31 Oct 2016

दिल के हर धड़कन पर

Shayari

दिल के हर धड़कन पर,

Kavitadilse.top द्वारा आप सभी पाठकों को समर्पित है।


दिल के हर धड़कन पर,
तुम्हारा नाम लिखा है।
रस्ते के हर मोड़ पर ,
बस तुम्हारा नाम छपा है।
Love shayari

जहाँ भी देखा
जिधर भी गया।
बस तुम्हारी छवि पाई है।

हमारी हर दुआ में,
बस तुम्हारा खैरीयत आई है।


बस तुम्हारे यादों के सहारे,
तन्हाई के पल काटी है।

सच कहता हूँ
तुम्हारे बिन जी पाना
जीवन बड़ा दुखदाई हो।
Love shayari

Love you
💓 से

written by Sushil Kumar at kavitadilse.top

Shayari

24 Oct 2016

बहुत बुरा लगता है।

आज कल मानवता तो जैसे मानव से लुप्त ही हो गई है।हर कोई आज स्वार्थी हो गया है।'अपना काम बनता,भाड़ में जाए जनता।'लोग अपना काम निकालने के लिए,एक दूसरे का खून बहाने से नहीं चूक रहे हैं।हर कोई बस अपना फायदा देखे जा रहा है।
     कोई धन दौलत के लिए भागे जा रहा है,तो कोई जमीन जायदाद के लिए दौड़े जा रहा है।जिनके पास दोनो चीज़े हैं,वह नशा जैसे गाँजा,अफीम बगैरह के लिए भागे जा रहा है।और जो बचें,वह शारीरीक संभोग के लिए मचलाए जा रहें हैं।किन्हीं के मन में शान्ति नहीं है।बस हर कोई,हर दूसरे पर हावि होने को आतुर है।ऐसे मानो जैसे मानव में मानव नहीं,राक्छस वास कर रहे हैं।
    यहाँ हर जगह मानो दैत्य और राक्छस घूम रहे हैं।किन्हीं में मानवता नाम मात्र भी नहीं है।
    कुछ दिन पहले की ही बात है,मैं टीवी पे न्युज देख रहा था।एक रोड एक्सीडेंट का लाईव कवरेज़ दिखा रहे थे।सारी पब्लीक तमाशा देख रहा थी।उनमें से कुछ तो टीवी पर आने के लिए जी जान से प्रयास में लगे हुए थे।लेकिन किसी को भी घायल हुए व्यक्तियों की फिक्र नहीं थी।
    अब बताइए मानवता कहाँ गायब हो गई है।

23 Oct 2016

जिंदगी किस लिए मिली है।

लोग यहाँ इस दुनिया में,आते हैं और चले जाते हैं।पर किसी ने यह सोचने की कोशिश भी नहीं की,कि ये जिन्दगी,हमें किस मकसद के लिए दी गई है।क्या जिंदगी हमें बस इस लिए दी गई है,कि सुवह से शाम तक अपने व अपने परिवार के पेट के  लिए कार्य कर्रें,और घर पर भी आकर बस अपने परिवार की फिक्र करें।
      धरती पर रहने वाले हर मनुष्य जब जंम लेता है,तो वह अपना किस्मत साथ लेकर आता है।तो फिर किस लिए अपने परिवार के लिए इतना फिक्र करना,कि खुद को ही भूल जाना,और अपने अस्तित्व को ही खो देना।
      मेरे कहने का मतलब यह नहीं है कि,आप सब कुछ किस्मत पर छोड़ दें।अपितु अपने व अपने परिवार के पेट के लिए कार्य करें,जरूर करें,लेकिन इतना भी ना करें,कि आप स्वयं को ही भूल जाएँ।ये ञात रखिए,कि आप आप नहीं हैं।आप अपने शरीर से पहचाने जाते हैं।लेकिन आप अपने अंदर बसे आत्मा को ही भूल गए हैं।कैसे? और क्यों?हम और आप अपने शरीर से बँधे हैं।जब ये शरीर हमारा मिट्टी में मिल जाएगा,तब हमारी आत्मा यह शरीर छोड़ कर,किसी अन्य शरीर को धारन कर लेगी।और हमारी पहचान बदल जाएगी।और साथ ही नए सम्बंध भी बन जाएंगे।और फिर से नए दायित्व और बंधनों में बंध कर ,आप स्वयं को फिर से भूल जाते हैं।
      यह शरीर नश्वर है।हमसे और आपसे जुड़े सम्बंध भी नश्वर हैं।खुद को पहचाने।और अपने हर दिन के समय के कुछ हिस्से को ईश्वर को सौंपे,क्योंकि हमारी आत्मा हमारे ईश्वर के शेष हैं।जो भी कार्य करें,ईश्वर को याद रख कर ही करें।क्योंकि हम और आप करने वाले कोई नहीं हैं।हमारे ईश्वर ही हमारे संचालक हैं।

