8 Dec 2016

क्या हम सही में पुरूषों कहलाने लायक हैं?

Shayari

क्या हम सही में पुरूषों कहलाने लायक हैं?

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आज फिर से,हमने एक माँ,बहन,बिटीया गँवाई है।
पृथ्वी लोक से एक और ममता ने,हमसे अलविदा लिया है।
हम सभी पुरूषों ने क्या,यही संस्कार पाई है।
क्या हमसभी सही में,पुरूष कहलाने लायक हैं।
घर के बाहर की स्त्रियों पर,हमने नजर गड़ाई है।
अपने घर के स्त्रियों पर भी,अत्याचार ढाई है।
हम सभी पुरूषों ने क्या,यही संस्कार पाई है।
क्या हमसभी सही में,पुरूष कहलाने लायक हैं
आज कल के पुरूषों की सोच में,वासना समाई है।
जहाँ भी देखा स्त्रियों को,बस सम्भोग की इच्छा आई है।
हम सभी पुरूषों ने क्या,यही संस्कार पाई है।
क्या हमसभी सही में,पुरूष कहलाने लायक हैं।

सभी माँ बहन और बिटीया को,बराबर का सम्मान मिले।
हम पुरूष तभी हैं,जब तक कि हम सभी स्त्रियों को उनका हक दें।किसी भी स्त्री के साथ गलत होने ना दे।
Written by sushil kumar
Shayari

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