15 Nov 2017

आत्महत्या से बड़ा पाप नहीं हो सकता है!

पाप क्या है।अगर आप कोई कर्म करते हो,और उस कर्म के चलते,अगर किसी को कष्ट और तकलीफ पहुँचता है,तो वह पाप होता है।अब आप ही सोचिए, कि अगर कोई आत्महत्या करता है,तो उससे जुड़े लोगों को कितना तकलीफ होता है।अगर आप किसी कंपनी में काम करते हो,और काम के प्रेशर के चलते,अगर आप आत्महत्या करते हो,तो समझिए जो लोग आपसे जुड़े हुए हैं,उन्हे कितना तकलीफ होगा।वे लोग तो जीते जी मर जाते हैं।
       आज जो कहानी लेकर मैं आया हूँ,वह एक बैंक के ब्राँच मेनेजर की है।उनका नाम मोहन भैया था।वे अपने पिता भालदेव के इकलौते पुत्र थे।फिर मोहन भैया का शादी हुआ,और भाभी को लेकर मोहन भैया रायपुर चले गए, जहाँ उनकी पोस्टींग थी।अब वे ब्राँच मेनेजर बन गए थे।
      कभी कभी वे घर पर भी पैसा भेज दिया करते थे,क्योंकि उनके बाबूजी कलर्क से रिटायर्ड हुए थे,जिससे कि उनकी पेंशन घर चलाने के लिए, कभी कभी कम पड़ जाया करते थे।
      शादी के दो साल हो गए थे,भैया भाभी को मायके छोड़ने के लिए आए हुए थे।दरअसल भैया का ससुराल और घर एक ही शहर में था।भाभी प्रेग्नेंट थी।भैया भाभी को छोड़कर, घर चले आए।घर पर एक दिन  रुक कर,ड्यूटी करने के लिए वापस रायपुर चले गए।
      दो सप्ताह भी नहीं हुआ था,कि उनके आत्महत्या की खबर घर पर मिली।पूरा घर अश्रुओं की धारा में बह गया। सारा परिवार जीते जी मारे गएँ।माँ-पिता,पत्नी और बच्चे को अनाथ करके वह चल दिए।अब माँ बाबूजी का घर कैसे चलेगा।अब उनका परिवार किसके भरोसे  जिंदगी बसर करेंगे।उनकी पत्नी और उनके बच्चे का भविष्य कैसा होगा।उनकी बहन की शादी की शादी कैसे होगी।कितना तकलीफ भविष्य में झेलना पड़ेगा।कितने बड़े पाप के भागी हो गएँ मोहन भाई।
     जाते जाते उन्होंने एक सुसाईड नोट लिख के रख छोड़ा था।जिसे पत्रकारों ने अपने अपने समाचार पत्रिकाओं में छाप दिएँ।
    जिसमें भैया ने लिखा था,इश्वर मुझे अगले जन्म में रोबोट बनाना,ताकि जो भी इंस्ट्रक्शंस मुझे मिले,उसे फटाफट कर सकूँ।और मेनेज्मेंट के दिए गए सारे टारगेट को पूरा कर सकूँ।वरणा इस जन्म में तो हमारा जीना हराम कर दिया है।अगर दस मापदंडों के टारगेट में अगर आपने नौ भी पा लियो हो,फिर भी आपकी खैर नहीं।नौ के लिए आपको शाबाशी नहीं मिलेगी,पर जो एक नहीं हुआ है,उसके लिए इतनी अभद्र टिप्पणी मिलेगी,कि मानो आपने कोई मापदंडों पर खड़े ही नहीं उतरे हो।मैं लगातार हो रहे टोर्चर से तंग आकर,आज सुसाइड कर रहा हूँ।मैं अपने पापा,मम्मी, बहन,पत्नी सुजाता और होनेवाले बच्चे से बहुत प्यार करता हूँ।,I love you all.Bye and take care.
Mohan
अब मोहन भाई ने यहाँ हिम्मत हारकर जान दे दिया।जहाँ उन्हें चाहिए था कि सिस्टम से जुझे,और अगर सिस्टम नहीं बदलता है,तो खुद को बदल लें।और ज्यादा तकलीफ हो तो कोई नया काम देखकर चेंज करलें।आज पैसे कमाने के ओप्संस बहुत हैं।तकलीफों से भागना आसान है,पर उससे सामना करने वालों की ही जीत तय होती है।

      

12 Nov 2017

हिम्मते मर्दा मददे खुदा।

आज हिन्दुस्तान की हालत यौन शोषण में बहुत खराब है।हर दो में से एक महिला यौन शोषण की शिकार है।किसी का बचपन में यौन शोषन हुआ है,तो किसी का जवानी में।आपको ये भी जानकर हैरानी नहीं होगी कि उनमें से केवल पचास फीसदी महिला ही ऐसी हैं, जिनकी यौन उत्पीड़न की जानकारी समाज में पता चल पाया है।और ये जानकर आपको और भी ताज्जुब होगा,कि उनमें से केवल पचास फीसदी ही हैं,जो थाने में जाने की हिम्मत दिखाती हैं,और एफआईआर करवाती हैं।
      अब आप ही बताइए कि हमारी हालत कितनी बदतर है।
ऐसी ही एक कहानी मैं आपके लिए लेकर आया हूँ।रानी नाम की एक महिला नई नई शादी होकर हमारे मुहल्ले में रहने के लिए आई थी।पहला एक महीना सब कुछ शांति प्रिय था,उस घर में,लेकिन एक महीने बाद हर दिन कुछ ना कुछ कारन से चिल्लाने और चीखने की आवाजें आने लगी।कभी राजू भैया का चीखने का आवाज आता,तो कभी रानी भाभी का आवाज आता।कुछ लोग जो उनके आस पास रहते थे,वो बताते थे,कि राजू शाम में जब काम करके आता है,तो रानी से जबरदस्ती करता है।
        रानी भाभी दिन में कभी किसी से मिलती नहीं थी।और दिन में जब राजू भैया काम पर जाया करते थे,तो बाहर से ताला लगा करके जाया करते थे।फिर किसी पड़ोसी ने मानव कल्याण हित में काम करने वाले एन जी ओ को फोन कर दिया।एन जी ओ वाले रात में पुलिस लेकर,घर पहुँच गए।
       पर पता नहीं क्यों रानी भाभी राजा भैया के खिलाफ एक लब्ज भी नहीं बोला और उन्हें बचा लिया।
       उस दिन के बाद राजू भैया और भी उग्र हो गएँ।और हर दिन रानी भाभी के साथ गालीगलौज और जबरदस्ती करने लगे।फिर एक रात रानी भाभी बिच रात में ही घर से निकलकर थाने पहुँच गई, और एफआईआर दर्ज करवाई।और जो पुलिस को पता चला,वह चौकाने वाला था।
        रानी के पिता जमुनादास गरीब किसान थे।बहुत मुश्किल से उसका घर चलता था।कुछ साहूकारों से उन्होंने पैसा ले रखा था।और बेटी भी जवान हो चली थी।अब उसकी शादी की फिक्र जमुनादास को सताने लगी थी।
राजू भैया,गाँव में उसके पड़ोसी हुआ करते थे।वो रानी की खुबसूरती पर बचपन से ही लट्टू थे।राजू भैया ने एक दिन मौका पाते ही रानी से अपनी शादी की बात करली।रानी ने एक दिन का समय माँगा।राजू भैया मान गए।फिर अगले दिन मिलने पर रानी ने शादी के लिए राजू भैया के सामने एक शर्त रख दी।शर्त यह थी,कि अगर राजू उनके पिता द्वारा साहूकार से लिए कर्जे से मुक्ति करवा देता है,तो वह शादी करने के लिए तैयार है।राजू भैया मान जाते हैं।और जमुनादास के द्वारा लिए गए सारे कर्जे को चुकता कर,रानी से ब्याह कर शहर ले आता है।
       और इसी उपकार के बदले रानी भाभी ने राजू भैया को जैल जाने से बचा लिया था।और राजू भैया को लगा,कि रानी भाभी के साथ कुछ भी करलो,वह आवाज उठाने वाली नहीं है।वह डरी हुई है।और उसके बाद राजू भैया का अत्याचार और भी बढ़ गया।और जब भाभी से सहा नहीं गया,तो रात के बिच में ही उठ कर थाने पहुँच गई,एफआईआर करने के लिए।
       और आज राजू भैया जैल में सजा काट रहे हैं।
       रानी भाभी गाँव में अपने पिता के काम में मदद कर रही है,और साथ में एक एन जी ओ में भी योगदान दे रही है।आज वह हर औरत के लिए एक प्रेरणास्रोत बन गई हैं।
अत्याचार करने वाले से अत्याचार सहने वाला दोषी होता है।

22 Oct 2017

खच्चर ,गधे और घोड़े की कहानी।

खच्चर किसी दुनिया पर राज कर रहे थे।गधो की संख्या वहाँ घोड़ों से  ज्यादा थी,इसलिए अगर खच्चरों को राज करना था,तो गधों को घोड़ों से ज्यादा सुविधा देना जरूरी था।वरना उनकी गद्दी छिनी जा सकती थी।गधों को सारी सुख सुविधा की व्यवस्था की गई थी।
    इनमें से कुछ गधो को खच्चरों की चाल समझ में आ गई थी। घोड़े तो हमेशा से अवाज उठाते आ ही रहे थें।अब जब इन्हें कुछ गधों का साथ मिल गया था,तो उनके आक्रोश में और भी तेजी आई थी।
   खच्चरों की गद्दी डोलने लगी थी।आखिरकार घोड़ों को भी गधों की बराबरी की सुख सुविधा प्रदान की गई।

हमारा देश इतना पिछड़ा क्यों है?

आज हर भारतीयों को इस विषय पर गहन अध्ययन करना चाहिए, जो कि बहुत जटिल होता जा रहा है।हमारा देश हिन्दुस्तान का पिछड़ापन होने का विषय।
आज अगर हम इतने पिछड़े हैं,तो इसका केवल एक और एक ही कारण है,हमारे देश के नेता।जो देश पर राज करने के लिए,या फिर वोट बैंक के लिए देश के टूकड़े करने से भी पिछे नहीं हटते हैं।इसका सबूत हमें अजादी के समय ही दिख गया था।फिर वोट बैंक के लिए देश में आरक्षण लाया गया,और फिर से देश को  बाँटा  गया।अब आपके योग्यता के आधार पर नहीं बल्कि आपके जाति के आधार पर नौकरी पाना आसान हो गया।जिस कारण से अयोग्य व्यक्ति आज देश को चला रहे हैं।और हमारा देश बहुत ही तेजी से पिछड़ता चला जा रहा है।

जी़रो फिगर के साईड इफेक्ट्स।

बचपन से हम जी़रो के जी़रो पर ही रह गएँ।हम बात कर रहें हैं,अपनी बाडी के बारे में।हम बचपन में रामायण में भाग लेने के लिए पहुँचे, और अपना नाम दे दिएँ।हमें हमारी सुंदरता को देख,हमें राम जी का रोल दिया गया।और जब हम जवान हुएँ,और कालेज पहुँचे और रामायण में भाग लेने के लिए दुबारा नाम दिएँ,तो हमारी जी़रो फिगर को देखते हुए, हमे सीता का रोल दिया गया।क्योंकि कालेज में कुछ एक ही लड़की थी,जिसका जी़रो फिगर था।जिन लड़कियों का जी़रो फिगर था,लेकिन वह शामली थी।हम परेशान हो गए थे,जो कि सारा कालेज हमें सीता बनाने पर तुला हुआ जो था।
  जी़रो फिगर का पहला नेगेटिव इफेक्ट हमें दिख चुका था।  हमें फिर एक लड़की से प्यार हो गया।उसकी साईज़ तो हमसे डबल थी,पर देखने में हमें बहुत सुंदर दिखती थी।पर पता नहीं क्यों लोग उसे लाईन नहीं मारते थे।
और तो और कुछ दोस्त तो हमसे ये तक बोल दिए थे,कि ' साले तेरे को उस मोटी में क्या दिखता है,जो तू उससे प्यार करने लगा है।'
हमें उसका संबोधन इतना बुरा लगा,कि हम उस दोस्त से बात करना बंद कर दिए।फिर कुछ दिन बाद वही दोस्त आकर हमसे माफी माँगा।और हमने उसे माफ कर दिया।
फिर हमने फ्रेंडशिप डे के दिन उसे फ्रेंडशिप डे कार्ड देकर उससे दोस्ती कर ली।फिर धीरे धीरे हम क्लोज़ होते चले गए।और हर दिन हम उसे फ्रेंडशिप ट्रीट देने लगें।कभी बर्गर, कभी पिज्ज़ा, तो कभी समोसा तो कभी वड़ा पाव।वह और भी फैलती ही जा रही थी,पर पता नहीं क्यों हमें वह और भी सुंदर ही दिखने लगी थी।
      एक दिन उसने हमसे मजाक मजाक में पूछ ही लिया, 'क्यों हमसे प्यार करते हो क्या?'(हमें लगा शायद वो भी हमसे प्यार करने लगी है)ऐसे में अकस्मात ही हमारे लब्ज निकल पड़े। हाँ,बहुत दिनों से,तुमसे कहना चाहते थे,कि हमें तुम बहुत अच्छी लगती हो और हम तुमसे बहुत प्यार करते हैं।
     वह हंसने लगी,बोली ' तुम मेरे लिए क्या कर सकते हो?'
हमने भी आशिकाना भाव में जवाब दे दिया।'जो तुम चाहो,वह तुम्हें हम लाकर दे सकते हैं।'
उसने बोला,चलो मैं तुम्हारा प्यार स्वीकार कर लूंगी,लेकिन एक शर्त पर कि तुमहें हमें अपने दोनो बाहों में भरकर उठाना पड़ेगा।
हम नर्वस हो गए, पर हिम्मत नहीं हारे।बोला,चल उठा लिया तो।
वो बोली 'फिर मैं तेरी,नहीं तो फिर कभी तू मेरे नजदीक आने की सोचना भी मत।
हमने भी बोल दिया,चल ठीक है।
हम गए,और दोनो बाहों से पकड़कर उसे उठाने लगा।उठाने का तो उठा लिया,पर बेलेंस गड़बड़ाया,और हम धड़ाम से नीचे गिर पड़े,और हमारे ऊपर वो गिरी।
उसे तो चोट नहीं लगी,पर हम जख्मी हो गए।
उसने मजाक मजाक में बोल दिया,'अरे बच्चे पहले तो तू बाडी बना ले,गर्लफ्रैंड बाद में बनाना।'
हम भी अगले ही दिन जख्मी हालत में जिमखाना पहुँच गए।और जिम इंस्ट्रक्टर से पूछ लिया'बाडी बनाने में कितना टाईम लगेगा।
उसने छह से सात महीने का हमसे टाईम माँगा।और हमने उसे दे दिया।उस समय की स्थिति ऐसी थी कि कोई बच्चा क्लास में होमवर्क करके नहीं आया है,और क्लास टीचर उसे दस मिनट का टाईम दिया हो,होमवर्क कंप्लीट करने को,वरना पनिस्मेंट पाने के लिए तैयार रहने को कहा हो।
उसने हर दिन का डायट का लिस्ट हमे दे दिया।अब हम रोज वही डायट लेने लगें।साथ में रोज का हैभी वर्कआउट।धीरे धीरे हमारी सुवह  सुवह पेट साफ होना ही बंद हो गया।
 पहले दस मिनट में निकल जाया करता था,अब कभी भी आधे घंटे से कम नहीं लगता था।कभी कभी तो आधे घंटे में भी हल्का महसूस नहीं होता था,तो एक से दो घंटे तक भी बैठना पड़ जाता था।
    हैभी वर्कआउट के कारन पूरा बदन में दर्द हो जाया करता था,जिसके कारन रात भर करवटें बदलता रहता था।और सुवह सुवह दो ढाई बजे नींद लगती थी,जिसके कारन सुवह लेट से नींद खुलती थी।
    एक महीना होने पर हमने अपना वैट नापा,जो पाया,उसे देख हमे चक्कर आ गया।हमारा वैट एक पाव घट गया था।जब हम जिम जोयन किए थे,तब हमारा वैट पच्चपन किलो था,आज हमारा वैट चौवन किलो साढ़े सात सो ग्राम था।
हम परेशान हो गए।हमने जिम इंस्ट्रक्टर को भर पैट गाली दिया,और वहाँ से निकल गएँ।
    वह एक पाव हासिल करने में हमें तीन महीना लग गया।आज भी हम जी़रो फिगर पे ही अटके हुए हैं।

