8 Oct 2016

राम और रावण ram aur ravan

Kahani


Soch


हर इंसान में राम और रावण का वास होता है।ये इंसान का फैसला होता है,कि वह राम बनना चाहता है या रावण।ईश्वर की दी हुई जीवन को,अगर हम रावण बनकर,दूसरों को तकलीफ देकर जीए,तो ऐसी व्यर्थ की जिंदगी जीने का क्या मतलब।ईश्वर की अनमोल जिंदगी को हमें ऐसे जीने चाहिए, जिससे ईश्वर हमसे खुश रहे।हमे उससे प्राप्त अनमोल उपहार को व्यर्थ मे नहीं गँवाने हैं।
       हम मनुष्यों को पिता परमेश्वर,हमारे मालिक ने बनाया है,इस हिसाब से हम सभी भाई बहने हुये।फिर ये कैसी होड़ लगी है,हम सभी में,कि हमसे सर्वष्रेस्ठ कोई नहीं है।
       जब ईश्वर ने सृष्टि की संरचना की और मनुष्य को बनाया,तो हम सभी को एक समान शरीर का धाँचा दिया, एक समान सभी को बल,बुद्धि दिया।और फिर मनुष्यों ने जैसे जैसे कर्म किए, वैसे वैसे ही फल भोग।और शरीर की संरचना मे भी,उसी भाँति से बदलाव आएँ।
        मनुष्य ने अच्छे कर्म किए, तो उसके शरीर की संरचना मे और भी निखार आया,वही मनुष्य ने जहाँ बुरे कर्म किए,उसके शरीर की संरचना वैसी ही भद्धी होती चली गई।
         अगर आप ताकतवर हैं तो कमजोरों की मदद करो।ये नहीं की धर्म जाति, वेशभूषा, काले गोरे, अमीर गरीब के हिसाब से मनुष्य को मनुष्य से ही बाँट दे।ये भेदभाव मनुष्य के दिमाग की ऊपज है।
         मनुष्य हमेशा सच्चाई से भागता है और झूठ को सत्य मानता है।अगर आपको यह जीवन मिला है, इसका मतलब यह नहीं कि ये आपकी धरोहर हो गई और आप इसके मालिक हो गये ।एक दिन आएगा, जब आपकी ये धरोहर आपसे छीन ली जाएगी।और आपको आपके कर्म के हिसाब से,आपकी आगे की यात्रा तय की जाएगी।
          इस जीवन के रहस्य को समझना बहुत जरूरी है।अपने जीवन के हर पल को हमें खुल के जीना चाहिए।हमें जहाँ तक चाहिए, हमें बस यही कोशिश करना चाहिए, कि हमसे किसी का दिल ना दुखे।जहाँ तक हो हमें सभी को खुश रखने की कोशिश करनी चाहिए।ईश्वर की दी हुई जीवन को हमें राम बनकर निभाने की कोशिश करना चाहिए, ना कि रावण बनकर सबका सर्वनाश करना चाहिए।
        एक छोटी सी कहानी आगे लिख रहा हूँ।आनंद बहुत गरीब परिवार में जन्मा था।वह दिखने मे सुन्दर और सुशील था। बचपन से बहुत ही शर्मिला और भावुक था।किसी भी अंजान व्यक्ति से मिलने पर बहुत घबराता था।अपने पापा मम्मी बहन और खासकर अपने नाना जी से उसे विशेष लगाव था।
        माँ और बाबू जी हमेशा उसे रामायण सुनाते थे।और इसी वजह से राम जी की छाप उसके दिल पे गहराई से पड़ी थी।
        वह एक सच्चाई से बिलकुल अंजान था।वह सच्चाई थी मृत्यु।जिसने भी इस दुनिया मे जन्म लिया है, उसे एक ना एक दिन मरना भी है।और वह साल,दिन और समय पहले से ही निर्धारित है।
         एक समय घर पर नाना जी का आगमन हुआ।इस बार उनके गाँव लौटते वक्त,पता नही  क्यों, उसके आँसू थम नहीं रहे थे,और वह रोया ही चला जी रहा था।शायद उसे आभास हो गया था,ये उन दोनों की आखिरी मुलाकात है।