20 Oct 2016

हमारा समय अनमोल है।

काल का चक्र हर पल बदल रहा है।लोग आ रहे हैं,और अपने पूर्व जन्मों के किए गए अच्छे व बुरे कर्मों के हिसाब से,उन्हें उनका जीवन प्रदान की जाती है,व उनका भविष्य तय की जाती है।जीवन बहुत ही छोटी है।और हमें इस जीवन को ऐसा जीना चाहिए,जैसे कि अगले ही पल में,आपकी साँस थमने वाली है।हमारे कहने का मतलब है,कि हमें हर पल को खुलकर जीना चाहिए।क्या पता अगले किसी पल में,देवलोक से जीवन की धारा आना,इस मिट्टी की शरीर में बंद हो जाए।और हम मिट्टी में मिल जाऐं।
       अपने प्रियजनों के साथ,ज्यादा से ज्यादा समय व्यतीत करना चाहिए।हमेशा धन दौलत,जीवन जायदाद के लिए,हाथ पाँव नहीं मारना चाहिए।हमें अपने समय को,अपने प्रियजनों के साथ बीताकर व्यतीत करना चाहिए।और इस अनमोल समय को कभी भी,व्यर्थ की चीजों के लिए नही गँवाना चाहिए।धन दैलत,जमीन जायदाद सभी यहीं छूट जाएँगे।खाली हाथ ही आएँ थे,और खाली हाथ ही जाएँगे।यहाँ हम सभी अपने अपने कर्मों  के हिसाब से अपना जीवन ,और जीवन शैली पाते हैं।अच्छा शक्ल,बुरा शक्ल,गरीब परिवार,अमीर परिवार यह सारा कुछ आपके पूर्व जन्मों के हिसाब से तय हेता है।
      फिर आने वाले नस्लों के बारे में सोचकर,क्यों टेन्सन लेना।वो जैसा भी पूर्व जन्मों में कर्म किए होंगे,उन्हें उसके हिसाब से सारा कुछ मिल जाएगा।
       चलो अब हम अपना जिन्दगी जी ले।अपने प्रियजनों के लिए भी समय निकाल लें।कहीं ऐसा ना हो कोई अपना कल यहाँ से चला जाऐ,और हमें अपने काम से फुरसत ना हो,बस धन दौलत के पीछे भागे जा रहें हैं।और अपने प्रियजनों के जाने के बाद,फूट फूट कर अश्रु बहा रहे हैं।
       इसके विपरीत भी हो सकता है।हमारे जाने का समय कहीं समीप ना आ जाए,फिर हमारे पास हाथ मसलने के अलावा कुछ भी नहीं बचेगा।और अपने प्रियजनो से बिछुड़ने व उनको समय ना दे पाने के दुख में अश्रुओं की धारा फूट फूट कर बह पड़ेगी।  
       

12 Oct 2016

हर दिन का तरह

आज का दिन भी,हर दिन की जैसा ही दिख रहा था।एक रस,एक रंग,ना दिल में कोई उमंग,ना मन में कोई शांति।अब आप बोलेंगे कि ऐसा क्यों? हम और आप देखते हैं,कि हमारी जो हर दिन की दिनचर्या है,वह बिलकुल एक समान है।वही सुवह सुवह जबरदस्ती उठना,फ्रेश होना,ब्रश करना,नहाने का मन बिलकुल भी ना करना,फिर भी नहाना,क्योंकि पाँच दिनो से नहीं नहाया है।अगर फिर भी नहीं नहाया तो स्ट्रोंग परफ्यूम लगाकर,अपने काम पर निकलना। अब अगर स्कूल या कॉलेज जा रहे हैं,तो फिर वही पुराने दोस्तों से मिलना,और शैतानी भरी बातें करना,और एक दूसरे की टाँग खींचना।और फिर टीचर का रोज़ का एक ही सवाल पूछना कि,बच्चों,आज सभी लोग होमवर्क कर के आएँ हैं ना।और हम बच्चों का एक स्वर में बोलना,हाँ टीचर।और फिर किसी दोस्त से कॉपी मांगकर,होमवर्क कॉपी करना।और फिर टीचर के द्वारा पकड़े जाने पर मुर्गा बनना,वह छड़ी से पिटाई होना। पीछे की रॉ में बैठकर,आगे बैठे बच्चों के टीफीन निकालकर,उनके माँ के द्वारा,बनाए गए पकवान का मजा लेना।
         और टीटी वाली क्लास में बंक मार कर,लाईब्रेरी में छुप कर नॉवेल पढ़ना।टीचर का पकड़ना,और हमारा बहाना मारना,कि टीचर,प्रोजेक्ट की तैयारी कर रहे हैं।