20 Oct 2017

मस्कुलर फिगर का क्रेज़।

आज कल की लड़कियों की क्या बताऊँ यारों।
खुद भले ही साँवली रहे,या फिर मोटी,
पर चाहिए मस्कुलर लड़का।
मैं ठहरा जी़रो फिगर,करता था किसी लड़की को पसंद।
पहुँच गया फूल गुलाब का लेकर प्रपोज़ करने को अपनी महबूबा को।
क्या मारा था उस लड़की ने हमें अपने सैन्डल से।
सुज गया था गाल हमारा, उठ ना पाया था दो दिन तक अपने खाट से।
वह लड़की तो खुद बहुत मोटी थी,और उसे लड़का चाहिए था मस्कुलर।
मैं था साला ज़ीरो फिगर।पहुँच गया जिमखाना, सुजा हुआ मुंह लेकर।
जिम ट्रेनर ने पूछा हमसे,कैसी बाडी चाहिए आपको।
हमने कहा भाई साहब मस्कुलर बाडी लगानी है हमको।
ट्रेनर ने मजा लेकर पूछा हमसे,
क्यों गाल सुजाना है उसकी,जिसने गाल सुजाई है आपकी।
हमने जवाब दिया,बस ऐसा ही कुछ समझ लो आप।
ट्रेनर ने दिया मुझे दिन भर के डाइट का लिस्ट,और दिया एक प्रोटीन पाऊडर साथ में लेने का आदेश।
कराया पहला दिन दो घंटे का वर्कआउट, रात में जब सोया,पूरा शरीर रात भर रोया।
कराहता रहा रात भर,बस अपनी माँ को याद कर करके।
अगे मईया,पूरा शरीर दर्द कर रहा है बढ़ बढ़ के।
कोई आकर तेल से मालीश करदे जीभर के।
कुछ दिन तो फ्रेश होने में निकलना ही भूल गया।
सुवह एक घँटा से दो घँटा तक बैठता,
तब जाकर एक पाव निकलता।
एक महीना लगातार वर्कआउट और स्ट्रोंग डायट लेने के बाद ,ऐसा चैंज आया दोस्तों,कि
बनने चले थे मस्कुलर पर हम जी़रो से नेगेटिव हो गएँ।
छोड़ दिया सपना मस्कुलर बनने का,पुराने दिनचर्ये में लौट गए।
एक महीने में हम नेगेटिव हो गये यारो,पर हमें जी़रो बनने में हमें पाँच महीने लग गएँ।
आ गया हमें याद एक कहावत
,खोना आसान है,पर संजोना बहुत मुश्किल है दोस्तों।

14 Oct 2017

अगे मईया।

पति-काहे जी,कहाँ से आ रहील बानी।
पत्नी-काहे...घूमे लगी भी तोहरा से पूछ के जावे पड़ी की।
पति-नाहीं,हमरा के ई सोच के टैन्सन रहिल,कि तोहरा पास पैसा आईल ता आईल कहाँ से।
पत्नी-इल्लो,कले राते तो तोहरा से दस हजार रूपया लेईल रहिल।
पति-का बोलत बानी,कले कब हम तोहरा के पैसा देईल बानी।
पत्नी-ये ला,कर ला बात,कले अपने तो शराब के नशे में बोलत रहिल,कि ये ला दस हजार रुपये और कर ला अपन दिल के शौक पूरी।
पति-अगे मईया,हम ता तोहरा के दस हजार, इकरे लगी देईल रहिल,कि तोहरा के बड़ी शौक रहिल कि तो भी के बनिल करोड़पति में जाईब और करोड़पति बन के आईब।
पत्नी-काहे के झूठ बोलत बानी।
पति-नन्दूआ,हमर ड्राइवर के पत्नी दुई लाख, के बनिल करोड़पति से जीत कर आईल बानी।जेकरा के बोलत नहीं आवत है,उई दुई लाख जीत करके आईल बानी।तू तो बोले में ईतता एक्सपर्ट है,के हमरा के चूप करा देवत है।तो कम से कम तू अगर गईले रहिल तो करोड़पति बनके अईले रहिल।

2 Oct 2017

गांधीगिरी या गांडीगिरी।

Shayari

गांधीगिरी या गांडीगिरी।

kavitadilse.top द्वारा आप सभी पाठकों को समर्पित है।

गांधीगिरी
अगर कोई आपको एक थप्पड़ मारे,तो आप उसके सामने दूसरे गाल को आगे कर दीजिए।

गांडीगिरी
अगर किसी ने एक थप्पड़ जड़ा,तो उसके दोनो गाल को तो लाल कर ही देंगे,साथ में उसके बेस को भी लातो घूंसों से मार मार कर पकोड़े बना देंगे।

Written by sushil kumar
Shayari

28 May 2017

माँ मैं बहुत अकेला हूँ।

माँ मैं बहुत अकेला हूँ।जीवन की उबड़ खाबड़ राह पर चलता हुआ,थक गया हूँ।बस पैसे बनाने की चाह में,बहुत आगे निकल गया हूँ।मेरे मकसद में जो भी रोड़ा आया,उसे हटाटे चला गया हूँ।माना आज मेरा इस शहर में एक रुतबा,एक पहचान है,एक साख है।पर मैं अभी भी खुद को इस संसार में ढुंड रहा हूँ,क्योंकि मेरी पहचान नहीं हो पा रही है।मैं कौन हूँ।इस क्षणभंगूर संसार में क्षणभंगूर सुख सुविधा,क्षणभंगूर पहचान के लिए,क्यों भागा फिर रहा हूँ।माँ तुम क्यों मुझे छोड़कर गाँव चली गई,मैं आ रहा हूँ आपके पास,अपनी तलाश खत्म करने के लिए।मुझे अपने आँचल में सुला लो माँ,मुझे खुद से पहचान करवा दो माँ।

10 Apr 2017

अहंकार

अहमःमैं
आकार-शरीर
मैं हूँ,तो अहंकार है।
मैं नहीं हूँ,जो ये सोच रहा है,वह परमात्मा का अंश है,और परमात्मा ही उसे सोचवा रहा है।
मैं तो केवल एक आत्मा हूँ,परमात्मा का अंश हूँ।
परमात्मा ही हम सभी से सारे कार्य करवा रहा है।
परमात्मा ही हमारे अंदर जीवन का संचार कर रहा है
हम पाते हैं कि जब बच्चा जन्म लेता है तो बहुत रोता है,क्योंकि उस वक्त आत्मा को एहसास हो जाता है,कि अब वह परमात्मा को भूलकर जग के बंधन में बंधने वाला है।
उसे भूख लगता है तो रोता है,और माँ उसे दूध पिलाती है,फिर क्या?उसका बंधन यहीं से बंधना शुरु हो जाता है।और वह पहला शब्द बोलता हैःमाँ।
उसे नाम मिलता है,और उसे अलग पहचान मिलती है।और अहंकार का चादर आत्मा के उपर चढ़ता चला जाता है,और वह खुद को भूलकर नश्वर संसार में खुद को ही ढूंढना शुरु कर देता है।

9 Apr 2017

मौत बताकर नहीं आती है।

हमारा एक मित्र था,मनोज।वह बहुत ही मनमौजी और खुशमिजाजी से जीने वाला शख्स था।हमेेेशा खुश रहा करता था।उसकेे चेेहरे पर हमने एक ही बार शिकन देेखी थी।
    उससे हमारी मित्रता इंजीनियरिंग में हुई थी।पहला पहला दिन था।और हम कछ ज्यादा ही नर्वस थे।हम छोटे शहर से आए थे।हमारा पहनावा भी अद्यतन नहीं था।
    हम जो हैं,कि साधारण सा पैंट कमीज पहन कर गए थे,बाकि सारे लोग जीन्स टी शर्ट या जीन्स कमीज पहनकर आए थे।
     पता नहीं मनोज को हममें क्या दिखा,वह हमारे बगल वाले सीट पर आकर बैठ गया।आते ही उसने हमसे हाथ मिलाने के लिए आगे हाथ बढ़ाया।
   
मनोज(हँसते हुए) : हाई!मैं मनोज,आप भी कंप्यूटर विञान के कोर्स में दाखिला लेने के लिए यहाँ आए हैं।
हम: हाँ हम कंप्यूटर विञान के कोर्स में दाखिला लेने के लिए आए हुए हैं।हमारा नाम नवदीप है।

मनोजःऔर आप कहाँ से हैं।
हम: हम पटना जिला के भभुआ गाँव से हैं।और आप?
मनोज:हम पटना से हैं।
हम:पटना!पटना में कहाँ से?
मनोजःगर्दनीबाग
हम:हमारे बड़े पापा किसान नगर में रहते हैं।

मनोजःजो कभी पटना आना हुआ,तो हमारे यहाँ भी आ जाया करो।साथ मिलकर मजा करेंगे।
हमःहाँ हाँ,बिल्कुल।

फिर एक घोषना होता है।
(जिन जिन बच्चों को होस्टल में रुम चाहिए,वे इस फोर्म को भर कर जमा कर दें,ताकि आगे की प्रकृया की जा सके।)

मनोजःदोस्त होस्टल में रहना है क्या?
हम:हाँ होस्टल में ही रहना,सही रहेगा।

फिर हमने फोर्म भर दिया।

मनोजःअरे यार आप वेज हो या नन वेज।
हम:हम तो वेज हैं,और आप?
मनोज:हम भी वेज हैं।

फिर प्रिंसिपल माईक पर आते हैं।
प्रिंसिपल-बच्चों आप सभी लोगों का भारत की राजधानी में स्वागत है।अब हम आपको हमारे बारे में बता दें।हमारा नाम राजेश सिंघानिया है।हम बिहार के राजधानी पटना से हैं। हमने आई आई टी से कंप्यूटर इंजीनियरिंग में बी टेक किया है और फिर हमने यूनिवर्सिटी ओफ बोस्टन से एम टेक किया।इस संस्था का पदभार को हमने 2002 से संभाला है ।हमारी संस्था हमेशा से चोटी की दस  संस्था में रही है।हम हमारी अच्छे पढ़ाई, व अच्छे प्लेसमेंट के लिए जाने जाते हैं।इस बार भी हमारा एवरेज पैकेज साढ़े आठ लाख का गया है।हम आप सभी लोगों के उज्जवल भविष्य का कामना करते हुए, सभी लोगों का तहे दिल से अपनी संस्था की ओर से फिर से स्वागत करते हैं।


     वाईस प्रिंसिपल:हम आपके वाईस प्रिंसिपल है।हमारा नाम नियति पाठक है।हम वाराणसी से हैं।हमने बी आई टी मिश्रा से बी टेक किया है।और हम आपके सुनहरे भविष्य का कामना करते हैं।हमने आपलोगों के लिए फ्रैशर पार्टी ओर्गेनाईज़ किया है।सो आपलोग इसका आनंद उठाइए।


       सिनीयर की ओर्गेनाईज़र टीम माईक पर आई।
टीमःमैं सचिन ओर्गेनाईज़र टीम का हेड हूँ।आप  सभी फ्रैशर को अपने अपने एडमीट कार्ड के साथ स्टेज पर आने का निमंत्रन देता हूँ।आप एडमीट कार्ड कनिका मेम या सुनहरी मेम को देंगे।उसके बाद स्टेज पर रेम्प वाक् करते हुए,आप नीचे जाकर अपनी सीट को ग्रहण कर लेंगे।कनिका मेम और सुनहरी मेम,आप जिनका भी एडमीट कार्ड लेंगे,उनका नाम माईक पर घोषणा कर देंगे।

हमःचलें(मनोज को ईशारा करते हुए)
मनोजःहाँ हाँ,चलिए।रेम्प वाक् करने का भी आनंद लेकर आते हैं।(जरा मजा लेते हुए)

हम(सिनीयर टीम ओर्गेनाईज़र से): हेलो मेम,गुडमोर्नींग।
सिनीयर टीम ओर्गेनाईज़रः हेलो।गुडमोर्नींग।  आपका एडमीट कार्ड दीजिए।एडमीट कार्ड पर नाम तो सही सही लिखा हुआ है ना।
हमःहाँ मेम।
टीमःओके।अब आप स्टेज पर रेम्प वाक् करते हुए,हमारे विपरीत में जो द्वार है,उससे बाहर निकल जाईए।
हमःओके मेम।
(हम स्टेज पर जैसे ही पहुँचे,हमारा नाम की भी घोषणा हुई और हमारे लिए भी ताली बजनी शुरु हुई।और पूरा सभामंडप तालियों की गड़गड़ाहट से गूँज ऊठी।हमने अपने अंदर गजब तरह का आत्मविश्वास जागृत होता हुआ पाया।)
(फिर हम  अपने सीट पर जाकर बैठ गए।)

हम(मन ही मन में):मनोज कहाँ रह गया?
(फिर घोषणा होती है,मनोज)
हम(मन ही मन में):हमारा दोस्त मनोज आ गया।

मनोज के स्टेज पर आते ही हमने भी सभी के साथ  जोर जोर से ताली बजाना शुरु किया।
पर पता नहीं हमारे मन में ऐसा अहसास हो रहा था,कि सबसे ज्यादा तालियों की गूँज,हमारे स्टेज पर चलने के समय हुआ था।शायद मिस्टर फ्रैशर की उपाधि हमें ही प्राप्त हो जाए।
मनोज हमारे बगल वाले सीट पर आकर बैठ जाता है।


हम:मनोज छा गए गुरू,छा गए।
मनोजःतुम भी दोस्त।

सारे फ्रैशर्स का रेम्प वाक् होने के बाद।

ओर्गेनाईज़ींग टीम(माईक पर):हेलो फ्रैशर्स,अब आप ही लोगों के बिच के मिस्टर तन्मय अब तम्मा तम्मा गाने पर एकल प्रदर्शन करेंगे।सो तालियों की गड़गड़ाहट के साथ,उनका आप स्वागत करें।
तालियों से पूरा सभामंडप गूँज उठा।
तन्मय ने गजब का दमदार प्रदर्शन किया।
तन्मय के बाद स्वाति,नियति और राखी ने सामुहिक प्रदर्शन किया,और फिर मोनिका ने भी एकल प्रदर्शन किया।सभी लोगों ने अच्छा खासा प्रदर्शन किया।

ओर्गेनाईज़ींग टीम(माईक पर):क्या बात है!इतने अच्छे प्रदर्शन से हम जान गए हैं,कि हमारे इस साल के जुनियर काफि टैलेंटेड आए हैं। हमारे प्रिंसिपल व वाईस प्रिंसिपल को स्टेज पर आने के लिए आमंत्रित करते हैं,ताकि मिस्टर फ्रैशर व मिस फ्रैशर को(जिसे जूरी टीम ने सह सम्मति से चूना है) को पुरस्कृत कर सके।

वाईस प्रिंसिपलःआज का प्रदर्शन दमदार था।हमारी जूरी टीम ने जिन दो लोगों को मिस्टर फ्रैशर व मिस फ्रैशर चुना है,वे हैं मिस्टर अक्षय व मिस चाँदनी।आप दोनो स्टेज पर आएँ,और प्रिंसिपल साहब से पुरस्कार ग्रहण करें।
और फिर दोनो अक्षय और चाँदनी स्टेज पर पहुँचे और पुरस्कार ग्रहण किया।पूरा सभामंडप तालियों से गूँज उठा।

         हम सभी ने फिर साथ में खाने का लुत्फ़ उठाया।क्या गजब का दिन था वह।आज भी जब उस दिन को याद करता हूँ,तो मन अंदर से बहुत खुश हो जाता है।

          फिर हम सभी अपने अपने होटल शाम में लौट आते हैं।अपना समान पैक करके रखते हैं,ताकि अगले सुबह होस्टल के लिए प्रस्थान कर सकें।

फिर हमने मोबाईल उठाया और  मनोज का नंबर डायल किया।
हमःमनोज भाई गुड इवनिंग।
मनोजःगुड इवनिंग नवदीप बाबू।
हमःकल सुबह साथ में होस्टल चलेंगे।
मनोजःहाँ हाँ।बोलो कहाँ मिलना है।
हमःतुम संस्था के नजदीक हो,इसलिए हम सीधे तुम्हारे होटल में चले आते हैं।फिर हम साथ में वहीं से होस्टल के लिए प्रस्थान करेंगे।
मनोजःओके ब्रो।
हमःया ब्रो।
मनोजःहरियाली ही हरियाली है,दिल्ली में।क्यों?
हम:हाँ यार,आँखो को बहुत थंडक मिलती है।
मनोजःअरे यार हमें हमारी संस्था के सेकेन्ड ईयर की मेम,जिनका नाम कनिका है,से प्यार हो गया है।
हमःक्या?कौन है ये कनिका?
मनोजःओर्गेनाइज़ींग टीम में थी,और बैक स्टेज का काम संभाली हुई थी।और जो मेम सबसे आखिरी में हम सभी को खाने का लुत्फ़ उठाने के लिए आमंत्रित किया था।
हमःहाँ हाँ।अच्छी लग रही थी मेडेम।
मनोजःसाले लाईन मत मार।तेरी भाभी है।
हमःहम्म्म्म।
मनोजःवह भी हमारे स्ट्रीम से ही है।
हमःक्या बात है।चल बेस्ट ओफ लक।
मनोजःधन्यवाद,चल भाई,गुडनाइट,कल सुबह में मिलते हैं।
हमःओके ब्रो,गुडनाइट,हेभ ए स्वीट ड्रीम्स।
मनोजःसेम टू यू।

और फोन कट जाता है।

 
फिर हम सुबह उठे,और तैयार होकर,सारे समान के साथ मनोज के होटल पहुँचे।और फिर हम दोनो वहाँ से होस्टल के लिए निकले।
   हमें तीन बेड वाला रुम आवंटित होता है।हम रुम में पहुँचे,और फिर ब्रेकफास्ट करने के बाद, अपने क्लास में पहुँचे।
   दोपहर के एक बजे लंच का समय था।हमने साथ में लंच किया।और फिर एकाएक मनोज बोलता है।
मनोजः ला अपना हाथ,तेरा हाथ देखकर बताता हूँ,तेरे किस्मत में क्या है।
हमःये ले भाई,देख के बता जरा।
मनोजःतेरी लाईफ सेट है।तेरे पास पैसे की कमी कभी नहीं होगी।तेरी पत्नी सुंदर और सुशील होगी।