         कुछ दिनों बाद ही नाना की मृत्यु की खबर आती है, फिर क्या आनंद रो रो कर सारा घर सर पर उठा लेता है।उसे बहुत ज्यादा आघात पहुँचता है।माँ बाबू जी उसे बहुत समझाते हैं।पर उसके आँख से अक्ष्रुओं की धारा रुकी नहीं।
           उसने सोचा कि कोई जब मरता है, तो कहाँ गायब हो जाता है।ऐसे ही अगर मेरे पापा मम्मी बहन सभी लोग गायब हो जाएंगे,फिर मैं तो मर जाउँगा,इनके बिना मैं कैसे रह पाउँगा।इन सभी को मेरी भी उमर लग जाए।
            तभी से हर दिन और रात वह अपने ईश्वर से यही प्रार्थना करता है, कि जो भी कष्ट हो उसे हो,उसके पापा मम्मी बहन को किसी प्रकार का कष्ट ना हो।
           बचपन से ही वह सभी को लेकर चलने वाला इंसान है वह।कोई भी कार्यक्रम हो स्कूल मे, कुछ भी खाने को मिले उसे, वह अपने मम्मी पापा और बहन के लिए ले जाना नहीं भुलता है।
            आनंद अपने स्कूल ब्लू बेल्स में हमेशा प्रथम या द्वितीय स्थान पर रहता है।और हमेशा घर पर पुरस्कार लेकर घर पर आता है।उसे स्कूल का प्रधानाध्यापक भी बहुत मानते हैं।
             ब्लू बेल्स स्कूल के बोर्ड का रिजल्ट इस साल अच्छा नहीं हुआ,तो उसके पापा मम्मी ने स्कूल बदलने का निर्णय ले लिया।आनंद को पहले पहले अच्छा नहीं लगा।लगता भी कैसे उसके यहाँ पर इतने सारे अच्छे दोस्त जो बन गए हैं।
            वह दिन भी आ गया, जब उसे एडमिशन टेस्ट देने के लिए, सन्त फ्रांसिस स्कूल जाना था।ब्लू बेल्स के अच्छे रिजल्ट कार्ड लेकर पापा मम्मी के साथ स्कूल चला गया।लेकिन जाने से पहले वह हर दिन की तरह ईश्वर से बस यही प्रार्थना करता है,कि उसके मम्मी पापा को किसी प्रकार का दुख तकलीफ ना हो।उनके सारे कष्ट उसे मिल जाएं।आज वह एडमिशन टेस्ट देने जा रहा है।उसके पापा मम्मी ने जैसा उसके लिए सोचा है, वैसा ही हो।क्योंकि हर माँ बाप अपने बच्चे के लिए, हमेशा अच्छा ही सोचते हैं।
             वहाँ उसका टेस्ट हुआ, और वो फैल हो गया।पर किस्मत को कुछ और ही मंजूर था।उसके
 पापा मम्मी के निवेदन और उसका पुराना रिकॉर्ड देखकर,स्कूल के प्रधान अध्यापक ने उसका एडमिशन स्कूल मे ले लिया गया।
               वह कुछ दुखी था,कि उसके पुराने दोस्त छुटने वाले हैं, पर उसको इस बात की खुशी भी थी कि उसके माँ बाबू जी की सोच साकार हो गई।और उनकी खुशी देखकर आनंद भी काफी खुश है।
                    अब आनंद नया स्कूल जाना शुरू करता है। नया नया स्कूल और नए नए लोग।आनंद इन सभी मे अपने को बहुत ही अकेला महसूस करता था।पर वो था ही इतना प्यारा कि सभी लोग उससे आकर्षित हो कर उसकी ओर खींचे आते थे।जल्दी ही उसके बहुत सारे दोस्त बन गये।और सभी शिक्षकों का भी वह प्यारा बन गया।
                        आनंद के दिल मे वह पल घर कर गया था,जब उसके मम्मी पापा ने कितनी विनती करने के बाद उसका एडमिशन स्कूल मे
कराया था।उसे अपने मम्मी पापा को सही साबित करने के लिए,बहुत मेहनत करना शुरू किया।और बहुत जल्द ही सभी को पिछाड़ते हुए, अव्वल स्थान पर पहुँच गया।