8 Oct 2016

राम और रावण

हर इंसान में राम और रावण का वास होता है।ये इंसान का फैसला होता है,कि वह राम बनना चाहता है या रावण।ईश्वर की दी हुई जीवन को,अगर हम रावण बनकर,दूसरों को तकलीफ देकर जीए,तो ऐसी व्यर्थ की जिंदगी जीने का क्या मतलब।ईश्वर की अनमोल जिंदगी को हमें ऐसे जीने चाहिए, जिससे ईश्वर हमसे खुश रहे।हमे उससे प्राप्त अनमोल उपहार को व्यर्थ मे नहीं गँवाने हैं।
       हम मनुष्यों को पिता परमेश्वर,हमारे मालिक ने बनाया है,इस हिसाब से हम सभी भाई बहने हुये।फिर ये कैसी होड़ लगी है,हम सभी में,कि हमसे सर्वष्रेस्ठ कोई नहीं है।
       जब ईश्वर ने सृष्टि की संरचना की और मनुष्य को बनाया,तो हम सभी को एक समान शरीर का धाँचा दिया, एक समान सभी को बल,बुद्धि दिया।और फिर मनुष्यों ने जैसे जैसे कर्म किए, वैसे वैसे ही फल भोग।और शरीर की संरचना मे भी,उसी भाँति से बदलाव आएँ।
        मनुष्य ने अच्छे कर्म किए, तो उसके शरीर की संरचना मे और भी निखार आया,वही मनुष्य ने जहाँ बुरे कर्म किए,उसके शरीर की संरचना वैसी ही भद्धी होती चली गई।
         अगर आप ताकतवर हैं तो कमजोरों की मदद करो।ये नहीं की धर्म जाति, वेशभूषा, काले गोरे, अमीर गरीब के हिसाब से मनुष्य को मनुष्य से ही बाँट दे।ये भेदभाव मनुष्य के दिमाग की ऊपज है।
         मनुष्य हमेशा सच्चाई से भागता है और झूठ को सत्य मानता है।अगर आपको यह जीवन मिला है, इसका मतलब यह नहीं कि ये आपकी धरोहर हो गई और आप इसके मालिक हो गये ।एक दिन आएगा, जब आपकी ये धरोहर आपसे छीन ली जाएगी।और आपको आपके कर्म के हिसाब से,आपकी आगे की यात्रा तय की जाएगी।
          इस जीवन के रहस्य को समझना बहुत जरूरी है।अपने जीवन के हर पल को हमें खुल के जीना चाहिए।हमें जहाँ तक चाहिए, हमें बस यही कोशिश करना चाहिए, कि हमसे किसी का दिल ना दुखे।जहाँ तक हो हमें सभी को खुश रखने की कोशिश करनी चाहिए।ईश्वर की दी हुई जीवन को हमें राम बनकर निभाने की कोशिश करना चाहिए, ना कि रावण बनकर सबका सर्वनाश करना चाहिए।
        एक छोटी सी कहानी आगे लिख रहा हूँ।आनंद बहुत गरीब परिवार में जन्मा था।वह दिखने मे सुन्दर और सुशील था। बचपन से बहुत ही शर्मिला और भावुक था।किसी भी अंजान व्यक्ति से मिलने पर बहुत घबराता था।अपने पापा मम्मी बहन और खासकर अपने नाना जी से उसे विशेष लगाव था।
        माँ और बाबू जी हमेशा उसे रामायण सुनाते थे।और इसी वजह से राम जी की छाप उसके दिल पे गहराई से पड़ी थी।
        वह एक सच्चाई से बिलकुल अंजान था।वह सच्चाई थी मृत्यु।जिसने भी इस दुनिया मे जन्म लिया है, उसे एक ना एक दिन मरना भी है।और वह साल,दिन और समय पहले से ही निर्धारित है।
         एक समय घर पर नाना जी का आगमन हुआ।इस बार उनके गाँव लौटते वक्त,पता नही  क्यों, उसके आँसू थम नहीं रहे थे,और वह रोया ही चला जी रहा था।शायद उसे आभास हो गया था,ये उन दोनों की आखिरी मुलाकात है।
         कुछ दिनों बाद ही नाना की मृत्यु की खबर आती है, फिर क्या आनंद रो रो कर सारा घर सर पर उठा लेता है।उसे बहुत ज्यादा आघात पहुँचता है।माँ बाबू जी उसे बहुत समझाते हैं।पर उसके आँख से अक्ष्रुओं की धारा रुकी नहीं।
           उसने सोचा कि कोई जब मरता है, तो कहाँ गायब हो जाता है।ऐसे ही अगर मेरे पापा मम्मी बहन सभी लोग गायब हो जाएंगे,फिर मैं तो मर जाउँगा,इनके बिना मैं कैसे रह पाउँगा।इन सभी को मेरी भी उमर लग जाए।