फिर क्या मनोज के पास लाईन लग गई,हाथ दिखाने वालों की।मनोज इसी बहाने कनिका मेम का भी हाथ देखा लिया।

कनिकाः मनोज मेरा भी हाथ देखकर बता जरा।
मनोजःआप क्या जानना चाहती हैं?
कनिकाःहमारी और लवलेस की शादी होगी या नहीं।
मनोजःलवलेस आपका बोयफ्रेंड है क्या?
कनिकाःवह होटल लाईन मेंं है।और मैं उससे बहुत,बहुत ही ज्यादा प्यार करती हूँ।

यह सुनकर मनोज का दिल टूट सा गया था।हमेशा अकेला अकेला किसी कोने में बैठा रहता था।हम उसे कुछ समझाने जाते,तो हमारे कँधे पर सर रखकर रोने लगता।

मनोजःअरे यार नवदीप,हम पागल हो गए हैं ,उसके प्यार में।
जहाँ भी जाते हैं,वही नज़र आती है।ना खाने का,ना पीने कि दिल करता है।जब से उसके बोयफ्रेंड के बारे में सुना हूँ,हमारा तो जीने का मकसद ही खत्म हो गया है।
हमःअरे पगले,दुनिया भरी पड़ी है,सुंदर लड़कियों से,किसी और पे ट्राई मार ना।
मनोजःनहीं नहीं नहीं।हमे तो कनिका ही चाहिए।

उसी बिच हमारी दोस्ती मयंक से भी हो गई थी।मयंक हमारा तीसरा रुम मेट्स था।

मयंक भी हमारे पास जाता है।मयंक को भी कनिका और मनोज की कहानी का पता था।


मयंकःअरे मनोज,चल उठ।आज क्लास बंक मारकर कहीं घूमने चलते हैं।वैसे भी आज रैशमा मेडेम का क्लास नहीं है।
मनोजःजाऊँगा,अगर नवदीप को भी,तुम साथ लेकर चलोगे तो?
मयंकःनवदीप भाई,चल ना जरा इसका मूड ठीक करवाकर लाते हैं।
हमःचलो,चलते हैं।

फिर हम तीनो ने मिलकर निर्णय लिया कि हम चलते हैं,मंडी(हिमांचल प्रदेश) फ्लाइट से।दस बजे की फ्लाइट बुक की ,और निकल पड़े।

फ्लाइट में
मनोजःथैंक यू,वेरी मच,बोथ ओफ यू।
हमःक्या यार तू भी।दोस्ती में नो थैंक यू,नो सोरी।ओके।
मयंकःहाँ यार,क्या तू भी।

हमारी गपशप मेंं पता ही नहीं चला,कि कब हम मंडी पहुँच गए।

मयंकःब्रो,ये रही बियर की दुकान।एक एक बियर लेते हैं,और चलते हैं,किसी नदी के किनारे।वहीं बैठकर पिएँगे।
हमःहम बियर शराब कुछ भी नहीं पिते हैं।
मयंकःपहला पैक केवल चियर्स करने के लिए ले लियो,फिर चखना और मुर्गा चबैयो।
हमःहम माँस भी नहीं खाते हैं।
मनोज बिच में आते हुए।
मनोजःहम ज़रूर पियेंगे,उस जालिम के द्वारा दिए गए गम को भूलाने के लिए,पर हम भी केवल वेज ही खाएँगे।
मयंकःचलो एक कोल्ड ड्रिंक ले लेते हैं मनोज के लिए,बाकि दो बियर,दो वेज खाना,और एक ननवेज खाना।और तीन प्लेट चखना।ठीक है।
हमःठीक है।
मनोजः ठीक है।

हम सारे समान लेकर नदी के किनारे पहुँचे।

मयंकःतुम लोगों को भूख लगी है।
हमःहमें तो नहीं लगी है,पर अगर तुम लोगो को लगी है,तो खा सकते हैं।
मनोजःनहीं यार,अभी नहीं आधे घंटे बाद खाते हैं।
मयंकःहम्म्म

मयंकःतुम लोग एक्स्टरा कपड़े लाए हो ना।
मनोजःहाँ हाँ।
हमःनहीं।

मयंकःअरे यार नदी किनारे बैठने के लिए थोड़े ना आए हैं।आए हैं तो नहाकर ही जाएँगे।
हमःक्या तुम दोनो को तैरना आता है।
दोनो एक साथःहाँ
हमःपर हमें नहीं आता है ना।ठीक है ना,हम तुमलोगों वीडियो रिकोर्डिंग करेंगे।

फिर दोनो जल्दी जल्दी सारे कपड़े उतारें,और नदी में छलाँँग लगा दिए।हमारा मन बहुत ललचा रहा था,पर हम तैरना ही नहीं जानते थे।और हमने मन ही मन निर्णय ले लिया था,कि दिल्ली लौट कर स्विमिंग क्लासेस ज़रूर जोईन करेंगे।
       हम दोनो के वीडियो रिकोर्डिंग करने में मगन थे,कि हमने देखा कि एकाएक नदी के पानी की धार तेज हो गई है और दोनो लोगों को हमसे दूर लिए जा रही थी।
 हमःअरे मनोज,मयंक कहाँ चले जा रहे हो।कोशिश करके किनारे आओ।
        पर अब तो वो हमें नजर भी नहीं आ रहें थे।हम बहुत डर गए,और भाग भाग कर नजदीकी पुलिस स्टेशन पहुंचे,और उन्हें सारी आपबीती बताई।पुलिस वाले वीडियो देखकर सारा कुछ समझ गए।और वो लोग फौरन एक्शन में आ गए,और हमसे हमारा सारा डिटेल्स लेकर,हमें दिल्ली लौटने का निर्देश दिया।
हमःसर प्लीज़,हम उन्हे लिए बिना नहीं जाएँगे।पहले आप उन्हें ढूंढ निकालिये।
पुलिसकर्मीः देखिए इतनी धार में उनका बच पाना मुश्किल है।हमने अपने टीम को उन्हे ढूंढने के लिए भेज दिया है।आप लौट जाईए,और अपनी संस्था को इसकी जानकारी पहुँचाइए।हम यहाँ छानबीन जारी रखेंगे।जैसे कुछ भी पता चलता है,तो आपको सूचित करेंगे।

हम उस दिन को,और उस पल को जब याद करते हैं,तो हमारा दिल सिहर जाता है।हम गए थे तीन,पर लौटे हम अकेले।
वह दिन हमारे जीवन का सबसे दर्दनाक दिन था।हम आज भी मनोज और मयंक को बहुत मिस करते हैं।
      संस्था में पहुँच कर हमने सारी घटना प्रिंसिपल को बताया।प्रिंसिपल ने हमें नियम उल्लंघन करने के चलते,हमें कोलेज से निस्कासित कर दिया।
      पर आज तक ना ही मनोज की और ना ही मयंक की लाश पुलिस को प्राप्त हुई है।
      और हमें जीवन यापन करने के लिए कुछ अलग सोचने पर मजबूर कर दिया।आज हम कहानियां लिखते हैं,और उन्हे पब्लिश करवाते हैं।

8 Apr 2017

जीवन के रहस्य।

आपको गुश्शा कब आता है?
जब आपके अनुरूप कोई काम नहीं होता है।

आप खुश कब होते हैं?
जब आपके अनुरूप कोई काम हो जाता है।

आप रोते कब हैं?
जब आपके दिल पर चोट लगती है।


आपको प्यार कब आता है?
जब कोई अपना,आपके अनुरुप कोई काम कर लेता है।

आपको ईर्ष्या कब होती है?
आप किसी व्यक्ति या किसी वस्तु से बहुत प्यार करते हो,पर वह व्यक्ति या वस्तु किसी अन्य के पास आपको दिखे,तो जाहिर सी बात है,आपको ईर्ष्या तो होगी ही।

आपको संकोच कब होता है?
आपको जब लगता है,कि सामने वाले को बुरा लग सकता है,तो आप कुछ काम करने में संकोच करते हो।


आप डर कब जाते हो?
आपको जब अनुभव होने लगता है,कि आपके साथ कुछ बुरा या अनुचित होने वाला है।

4 Apr 2017

कर्म किए जा, फल की चिंता मत कर।

हम पुनीत,आज आई ए एस ओफिसर हैं।हमें कानून के रखवाले सलाम ठोकते हैं।हम जब भी बाहर कहीं जाते हैं,तो हमारे साथ एक सिक्योरिटी गार्ड हमेशा रहता है।नीली बत्ती वाली कार, खाना बनाने के लिए कुक, गार्डीनींग करने के लिए गार्डेनर तक दिया हुआ है।हर तरह की सुख सुविधा,आज हमारे पास है।
       पर इन सबसे बड़ी बात आज हमारे माँ बाबू जी का छाती फूला हुआ है और उनकी खुशी झलकती है,जिससे हमें और भी अच्छे काम करने के लिए हिम्मत बढ़ती है।

      लोग हमारी सफलता के आगे नतमस्तक हैं,और  हमें सलाम ठोकते हैं और चापलूसी करने से बाज नहीं आते।
        नेता भी अपना काम बनवाने के लिए,हमारे आगे पीछे लगे रहते हैं।हमें पता नहीं चलता है,कि कल तक जिसकी कोई पहचान नहीं थी।लोग हमें आते जाते देखते थे,पर कभी भी किसी ने हमें जानने या पहचानने की कोशिश नहीं किया।
      ऊल्टा ऐसा हुआ है,कि राशन लाने किसी दुकान पर खड़े हैं,और राशन का बिल ज्यादा हो गया और पैसे कम पड़ गए ,तो हमने बताया कि हम श्री सत्यनारायण चौधरी के बेटे हैं।पर दुकानदार उन्हें पहचानने से इंकार कर दिया।फिर हमें श्री बिनय राम का नाम लेना पड़ा,हमने बोला कि श्री बिनय राम ,यूको बैंक,मेनेजर के घर के बगल के मकान में रहते हैं,तब भी उसने उधारी देने से मना कर दिया।
      शायद वह दुकानदार को हमारे बात पर विश्वास ना हुआ हो।या हमारे बाबूजी जो हमेशा राशन लेने आते थे,वह दूकानदार उन्हें उनके नाम से नहीं जानता हो,या भूल गया हो।
      आज के समय में हर कोई हमसे संपर्क बनाना चाहता है।
       आज जो बुआ इतने प्यार से बर्ताव कर रही है,पहले तो हमेशा  हमसे डांट कर ही बात करती थी।कहती थी,तुम काले चादर हो,जिस पर कोई भी रंग नहीं चढ़ सकता है।
      हम सोचते हैं,कि बुआ जैसे लोग ही होते हैं,जो किसी पुनीत के सफलता की सीढ़ी बनते हैं।
       हमारे जिंदगी में हम पाते हैं,कि जब तक हम नाकामयाब होते हैं,तब तक कोई भी हमसे सीधी मुंह बात नहीं करता हैं,और  हमें आभास लगने लगता है,कि सारे लोगों का मुंह ही टेढ़ा है।
      पर जैसे ही सफलता हमारे कदम छूती है ,हम पाते हैं कि सारे लोग जिनका मुंह टेढ़ा था,उनका मुंह एकाएक सीधा हो गया है।और हमारी पहचान सभी को हो जाती है।बहुत से लोग तो हमसे रिश्ता जोड़ने के लिए कुछ से कुछ कह जाते हैं।
      हम पुनीत आज से इक्कीस साल पहले डोबरी  नामक गाँव में जन्मे थे।हम किसान परिवार में जन्मे थे।माँ ज्यादतर घर का काम देखती थी,पर जरुरत पड़ने पर खेत में भी काम बटाटी थी।और पापा खेत का काम देखते थे।खेत तो ज्यादा था नहीं पर हर साल इतना अनाज हो जाया करता था,कि घर के लिए खाने भर भंडार रख कर,बाकि के अनाज मंडी में बेचकर घर का खर्चा चल सके।
     घर में दो देशी गाय भी  पालकर रखा था।सुबह शाम गाय का दूध माँ निकाला करती थी।घर के लिए दूध रखकर,बाकि गाँव में बेच दिया करती थी।
     हमारे घर के बगल में यूको बैंक में काम करने वाले बिनय राम रहते थे।वो लोग बहुत पैसे वाले थे।उनके पास सौ एकड़ से ज्यादा खेत था।उनके घर में उनकी पत्नी और तीन बिटिया रहा करती थी।तीनो बेटी बहुत सुंदर थी।
     हम बचपन में पढ़ने से भागते थे।स्कूल जाने के बजाय खेत में घुस जाया करते थे,मेरे साथ मेरा दोस्त अनूप भी आ जाया करता था।और हम लोग वहाँ लूडो खेला करते थे।फिर कभी कभी हम नदी के किनारे बैठकर मछली पकड़ा करते थे।और फिर नदी में मछली को छोड़ दिया करते थे।क्योंकि ना ही हमारे यहाँ ना ही अनूप के यहाँ कोई भी माँस खाते थे।
     किताब लेकर जब भी पढ़ने बैठे,तो खुली किताब पर सर रख कर सो जाते थे।माँ बाबू जी आकर के जब देखते थे,कि हम सो गए हैं,तो हम पर चिल्लाने लगते थे,कहते थे,किताब का अपमान मत करो,किताब खोलकर उस पर मत सोया करो।जितना भी देर पढ़ना है,मन लगाकर पढ़ाई करो,और फिर किताब को बंद करके रख दो,व खाना खाकर सो जाओ।पर हमारी आदत सुधरी नहीं।हम किताब खोलते और किताब पर ही सो जाते।
      दरअसल हमारे माँ दसवी पास थी,और पापा दसवीं फैल।अक्सर वह हमें शिक्षा दिया करते थे,कि बेटा हमारे पास ज्यादा खेत नहीं है,जो भी थोड़ा मोड़ा खेत है,उसी से हम सब का पेट भर रहे हैं।तुम्हारे पास बहुत बड़ा अस्त्र है,तुम्हारी पढ़ाई।देखो हमें भी पढ़ने का अवसर,हमारे बाबू जी ने दिया था,पर हम मैट्रिक में फैल हो गए,और हमारे बाबूजी ने हमें घर बैठा दिया था।वही देखो विनय राम को,उसने सही ढंग से पढ़ाई किया,आज उसके पास किस चीज की कमी है।आज वह बैंक मेनेजर है।सो बेटा तुम्हारे पास जो अस्त्र है,उसका सही इस्तेमाल करो,और दुनिया को कुछ बन कर के दिखा दो।
      उस समय तो दिल में चिनगारी लग जाती थी,कि कुछ बन कर दिखाना है हमे,और जोर सोर से पढ़ाई में लग जाते थे।पर समय के साथ चिनगारी बुझ जाया करती थी,और फिर से वही पुराने रवैये में हम लौट आते थे।
      पर फिर हम किसी तरह मैट्रीक पास किए।मैट्रीक में रिज़ल्ट अच्छा नहीं आने के कारण बाबू जी ने हमे घर बैठने को कहा।और कहा तुमसे पढ़ाई लिखाई नहीं होगी,तुम खेत संभालो।हम भी हूँ बोलकर वहाँ से हट गए।पर बाबूजी को ये जवाब की उम्मीद नहीं थी। तभी बुआ का आना हो गया,और फिर जो उन्होंने जो हमे ताना मारा,अभी तक नहीं भूल पाए हैं हम।
       फिर बुआ के जाने के बाद,एक रात हम सोये हुए थे,कि हमें किसी के शिशक शिशक के रोने की आवाज आती है।फिर हम जरा सा ध्यान से सुनते हैं तो पता चलता है,कि ये तो हमारे माँ बाबू जी के रोने की आवाज है।
      हमारे दिल में घबड़ाहट होने लगती है।क्या हुआ?कोई घटना घटी क्या?भाँति भाँति के सवालों ने हमारे मन को घेर लिया था।फिर हम अपने कमरे से निकल,उनके कमरे के पास जाकर खड़े हो गए।पापा बोल रहे थे,कि देखो एक तरफ हमारा भगना है,जो इंजीनियर बन गया है,और अपने माँ बाबूजी के सारे सपनों को पूरा करने में लगा हुआ है,और एक हमारा बेटा है,नालायक जिसे पढ़ने बोलो तो नींद आती है।माँ ने कहा,देखिए पहले आप अपना ईलाज करवाइए,बेटे को लेकर ज्यादा तनाव मत पालिए।वह अपना भविष्य बना लेगा।पैसे कम पड़े तो हमारे गहने और एक दो खेत बेच कर हटा दीजिए,लेकिन अपना ईलाज करवाइये।
       हमारा मन बेचैन हो गया।क्या हो गया बाबू जी को?
फिर पापा ने कहा टीवी टावी जैसे रोग तो हमें बाद में मारेंंगे,पर बेटे ने हमें जिन्दा ही मार दिया।हमारे पास ईलाज के लिए पैसे नहीं हैं,और बाप दादा की चीजें हम बेचेंगे नहीं।यह सब सुनकर माँ रो पड़ी।
      हमें यह सब सुनकर बहुत बुरा लग रहा था।पहली बार अपने माँ बाबू जी को इतना लाचार देख रहा था,वह भी हमारे चलते।उनके रोने की आवाज,हमारा दिल चीरे जा रही थी।हमें
अपने आप से बहुत ही घृणा हो रही थी।जिस माँ बाप ने हमें आज तक कभी आँखो से आँसू आने नहीं दिया,आज हम उन्हें रोने को विवश कर दिए।फिर हमने निश्चय किया कि हम आगे पढ़ाई करेंगे,और कुछ बनकर अपने माँ बाबूजी को दिखाएँगे।
      कल सुबह पाँच बजे उठकर हम किताब लेकर पढ़ने बैठ गए।और विञान का दो अध्याय हम पढ़ गए।माँ बाबू जी जब हमें किताब पढ़ते देखे,बहुत खुश हुएँ।बाबू जी ने पूछा,आगे कौन सा विषय लेने वाले हो?हमने कहा विञान लेंगे बाबूजी,पर आप पहले अपना ईलाज करवाइये।बाबूजी ने हमें अपने छाती से लगा लिया,और बोले,हाँ बेटा,अब हम अपना ईलाज जरूर करवाएँगे,क्योंकि हमारा बेटा जिम्मेदार हो गया है।
      फिर बाबूजी ने अपना ईलाज करवाया।
      बारहवीं में दाखिला लेने के लिए हम अपने गाँव से लगभग बारह कि. मी. दूर भागलपुर नाम के शहर पहुँचे।और वहाँ हमने गणित विञान में दाखिला लिया।
        फिर बाबूजी ने अपनी बची खुची कमाई से एक नई साईकील खरीद कर दिया।और फिर हमारी जिंदगी की सबसे बड़ी संघर्ष शुरू हुई।रोज सुबह हमें आठ बजे तक  घर छोड़ देना पड़ता था।
       माँ सुबह सुबह खाना तैयार कर देती थी,और दोपहर के लिए टीफीन पेक कर के दे दिया करती थी।कभी कभी घर से निकलने में लेट हो जाया करता था,तब ज्यादा दम लगाकर साईकील चलाना पड़ता था,जिससे छाती में दर्द हो जाया करता था,और पैर भी पूरे थक जाया करते थे।फिर क्लास में जाकर झपकी लेते थे।
      फिर एक बार हम क्लास जाने के लिए निकले थे,तब हम पाते हैं कि एक नीली बत्ती की गाड़ी और उसके पीछे पीछे चार गाड़ी पुलिस की निकली।हमारा दिल धक धक करने लगा।और हमारे मन के अँधियारे में दिल ने एक रोशनी की किरन जगा दिया,और हमने निश्चय कर लिया,कि हमे आई ए एस ओफिसर ही बनना है।
      हमने शाम में ट्यूशन पढ़ाना शुरु किया।हमें पैसे का आभाव था,और हमें आई ए एस की तैयारी करने के लिए,कुछ महंगी किताबों की जरुरत थी,और बाबू जी के कंधे पर भार देना,हमें उचित नहीं लगा।
       ट्यूशन पढ़ाना,इतना आसान काम नहीं था।बचपन की मारी गई फकैती,अब हमें तकलीफ दे रही थी।बच्चे कुछ ऐसे सवाल कर दिया करते थे,जिसका जवाब हमारे पास नहीं होता था।और हम टार बटोर करके,उस सवाल के जवाब को अगले दिन पर टाल दिया करते थे।
       और हमें तब बहुत बुरा लगता था,कि अगर हम बचपन में सही ढंग से पढ़ाई किए होते तो हम इन सवालों कख जवाब दे दिए होते।फिर घर जाकर उस सवाल का जवाब ढुंढने के लिए,गहन अध्ययन करते।और अगले दिन जाकर सवाल का जवाब बताते थे।
        पर ट्यूशन पढ़ाने से हमें बहुत फायदा हुआ,सारे क्लास  के विषयों पर हमारा पकड़ मजबूत हो गया,और पोकेट खर्चे भी हमारे निकलते चले गए।जिसमे से हम बचा बचा कर आइ ए एस की तैयारी हेतु, कुछ किताब भी खरीद लिए।
        इंटरमीडिएट व बैचलर डिग्री में अच्छे अंक आने की वज़ह से हमारा मनोबल बढ़ा हुआ था।आइ ए एस का परीक्षा दिए,पर पहले राऊन्ड लिखित में ही हम बाहर हो गए।
          हमने आइ ए एस का ओनलाईन डिस्टेंस कोर्स में दाखिला ले लिया।इस कोर्स के तहत हमारे पास स्टडीज़ मेटरीयल आ गए।हर सप्ताह ओनलाईन परीक्षा देना पड़ता था।जहाँ आप सारे भारत भर में इस कोर्स में दाखिला लिए हुए विद्यार्थियों से टक्कर लेते हैं,और आप अपनी मेहनत को परखते हैं,कि आप अभी कितने पानी में हैं।
         इस कोर्स ने हमारी काफि मदद की।और हमने अपनी मंजिल को हासिल कर ही लिया।
          दोस्तों अपने अंदर लगी चिनगारी को आग में तब्दील करें,और अपनी मंजिल को हासिल किए बिना हिम्मत ना हारें।असफलता से अपनी मनोबल गिराए नहीं,क्योंकि हार ही जीत की संकेत होती है,इसलिए अपनी जीत के लिए लगातार प्रयास करते रहें।आपकी मंजिल आपके करीब है।
   