                        उसने अपने माँ बाबू जी को गरीबी मे पेट काटते देखा था।खुद आधे पेट खाएंगे पर उसे भर पेट खिलाएंगे।वो झगड़ता है, लड़ता है कि उसके प्लेट से कुछ खाना निकाल ले,वह इतना खाना नहीं खा पाएगा, पर माँ बाबू जी कहाँ सुनते हैं, ऊपर से माँ का कसम कि भर पेट खाना खाया कर,वरना मरा हुआ मुख देखेगा मेरा।
                         आनंद अपने माँ बाबू जी का निःस्वार्थ प्रेम देखकर भाव भिहोर हो जाया करता है,और वो अपनी पढाई मे जी जान से लग जाता है।आनंद को मालूम है कि उसके पास केवल एक ही शस्त्र है, जिससे वह अपने परिवार की गरीबी हटा सकता है, और वह है पढाई।
                           आनंद के पिता अस्पताल मे कम्पाउंडर थे।तन्ख्वा कम मिलती थी।बाहरी आमदनी के अवसर खूब थे, पर कभी भी उन्होंने गलत तरीके की कमाई मे ध्यान नहीं दिया।और आनंद को भी बाल अवस्था से ही अच्छे संस्कार दिए।हर स्त्री को माँ और बहन के सामान देखना और सम्मान देना।कभी किसी का ना बुरा सोचना, और ना किसी का बुरा करना ।सभी को साथ लेकर चलना।
                                आनंद का रोल माडल उसके पापा और मम्मी थे।वह पूरे दिल से उनकी बातों को मानता था।
                                  धीरे धीरे वह बड़ा हुआ।स्कूल के प्रधानाध्यापक,शिक्षकों और विद्यार्थियों मे प्यारा हो गया।आनंद को किताबों से इतना प्यार हो गया था,कि जब भी उसे फुरसत मिलती, वह पुस्तकालय मे जाकर बैठ जाया करता।आनंद को कभी धुंधने की बारी आती, तो सभी को मालूम था,कि आनंद महाशय स्कूल के पुस्तकालय मे गहन अध्ययन मे लीन होंगे।स्कूल के बोर्ड मे आनंद अव्वल अंक से पास हुआ।10+2 मे भी अच्छे स्कूल मे एडमिशन मिल गया।वहाँ का पढाई बहुत महँगा था,लेकिन आनंद के बोर्ड मे अच्छे रिजल्ट आने के कारण,उसे अच्छी स्कोलरशिप मिल गई।
                                  उस समय की एक घटना ने उसे काफी प्रोत्साहित किया।जैसे कि किसी महेश नाम के लड़के ने उस साल उसी स्कूल से पूरे भारत मे टाप किया था,और भारत सरकार ने उसके आगे की पढ़ाई की जिम्मेदारी अपने कँधे पर ले ली।
                                   आनंद को उसकी मंजिल पाने का जरिया मिल गया।अब वो पूरे जी जान से अपने पढ़ाई मे जुट गया।
                                   अब उसका मकसद भारत के सर्वक्ष्रेष्ठ इन्जिनीयरींग संस्थान आई आई टी से शिक्षा ग्रहण करने का था।10+2 के फाइनल का रिजल्ट आया।उसके सपने मे चार चाँद लग गए।उसने पूरे भारत मे टाप किया।भारत सरकार ने आनंद के आगे की पढ़ाई का खर्चा उठाने का फैसला लिया।
                                       आनंद आज बहुत खुश है, और आज आनंद से भी ज्यादा खुश उसके पापा और मम्मी हैं।
                                       आनंद अब आई आई टी की परीक्षा के तैयारी मे लग गया।उसे मालूम था, कि उसकी जंग अभी खत्म नहीं हुई है।सच्ची तैयारी और पुरी लगन के बदौलत उसने आई आई टी की परीक्षा भी पास कर लिया।
