आशियाने में  है।

पर दिल मे असंतुष्टी  भरा,और मन बहूत बेचैन है।

क्योंकि हमारी खुशियों के पल में,आप हमारे साथ नहीं हो।

माँ बाबू जी,आपके साथ के बिना,हर पल यहाँ निरर्थक है।

माँ पापा जी,आप हमारे साथ आकर क्यों नहीं रहते हैं।

खैरीयत

हर साँस के साथ,बस एक ही आवाज दिल में गुंजता है।
तुम्हारी खैरीयत रहे,मैं तो यहाँ जिंदा हूँ।
आज भी हर हर सुबह,तुम्हारी खैरीयत के लिए दुआ करता हूँ।
हमारा दिन भले खराब जाए, पर तुम्हारी झोली में केवल खुशियों की सौगात आए।
मेरी जिंदगी है बहुत ही छोटी सी,
यह हमें पता है।
पर जिंदगी के हर पन्ने को तेरे नाम से लिखा है।

दिल है बेचैन

दिल है बेचैन,
मेरे रस्ते पर नैन
आज दिखी नहीं मेरी जान
मैं हो गया हूँ परेशान
कहाँ गया मेरा चाँद
मेरा सूना है,दिल का आसमान

मेरे सपनो को कर चकनाचूर


मेरे सपनो को कर चकनाचूर,
हो के मगरुर,
जिन्दगी से हो गयी हो दूर।
मैने क्या गुनाह किया।

पहली बार जब मिला तुमसे हूर,
तुमने इश्क करने को,कर दिया था मजबूर
आज जब छाया है दिल पे सुरूर
कहाँ तुम चले गये।

वह दिन है आज भी मुझे याद
जब तुम आई थी मेरे पास
किया था मुझे तुमने जब प्रपोज़
उड़ गये थे मेरे होश।
क्यों नहीं ,संभाला था दिल को तब
यह मुझे हो रहा है आज अफसोस

गली गली भटक रहा हूँ मैं आज
बस छोटी सी,दिल में लिए हुए आस
कि मेरी महबूबा,कब होगी मेरे पास
बस यही सवाल कर रहा है मन हर बार
पर मेरे दिल को है ये विश्वास
कि मेरी जिन्दगी की खत्म होगी अब तलाश।



ललक

लहरों का लहरों से मिलने की तड़प
गगन चुम्बी आसमान का,समुन्द्र को चुमने की ललक
फतिंगो का अग्णि में समाने की हठ
यह क्या है,यह एक जुनून है,
अपने प्यार को हासिल करने का।
आओ हम भी वही जुनून
अपने प्यार को हासिल करने के लिए
अपने दिल में जगा लें।

जिन्दगी की नब्ज पकड़कर चलना मुझे आ गया।

जिन्दगी की नब्ज पकड़कर चलना मुझे आ गया।
मुसीबत भरे लम्हों को झेलना मुझे आ गया।
जीवन के हर परीक्षा को हल करना मुझे आ गया।
दुख के हर लम्हों में,खुशियों को समेटना आ गया।
जिन्दगी बहुत छोटी सी है
उस अनमोल पल को जीना गया।

मैं अपनी जिम्मेवारी को कैसे निभा पाऊँगा।

 मैं अपनी जिम्मेवारी को कैसे निभा पाऊँगा।


अपनी ही नौकरी के बोझ तले,


कब तक साँस ले पाऊँगा।


घर पर जब पहुँचता हूँ,


तो दिल में ख्याल बस यही आता है,


कि अपने परिजनों के लिए बहुत कुछ करना है।


माँ के लिए गले का हार लेना है।
बहन की शादी के लिए अच्छा लड़का देखना है।
पापा के लिए नयी गाड़ी लेनी है।

पर जब दफ्तर में पहुँचता हूँ,


तो पाता हूँ,कि हर कोई बस मेरे कंधे पर बंधूक रख कर गोली चलाना चाहते है।
ऐसे में कब तक खुद को बचा पाऊँगा?ये बहुत बड़ा सवाल है।
मैं अपनी जिम्मेवारी को कैसे निभा पाऊँगा।




