17 Dec 2016

पप्पू बना दिया।

Shayari

पप्पू बना दिया।

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हम सभी प्यासे के प्यासे ही रह गए।
मंजिल की तलाश में,हम सभी आगे बढ़ चले।
मंजिल तो नहीं मिली,जो कि किस्मत ने दगा दी हमें।
साला फिर से हमे हमारे किस्मत ने पप्पू बना दिया।
हाथों में वाईलिन की जगह,झुनझुन्ना थमा दिया।

हम सभी प्यासे के प्यासे ही रह गए।
कलक्टर बनने की शौक ने,हाथों में किताबों को पकड़ा दिया।
डिग्रियों की फौज को,हमने घर पर सजा दिया।
साला फिर से हमें हमारी किस्मत ने पप्पू बना दिया।
कलक्टर तो नहीं,लेकिन चपरासी बना दिया।

हम सभी प्यासे के प्यासे ही रह गए।
चपरासी की नौकरी ने,चलो शादी करवा दिया।
ऊमर भी ढल रही थी,चलो जीवन संगीनी से मिलवा दिया।
साला फिर से हमें हमारी किस्मत ने पप्पू बना दिया।
खोजते थे माधुरी दिक्षीत,कहाँ टुन टुन से मिलवा दिया।


Written by sushil kumar
Shayari


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