                                         आई आई टी से पास होने के बाद उसने एक मल्टी नेशनल कम्पनी मे जोब पाली।ये दिन आनंद और उसके परिवार के लिए जन्नत पाने वाली खुशी से कम नहीं है।
                                          आनंद को बचपन से ही माँ और पिता के द्वारा अच्छे संस्कार दिए गए।ये तो हम पाते हैं,कि आज कल के माँ और पिता अपने बच्चों को अच्छे संस्कार देते हैं, पर जब खुद पे जब उनके बारी आती है, वे उसे पालन करने से भागते हैं।
                                        आनंद के केस मे ऐसा नहीं था।उसके माँ बाबू जी जो उसे संस्कार दिए थे, उसका वह पालन भी करते थे।
                                          आनंद के माँ बाबू जी ने हमेशा से यही संस्कार दिए हैं, कि सदा जरूरतमंदो की मदद करना चाहिए।उन्होंने किसी भी जरूरतमंदो को अपने घर से खाली हाथ जाने नहीं दिया।जहाँ तक हो,उनकी मदद ही किया।
                                           पर आज कल के लोगों मे ऐसे गुण बहुत कम ही दिखते हैं।बस हर कोई अपने स्वार्थ को पूरा करने के लिए एक दूसरे का खून बहाते जा रहे हैं।
                                            आनंद के माँ बाबू जी ने हमेशा से यही संस्कार दिए कि हमेशा सभी को साथ लेकर चलना चाहिए।और सभी का हमें भला देखना चाहिए।और हमेशा से उन्होंने इसका पालन भी किया।हमेशा से उन्होंने अपने माँ बाबू जी और अपने छोटे भाईयों (जो गाँव मे रहते थे)को साथ मे लेकर चले।कभी भी घर का छोटा से छोटा व बड़ा से बड़ा काम करने के पहले अपने छोटे भाईयो व अपने माँ बाबू जी से राय लेना नहीं भूलते थे।
                                             आज कल के लोग अपनी दुनिया मे ऐसे रमे हुए हैं, कि अपने माँ बाप को भूल जाते है, तो भाई को कहाँ से याद रख पाएंगे।
                                                आज कल के माँ बाप बच्चों को सीखाते हैं कि कोई भी बुरा काम नहीं करना चाहिए।चोरी नहीं करना चाहिए, सिगरेट व शराब नहीं पिनी चाहिए।तंबाकू व खैनी का से वन नहीं करना चाहिए।ड्रग्स नहीं लेना चाहिए।जुआ नहीं खेलना चाहिए।और जाने अनजाने आप ये गलत काम बच्चे के सामने करते हैं।इससे बच्चे के मन और स्वभाव पर गलत असर पड़ता है।
                                         पर आनंद के माँ बाबू जी के साथ ऐसा नहीं था।उनके परिवार मे कोई भी गलत चीज़ो का सेवन नहीं करता था।आनंद के बाबू जी का तो बता ही चुके हैं,कि उनके पास काफी अवसर थे, जिससे वे गलत तरीकों का उपयोग कर काफी पैसे कमा सकते थे, पर दादा दादी के दिए गये संस्कार ही थे, जिसने उन्हें हमेशा सही राह पर रखा।
                                           आनंद भी आम बच्चे की ही तरह था।पर बचपन मे ही माँ बाबू जी के दिए गए अच्छे संस्कार ने और निःस्वार्थ प्रेम ने आनंद को पूरी तरह से जीवन मे आने वाले हर विघ्न से लड़ने के लिए तैयार कर दिया था।और जीवन के हर मोड़ पर राम के आदर्श पर चलकर आनंद ने रावण को हराया।खुद को पहचानो.