मन बावरे संभल जा।

मन  बावरे संभल जा।
                   क्यों भटक रहा है इधर उधर।
ईश्वर की भक्ति को छोड़,
                    क्यों फँस रहा है बंधन में।



पप्पु पास हो गया।


क्या कर रहे हो पप्पु,थम के जरा साँस तो ले लो।


क्या कर रहे हो पप्पु,


                          थम के जरा साँस तो ले लो।



भागम भाग क्यों मचा रखी है,


                          क्या धुंढ रहे हो पप्पु।




कभी इधर,तो कभी उधर,


                           क्यों बंदर जैसा फाँद रहे हो।



एक जगह स्थिर होकर,


                            क्यों नहीं तू सोच रहा है पप्पु।




इतनी मेहनत,इतना जतन ,


                             तू किस लिए,किये जा रहा है पप्पु।



मालूम है ना,कल फिर से फैल हो जाएगा तू।



                             फिर इतना दिमाग क्यों भिड़ा रहा है ।




पप्पु पास हो जाएगा,


                              क्या ये कभी सच हो पाएगा।



सारा जग हैरान है कि पप्पु



                              पास कब हो पाएगा?😢





मेरा दिल है दिवाना☺

मेरा दिल है दिवाना,जो हर खुबसूरत चेहरे को देख धड़कता है।



कभी चहकता है,तो कभी बहकता है।



कभी शायरी के बहाने,तो कभी कविता के बहाने,जुबान भी हमारा फिसलता है।



दिल भी हमारा बड़ा नादान है,जो हर कली को देख हमेशा महकता है।


तारे भी चाँद की खुबसूरती देखकर टिमटिमाते हैं।


कभी बस में किसी हसीना से मुलाकात हो जाया  करता है।



तो कभी चलते चलते राह में किसी हसीना से मुलाकात हो जाया करता है।



और फिर क्या दिल दिल धक धक,



धक धक दिल दिल,तब से अब तक,अब से कब तक।



मैं और मेरा तनाव का साथ


मैं और मेरा तनाव का साथ

मानो दो जिस्म एक जान हैं आज



जितना भी खुशनुमा माहौल हो कहीं

पर तनाव की यारी है बहुत पक्की

हमेशा हमारी साथ जो निभाती है।



अपने छोड़ जाते हैं  साथ

बुरे समम में हमारे।



एक तनाव ही तो है,हमारा सच्चा दोस्त

जो नहीं छोड़ता है हमें, किसी भी पल में।


इन दिनों भी कितना तनाव हम झेल रहे हैं आज कल में।


बाहर वालों का तो धर्म ही है तनाव देने का

पर अपने भी बख्श नहीं रहे हैं

हर एक क्षण में।







अपनी पहचान।

                            श.प्
कर्म ही पहचान है हमारी।
             कर्म ही स्तम्ब है हमारी जिंदगी की।
कर्म से ही बनता है हमारा शरीर,
            और  कर्म से  ही निर्धारीत होता है हमारा संस्कार।

         

दो दिन की जिंदगी


  दो दिन की जिंदगी को

                व्यर्थ में क्यों गँवाते हो।

जीवन के हर पन्ने पर,

                गंदगी क्यों फैलाते हो।

खाली हाथ आये थे तब,

           अब मुट्ठी क्यों नहीं खोल पाते हो।

लोभ मोह और क्रोध इर्ष्या वश

      बैंक बेलेंस और प्रोपरटी छोड़ नहीं पाते हो।

अपनों के भावनाओं को बिना समझे
                               क्यों ठेस  पहुँचाते हो।

जिस माँ बाप ने सदा तुमसे प्यार से बोला।

                     आज तुम उनसे क्यों खखुआते हो।

बिना कारन उनका दिल दुखाकर,

                         नैनों से अक्ष्रु क्यों गिरवाते हो।

 सभी के अरमानों को कुचलते हुए,

                          क्यों आगे चले जाते हो।

जरा सा रुक कर,दो पल की साँस लेकर,

               क्यों नहीं अपनो से प्यार से बतियाते हो।

सबको साथ लेकर चलने की,
     
                   क्यों नहीं जिम्मेवारी उठाते हैं।




वह डरावनी रात !