     
     

31 Mar 2017

जिंदगी को जीना सीख लो।

Shayari

जिंदगी को जीना सीख लो।

kavitadilse.top द्वारा आप सभी पाठकों को समर्पित है।


जिंदगी को जीना सीख लो।
खुशी के जाम से ज्यादा,गम के जहर को पीना सीख लो।
जीवन है,तब तक संघर्ष तो  करना पड़ेगा मित्रो।
हर परिस्थिति में खुद को ढालना सीख लो।
ऐसा नहीं कि दुख के बादल नहीं छँटेगे  ।
पर नैनो की बारिश का भी आनन्द लेना सीख लो।
कुछ लोगों का तो काम ही है आपको तकलीफ देना।
ईश्वर की रजा समझ,उन्हें माफ करना सीख लो।
जिंदगी बहुत छोटी सी है मित्रों।
जीवन के हर पल में,लोगों में खुशी बाटना सीख लो।

Written by sushil kumar
Shayari

28 Mar 2017

कचड़ा में हीरा

हमारा नाम गोटी है।हम मुंबई के एक झोपड़पट्टी में रहते हैं।हमारे माँ बाप कचड़ा बुनने का काम करते हैं।कभी कभी मैं भी उनकी मदद करने चला जाता हूँ।
      पढ़ाई करना  हमें पसंद था।कोई भी विषय हो,हमें समझने में ज्यादा वक्त नहीं लगता था।सारे टीचर हमें बहुत ज्यादा पसंद करते थे।
      हमारे माँ बाबू जी भी हमसे बहुत आस लगा कर रखे हुए थे।मानो हम उनकी गरीबी दूर हटाने की आखिरी उम्मीद हैं।पर हमें गरीबी और अमीरी में कुछ फर्क नहीं दिखता था।क्योंकि हमने कभी अमीरी देखी ही नहीं थी। सुबह शाम का खाना मिल जाता था,खेलने के लिए दोस्त मिल जाते थे,माँ बाबू जी का प्यार मिल जाता था।इससे ज्यादा हमारे जैसे बच्चे को और क्या चाहिए?
      किताबों से विशेष लगाव था हमारा।हम शाम को खेल कर आते,और किताबों में डूब जाते।अपने क्लास में हमेशा हम अव्वल नंबर से पास हुए हैं।
      हमने कभी भी किसी लड़की से बात नहीं की थी।और अगर क्लास में कोई लड़की बात करने की कोशिश करती,तो हमारी अवाज लड़खड़ा जाती थी,और आँखे भी शर्म से झुक जाया करती थी।
     पता नहीं,हमें क्या हो जाया करता था,पूरे शरीर में कम्पन्न सा होने लगता था।सारे दोस्त हमारा मजाक उड़ाते थे।
   फिर हम दसवी कक्षा में पहुँचे,और हमें पता था कि ये पड़ाव हमारे जिंदगी का अहम पड़ाव हो सकता है।और अगर हमें आसमान की ऊँचाईयों को छूना है,तो ये पड़ाव हमारे जीवन का अहम पड़ाव हो सकता है।
    माँ बाबू जी के सपने को सच करना था,तो ये पड़ाव को सफलता पूर्वक पार करना अत्यंत जरूरी था।
     हमने अच्छी खाशी पढ़ाई की,और बहुत जोर सोर से मेहनत की।और दसवी कक्षा का परीक्षा दिया।पर जो विश्वास के साथ हम परीक्षा देने पहुँचते थे,उससे ज्यादा हम नर्वस हो कर हम बाहर निकलते थे।पता भी नहीं चलता था,और समय जल्दी खत्म हो जाया करता था।
   हर परीक्षा में एक दो सवाल तो छूट ही जाते थे।पर गणित के पेपर ने तो हमें हिला कर रख दिया था।एक इक्वेसन के सवाल ने हमें आगे बढ़ने ही नहीं दिया।
     दर असल वैसे सवालों का अभ्यास हमने बहुत किया था,पर ना जाने कुछ तो था,जो हमसे छुट रहा था,जिससे सवाल सुलझने की जगह उलझता जा रहा था।
     फिर हम वह सवाल को छोड़,आगे बढ़ें।अभी भी चार सवालों का जवाब देना बचा हुआ था,कि घंटी बज गई।और चार सवाल छूट ही गएँ।
     परीक्षा का दिन खत्म हो गया,पर सवाल खत्म नहीं हुए।पता नहीं कैसा रिज़ल्ट आएगा?मैं पास तो हो जाऊँगा ना?अगर मैं उस इक्वेसन के सवाल छोड़,आगे बढ़ गया होता,तो मैं ज्यादा सवाल अटेम्प्ट कर पाता।वगैरह वगैरह।
     रिज़ल्ट आने का समय जैसे जैसे नजदीक आ रहा था,वैसे वैसे ही दिल की धढ़कने तेज हुए जा रही थी।
     आज रिज़ल्ट निकलने का समय भी आ ही गया।नोटिस बोर्ड पर रिज़ल्ट लग चुका है।सभी लोग रिज़ल्ट देखने के होड़ में,एक के ऊपर एक चढ़े हुए हैं।जो आगे हैं,वह तो अपना रिज़ल्ट देख चुके हैं,(और जो पास हो गए हैं,वह अंदर से ही खुशी जाहिर कर रहें हैं(हे हे हाहा मैं पास हो गया),(और जो फैल हो गए हैं,उन पर तो मानो जैसे गाज ही गिर पड़ा हो।बिल्कुल ही कुछ देर के लिए दिमाग सुन्न पड़ जाता है।(तभी उन आवाजों में एक आवाज आती है बगल से,ओय बब्लू तू फैल हो गया है,बे),वह भले ही बब्लू को ना जानता हो,या उससे नहीं बनता हो,पर उसके अंदर अब  हिम्मत जाग आता है।उसके साथ दोस्ती वह भाईचारा,स्वतः ही मन में जाग आता है।पर अब उसे यह देखने की होड़ थी,कि कोई उसका दोस्त,इस मुश्किल घड़ी में उसका साथ दे रहा है या नहीं,या उसके यूनियन में और कितने लोग जुड़ने वाले हैं।उन्हें बाहर निकलने के लिए जगह नहीं मिलने के कारन ,वहीं फंस जाते हैं।फिर ये जिम्मेवारी उनकी हो जाती है,कि जो उनके दोस्त हैं,और क्लासमेट जो भीड़ के कारन  रिज़ल्ट नहीं देख पा रहें हैं,उनके रिज़ल्ट भी वही देखकर बताए।
        और फिर शाम में सारे फैल्यर एक साथ बैठकर अपना यूनियन बनाएँगे, और साथ में दारू पीकर फैल होने के गम को भूलाएँगे,साथ ही अपने पूराने दोस्तों को गरियाएँगे,कि साले,कमीने फलना ने उसे धोखा दे ही दिया, साले काहे का दोस्त,पढ़ाई ज्यादा की,और खेल में भी हमें नीचा दिखाया।वगैरह वगैरह।
      हमें भी अपना रिज़ल्ट पता लग ही गया था।हम पास हो गए थे।पूरे स्कूल में टोप किए थे।नब्बे प्रतिशत अंक हमने हासिल किए थे।
     हमारे स्कूल के प्रधानाध्यापक हमसे बहुत प्यार करते थे।हमारे भविष्य को लेकर वह बहुत ज्यादा चिंतामुक्त रहते थें।हमारे अच्छे अंक देख वह  बहुत खुश हुए थे।
     हमारे माँ बाप को जब हमारे रिज़ल्ट का पता चला,तो वह बहुत खुश हुए।और हमारे प्रधानाध्यापक हमारे घर माँ बाबू जी से मिलने के लिए आए।
      प्रधानाध्यापक ने हमारे माँ बाबू जी को हमारी सफलता के लिए बधाई दी और हमारी भविष्य की चिंता छोड़ने के लिए बात कही।यह सुन माँ बाबू जी सन्न रह गए।
      फिर प्रधानाध्यापक ने बात को और भी साफ करते हुए बताया,कि उनके घर में कोई बच्चा नहीं है,और वो और उनकी धर्म पत्नी को गोटी बहुत पसंद है,और वो गोटी को आगे बढ़ता देखना चाहते हैं।
      दर असल बात क्या था,कि आज से चौदह साल पहले प्रधानाध्यापक के परिवार में एक बच्चा हुआ था।प्रधानाध्यापक वह उसकी पत्नी बहुत खुश थे।पंडित जी को  बुलाया गया,ताकि उसका नामकरन किया जा सके,वह कुंडली बनवाया जा सके।पंडित जी ने उसका नाम गोटी रखा।
गोटी बढ़ता गया,और सम्बंध गहराता गया।चार साल की ऊमर में गोटी की तबीयत बहुत जोरों से खराब हो गई,और वह दुनिया छोड़ के चला गया।
    प्रधानाध्यापक व उसकी पत्नी बिल्कुल टूट गए थे।फिर से उन्होंने डाक्टर को कन्सल्ट किया।डाक्टर ने बच्चे के लिए मना कर दिया।फिर क्या,आज तक वो बच्चे से वंचित ही रहे।
    आज फिर से गोटी को देख उनके अंदर माँ का ममत्व और पिता का ख्याल जाग उठा था।
    आगे गोटी का सारा खर्चा उन्होंने उठाया।                
    और गोटी ने फिर कभी भी पीछे मुड़कर नहीं देखा।आज वह भारत का बहुत बड़ा वैज्ञानिक है।कचड़े से निकला हुआ हीरा है।

25 Mar 2017

नाम है मनमोहन,पर नाम में क्या रखा है?

मेरा नाम मनमोहन है।मुझे बचपन से ही राजू काका ने पाला था।राजू काका बताते थे कि मैं उन्हें आज से करीबन सोलह साल पहले,पेसेंजर  ट्रेन में किसी टोकड़ी में पड़ा हुआ मिला था।



      मतलब आप समझ ही गये होंगे,मेरी उमर अंदाजन सोलह से सत्रह साल होगी।मेरे माँ बाप का मुझे पता नहीं था।या ये कहिए,कि मैने कुछ बहुत अच्छे कर्म किए थे,कि मुझे इस जन्म में  राजू काका और काकी मेरे माँ बाबू जी के रुप में मिले।



       राजू काका को एक बच्ची थी।उसका नाम तृप्ति था।वह मुझसे दो साल बड़ी थी।और मैं उसे कभी भी बड़ी बहन से कम नहीं माना।



        राजू काका ने मुझे अपने बेटे जैसा पाला था।कभी भी मुझे बाप की कमी महसूस  होने नहीं दिया।



     आज भी मैं सोचता हूँ,अगर मेरे माँ बाप होते,तो वह भी मुझसे इतना प्यार नहीं करते, जितना मुझसे राजू काका करते हैं।



       मेरी हर जिद को पूरी करके दी थी,राजू चाचा ने।मैं भी राजू काका,काकी और तृप्ति से बहुत प्यार करता था।



        राजू काका की आँटे की चक्की थी।आस पास में कोई चक्की नहीं होने के कारन,उनका धंधा बहुत तेजी से विकसित हुआ।आज के दिन उनके पास,एक नहीं,बल्कि तीन तीन आंटे की चक्की है।और चार मजदूर भी हैं।



         मैं भी कभी कभी धंधे पर बैठ जाया करता था।



      तृप्ति अब कोलेज जाने लगी थी।उसका सपना था,कि वह फैशन डिजाईनींग की शिक्षा ग्रहण करे।



      वह पढ़ाई में बहुत अच्छी थी,वहीं मैं उसका उल्टा।पढ़ाई में दिल कभी लगा ही नहीं।और जब भी किताब लेकर बैठता,नींद बूरे तरीके से जकड़ लिया करती थी।और मैं सो जाया करता था।



      इसलिए मैं के के के एम पी का डिग्री लेकर,बाबू जी का धंधा संभालने लगा।



   अब आप सोचते होंगे,यह कौन सी नई डिग्री मार्केट में आ गई है।उस डिग्री का मतलब था,खींच खा़ंच के मेट्रीक पास।मतलब तो आप समझ ही गये होंगे,कि मैं मेट्रीक पास था।



     मैं अपनी बहन से बहुत ज्यादा प्यार करता था,वह भी मुझपर जान छिड़कती थी।मेरी बहन कोलेज जाने लगी।फिर मेरा रोज का एक काम फिक्स हो गया।बहन को कोलेज छोड़ना,और फिर कोलेज से घर लेकर आना।



      स्कूल के दिनों में स्कूल बस से जाती थी,और अब मेरे साथ बाईक पर।



      फिर तृप्ति और भी बड़ी हुई,और उसे फैशन डिज़ाईनींग के कोर्स करने के लिए,मुंबई जाने का मन हुआ।पर घर वालो ने मना कर दिया



       मैने घर वालों को मनाया,और बहुत मनाने के बाद,तृप्ति का मुंबई जाना फिक्स हुआ।



       काका काकी का कहना था,कि लड़की जवान हो गई है,तो अब उसकी शादी करके,उसका घर बसवा देना चाहिए।पर अपनी बहन की जिद्ध को पूरा करने के लिए,मैने  काका काकी को बैठा कर अच्छे से समझाया।



       और काका काकी मान गए,पर एक शर्त पर,कि मैं भी उसके साथ मुंबई जाऊँगा।और हमेशा उसके साथ रहूँगा।



        मैने हार कर हामी भर दिया।



मैं भी तृप्ति के साथ मुंबई पहुँच गया।



मैं  जैसे ही ट्रेन से उतरा,बहुत तेज बारीश शुरू हो गई।



       हमने कैब बुक किया,और काका के बताए गए तनू बुआ के पते पर पहुँच गए।वहाँ जब पहुँचे,तो तनु बुआ ने हम दोनो को अपना अपना कमरा दिया।



       तृप्ति का फैशन डिज़ाईनींग कोर्स के लिए निफ्ट में दाखिला दिलवा दिया। और मैं भी अपने लिए कुछ जोब की तलाश करने लगा।पर मेरी डिग्री के हिसाब से,मेरे लिए जोब ढुंड पाना मुश्किल हो रहा था।



        फिर मैं ऐसे ही किसी जोब इन्टरव्यू के लिए गया हुआ था।उन्होंने उस जोब के लिए तो मना कर दिया,पर एक ओफर दिया।



      उन्होंने बताया,कि हमारे यहाँ जो प्रोडक्ट लान्च होते हैं,उसके विज्ञापन के लिए,हम मोडल हायर करते हैं।क्या तुम उन विज्ञापनों में काम करना चाहोगे।



        मैने पूछा,सैलेरी!