har ensaan men raam aur raavan kaa vaas hotaa hai।ye ensaan kaa phaislaa hotaa hai,ki vah raam bannaa chaahtaa hai yaa raavan।ishvar ki di hui jivan ko,agar ham raavan banakar,dusron ko takliph dekar jia,to aisi vyarth ki jindgi jine kaa kyaa matalab।ishvar ki anmol jindgi ko hamen aise jine chaahia, jisse ishvar hamse khush rahe।hame usse praapt anmol uphaar ko vyarth me nahin gnvaane hain।

       ham manushyon ko pitaa parmeshvar,hamaare maalik ne banaayaa hai,es hisaab se ham sabhi bhaai bahne huye।phir ye kaisi hod lagi hai,ham sabhi men,ki hamse sarvashresth koi nahin hai।

       jab ishvar ne sriashti ki sanrachnaa ki aur manushy ko banaayaa,to ham sabhi ko ek samaan sharir kaa dhaanchaa diyaa, ek samaan sabhi ko bal,buddhi diyaa।aur phir manushyon ne jaise jaise karm kia, vaise vaise hi phal bhog।aur sharir ki sanrachnaa me bhi,usi bhaanti se badlaav aaan।

        manushy ne achchhe karm kia, to uske sharir ki sanrachnaa me aur bhi nikhaar aayaa,vahi manushy ne jahaan bure karm kia,uske sharir ki sanrachnaa vaisi hi bhaddhi hoti chali gayi।

         agar aap taakatavar hain to kamjoron ki madad karo।ye nahin ki dharm jaati, veshbhushaa, kaale gore, amir garib ke hisaab se manushy ko manushy se hi baant de।ye bhedbhaav manushy ke dimaag ki upaj hai।

         manushy hameshaa sachchaai se bhaagtaa hai aur jhuth ko saty maantaa hai।agar aapko yah jivan milaa hai, eskaa matalab yah nahin ki ye aapki dharohar ho gayi aur aap eske maalik ho gaye ।ek din aaagaa, jab aapki ye dharohar aapse chhin li jaaagi।aur aapko aapke karm ke hisaab se,aapki aage ki yaatraa tay ki jaaagi।

          es jivan ke rahasy ko samajhnaa bahut jaruri hai।apne jivan ke har pal ko hamen khul ke jinaa chaahia।hamen jahaan tak chaahia, hamen bas yahi koshish karnaa chaahia, ki hamse kisi kaa dil naa dukhe।jahaan tak ho hamen sabhi ko khush rakhne ki koshish karni chaahia।ishvar ki di hui jivan ko hamen raam banakar nibhaane ki koshish karnaa chaahia, naa ki raavan banakar sabkaa sarvnaash karnaa chaahia।

        ek chhoti si kahaani aage likh rahaa hun।aanand bahut garib parivaar men janmaa thaa।vah dikhne me sundar aur sushil thaa। bachapan se bahut hi sharmilaa aur bhaavuk thaa।kisi bhi anjaan vyakti se milne par bahut ghabraataa thaa।apne paapaa mammi bahan aur khaasakar apne naanaa ji se use vishesh lagaav thaa।

        maan aur baabu ji hameshaa use raamaayan sunaate the।aur esi vajah se raam ji ki chhaap uske dil pe gahraai se pdi thi।

        vah ek sachchaai se bilakul anjaan thaa।vah sachchaai thi mriatyu।jisne bhi es duniyaa me janm liyaa hai, use ek naa ek din marnaa bhi hai।aur vah saal,din aur asamay apahle se hi nirdhaarit hai।