वह रात घंघोर अंधेरा था,
              सड़क पर मैं अकेला था।
धीरे धीरे कदम  रख रहा था,
              क्योंकि हर जगह बस सन्नाटा  था।
हर चीज डरावना था,
               दिल भी तेजी से धकधका रहा था।
चलते समय मानो एसा लगता,
                जैसे कोई पीछा कर रहा था।
भूत पिशाच का डर रह रह कर,
                  मन में भय घर कर रहा था।
कभी आगे तो कभी पीछे
                   टोर्च जलाकर देख रहा था।
फिर रूक रूक कर,हर दूसरे पल में,
                      बिल्ली जोर जोर से रो रही थी।
वह आवाज सुन सुन कर मेरा,
                       धड़कन रुका जा रहा था।
कदम भी मेरा तेजी से,
                      घर की ओर चला जा रहा था।
जैसे तैसे घर जब पहुँचा,
                       आँखों में नींद नहीं आ रहा था।
जरा सा पलक झपकते ही,
                        भयानक सपना आ रहा था।
मेरे जीवन की वह भयानक रात को
                         आज भी भूल नहीं पा रहा हूँ।
             
               

               



अहसास

                             श.प्र.
जिंदगी के हर अहसास को जीना सीख लो।
जीवन के हर पग पर चलना सीख लो।
हर मिठास और करवाहट को जीह्वा पर जगह दो।
खुशी और गम के लम्हों को जीना सीख लो।
जीवन के हर धारा में,परमात्मा की मौज है।
ईश्वर की हर मौज में,रहना सीख लो।


हर दिल की आवाज हूँ मैं।

हर दिल की आवाज हूँ मैं।
             उगते हुए सुरज की आगाज़ हूँ मैं।
नव युवकों के  सोच और विचार में हूँ मैं।
             देश के आम आदमी की हूँकार में हूँ मैं।
हर दबी हुई आवाज की दहाड़ में हूँ मैं।
               हर निराशाओं की आश में हूँ मैं।
 हर दुखी व्यक्ति की खुशी में हूँ मैं ।
             हर अंधियारी मन की रोशनदान हूँ मैं।
हर खिलाड़ीयों की प्रयास में हूँ मैं।
                 हारी हुई बाजी के जीतने की विश्वास में हूँ मैं।
हाँ सही पकड़ा आपने
                                आत्मविश्वास हूँ मैं।

             


             
              

अहंकार ही हमारा दुश्मन है।

जब जन्मे थे इस धरती पर बंदे,
                                    क्या लाये थे संग में ।

जब जाओगे जग छोड़कर,
                             क्या लेकर जाओगे संग में।

खाली हाथ ही आए थे बंदे,
                              और खाली हाथ ही जाओगे।

फिर मेरा और तेरा  करते हुए
                                 जग में क्यों  बौढ़ाए हो।

सभी लोग यहाँ पागल हैं,
                                 अपने बेंक बेलेंस बढ़ाने में।

प्रोपरटी की लाईन लगा दी है,
                               अपने ब्लेक मनी छिपाने में।

बड़े बड़े राजा और अरबपती,
                                 सभी छोड़ गये अपनी सम्पत्ति।

धर्मराज ने भी नहीं बख्शा उन्हें,
                                 ले देकर उनसे बख्शिश।

फिर मेरा क्या,और तेरा क्या
                                 सब कर्मों का फेरा है बंदे।

कर्म जैसा किए  हो पूर्व जन्म में
                                  वैसे ही संस्कार आप पाओगे।

तेरा कुछ है क्या यहाँ बंदे,
                          जो तू अहम को पाले हो।


ये धन दौलत और शरीर की काया,
                                      सब में मेरी माया है।

फिर इतनी अकड़ तू किस लिए,
                              अपने भाईयों पर इतना दिखाता है।

भूला रहता है,अपनी सच्चाई से,
                              बस अपने अहम बस सबको दबाता है।

अहंकार रुपी मैल धुलने के बाद ही,
                                 तुम योग्य बन पाओगे।

परमात्मा में समाने की शक्ति,
                                 तभी प्राप्त कर पाओगे।
               