       उन्होंने कहा,हर विज्ञापन के पाँच से दस हजार रुप्ये मिलेंगे।



       मेरी खुशी का ठिकाना नहीं रहा,और मैने झटपट हाँ कह डाला।



       फिर उन्होंने मुझे अगली सुबह नौ बजे बुलाया।



       मैं खुशी खुशी घर पहुँचा,और घर  पहुँच कर काका काकी को फोन करके बताया,तो उनकी खुशी का ठिकाना नहीं रहा।



     बुआ भी सुनकर खुश हो गई।



    फिर मैं तृप्ति के आने का इंतजार करने लगा।तृप्ति के आते ही,उसे जब मैं अपनी आपबीति बताई,तो वह भी बहुत खुश हुई।


      फिर अगली सुबह का इंतजार करने लगा।समय तो मानो थम सा गया हो।रह रह कर मैं घड़ी को देखता,और बोलता ऊफ,अभी भी चोदह घंटे बचे हुए हैं।


       फिर मैने नौ बजे रात्री का भोजन किया और लेट गया।लेटे लेटे पता नहीं कब नींद आ गया,पता ही नहीं चला।


       सुबह छह बजे का अलार्म लगाया हुआ था।अलार्म बजते ही मैं उठ खड़ा हुआ।और फटा फट फ्रेश होकर नाश्ता तैयार किया।और तब तक मेरी बहन तृप्ति भी उठ गई थी।मुझे नाश्ता बनाते देख,तृप्ति बहुत खुश हुई।दर असल मेरे हाथ का बना खाना तृप्ति को बहुत पसंद था।नाश्ता करने के बाद  उसे मैने बाई बाई कहा,और फिर मैं अपनी जोब के लिए निकल पड़ा।


       मोडलिंग और एक्टींग करना इतना आसान नहीं था।फिर भी लगातार अभ्यास से मैं जल्दी सीख गया।और फिर मैं पीछे मुड़कर नहीं देखा।


       आज दो साल हो गए हैं,और मेरी आज पहचान है।तृप्ति का भी कोर्स कम्प्लीट हो गया है।


       तृप्ति का आज जोब इंटरव्यू था।और वह बहुत खुश थी।मैं तृप्ति को साथ लेकर जोब इंटरव्यू के लिए गया।


       उसका इंटरव्यू अच्छा गया था,वह बहुत खुश थी।फिर इस खुशी में,मैने उसे मेक्डी में ट्रीट दिया।तृप्ति को बर्गर बहुत पसंद था।


      फिर एक दो दिन बीत जाने के बाद रात में तृप्ति को एक फोन आता है।अगर तुम्हें जोब चाहिए,तो कल शाम सात बजे होटल रेडिएंस के कमरा नंबर दो सौ तीन में आकर मुझसे मिलो।और अकेले ही आना।


      तृप्ति भाग कर मेरे कमरे में आ जाती है।और फोन के बारे में बताती है।


      मुझे बहुत गुस्सा आ जाता है।और मैं उससे पूछता हूँ,क्या तुम खुद का कोई अपना धंधा नहीं  कर सकती हो?


        उसने कहा,उसके पास केपिटल नहीं है,वरना उससे अच्छा कुछ नहीं हो सकता है।


         मैने पूछा,कितना लगेगा?


          तो उसने कहा,लगभग तीस से चालिस लाख रुप्या लगेगा।


          मैने बोला,मुझसे ले लो और शुरु करो।तृप्ति खिल उठी,और बहुत खुश हुई।


     फिर उसने अपना वर्कशोप शुरू किया।और फिर क्या देखते देखते उसका काम चल पड़ा।


      आज उसके डीज़ाइन किए गए कपड़े का शो चल रहा है।बड़े बड़े एक्टर आज रेम्प वाक करने वाले हैं।मैं भी उनके साथ में रेम्प वाक करने वाला हूँ।


          आज मुझे मेरी बहन तृप्ति पर गर्व हो रहा था।आज शो के बाद कुछ न्युज़ टीवी चैनल वाले तृप्ति का इंटरव्यू लेने वाले थे।तृप्ति की कामयाबी देख मेरा दिल गद गद था।


         इंटरव्यू का समय आया तो तृप्ति ने मेरा हाथ पकड़ कर मुझे  भी अपने साथ बैठा लिया।


        सवाल आता गया,और बड़ी सहजता से सारे सवालों का जवाब देती गई।


  फिर एक सवाल आया,आपके जीवन का रोल मोडल कौन है?


तृप्ति ज़रा सा रुकी,फिर बहुत गीले हुए स्वर में बोली,मेरा भाई मनमोहन ही मेरा रोल मोडल है।

आज मेरी शादी हो गई होती,और मैं किसी का घर संभाल रही होती,अगर मेरे भाई मनमोहन ने मेरा साथ ना दिया होता।आज अगर मेरा ये वर्कशोप नहीं होता,तो मैं किसी कंपनी में अपनी काबिलियत बेच रही होती।मेरे वर्कशोप का नाम मनमोहलिया है।ये नाम भी मैने अपने भाई के नाम पर ही रखा हुआ है।


       तृप्ति की बाते सुन मेरे आँखों में आँसू भर आए थे।मेरा दिल भी भर आया था।


      मैंने काका काकी को फोन किया,और उन्हें मुंबई बुलाया।


       काका ने पूछा,सब कुछ ठीक है ना!कोई दिक्कत तो नहीं है ना!


      मैने बोला,नहीं काका तुम आओ ना,तुम्हें कुछ दिखाना है।


काका काकी ने अगले सप्ताह आने का वादा किया।


काका काकी के आने की बात,मैने तृप्ति से छिपाई हुई थी,और काका काकी को भी मना करके रखा था,कि तृप्ति को अपने आने की बात मत बताना।


      काका काकी के आने के बाद उन्हें मैने एक होटल में ठहराया।और अगले दिन तृप्ति के शो पर उन्हें लेकर गया।उन्हें आगे की सीट पर बैठाया,और साथ में मैं भी बैठ गया।फिर तृप्ति को फोन किया, आज मैं नहीं आ पाऊँगा,कुछ जरूरी काम में फँसा हूँ।


       तृप्ति जब स्टेज़ पर आई,काका काकी उसे देखकर बहुत गर्व महसूस कर रहे थे।फिर तृप्ति की नज़र हम सब पर पड़ी,तो भाग कर काका काकी से मिलने के लिए चली आई।


        और फिर शो खत्म होने के बाद हमने रात्री का भोजन फाईव स्टार होटल में लिया।वह दिन मेरे जीवन का सबसे अनमोल दिन था।


       तृप्ति बहुत सारे लोग के लिए आँखों का कांटा बन सी गयी थी।बहुत सारे लोग ,उसे अपने रास्ते से हटाना चाहते थे।उसकी क्रीएटीविटी सबसे अलग थी,इसलिए उसका डिमांड, मार्केट में बहुत ही ज्यादा हो गयी था।


       मैं और तृप्ति अपनी कार में एक शाम अपना शो ओर्गेनाईज़ करने जा रहे थे।तभी मुझे लगा,कुछ लोग हमारा पीछा कर रहें हैं।फिर कुछ दूरी के बाद वह ट्रेफिक में गायब हो गएँ।फिर मुझे लगा,कि केवल यह मेरा भ्रम होगा।


       शो ओर्गेनाईज़ करने के बाद जब हम लौट रहे थे,तो मुझे आते वक्त की घटना का याद आया।तो मैने तृप्ति को   संजना (जो हमारे घर के बगल में रहती है)आज हमारा शो देखने आई हुई थी,उसके साथ में जाने को कहा।


     और मुझे कुछ काम है,का बहाना कर वहीं रुक गया।फिर वहाँ से मैं पुलिस स्टेशन जाकर कमिश्नर साहब से मिला,और साथ में एफ आई आर कर दिया और तृप्ति के लिए पुलिस प्रोटेक्सन की माँग की।

       कमिश्नर साहब पुलिस प्रोटेक्सन के लिए मान जाते हैं।


       फिर मैं घर लौट रहा था,तो पाता हूँ,कि एक युवक रोड पर जख्मी हालत में बेहोश पड़ा हुआ है।मैं गाड़ी रोक कर उसे देखने के लिए गाड़ी से बाहर निकला।मुझे लगा,शायद किसी गाड़ी ने उसे उड़ा दिया है।जैसे ही मैं दूसरा कदम बढ़ाता हूँ कि पीछे से लगातार एक के पीछे एक गोली पीठ में आकर लगती है और मैं खून से लथपथ वहीं बेहोश होकर गिर जाता हूँ।


        फिर मेरी जब आँख खुलती है,तो मैं अपने आप को किसी होस्पिटल के इमरजेंसी रूम में पाता हूँ।


मैं इमरजेंसी रुम के बाहर निकलता हूँ,तो पाता हूँ कि काका काकी और तृप्ति गला फाड़ फाड़ कर रो रहे हैं।मेरे को लगा,शायद कोई मर गया है,इसलिए ये लोग गला फाड़ कर रो रहें हैं।फिर जब मैं उनके मुंह से मेरा नाम सुना,तो मुझे हँसी आई।


हे हे हे,

 मैं तो जिंदा हूँ,और ये लोग यहाँ रो रहे हैं।फिर मैं पीछे से जाकर तृप्ति की आँखो को बंद किया,पर उसे कुछ भी अहसास नहीं हुआ।और वह लगातार रोए जा रही थी।


     फिर मुझे विश्वास नहीं हुआ,तो मैं चिल्लाकर चिल्लाकर चाचा चाची और तृप्ति से गुस्सा करके बोलने लगा,मुझसे मजाक मत कीजिए आपलोग,मुझसे बात कीजिए।आप लोग चुप क्यों हैं?


     फिर इमरजेंसी रूम में वार्ड बोय घुसा और व्हील बेड पर किसी को लेटा कर बाहर लेकर आया।उसका मुंह सफेद चादर से ढका हुआ था।


      तृप्ति दौड़कर उस व्हील चेयर के पास गई,और चादर जैसे हटाई,मेरे नीचे से जमीन खिसक गया।


      मैं चिल्ला उठा,नहीं नहीं नहीं।


   मैं ! मैं मर गया हूँ।


   यही मेरी कहानी है।
आपकी भी अगर कोई कहानी है तो हमसे ज़रुर शेयर करें।


   


18 Mar 2017

जीवन नइया

Shayari

जीवन नइया।

Kavitadilse.top द्वारा आप सभी पाठकों को समर्पित है।

जीवन नइया की लीला है न्यारी,

दुख सुख कर रहें हैं,साथ में सवारी।

कभी दुख  मुझे और सुख को उठा कर दे पटक मारी।

तो कभी दुख को मैने और सुख ने मिलकर धोबी पछाड़ डाली।

इस उठा पटक का मजा भी अजब है मेरे भाई।

कभी हम नाव पर सवार करें,तो कभी नाव हम पर करे सवारी।

जीवन की नइया में,भरी पड़ी है खुशियाँ सारी।      

खुशी को लुटाटे चलो,और दुख को समेटते चलो मेरे हमराही।


Written by sushil kumar
Shayari

17 Mar 2017

अहंकार

कोई भी मनुष्य का सबसे बड़ा काल,उसका अहंकार होता है।जिस दिन मनुष्य ने अहंकार पर विजय पा लिया,उस दिन समझो उसने ईश्वर को प्राप्त कर लिया।

आज मैं जो कहानी लेकर आया हूँ,इसमें आप देखेंगे कि मनुष्य कैसे ईश्वर को भी ढुंढ रहा है,और खुद को भी ईश्वर से कम नहीं आंक रहा है।

ये कहानी है,मनोहर की।मनोहर एक आम आदमी था।वह भगवान का बहुत बड़ा श्रद्धालु था।उसका बस दो ही काम था।सुबह से शाम तक कपड़े का धंधा करता था,और बाकी बचे समय में ईश्वर की भजन भक्ति में डूबा रहता था।

       फिर धीरे धीरे समय बदला।और समय के साथ साथ मनोहर का दिन भी बदला।मनोहर अब कपड़े का बहुत बड़ा व्यापारी हो गया था।

       जैसे जैसे उसका समय बदला वैसे वैसे ही वह ईश्वर से दूर होता चला गया।अहंकार ने उसे पूरी तरीके से जकड़ लिया था।अब वह किसी को नहीं बुझता था।

        मनुष्य जब तक तकलीफ में होता है,तब तक वह ईश्वर की भजन भक्ति में लगा रहता है।और ईश्वर को नहीं भूलता है।पर जैसे ही उसका समय बदलता है,और वह सुखी सम्पन्न हो जाता है,तब वह ईश्वर को भूल कर ऐश और आराम की जिन्दगी में व्यस्त हो जाता है।