         ek samay ghar par naanaa ji kaa aagaman huaa।es baar unke gaanv lautte vakt,pataa nahi  kyon, uske aansu tham nahin rahe the,aur vah royaa hi chalaa ji rahaa thaa।shaayad use aabhaas ho gayaa thaa,ye un donon ki aakhiri mulaakaat hai।

         kuchh dinon baad hi naanaa ki mriatyu ki khabar aati hai, phir kyaa aanand ro ro kar saaraa ghar sar par uthaa letaa hai।use bahut jyaadaa aaghaat pahunchtaa hai।maan baabu ji use bahut samjhaate hain।par uske aankh se akshruon ki dhaaraa ruki nahin।

           usne sochaa ki koi jab martaa hai, to kahaan gaayab ho jaataa hai।aise hi agar mere paapaa mammi bahan sabhi log gaayab ho jaaange,phir main to mar jaaungaa,enke binaa main kaise rah paaungaa।en sabhi ko meri bhi umar lag jaaa।

            tabhi se har din aur raat vah apne ishvar se yahi praarthnaa kartaa hai, ki jo bhi kasht ho use ho,uske paapaa mammi bahan ko kisi prkaar kaa kasht naa ho।

           bachapan se hi vah sabhi ko lekar chalne vaalaa ensaan hai vah।koi bhi kaaryakram ho skul me, kuchh bhi khaane ko mile use, vah apne mammi paapaa aur bahan ke lia le jaanaa nahin bhultaa hai।

            aanand apne skul blu bels men hameshaa pratham yaa dvitiy sthaan par rahtaa hai।aur hameshaa ghar par puraskaar lekar ghar par aataa hai।use skul kaa prdhaanaadhyaapak bhi bahut maante hain।

             blu bels skul ke bord kaa rijalt es saal achchhaa nahin huaa,to uske paapaa mammi ne skul badalne kaa nirnay le liyaa।aanand ko pahle pahle achchhaa nahin lagaa।lagtaa bhi kaise uske yahaan par etne saare achchhe dost jo ban gaye hain।

            vah din bhi aa gayaa, jab use edamishan test dene ke lia, sant phraansis skul jaanaa thaa।blu bels ke achchhe rijalt kaard lekar paapaa mammi ke saath skul chalaa gayaa।lekin jaane se pahle vah har din ki tarah ishvar se bas yahi praarthnaa kartaa hai,ki uske mammi paapaa ko kisi prkaar kaa dukh takliph naa ho।unke saare kasht use mil jaaan।aaj vah edamishan test dene jaa rahaa hai।uske paapaa mammi ne jaisaa uske lia sochaa hai, vaisaa hi ho।kyonki har maan baap apne bachche ke lia, hameshaa achchhaa hi sochte hain।

             vahaan uskaa test huaa, aur vo phail ho gayaa।par kismat ko kuchh aur hi manjur thaa।uske

 paapaa mammi ke nivedan aur uskaa puraanaa rikard dekhakar,skul ke prdhaan adhyaapak ne uskaa edamishan skul me le liyaa gayaa।

               vah kuchh dukhi thaa,ki uske puraane dost chhutne vaale hain, par usko es baat ki khushi bhi thi ki uske maan baabu ji ki soch saakaar ho gayi।aur unki khushi dekhakar aanand bhi kaaphi khush hai।

                    ab aanand nayaa skul jaanaa shuru kartaa hai। nayaa nayaa skul aur naye naye log।aanand en sabhi me apne ko bahut hi akelaa mahsus kartaa thaa।par vo thaa hi etnaa pyaaraa ki sabhi log usse aakarshit ho kar uski or khinche aate the।jaldi hi uske bahut saare dost ban gaye।aur sabhi shikshkon kaa bhi vah pyaaraa ban gayaa।

