24 Dec 2016

चोपटानंद

Shayari

चोपटानंद

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हमारी जिन्दगी चोपटानंद हो गई है।
सच बतादूँ मेरे भाई।
हर कोई आकर खरी खोटी सुनाकर,
और ज़रा चुस्की लेकर निकल जाता है।
बाहर वाले तो मजा ले ही रहे हैं
घरवाले भी नहीं चुक रहे हैं
चुस्की लेने से हमारी।
हमारी जिन्दगी चोपटानंद हो गई है।
सच बतादूँ मेरे भाई।
अब कल की ही बात देखो,
जब रात्री में साढ़े नो बजे घर पहुँचा था मेरे भाई।
और प्यारी सी बीवी ने,तभी मजा ले ली हमारी।
बैंक में ही घर बना लिजिए ना!बैंक से घर आते ही क्यों हैं।
इन तीखे बाणों से,दिल के टुकड़े टुकड़े हो गए मेरे भाई।
सच कहता हूँ दोस्तों,मुझे लगा,मैं अगले ही पल में रो दूँ।
बैंक में इतना तनाव है,और वो कहती हैः
बैंक में ही घर बना लूँ।
फिर दिल को संभाला,और उनसे प्यार से पूछ डालाः
डार्लिंग,तुम भी चलोगी ना!साथ में रहने को।
हमारी जिन्दगी चोपटानंद हो गई है।
सच बतादूँ मेरे भाई।
बैंक में कस्टमर भी बस मौके की तलाश में रहते हैं भाई।
कहते हैं,नोटबंदी का सबसे ज्यादा फायदा हुआ है आप सभी बैंक वालो को।
नोट के लिए लाईन में खड़े होने का कष्ट तो नहीं हुआ।
मेरा मन भी एक पल में छनछना सा गया।
और मुँह से निकल पड़ा,भाई साहब आप इधर आओ और बैंक को संभालो।
और मैं  जाकर लाईन में लग जाता हूँ आपके लिए।
कस्टमर भी सकपका सा गया,कहने लगाः
साहब,हम तो आपसे मजाक कर रहे थे।
नोटबंदी की मार देखा जाए तो,
सबसे ज्यादा आप लोग ही झेल रहे हैं।
सारी भीड़ को नियंत्रित करके,
सभी का पेट जो भर रहे हैं।
हमारी जिन्दगी चोपटानंद हो गई है।
सच बतादूँ मेरे भाई।


Written by sushil kumar
Shayari

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