अँधियारी रात

अँधियारी रात थी।मैं अकेला सुनसान सड़क पर रोज की भांति अपनी जोब से वापस लौट रहा था।कान में इअर फोन ठुसा हुआ था।और हनी सिंह के गाने सुनता हुआ,और उस गाने का कुछ स्टेप करता हुआ घर की ओर चला जा रहा था।
       पर  जब मैं अपनी कोलोनी में जाने के लिए सड़क पर मुड़ा,तो मुझे एक जानी पहचानी सी अवाज मेरे पीछे से सुनाई दी।मानो जैसे,किसी ने पुकारा हो,सोनू रूक ना जरा।
      मैं जब पीछे मुड़ कर देखता हूँ,तो पाता हूँ कि,बल्लू मेरा जिगरी दोस्त खड़ा है।
     मैने पूछा,क्या हुआ दोस्त,यहाँ क्यों खड़े हो?और तुम पर ये सफेद पोशाक बहुत ही जंच रहा है।बिल्कुल हीरो की तरह लग रहे हो।
      बल्लू ने कहा,कि हम अपने गाँव जा रहें हैं,तो सोचा कि तुमसे मिलते हुए चलें।
       मैने पूछा,तुम तो हमेशा गाँव अपने माँ बाबूजी के साथ जाते हो।तो आज तुम अकेले ही कैसे जा रहे हो?            बल्लू ने कहा,माँ बाबू जी जरा सा पहले निकल गये हैं,मैं तुमसे मिलने के लिए,तुम्हारा यहाँ इंतजार कर रहा था।
बल्लू की बातें सुन सुन कर पता नहीं क्यों दिल बैठा जा रहा था।मानो अगले ही पल आँसू की धारा आँखो से सैलाब बन कर निकल पड़े।
     फिर मैं बल्लू से जाकर लिपट गया,और बोला,अपना ख्याल रखना दोस्त।
फिर बल्लू ने कहा,चल यार चलता हूँ,तू भी अपना ख्याल रखना।अलविदा।
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         मेरे घर से  लगभग दौ सो कदम पर बल्लू का घर आता था।
          मैं अपने घर का बेल बजाया,और तभी एक बात मेरे दिमाग में ठनका,बल्लू ने मुझे अलविदा क्यों कहा?
          मेरी बीबी शर्मिला ने गेट खोला,और मैं उसके गालों पर चुंबन देकर,हाथ पैर धोने के लिए बाथरूम में गया।
          फिर मैं डायनींग टेबल पर खाने के लिए बैठा।शर्मिला भी साथ में आकर बैठ गई।
           मैने बोला,शर्मिला तुम सो जाओ,मैं आता हूँ ,खाकर।
     शर्मिला ने कहा,मैं भी आपके साथ आज खाऊँगी।
        मैं जरा सा गुश्शा हो गया,और बोला,मेरे लिए इतनी रात तक क्यों इंतजार कर रही थी।तुम्हें खाना समय पर खा लेना चाहिए।
      शर्मिला ने हामी भर कर खाना पड़ोसा,और हमने साथ मिलकर खाना खाया।
     अगली सुबह सात बजे,मेरे मोबाईल फोन पर घंटी बजती है।मैने अधखुली आँखो से फोन के स्कृण को देखा,ये तन्मय अभी फोन क्यों कर रहा है?
      मैने फोन काट दिया।फिर से दुबारा फोन आने पर,मैं जरा सा चिड़चिड़ा कर बोला,क्या हो गया?इतनी सुबह सुबह क्यों फोन कर रहा है।
      उसने बोला,जरा सा बल्लू के घर आना,कुछ बात करनी है।
    मैं बोला,हाँ मैं आता हूँ।
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कहकर फोन काट दिया।
फिर मुझे,कल रात की जोब से लौटते समय वाली घटना याद आ गई।
बल्लू तो गाँव गया है,फिर तन्मय उसके घर पर मुझे क्यों बुला रहा है?
क्या कल रात में बल्लू वापस आ गया?बहुत सारे सवाल मन में गूंज रहे थें।सारे सवालों को मन में लिए,मैं पहुँच गया,बल्लू के घर।वहाँ जाकर देखता हूँ,कि तन्मय बल्लू के घर के बाहर खड़ा है।
    तन्मय ने कहा कि हर रोज जब मैं जोगिंग कर के लौटता था,तब संतोष अंकल रोज सुबह  यहाँ पेपर पढ़ते दिखते थे,और अक्सर हम दोनो में गुप्तगू हो जाया करती थी।और इसी बहाने बल्लू से भी मुलाकात हो जाया करता था।
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       पर आज जब मैं उन्हें यहाँ नहीं पाया,तो उन्हें फोन किया,तो फोन की घंटी की आवाज अंदर से आती हुई सुनाई दी,पर किसी ने उठाई नहीं।फिर मैने बल्लू को फोन किया,पर उसने भी फोन नहीं उठाई,और फोन की घंटी की आवाज फिर से घर के अंदर से आती हुई सुनाई दी।
    तन्मय की बाते सुन मैं जरा सा घड़बड़ा गया।और बोला कि कल रात को मैं बल्लू से कोलोनी के बाहर मिला था।वह...वह तो अपना गाँव जा रहा था।फिर मैने सोचा कि उसने जाते जाते मुझसे अलविदा क्यों कहा था?
       यह सोचते सोचते मेरी आँखें भर आई थी।मैने बोला,तन्मय,बल्लू हो सकता है,सोया हुआ हो।मैं फोन करके देखता हूँ।
      फिर अपने मन में,मैं ईश्वर से प्रर्थना करने लगा कि बल्लू जहाँ भी हो,सुरक्षित हो।
      पर बल्लू ने मेरे फोन को भी नहीं उठाया।और फोन की घंटी की आवाज घर के अंदर से आती हुई सुनाई दे रही थी।फिर मुझे उसकी चिंता होने लगी।और हमने पुलिस को फोन करके सारा हाल बयान किया।
       पुलिस आधे घंटे में वहाँ पहुँच जाती है।फोन ट्रेकर से पुलिस ने पता लगा लिया था,कि दोनो फोन अंदर में ही है।फिर ताबड़तोड़ दरवाजा तोड़ कर जब हम अंदर पहुँचे,तो पुलिस ने हम सभी को आदेश दिया,कि हम कोई भी समान नहीं छुएँ।
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     फिर पुलिस ने एक एक करके सारे  कमरे की तलाशी ली।पर जब हम बल्लू के कमरे के अंदर गयें,तो वहाँ का दृश्य देखकर हम सभी के होश उड़ गयें,और मेरे आँखों से आँसू निकल पड़े।
     मेरा दोस्त पंखे पर बेजान सा लटका हुआ था।उसकी दोनो आँख बाहर निकली हुई थी।बगल में अंटी के मुंह से झाक सा कुछ निकला पड़ा था,और वह भी अचेत सी पड़ी हुइ थी।।और कोने में अंकल अपना एक हाथ छाती पर रखे,बल्लू को देख रहें थे।और वह भी बिल्कुल अचेत थे।
     पुलिस ने सभी की नसें चेक की और सभी को मरा हुआ घोषित किया।अंकल को शायद हर्ट अटैक आया था,और अंटी ज़हर खा कर मरी थी।
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      बल्लू की उमर भी,मेरी जितनी ही थी,लगभग तीस साल।मैं और बल्लू बचपन से ही साथ साथ बड़े हुए थे।साथ में पढ़े,साथ में खेलें,साथ में ही हमने जोब भी हासिल की।पर बल्लू ने अपना जोब,कुछ महीनें में ही छोड़ दिया था।वो कंपनी,जहाँ बल्लू जोब कर रहा था,उसमें बहुत बड़ा घोटाला हुआ था।कंपनी दिवालिया होने की स्थिति में आ गई थी।सारे स्टाफ की निकासी की जा रही थी।मेरे दोस्त बल्लू को भी निकाल दिया गया था।मैं जिस कंपनी में काम कर रहा था,वहाँ नया होने की वजह से,मेरी पहचान उतनी तगड़ी नहीं हुई थी।फिर भी मैं एच आर में जाकर पूछताछ की थी।तो उन्होंने साफ साफ मना कर दिया था,कि अभी कोई वेकेन्सी नहीं है।बल्लू ने तो मानो जोब नहीं करने की जिद्ध ठान के रखी थी।वह बोलता था,जोब ओब मुझसे नहीं होगा,मैं तो बिझनेस करूँगा।
       जब बल्लू ने अपने पिता  से मदद माँगा,तो उसके पिता ने मना कर दिया था, कहा , जोब धूंढो,और मुझसे एक पैसे की उम्मीद मत रखना, कि तुम्हारे बिझनेस में एक पैसा भी मैं लगाऊँगा।बल्लू ने कभी भी मुझसे आकर मदद नहीं माँगा था।पता नहीं क्यों?और मैं भी,अपनी स्थिति को देखते हुए,आगे नहीं बढ़ा था।शायद बल्लू ने सोचा होगा,कि मेरी भी नई नई जोब है,और नई नई शादी हुई है।जिम्मेदारी बढ़ गई है।
        फिर कुछ दिनों के बाद बल्लू और उसके पापा में बहुत ज्यादा ताना तानी रहने लगा।बात यहाँ तक पहुँच गई थी,कि बल्लू ने बँटवारा करने को कह दिया था।
        बल्लू मुझसे सारी बातें शेयर किया करता था।किसी भी दिन जो हमारी मुलाकात नहीं हो पाती,तो वह सारी बातें व्हाट्स एप पर शेयर किया करता था।
http://vinodekbote.blogspot.in/
        घटना वाले दिन  बल्लू बहुत ज्यादा ही तिलमिलाया हुआ था।और सुबह से ही बँटवारा करने के लिए झगड़ा कर रहा था।उसके पिता ने भी गुश्शे में आकर बोल दिया,कि वह सारा जमीन जायदाद,और धन दौलत किसी अनाथ आश्रम में दान कर देंगे,पर उसे एक पैसा भी नहीं देंगे।
       मैं बल्लू से मिलने हर दिन की तरह दोपहर एक बजे गया था।बल्लू बहुत गुश्शे में था,और अपनी जिन्दगी से तंग आ गया था।
        मैं उसे हर दिन की तरह आज भी उसे ढांढस बँधवा रहा था।और बोल रहा था,हिम्मत मत हार दोस्त,तेरे बाबू जी एक दिन ज़रूर मान जाएँगे।
http://www.anureviews.com/
       और तीन बजे जैसे की मुझे अपने जोब पर जाने के लिए घर से निकलना पड़ता है,मैं दो बजे बल्लू के घर से चला आया।
    उस दिन भी उसने आत्महत्या करने से पहले,सारी आपबीती मुझे व्हाट्स एप करके बताया था।पर उस दिन काम का इतना प्रेशर था,कि व्हाट्स एप खोल ही ना सका।
     अगले दिन पुलिस जब पोस्टमोर्टम के लिए अपने साथ सारी बडी ले गई,और मैने घर आकर जब मोबाईल पर नेट ओन किया,तो बल्लू का व्हाट्स एप मुझे मिला।जिसे पढ़कर मैं अवाक् सा रह गया।
     समय कुछ शाम के चार बज कर पाँच मिनट का था।बल्लू ने बोला,पापा आप बँटवारा कर रहें है या नहीं,मैं आखिरी बार पूछ रहा हूँ।
http://blog.fatema.in/
        बात बिगड़ता देख,माँ भी बिच में आ गई,और संतोष अंकल को समझाने लगी,कि जो बेटा बोलता है,कर दो ना।हमारे बुढ़ापे में,अगर इसने कुछ ऐसा वैसा कर लिया,तो हम कहीं के नहीं रहेंगे।
      संतोष अंकल ने भी चिल्ला कर कह दिया,कि ऐसा नालायक बेटा होने से अच्छा होता,कि हम निःसंतान होते।
     यह सुनकर बल्लू अपने कमरे में चला गया।पीछे पीछे माँ भी गई।बल्लू को उसकी माँ ने बहुत समझाया,कि बेटा,हम बनिये नहीं हैं,हम ठाकुर हैं।हमसे धंधा नहीं संभलेगा।देखो तुम्हारे मामा,धंधे में,घर जायदाद सबकुछ बेचकर रोड पर आ गयें हैं।
      बल्लू का मन पसंद खाना था,आलू का परांठा और टमाटर की चटनी।उसने कहा,माँ आज मुझे,आलू का परांठा खाने की बहुत इच्छा हो रही है।
       बल्लू की माँ खुशी खुशी किचन में आलू का परांठा और चटनी बनाने चली गई।बहुत दिनों के बाद बल्लू ने कुछ फरमाईश की थी,इसलिए माँ भी बहुत खुश थी।
      शाम के पाँच बज गयें थे।माँ आलू का परांठा और चटनी लिए बल्लू के कमरे में पहुँचती है।बल्लू खूब स्वाद लेकर खाता है।
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       माँ पूछती है,कि रात में क्या खाएगा।तो बल्लू ने कहा,जो भी आप प्यार से बनाएँगे, वही खाएँगे।
      माँ किचन में जाकर रात के खाने की तैयारी करने लगी।
      बल्लू ने आगे लिखा,कि मैं अपनी  जिन्दगी से तंग आ गया हूँ,दोस्त।और अब जीने की आस भी नहीं रही है।मैं किसी के भी दबाव में आकर आत्महत्या नहीं कर रहा हूँ,इसके लिए  मैं खुद जिम्मेदार हूँ।मेरे माँ बाबू जी पर कोई एक्शन ना हो,इसलिए मैं ये सारी बातें, अपनी डायरी में लिखकर जा रहा हूँ।
अलविदा,मेरे दोस्त।

यह पढ़कर,मेरा दिल बैठ गया।और कल रात की मेरे दोस्त के द्वारा की गई अलविदा का मतलब अब समझ में आया।https://.blogspoitchingtoreadt.in

13 Mar 2017

जंगल का राजा।

किसी जंगल में एक शेर राज किया करता था।उसके राज्य में हर जगह शांति और खुशहाली फैली हुई थी।उसके फैसले भी सदा न्याय पूर्वक ही रहा करते थे।सारी जंगल की प्रजा,उनके राजा से अत्यधिक प्यार करते थे।

       फिर समय बिता,और इस जंगल के राजा और जंगल की खुशहाली भरा जीवन की खबर दूर दूर तक पहुँच गई।सभी जगह इस जंगल के चर्चे छाए हुए थे।

      कुछ जंगल के राजा तो उस जंगल को हथियाना चाहते थे।पर वह जंगल तीन तरफ से प्राकृतिक संरचनाओं से घिरी पड़ी थी।
     उत्तर में पहाड़ और पूर्व और दक्षिण में नदी।बचा पक्षिम, तो पक्षिम में पूरे तरीके से चोकसी बढ़ा कर रखी हुई थी।
     तभी खबर आई कि पक्षिम में हमला हुआ है।वहाँ तैनात सैनीकों ने हमले का करारा जवाब दिया और दुश्मनों को खदेड़ कर भगाने में सफल हुए।
      उस हमले में कुछ सैनीक शहीद हुए,उन सैनीकों के परिवार को पर्याप्त मुआवजा दिया गया,साथ ही उस शहीद सैनीक को मरनोप्रांत वीर सम्मान,(जो उस राज्य का सबसे बड़ा सम्मान था) से सम्मानित किया गया।
       राजा ने नया कानून बनाया,और ऐलान किया कि,आज से हमारे सीमा पे जो  भी सैनीक तैनात रहेंगे,उनके परिवार का खर्चा राज्य उठाएगा।और सैनीकों की वेतन में हर वर्ष ढेड़ गुणा बढ़ोत्तरी की जाएगी।
       ऐसी खबर सुनते ही सैनीक की भर्ति में तेजी से इजाफा हुआ। राज्य और भी शक्तिशाली और सुदृढ़ हो गया।
        उस शेर राजा को समझ आ गया थी,कि अगर राज्य में शांति और खुशहाली बरकरार रखना है,तो उसके लिए हमारी सीमा को और भी मजबूत बनाना पड़ेगा,ताकि हमारी अजादी बरकरार रहे।वरना हमारी अजादी और मन की शान्ति दोनो खतरे में आ जाएंगे,और हमारी जनता भी तकलीफ में आ जाएगी।

6 Mar 2017

भारत है हमारी जान।

यह मानो कल की ही बात हो जैसे,मैं अपने दोस्तों के साथ अपने घर के सामने वाले मैदान में क्रिकेट खेल रहा था।तभी हमें बहुत ही तेज,झकझोर कर रख देने वाली आवाज सुनाई दी।
     मेरी तो जैसे एक पल के लिए दिल की धड़कन ही बंद हो गई।हम सभी सहम गये।



फिर वैसी ही तेज आवाज लगातार सुनाई देने लगी।हम बहुत ज्यादा डर गये।तभी मेरी और मेरे दोस्तों के मोबाईल फोन एक साथ बजे।
माँ का फोन आया था।बेटा जल्दी घर आजा,शहर में आतंकवादियों ने हमला किया है।


हम सभी अपने अपने घर चल पड़े।घर पहुँचने पर देखता हूँ कि मेरी माँ बहुत परेशान है।पापा के घर आने का समय शाम सात से आठ बजे का था।माँ पापा को इस आधे घंटे में दस बारह बार फोन कर चुकी थी।
   पापा ने माहौल जरा शाँत होने तक ओफिस में ही रुकने का प्लान बनाया था।आतंकवादियों को पूरे जोर शोर से ढूँडा जा रहा था।हमारे पूरे शहर में तनाव का माहौल था।सारे शहर में नाका बंदी कर दी गयी थी।सभी गाड़ियों की तलाशी ली जा रही थी।

सात बजे के आसपास में सक्षम (मेरे दोस्त का नाम)की माँ का मेरे पास फोन आता है ,"बेटा,सक्षम तुम्हारे साथ में है क्या?" मैने  कहा,"नहीं अन्टी,क्या वो अभी तक वह घर नहीं पहुँचा?"
अन्टी ने बोला,"नहीं आया है।पता नहीं कहाँ है।फोन भी नहीं लग रहा है।"
मैने बोला,"अन्टी रूकीये,मैं जरा संजय और विनोद से बात कर लेता हूँ,वह उसके साथ में निकला था।"
मैने संजय और विनोद को फोन किया,तो पता चला कि सक्षम को रास्ते में सही सलामत छोड़ा था,जहाँ से वह अपने घर की तरफ चला।
मैने अन्टी को फोन कर के सब कुछ बता दिया।
अन्टी काफि परेशान हो गयीं।
मैने बोला,"अन्टी परेशान मत होइये,सक्षम हो सकता है,आस पास में गया हो।"
अन्टी ने बोला, "चलो बेटा,मैं देखकर आती हूँ,सक्षम को।"
 रात के नौ बज गये थे।पापा घर पर थे।हम सभी टीवी पर न्युज़ देख रहे थे।तभी कुछ ब्रेकींग न्युज़ आ रही थी कि कुछ बच्चों को ढाल बनाकर आतंकवादी किसी फ्लैट में छिप कर बैठे हुए हैं।जब मैंने ध्यान से देखा तो पाता हूँ कि वह अपार्टमेंट सक्षम के अपार्टमेंट के पास वाली अपार्टमेंट है।
जिस फ्लेट पर कब्जा किया हुआ था आतंकवादियों ने,उस बिल्डींग को पुलीस ने चारो तरफ से घेर कर रखा हुआ था।और बार बार ध्वनि-विस्तारक यंत्र से घोषणा किये जा रहा था,कि पुलीस तुम सभी लोगों को चारो तरफ से घेर लिया है,अगर तुम सलामती चाहते हो तो सारे बच्चों को छोड़ दो,और खुद को हमारे हवाले कर दो।
 आतंकवादियों ने कागज  के उपर लिख कर नीचे फेंका।उस पर लिखा हुआ था,अगर कोई चलाकी की गयी,तो तुमलोग बच्चों से हाथ धो बैठोगे।आगे उन्होंने उनके नेता गद्दाफ खान को छोड़ने की डीमांड कर डाली।
ये गद्दाफ खान वही है,जिसकी फाँसी की सजा आने वाले सोमवार को तय की गयी है।इसने हजारों बेकसूर लोगों की जान ली हुई है।उसे छोड़ना,मतलब मौत के फरिश्ते को छोड़ना।
मैं समझ गया,सक्षम बता रहा था,कि उसके बगल वाले अपार्टमेंट में उसके किसी दोस्त का बर्थडे सेलिब्रेशन था।वहाँ सक्षम जाने वाला था। ऐसा तो नहीं कि सक्षम की जान खतरे में हो।यह सोचकर मैं डर गया। मैने पापा को बताया, कि हो सकता है सक्षम उसी फ्लैट में फँसा हुआ हो।मेरी माँ ने सक्षम की माँ को फोन लगाया।और जैसा कि मैने सोचा था,वैसा ही हुआ।सक्षम की माँ फोन पर फूट फूट कर रोने लगीं।मेरी माँ ने उन्हें ढ़ांढ़स बंधाया,और धीरज रखने को कहा।
       फिर हमसभी सक्षम के परिवार से मिलने के लिए,घर से निकले।रास्ते भर बस मैं यही सोचता रहा,'सक्षम मेरा सबसे अच्छा दोस्त है,अगर उसे कुछ हो जाएगा,तो मैं तो बिल्कुल अकेला हो जाऊँगा।मैं किससे होमवर्क कौपी करुँगा,मैं किसके साथ टीफीन शेयर करूँगा,और किसके साथ खेलूँगा।"
         फिर हम सक्षम के अपार्टमेंट के पास पहुँचे,वहाँ मैने जो देखा,वह देखकर दंग रह गया।इतनी ज्यादा पुलीस फोर्स और कमांडोज़,मैने केवल फिल्मों में ही देखा था।पाँच बच्चे आतंकवादियों के कैद में हैं।उनके माँ बाप बिलख-बिलख  के रो रहे थे।
     सक्षम की माँ  और पिता भी वहीं थे।फिर हम उनके पास गये।और हमें पास आते देख,सक्षम की माँ की आँखों से आसुओं की धारा के बह निकली।