                        aanand ke dil me vah pal ghar kar gayaa thaa,jab uske mammi paapaa ne kitni vinti karne ke baad uskaa edamishan skul me

karaayaa thaa।use apne mammi paapaa ko sahi saabit karne ke lia,bahut mehanat karnaa shuru kiyaa।aur bahut jald hi sabhi ko pichhaadte hua, avval sthaan par pahunch gayaa।

                        usne apne maan baabu ji ko garibi me pet kaatte dekhaa thaa।khud aadhe pet khaaange par use bhar pet khilaaange।vo jhagdtaa hai, ldtaa hai ki uske plet se kuchh khaanaa nikaal le,vah etnaa khaanaa nahin khaa paaagaa, par maan baabu ji kahaan sunte hain, upar se maan kaa kasam ki bhar pet khaanaa khaayaa kar,varnaa maraa huaa mukh dekhegaa meraa।

                         aanand apne maan baabu ji kaa niahsvaarth prem dekhakar bhaav bhihor ho jaayaa kartaa hai,aur vo apni padhaai me ji jaan se lag jaataa hai।aanand ko maalum hai ki uske paas keval ek hi shastr hai, jisse vah apne parivaar ki garibi hataa saktaa hai, aur vah hai padhaai।

                           aanand ke pitaa asptaal me kampaaundar the।tankhvaa kam milti thi।baahri aamadni ke avasar khub the, par kabhi bhi unhonne galat tarike ki kamaai me dhyaan nahin diyaa।aur aanand ko bhi baal avasthaa se hi achchhe sanskaar dia।har stri ko maan aur bahan ke saamaan dekhnaa aur sammaan denaa।kabhi kisi kaa naa buraa sochnaa, aur naa kisi kaa buraa karnaa ।sabhi ko saath lekar chalnaa।

                                aanand kaa rol maadal uske paapaa aur mammi the।vah pure dil se unki baaton ko maantaa thaa।

                                  dhire dhire vah bdaa huaa।skul ke prdhaanaadhyaapak,shikshkon aur vidyaarthiyon me pyaaraa ho gayaa।aanand ko kitaabon se etnaa pyaar ho gayaa thaa,ki jab bhi use phurasat milti, vah pustkaalay me jaakar baith jaayaa kartaa।aanand ko kabhi dhundhne ki baari aati, to sabhi ko maalum thaa,ki aanand mahaashay skul ke pustkaalay me gahan adhyayan me lin honge।skul ke bord me aanand avval ank se paas huaa।10+2 me bhi achchhe skul me edamishan mil gayaa।vahaan kaa padhaai bahut mahngaa thaa,lekin aanand ke bord me achchhe rijalt aane ke kaaran,use achchhi skolaraship mil gayi।

                                  us samay ki ek ghatnaa ne use kaaphi protsaahit kiyaa।jaise ki kisi mahesh naam ke ldke ne us saal usi skul se pure bhaarat me taap kiyaa thaa,aur bhaarat sarkaar ne uske aage ki pdhaai ki jimmedaari apne kndhe par le li।

                                   aanand ko uski manjil paane kaa jariyaa mil gayaa।ab vo pure ji jaan se apne pdhaai me jut gayaa।

                                   ab uskaa makasad bhaarat ke sarvakshreshth enjiniyring sansthaan aai aai ti se shikshaa grahan karne kaa thaa।10+2 ke phaaenal kaa rijalt aayaa।uske sapne me chaar chaand lag gaye।usne pure bhaarat me taap kiyaa।bhaarat sarkaar ne aanand ke aage ki pdhaai kaa kharchaa uthaane kaa phaislaa liyaa।

                                       aanand aaj bahut khush hai, aur aaj aanand se bhi jyaadaa khush uske paapaa aur mammi hain।