ऐ मानस सम्भल जा जरा।

ऐ मानस सम्भल जा ज़रा,थोड़ा समय भक्ति में दे दे।
क्यों भटक रहा है इधर उधर,धुंडता फिर रहा है क्षणभंगुर सुख।
कभी धुंड रहा था बचपन में एक प्यारा सा खिलौना।
आज धुंडता फिर रहा है हर जगह,तू पैसा और प्यारी सी लैला।

ऐ मानस सम्भल जा ज़रा,थोड़ा समय भक्ति में दे दे।

एक बात बताना ऐ मानस,क्या किसी अपने को कभी नहीं खोए हो।
सच में बताओ,ऐ मानस,क्यों तुम उस दिन खूब नहीं रोए हो।
अगर रोए हो,तो सोचे भी होगे,सभी कहाँ चले जाते हैं हमें छोड़कर।
फिर कुछ दिन बीत जाने के बाद,उन्हें भूल,काम में लग जाते हैं हमलोग।
सच में बताओ,ऐ मानस,लोग मरने के बाद कहाँ चले जाते हैं।

ऐ मानस सम्भल जा ज़रा,थोड़ा समय भक्ति में दे दे।

हर कोई बस अपने समय को,व्यर्थ में यहाँ गँवाते हैं।
भूल जाते हैं स्वयं को यहां,और दुनिया में खुद को फँसाते हैं।
आत्मा की सच्चाई से,जीते जी वाकिफ नहीं हो पाते हैं।
बस क्षणभंगुर चीजों के लिए,मरते दम तक इच्छा जताते हैं।
एक चीज़ बताओ ऐ मानस,क्या मरने के बाद भी,
ये चीजें काम में आती हैं।

ऐ मानस सम्भल जा ज़रा,थोड़ा समय भक्ति में दे दे।

आज अगर अपने अनमोल समय में,भक्ति के लिए समय नहीं निकालोगे।
तब तुम कभी नहीं समझ पाओगे,कि ये शरीर तुम्हारा है नश्वर।
आज यह मनुष्य योनि में है,कल किसी ओर योनि में  चला जाएगा।
जाग जा ऐ इंसान,वरना कल को नर्क में पछताओगे।

ऐ मानस सम्भल जा ज़रा,थोड़ा समय भक्ति में दे दे।



आज फिर से,मैने जी लिया अपने बचपन को।

आज नये साल के अवसर पर,हम बहुत खुश थे और उत्साहित।
हर दिल में था खुशी,और कुछ नया करने की थी दिल में गुंजाइश।
आज पापा मम्मी हमारे साथ में जो थे,यह अवसर आया था पाँच वर्षों में।
क्यों ना कुछ ऐसा किया जाए,जो हो नया बिल्कुल उनके लिए।
आज हमने फिर जुहु बीच घूमने की योजना बनाई थी।
पापा मम्मी हमारे आज तक,समुद्र तट देख नहीं पाए थे।
फिर क्या था,बुक किए केब हम और निकल पड़े  जुहु की ओर।
वहाँ पहुँच कर पता चला कि,क्या हम मिस यहाँ कर रहे थे।
पापा मम्मी की खुशी और उत्साह,जो समुद्र तट को देखकर आया था।
ऐसा लगा अपने बचपन को,दुबारा जीने का अवसर पाया था।


आओ मिल कर लिख चले,एक नया अध्याय हम।

नया साल,नयी दिन,
आओ मिल कर लिख चले,एक नया अध्याय हम।
और फिर से आज नयी सुवह का आगमन पुनः हुआ है।
अच्छाई की रोशनी से,सूरज ने फिर से अंधकार की बुराई पर विजय ध्वज लहराया है।
सकारात्मक सोच की शक्ति के सामने,आज फिर से नकारात्मकता हारी है।
प्यार की ताकत के सामने आज फिर से नफरत का सर झुका है।
हम भी आज कसम खा लें कि,क्यों ना हम भी आज से मानवता को दिल से अपनाएँगे।
और नये साल में,नये ऊर्जा के साथ,दुनिया से अराजकता को हम मिलकर हटाएँगे।

राष्ट्रवाद

राष्ट्रवाद kavitadilse.top द्वारा आप सभी पाठकों को समर्पित है। कोई ऐसा तूफान नहीं जो मेरे इरादे को हिला सके। कोई ऐसा सैलाब नहीं जो मे...