   भारत सरकार की तरफ से नोटीस आई कि उन्हें दस घंटे का समय चाहिए।आतंकवादियों को घोषणा करके बता दिया गया कि भारत सरकार ने सोचने के लिए दस घंटे का समय माँगा है।इस पर आतंकवादियों ने  एक और पेपर का टुकड़ा उपर से फेंका।इस पर लिखा था,हम पाँच घंटे से ज्यादा समय नहीं दे पाएँगे।अगर हमारी डीमांड पूरी नहीं हुई,तो एक एक बच्चे की उंग्ली हर आधे आधे घंटे पर काट कर हम नीचे फेंकेंगे।इसमें तुम लोगों के बच्चों को कितना दर्द होगा,यह तो तुम लोगों को पता ही होगा।इसकी जिम्मेदार केवल और केवल तुम्हारी सरकार होगी।
      फिर सरकार को आतंकवादियों की डीमांड की जानकारी भेज दी गयी।हम सभी सरकार के फैसले का इंतजार कर रहे  थें।तभी मेरे दिमाग में एक आइडीया आया।अभी रात के खाने का डीमांड आएगा,अगर उनके खाने में कोई ऐसी दवा मिला दें,जिससे उन्हें धीरे धीरे आधे से एक घंटे में नीन्द आ जाए,तो कैसा रहेगा।
      मैने अपना आइडिया वहाँ खड़ी पुलीस कमिश्नर को बताया।पुलीस कमिश्नर ने मेरे कंधे पर हाथ रखते हुए कहा,शाबास बेटे,लेकिन आज कल के मुजरिम बड़े शातीर हो गये है हमारे द्वारा भेजे गये कोई भी समान को पहले बच्चों पर अपनाएगें।
      हम सभी परेशान थे,तभी कुछ लोगों को बात करते सुना कि गद्दाफ खान को यहाँ लाया जा रहा है।मैं बड़ा डरा हुआ था,कि कितना खतरनाक लगता होगा वह आतंकवादी।
😱बहुत सारा सवाल मन में लगातार उठने लगे।
     फिर पुलिस ने घोषणा कर के आतंकवादियों को बताया, कि तुमसे मिलने गद्दाफी खुद आ रहा है।वह तुम लोगों से मिलने के लिए जिद्ध कर रहा था।
      आतंकवादियों ने अपना संदेश हमें भेजा।'हमसे मजाक ना करना,वरना तुम लोगों पर बहुत भाड़ी पड़ेगा।
      फिर से पुलिस ने घोषणा करके आतंकवादियों को बताया कि ,अगर तुमलोगों को विश्वास नहीं है तो नेशनल टीवी पर देख लो।नेशनल टीवी पर न्युज देखकर आतंकवादियों को विश्वास आ गया।
      गद्दाफ खान को पूरे पुलिस फोर्स के सिक्योरिटी में वहाँ लाया गया।गद्दाफ खान फिर वहाँ से अकेले ही उस अपार्टमेंट में गया।फिर कुछ आधे घंटे बाद,कुछ ऐसा हुआ,जिसका हमें अंदेशा भी नहीं था।पहले गद्दाफ खान नीचे आया,और उसने पुलिस ओफिसर से कुछ गुफ्तगू  किया।
      ओर फिर गद्दाफ ने तीन बार ताली बजाई,और फिर धीरे धीरे बारी बारी से सारे आतंकवादी नीचे आने लगें।सभी अपने हाथ उठाकर आ रहे थें।और किन्हीं के हाथ में कोई भी हथियार नहीं था।
        सभी को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया।गद्दाफ के साथ सभी को अपने साथ ले गएँ।
       हमारे आँख खुले के खुले रह गयें।ये आतंकवादी गद्दाफ खान को छुड़वाने आए थे।पर ये क्या हुआ?और कैसे हुआ?
सक्षम बाहर भाग के आया,और अपने पापा मम्मी से लिपट कर रोने लगा।मेरा दिल भी खुशी के मारे गद गद  हो गया।मेरा दोस्त मेरे सामने सही सलामत खड़ा था।
         फिर मैं भी अपने दोस्त से गले लग गया।और पता नहीं आँखें मेरी क्यों नम हो गयी।हम सभी ने एक दूसरे गुड नाईट कहा,और हम अपने अपने घर के लिए निकल पड़े।
         रात के दो बज गये थे।और एक नया दिन शुरू हो गया था।नई सोच और नई रोशनी हमारे दरवाजे पर दस्तक दे रहा था।
          हम सभी घर पहुँचे और चैन से चादर तानकर सोएँ।
          फिर नेशनल टीवी पर न्युज़ फ्लेश हो रहा था,गद्दाफ खान ने आतंकवादियों से जाकर  क्या कहा?और क्यों सारे आतंकवादियों ने आत्म समर्पण किया।
          दर असल पाँच साल पहले जब गद्दाफी को गिरफ्तार किया गया,तो जेल में किसी सुफी संत का प्रवचन होने वाला था।गद्दाफी सुफी संत के प्रवचनों से इतना प्रभावित हुआ,कि उसे अपने आप से ही घृणा हो गया।और उसने ना जाने कितनी बार सुसाईड करने की कोशिश की।लेकिन हर बार वह बच निकला।
      वह चिल्ला चिल्ला कर रब से अपनी मौत के लिए फर्याद करता।फिर वह हारकर कुछ सुफी संतो की किताबें मंगवाई।और लगातार दिन रात अध्ययन किया।
      अब वह बिल्कुल ही अब बदल गया था।हमेशा शाँत शाँत सा रहने लगा।उसने अपने सारे गुनाह कबूल लिये।
       फिर जब उसे छुड़ाने के लिए आतंकवादी हमला हुआ।और जब उसे पता चला,कि उसे छुड़ाने के लिए कुछ बच्चों को कैद कर लिया गया है,वह बहुत दुखी हुआ,और चिल्ला कर गिड़गिड़ा कर रब से माफी माँगने लगा।
        फिर जैलर से मिलने के लिए जोर जोर से आवाज लगाने लगा।जैलर तक खबर पहुँची।जैलर उससे मिलने पहुँचा।गद्दाफ खान रोते हुए कहा,मुझे जहन्नुम में जगह मिलेगी,अगर एक भी बच्चे पर मेरे चलते एक भी खरोच आया तो।मेरे साथी तो भटके हुए हैं।
अगर वह आत्म समर्पण कर देंगे,तो आप उनपर गोली नहीं चलाओगे ना।जैलर ने कहा,नहीं चलाएँगे।मुझे मेरे साथियों से मुझे मिलवादो,मैं विश्वास दिलाता हूँ,सारे आतंकवादी आत्म समर्पण कर देंगे।
       जैलर ने सारी बात पुलिस कमिश्नर को विस्तार से बताया,फिर जो कुछ भी हुआ,वह तो आपको पता ही है।
भारत की मिट्टी की बात ही निराली है।यहाँ की हवा में प्यार और मोहब्बत की सुगंध फैली हुई है।
       

1 Mar 2017

सोच बदलो।

एक घोसले में गोरइया अपने परिवार के साथ खुशी खुशी रहता था।वहीं पास में ही कौआ अपने परिवार के साथ में रहता था।कौआ गोरइया के घोसले की  सुंदरता को देख,उसे हथियाना चाहता था।
        कौआ ने अपने साथियों के साथ मिलकर गोरइया पे हमला कर दिया।गोरइया ने भी अपनी पूरी ताकत के साथ,अपना घोसला बचाने के लिए उसका मुंंहतोड़ जवाब दिया।और कौए को परास्त किया।इस हमले में गोरइया बुरी तरह घायल हो गया,और शहीद हो गया।
        शरीर को त्यागने के समय,जो गोरइया ने अपने भाईयों को सीख दी,वह हम मनुष्यों के लिए भी सीखने जोग्य बाते थी।।          
        हम शांतिप्रिय पक्षि हैं,और सदा रहेंगे।लेकिन अगर कोई हमारे घर पर कब्जा करने के लिए,हम पर हमला करेगा,तो फिर हम उससे युद्ध करेंगे,और उसे कभी ना भूलने वाला मुंहतोड़ जवाब भी देंगे,ना कि युद्ध टालेंगे।जहाँ हमारी वजुद पर बन आती है,वहाँ हम पीछे नहीं हट सकते हैं।

28 Feb 2017

आजाद देश की आजाद सोच।🤓

Shayari

आजाद देश की आजाद सोच।🤓

kavitadilse.top द्वारा आप सभी पाठकों को समर्पित है।

आजाद देश की आजाद सोच हैं हम।
घनघोर अंधेरा को काटता हुआ,उगते हुए सुरज की जोत हैं हम।
अपनी आजादी की कीमत को पहचानने वाले,
आज के भगत सिंह और सुभाष चंद्र बोस हैं हम।
आज हमारे देश की अखंडता को चुनौती देने वाले,
नेताओं की कूटनीति की तोड़ हैं हम।
अपनी आजादी को किसी भी हालत में दाव पे ना लगने देने वाले,
आज के चंद्रशेखर आजाद और खुदीराम बोस हैं हम।

Written by sushil kumar
Shayari

25 Feb 2017

हर दुआ में

Shayari

हर दुआ में।

kavitadilse.top द्वारा आप सभी पाठकों को समर्पित है।



मेरी हर दुआ में,तेरा नाम आया है2

तू ही मेरी धड़कन में,जाने कब से समाया है।2

वह दिन मुझे याद है,जब पहली बार तुम्हें देखा था।2

दिल को मैं थाम ना सका,मन भी साथ में बहका था।2

वह पहला पहला प्यार का,अजब ही नशा था।2

आज तक उतर ना पाया,ऐसा वह चढ़ा था।

मेरी हर दुआ में,तेरा नाम आया है2

तू ही मेरी धड़कन में,जाने कब से समाया है।2

मेरा वह पहला पहला प्यार का,अजब ही नशा था।2

आज तक उतर ना पाया,ऐसा वह चढ़ा था।
मैने हर दुआ में,बस तेरी खुशी माँगी है।2

फिर मैं तुझसे कैसे पूछूं?तुम्हारी दिल की क्या चाहत है।2

मेरे इस सवाल से,कहीं तुम्हारा दिल ना दुख जाए।2

इसलिए मैं सहमा रहता हूँ ,मन में ये सवाल लिए।2

मेरी हर दुआ में,तेरा नाम आया है2

तू ही मेरी धड़कन में,जाने कब से समाया है।2

Written by sushil kumar
Shayari

21 Feb 2017

लोग आपके बारे में सोचने पर क्यों मजबूर हो जाते हैं?

लोग आपके बारे में सोचने पर क्यों मजबूर हो जाते हैं?
जब आप कुछ वैसा कर जाते हैं,जो कुछ अलग सा हो,और जो बहुत लोगों के सोच से परे हो।
आप कुछ वैसा पा लेते हो,जो बहुत कम लोग पाए होते हैं।

11 Feb 2017

माँ बाबूजी,आप हमारे साथ आकर क्यों नहीं रहते हैं।

माँ बाबूजी,आप हमारे साथ आकर क्यों नहीं रहते हैं।


हम यहाँ बहुत ही परेशान हैं।


आपके साथ के बिना हैरान हैं ।


आपके प्यार और आशिर्वाद के बिना


हम बिन कश्ती मझधार में हैं।




माँ बाबू जी,आप हमारे साथ आकर क्यों नहीं रहते हैं।


बचपन से जवानी तक आपने हमारा साथ दिया।


सही संस्कार और सही दिशा सदा हमें प्रदान किया।


जब गिरे और रोये,तो साहस और विश्वास दिया।


और जब अव्वल नंबर से पास हुए,


तो प्रोत्साहन और लाकर हमें चोकलट दिया।


आज आपके साथ के बिना,


हम अधूरा अधूरा सा महसूस करते हैं।


जिंदगी के हर खुशी के लम्हे को,


नीरस हो कर जीते हैं।


सच कहते हैं,माँ बाबू जी हम


जल बिन मछली तड़पते हैं।




माँ बाबू जी,आप हमारे साथ आकर क्यों नहीं रहते हैं।


आज भी जब कोई तकलीफ होती है।
आपको याद हम  सदा करते हैं।

हम भूले नहीं,वह बचपन के दिन,
जब सारे तकलीफ , आपके गोद में आकर बिसरते थे।


आज भी हम तकलीफ में हैं,जिंदगी बड़ी नासूर सी बन गयी है।
आपके साथ के बिना हर महफिल,यहाँ मातम सा लगता है।

बस रोम रोम आज यही गुजारिश कर रहा है हमसे।
ऋण चुका लो अपना,वरना समय निकल जाएगा कल तुमसे।


माँ पापा जी,आप हमारे साथ आकर क्यों नहीं रहते हैं।


आज भले ही हम आसमान की ऊँचाईयों को छू रहे हैं  यहाँ।

हर सुख,हर सुविधा आज हमारे आशियाने में  है।

पर दिल मे असंतुष्टी  भरा,और मन बहूत बेचैन है।

क्योंकि हमारी खुशियों के पल में,आप हमारे साथ नहीं हो।

माँ बाबू जी,आपके साथ के बिना,हर पल यहाँ निरर्थक है।

माँ पापा जी,आप हमारे साथ आकर क्यों नहीं रहते हैं।

9 Feb 2017

खैरीयत

हर साँस के साथ,बस एक ही आवाज दिल में गुंजता है।
तुम्हारी खैरीयत रहे,मैं तो यहाँ जिंदा हूँ।
आज भी हर हर सुबह,तुम्हारी खैरीयत के लिए दुआ करता हूँ।
हमारा दिन भले खराब जाए, पर तुम्हारी झोली में केवल खुशियों की सौगात आए।
मेरी जिंदगी है बहुत ही छोटी सी,
यह हमें पता है।
पर जिंदगी के हर पन्ने को तेरे नाम से लिखा है।

8 Feb 2017

दिल है बेचैन

दिल है बेचैन,
मेरे रस्ते पर नैन
आज दिखी नहीं मेरी जान
मैं हो गया हूँ परेशान
कहाँ गया मेरा चाँद
मेरा सूना है,दिल का आसमान

6 Feb 2017

मेरे सपनो को कर चकनाचूर


मेरे सपनो को कर चकनाचूर,
हो के मगरुर,
जिन्दगी से हो गयी हो दूर।
मैने क्या गुनाह किया।

पहली बार जब मिला तुमसे हूर,
तुमने इश्क करने को,कर दिया था मजबूर
आज जब छाया है दिल पे सुरूर
कहाँ तुम चले गये।

वह दिन है आज भी मुझे याद
जब तुम आई थी मेरे पास
किया था मुझे तुमने जब प्रपोज़
उड़ गये थे मेरे होश।
क्यों नहीं ,संभाला था दिल को तब
यह मुझे हो रहा है आज अफसोस

गली गली भटक रहा हूँ मैं आज
बस छोटी सी,दिल में लिए हुए आस
कि मेरी महबूबा,कब होगी मेरे पास
बस यही सवाल कर रहा है मन हर बार
पर मेरे दिल को है ये विश्वास
कि मेरी जिन्दगी की खत्म होगी अब तलाश।



5 Feb 2017

हमारा प्यार(2)

कोलेज के आखिरी दिनों में,मैं और जस्सी बहुत ज्यादा दुखी रहने लगे थे।क्योंकि हमारे बिछुड़ने का समय नजदीक आ गया था।मैं और जस्सी दोनो मिलकर,एक दूसरे से वादा किये,कि हम इसी कोलेज में आज से दो साल के बाद दुबारा मिलेंगे और शादी करेंगे।ये दो साल हमारे लिए  किसी अग्निपथ से कम नहीं है।इस लिए इस पल का हम सदुपयोग करते हुए,एक अच्छी जोब हासिल करने की कोशिश करेंगे।और दो साल में हम कभी भी एक दूसरे से मिलने की कोशिश नहीं करेंगे।