                                       aanand ab aai aai ti ki parikshaa ke taiyaari me lag gayaa।use maalum thaa, ki uski jang abhi khatm nahin hui hai।sachchi taiyaari aur puri lagan ke badaulat usne aai aai ti ki parikshaa bhi paas kar liyaa।

                                         aai aai ti se paas hone ke baad usne ek malti neshanal kampni me job paali।ye din aanand aur uske parivaar ke lia jannat paane vaali khushi se kam nahin hai।

                                          aanand ko bachapan se hi maan aur pitaa ke dvaaraa achchhe sanskaar dia gaye।ye to ham paate hain,ki aaj kal ke maan aur pitaa apne bachchon ko achchhe sanskaar dete hain, par jab khud pe jab unke baari aati hai, ve use paalan karne se bhaagte hain।

                                        aanand ke kes me aisaa nahin thaa।uske maan baabu ji jo use sanskaar dia the, uskaa vah paalan bhi karte the।

                                          aanand ke maan baabu ji ne hameshaa se yahi sanskaar dia hain, ki sadaa jaruratamando ki madad karnaa chaahia।unhonne kisi bhi jaruratamando ko apne ghar se khaali haath jaane nahin diyaa।jahaan tak ho,unki madad hi kiyaa।

                                           par aaj kal ke logon me aise gun bahut kam hi dikhte hain।bas har koi apne svaarth ko puraa karne ke lia ek dusre kaa khun bahaate jaa rahe hain।

                                            aanand ke maan baabu ji ne hameshaa se yahi sanskaar dia ki hameshaa sabhi ko saath lekar chalnaa chaahia।aur sabhi kaa hamen bhalaa dekhnaa chaahia।aur hameshaa se unhonne eskaa paalan bhi kiyaa।hameshaa se unhonne apne maan baabu ji aur apne chhote bhaaiyon (jo gaanv me rahte the)ko saath me lekar chale।kabhi bhi ghar kaa chhotaa se chhotaa v bdaa se bdaa kaam karne ke pahle apne chhote bhaaiyo v apne maan baabu ji se raay lenaa nahin bhulte the।

                                             aaj kal ke log apni duniyaa me aise rame hua hain, ki apne maan baap ko bhul jaate hai, to bhaai ko kahaan se yaad rakh paaange।

                                                aaj kal ke maan baap bachchon ko sikhaate hain ki koi bhi buraa kaam nahin karnaa chaahia।chori nahin karnaa chaahia, sigret v sharaab nahin pini chaahia।tambaaku v khaini kaa se van nahin karnaa chaahia।drags nahin lenaa chaahia।juaa nahin khelnaa chaahia।aur jaane anjaane aap ye galat kaam bachche ke saamne karte hain।esse bachche ke man aur svbhaav par galat asar pdtaa hai।

                                         par aanand ke maan baabu ji ke saath aisaa nahin thaa।unke parivaar me koi bhi galat chijo kaa sevan nahin kartaa thaa।aanand ke baabu ji kaa to bataa hi chuke hain,ki unke paas kaaphi avasar the, jisse ve galat tarikon kaa upyog kar kaaphi paise kamaa sakte the, par daadaa daadi ke dia gaye sanskaar hi the, jisne unhen hameshaa sahi raah par rakhaa।

                                           aanand bhi aam bachche ki hi tarah thaa।par bachapan me hi maan baabu ji ke dia gaye achchhe sanskaar ne aur niahsvaarth prem ne aanand ko puri tarah se jivan me aane vaale har vighn se ldne ke lia taiyaar kar diyaa thaa।aur jivan ke har mod par raam ke aadarsh par chalakar aanand ne raavan ko haraayaa।khud ko pahchaano


Written by sushil kumar

No comments:

तू ही मेरी दुनिया है। tu hi meri duniya hai.

Tu hi meri duniya hai. Shayari तकलीफ मेरे हिस्से की तू मुझे ही सहने दे। आँसू मेरे बादल के तू मुझ पर ही बरसने दे। सारे मुसीबतों क...