       इसलिए हमारे पास केवल दो साल है,कुछ जोरदार मेहनत करने के लिए और अपने पैरों परों खड़ा होने के लिए।ये सोच लेकर हम एक दूसरे से अलग हुए।


         और आज दो साल हो गया है,हम दोनो को बिछड़े हुए।मैं बहुत लालाईत था जस्सी से मिलने को।

          मैं कोलेज का कैन्टीन सुबह नौ बजे ही पहुँच गया और जस्सी के आने का वैट करने लगा।तभी कोई पिछे से आकर मेरे आँखो पर हाथ रख दिया।मैें वो स्पर्श को पहचान गया,और बोल उठा,आई लव यू,जस्सी।

       जस्सी ने रिप्लाइ में,आई लव यू टू कहा।और हम एक दूसरे से गले लग गयें।

वो पल लाजवाब था।

      जस्सी ने पूछा,तुम अभी क्या करते हो?मैने कहा,मैं एक बैंकर हूँ।इलाहाबाद बैंक में ओफिसर हूँ,और तुम क्या कर रही हो जस्सी?जस्सी ने जवाब दियाः मैं आई ए एस ओफिसर हूँ।

     हमने एक दूसरे को बधाई दिया।

मैं अपने पापा मम्मी को साथ लेकर चंडीगड़ गया था।और उन्हें होटल में छोड़कर कैन्टीन पहुँचा था।

      फिर मैने पूछा,शादी कब करनी है।

जस्सी ने कहा,शादी तो आज ही करने की सोची थी,पर लगता है,तुम अपने पापा मम्मी को लेकर नहीं आए हो।

मैने कहा,तुम्हारे पापा मम्मी कहाँ हैं,उसने हाथों से ईशारा करते हुए,वहाँ बैठे हुए  बुजुर्ग दाम्पत्तियों को अपना माँ बाप बताया।

मैं उठा,और उनके चरण छूकर,उनसे आशिर्विद लिया।और फिर अपने माँ बाबूजी को उसी कैन्टीन में बुला लिया।

और फिर हम दोनो ने अपनी दास्तां उनसे बयान किया।वो सभी हमारी कहानी सुन भावुक हो उठे,और हमें आशिर्वाद दिया,:तुम  दोनो का बंधन कभी भी टूटे नहीं।और फिर हमने कोर्ट में जाकर,कोर्ट मैरीज़ किया।और अपने माँ बाबू जी का आशिर्वाद लिया।

2 Feb 2017

हमारा प्यार।

  ये उन दिनों की बात है,जब मैं कोलेज में दाखिला लिया था।मेरा कोलेज चंडीगड़ में था।मेरे शहर से लगभग 1500 की. मी. दूर।स्कूल की पावंदी से कोलेज की आजादी वाले माहौल में,मैने कदम रखा था।नया जगह,नये लोग,नया जोश और नया टशन।


      मैंने कोलेज में वाणिज्य विभाग में दाखिला लिया।इस विभाग में लड़कीयां ज्यादा थी।मैं बहुत ही ज्यादा शर्मिला था।लड़कीयों से नजर मिलाने का दूर,उनके पास आने पर भी घबरा जाया करता था।


मेरा ये रिकार्ड रहा है,कि पूरे स्कूल लाईफ में,एक भी लड़की से बात नहीं कर पाया था।


फिर धीरे धीरे कोलेज लाईफ में आगे बढ़ा।उन दिनों कुछ लड़के और लड़कीयों का ग्रुप हुआ करता था,जो हमेशा सभी लोगों का मजाक बनाया करता था।वैसे ही मुझसे भी कभी कभी वो लोग मजाक किया करते थे।उन्हीं लोगों में एक लड़की थी जस्सी जो मुझसे मजाक करने पर उन सभी से गुस्सा हो जाया करती थी।


       एक दिन की बात है,मैं बहुत उदास था।मेरे दादा जी की तबीयत बहुत खराब थी,मेरे पास फोन आया था।मैं अकेले क्लास में उदास बैठा था।तभी जस्सी पीछे वाली सीट पर धीरे से आकर बैठ गयी।


        फिर धीरे से वो बोली,सुशी,क्या हो गया?आज बहुत दुखी लग रहे हो?क्या बात है?


एक पल के लिए तो मैं घबरा ही गया।पिछे मुड़ के देखता हूँ,तो जस्सी मेरे पिछे वाले सीट पर बैठी हुई है।


मैं लड़खड़ाते हुए टूटे शब्दो में कहा,जस्सी त त तुम यहाँ कब आई?


        जस्सी ने कहा,जब तुम यहाँ बैठ कर आँखो से आँसू बहा रहे थे,तब आई।दर असल मेरा पेन क्लास में छूट गया था,वही लेने आई थी,तो पाया,तुम आँखो से आँसू बहा रहे हो।


         क्या हो गया सुशी? क्या बात है?


उसके पूछने के तरीके ने,मेरे दिल में जगह बना लिया।


     मेरे मुंह से सारी सच्चाई निकल पड़ी।मेरी सच्चाई सुन कर जस्सी की आँखे भी भर आई,और बोल पड़ी,मैं भी अपने दादा जी से बहुत प्यार करती हूँ।


     शाम के पाँच बज चले थे।जस्सी ने कहा,चलो मेक्डी चलते हैं,आज शाम का ट्रीट मेरे तरफ से।


      पहली बार किसी लड़की से बात करने के बाद,मेरे अंदर का कोन्फिडेंस जागा था,और डर भागा था।कि लड़की लड़की होती है,ना कि चूड़ैल।

       उसके अपनापन देखकर,मेरा दिल और मन उसके बातों में हामी भरने लगा।
मैं मिडिल क्लास फैमिली से था।मैने कोलेज के बगल में ही,एक पी जी ले लिया था।और बाईक अभी तक खरीदी ही नहीं थी और ना ही चलाई थी।
जस्सी ने मुझे अपने स्कूटी पर बैठने के लिए आमंत्रित किया।और मैं उसके पिछे जा बैठा।पता नहीं,आज मेरा शर्म कहाँ चला गया था।

फिर उस शाम मैं और जस्सी मेक्डी पहुँचे।

जस्सी ने पूछा,क्या खाओगे सुशी?

मेरे मुह से निकल गया,जो तुम खाओगी,वही मैं भी खाऊँगा।

जस्सी ने ओर्डर किया,दो वेज बर्गर,एक फ्रेंच फ्राईज़ बड़ा वाला।

मेरा दिल जो है,पूरा लट्टू हो गया था जस्सी पर।

फिर बातो बातो में पता चला,कि वह रहने वाली दिल्ली की है।और फिर उसने झट से ओफर दे दिया,दिल्ली आने के लिये।और बोली,तुम आओ,फिर मैं तुम्हें पूरी दिल्ली घूमाऊँगी।फिर पूछ पड़ी,तुम आओगे ना।

मैं बोला,जस्सी तुम बुलाओ और मैं ना आऊँ,ऐसा कभी हो भी सकता है क्या?

पता नहीं,मुझे क्या हो गया था?बहुत ही ज्यादा खुश था,मानो सातवाँ आसमान पे पहुँच गया हूँ।दिल झूम रहा था, तो मन नाच रहा था।ऐसा लग रहा था,कि जस्सी बस बोली जाऐ,और मैं उसे सुनता रहूँ।जस्सी की वाणि में कोयल की मधुरता झलक रही थी।शायद यही था,प्यार।

पर मैं यह कैसे जानू,कि वह भी मुझसे प्यार करती है।पर जो भी हो,उस शाम ने मेरी जिन्दगी बदल कर रख दी थी।

मेक्डी में हमारी पहचान और भी गहरी हो गयी थी।हम दोनो इस कदर एक दूसरे की बातो में खो गये थे,कि हमें समय का पता ही नहीं चला।फिर मेक्डी बोय ने आकर हमसे आग्रह किया,कि आप लोग निकलिये,रेस्टुरेंट बंद होने वाला है,रात के इग्यारह बज गये हैं।
 हम एक दूसरे को देखकर हँसने लगे।मैने जस्सी से बोला,चलो मैं तुम्हारे पी.जी. तक साथ चलता हूँ,और फिर मैं अपना पी.जी. वहाँ से चला जाऊँगा।
    पर मेरी बात जस्सी नहीं मानी,और मुझे मेरे पी.जी. तक छोड़ने की बात कहने लगी।
मेरे लाख समझाने के बाद भी,कि रात ज्यादा हो गयी है,तुम्हें छोड़कर ,मैं आगे निकल जाऊँगा,पर उसके जिद्ध के आगे मुझे झुकना पड़ा।
फिर मैने उससे उसका मोबाईल नंबर माँगा,फिर हम दोनो ने एक दूसरे से अपना अपना मोबाईल नंबर शेयर किए।
      फिर से मैं उसके पिछे,स्कूटी पर जाकर बैठ गया।रास्ते में जस्सी ने पूछा,क्या तुम्हें बाईक चलानी नहीं आती है।
मैने कहा नहीं आती है।एक बार मैने कोशिश किया था,पर बहुत जोर का धक्का खाया था।फिर क्या?दो हफ्ते तक बेड से हिल नहीं पाया था,उसके बाद कभी हिम्मत जुटा नहीं पाया।
 
 जस्सी ने फिर मजा लेते हुए कहा,क्या सारी जिंदगी कुँवारे ही रहना चाहते हो?
मैने कहा,मतलब?
जस्सी ने कहा,मतलब ये,कि ये कि मैं कभी नहीं चाहूँगी,मेरी शादी किसी ऐसे लड़के से हो,जिसे बाईक चलानी भी नहीं आती हो।
मैं एक सेकेन्ड के लिए हरबरा गया।फिर जस्सी ने बात संभालते हुए कहा,कि मेरा कहने का मतलब ये है,कि क्यों ना कल से तुम्हें मैं स्कूटी चलानी सिखा दूँ।
कल से रोज सुवह सात बजे,मैं तुम्हारे पी.जी. पर आऊँगी।और तुम्हें बाईक चलाना सिखाऊँगी।
फिर हर सुबह से शाम तक हम ज्यादातर समय साथ में बिताने लगे।कुछ दिनो में मुझे स्कूटी चलाना भी आ गया।
फिर क्या?दिन बदला,समय बदला। हमारा बंधन और भी मजबूत हो गया।वेलेन्टाईन डे आया,और मैं लाल गुलाब लेकर कोलेज पहुँचा।और सभी लोगों के सामने,मैं उसे प्रपोज़ करने के लिए मैं आगे बढ़ा ही था,कि जस्सी ने अपने पैर पर झुक कर मुझे प्रपोज़ कर दिया।
मैं खुशी से पागल हो गया।और मैं उसे रेस्टूरेंट में ट्रीट देने के लिए मेक्डी लेकर गया।जहाँ हमने जीवन भर एक दूसरे का साथ देने का वादा किया।

1 Feb 2017

ललक

लहरों का लहरों से मिलने की तड़प
गगन चुम्बी आसमान का,समुन्द्र को चुमने की ललक
फतिंगो का अग्णि में समाने की हठ
यह क्या है,यह एक जुनून है,
अपने प्यार को हासिल करने का।
आओ हम भी वही जुनून
अपने प्यार को हासिल करने के लिए
अपने दिल में जगा लें।

31 Jan 2017

जिन्दगी की नब्ज पकड़कर चलना मुझे आ गया।

जिन्दगी की नब्ज पकड़कर चलना मुझे आ गया।
मुसीबत भरे लम्हों को झेलना मुझे आ गया।
जीवन के हर परीक्षा को हल करना मुझे आ गया।
दुख के हर लम्हों में,खुशियों को समेटना आ गया।
जिन्दगी बहुत छोटी सी है
उस अनमोल पल को जीना गया।

जिन्दगी जीने के लिए क्या जरूरी है।

       हम जीते हैं,हम सभी अपने संस्कार  और उसूल के साथ जीते हैं।जिस दिन हमारे संस्कार और उसूल दम टोड़ते हैं,उसी दिन हम संसार में जिंदा रहते हुए भी मर चुके होते हैं।

     बहुत लोग धन दौलत,मान सम्मान पाने के लिए,अपना संस्कार और अपने उसूलों की आहुति देने से पीछे नहीं हटते हैं।ऐसे लोग खुद तो भ्रष्ट होते हैं,साथ में सभी लोगों को लाना चाहता हैं।उनके जीवन में तो अंधकार होता ही है,और वो दूसरों के जीवन में अंधकार करने से खुद को नहीं रोकते हैं।
        बचपन में माँ बाप संस्कार सीखाते हैं,और स्कूल में शिक्षक।और फिर जवानी में बचपन के ग्रहण किए गये संस्कार को भूल जाते हैं।पैसे की चकाचौंध में,सारा संस्कार दिल और दीमाग से निकल कर चला जाता है गुईयां के खेत में।
        फिर संस्कार नहीं,लोभ और लालच दीमाग में घर बना लेता है।
        ये संस्कार जो हो,सीखाया नहीं जाता है।यह तो आपके पूर्व जन्मों में किये गये घोर तप और अच्छे कर्म का फल है।अगर आप पूर्व जन्म में अच्छे कर्म किए हैं,तो इस जन्म में आप अच्छे संस्कार लेकर पैदा होंगे।
        जीते तो सभी जीव हैं,पर उन सभी में मनुष्य ही क्यों क्ष्रेष्ठ है।क्योंकि उसके पास सोचने और समझने की क्षमता है।आप और हम देखते हैं कि कोई भी गलत काम करने के पहले,हमारे अंदर से एक आवाज जरुर आती है।'यह क्या करने जा रहा हूँ मैं।यह गलत काम है।कहीं कोई देख तो नहीं रहा।'
      हाँ!हमारा परमात्मा हमेशा ही हमें देखता रहता है।उससे कुछ भी छिपाना संभव नहीं है।
      फिर सभी कर्मों का फल मरने के उपरांत स्वर्ग लोक और नर्क लोक में दी जाती है।
      संस्कार अगर अच्छे हैं हमारे,तो हमसे बुरे कर्म करते बनेगे ही नहीं।और हम सदा सभी का भला ही चाहेंगे,भले ही वह हमारा दुश्मन ही क्यों ना हो।
       संसार की सभी वस्तुएँ उधार ली जा सकती है,पर संस्कार नहीं।

       
           

29 Jan 2017

मैं अपनी जिम्मेवारी को कैसे निभा पाऊँगा।

 मैं अपनी जिम्मेवारी को कैसे निभा पाऊँगा।


अपनी ही नौकरी के बोझ तले,


कब तक साँस ले पाऊँगा।


घर पर जब पहुँचता हूँ,


तो दिल में ख्याल बस यही आता है,


कि अपने परिजनों के लिए बहुत कुछ करना है।


माँ के लिए गले का हार लेना है।
बहन की शादी के लिए अच्छा लड़का देखना है।
पापा के लिए नयी गाड़ी लेनी है।

पर जब दफ्तर में पहुँचता हूँ,


तो पाता हूँ,कि हर कोई बस मेरे कंधे पर बंधूक रख कर गोली चलाना चाहते है।
ऐसे में कब तक खुद को बचा पाऊँगा?ये बहुत बड़ा सवाल है।
मैं अपनी जिम्मेवारी को कैसे निभा पाऊँगा।




20 Jan 2017

मन बावरे संभल जा।

मन  बावरे संभल जा।
                   क्यों भटक रहा है इधर उधर।
ईश्वर की भक्ति को छोड़,
                    क्यों फँस रहा है बंधन में।



17 Jan 2017

पप्पु पास हो गया।


क्या कर रहे हो पप्पु,थम के जरा साँस तो ले लो।


क्या कर रहे हो पप्पु,


                          थम के जरा साँस तो ले लो।



भागम भाग क्यों मचा रखी है,


                          क्या धुंढ रहे हो पप्पु।




कभी इधर,तो कभी उधर,


                           क्यों बंदर जैसा फाँद रहे हो।



एक जगह स्थिर होकर,


                            क्यों नहीं तू सोच रहा है पप्पु।




इतनी मेहनत,इतना जतन ,


                             तू किस लिए,किये जा रहा है पप्पु।



मालूम है ना,कल फिर से फैल हो जाएगा तू।



                             फिर इतना दिमाग क्यों भिड़ा रहा है ।




पप्पु पास हो जाएगा,


                              क्या ये कभी सच हो पाएगा।



सारा जग हैरान है कि पप्पु



                              पास कब हो पाएगा?😢





15 Jan 2017

मेरा दिल है दिवाना☺

मेरा दिल है दिवाना,जो हर खुबसूरत चेहरे को देख धड़कता है।



कभी चहकता है,तो कभी बहकता है।



कभी शायरी के बहाने,तो कभी कविता के बहाने,जुबान भी हमारा फिसलता है।



दिल भी हमारा बड़ा नादान है,जो हर कली को देख हमेशा महकता है।


तारे भी चाँद की खुबसूरती देखकर टिमटिमाते हैं।


कभी बस में किसी हसीना से मुलाकात हो जाया  करता है।



तो कभी चलते चलते राह में किसी हसीना से मुलाकात हो जाया करता है।



और फिर क्या दिल दिल धक धक,



धक धक दिल दिल,तब से अब तक,अब से कब तक।



Meri khamoshi mein ek sandesh hai.

Shayari मेरी खामोशी में एक संदेश है। kavitadilse.top द्वारा आप सभी पाठकों को समर्पित है। मेरी खामोशी देख तुम्हें तो आज बड़ा ही सुकून...