            तभी से हर दिन और रात वह अपने ईश्वर से यही प्रार्थना करता है, कि जो भी कष्ट हो उसे हो,उसके पापा मम्मी बहन को किसी प्रकार का कष्ट ना हो।
           बचपन से ही वह सभी को लेकर चलने वाला इंसान है वह।कोई भी कार्यक्रम हो स्कूल मे, कुछ भी खाने को मिले उसे, वह अपने मम्मी पापा और बहन के लिए ले जाना नहीं भुलता है।
            आनंद अपने स्कूल ब्लू बेल्स में हमेशा प्रथम या द्वितीय स्थान पर रहता है।और हमेशा घर पर पुरस्कार लेकर घर पर आता है।उसे स्कूल का प्रधानाध्यापक भी बहुत मानते हैं।
             ब्लू बेल्स स्कूल के बोर्ड का रिजल्ट इस साल अच्छा नहीं हुआ,तो उसके पापा मम्मी ने स्कूल बदलने का निर्णय ले लिया।आनंद को पहले पहले अच्छा नहीं लगा।लगता भी कैसे उसके यहाँ पर इतने सारे अच्छे दोस्त जो बन गए हैं।
            वह दिन भी आ गया, जब उसे एडमिशन टेस्ट देने के लिए, सन्त फ्रांसिस स्कूल जाना था।ब्लू बेल्स के अच्छे रिजल्ट कार्ड लेकर पापा मम्मी के साथ स्कूल चला गया।लेकिन जाने से पहले वह हर दिन की तरह ईश्वर से बस यही प्रार्थना करता है,कि उसके मम्मी पापा को किसी प्रकार का दुख तकलीफ ना हो।उनके सारे कष्ट उसे मिल जाएं।आज वह एडमिशन टेस्ट देने जा रहा है।उसके पापा मम्मी ने जैसा उसके लिए सोचा है, वैसा ही हो।क्योंकि हर माँ बाप अपने बच्चे के लिए, हमेशा अच्छा ही सोचते हैं।
             वहाँ उसका टेस्ट हुआ, और वो फैल हो गया।पर किस्मत को कुछ और ही मंजूर था।उसके
 पापा मम्मी के निवेदन और उसका पुराना रिकॉर्ड देखकर,स्कूल के प्रधान अध्यापक ने उसका एडमिशन स्कूल मे ले लिया गया।
               वह कुछ दुखी था,कि उसके पुराने दोस्त छुटने वाले हैं, पर उसको इस बात की खुशी भी थी कि उसके माँ बाबू जी की सोच साकार हो गई।और उनकी खुशी देखकर आनंद भी काफी खुश है।
                    अब आनंद नया स्कूल जाना शुरू करता है। नया नया स्कूल और नए नए लोग।आनंद इन सभी मे अपने को बहुत ही अकेला महसूस करता था।पर वो था ही इतना प्यारा कि सभी लोग उससे आकर्षित हो कर उसकी ओर खींचे आते थे।जल्दी ही उसके बहुत सारे दोस्त बन गये।और सभी शिक्षकों का भी वह प्यारा बन गया।
                        आनंद के दिल मे वह पल घर कर गया था,जब उसके मम्मी पापा ने कितनी विनती करने के बाद उसका एडमिशन स्कूल मे
कराया था।उसे अपने मम्मी पापा को सही साबित करने के लिए,बहुत मेहनत करना शुरू किया।और बहुत जल्द ही सभी को पिछाड़ते हुए, अव्वल स्थान पर पहुँच गया।
                        उसने अपने माँ बाबू जी को गरीबी मे पेट काटते देखा था।खुद आधे पेट खाएंगे पर उसे भर पेट खिलाएंगे।वो झगड़ता है, लड़ता है कि उसके प्लेट से कुछ खाना निकाल ले,वह इतना खाना नहीं खा पाएगा, पर माँ बाबू जी कहाँ सुनते हैं, ऊपर से माँ का कसम कि भर पेट खाना खाया कर,वरना मरा हुआ मुख देखेगा मेरा।
                         आनंद अपने माँ बाबू जी का निःस्वार्थ प्रेम देखकर भाव भिहोर हो जाया करता है,और वो अपनी पढाई मे जी जान से लग जाता है।आनंद को मालूम है कि उसके पास केवल एक ही शस्त्र है, जिससे वह अपने परिवार की गरीबी हटा सकता है, और वह है पढाई।
                           आनंद के पिता अस्पताल मे कम्पाउंडर थे।तन्ख्वा कम मिलती थी।बाहरी आमदनी के अवसर खूब थे, पर कभी भी उन्होंने गलत तरीके की कमाई मे ध्यान नहीं दिया।और आनंद को भी बाल अवस्था से ही अच्छे संस्कार दिए।हर स्त्री को माँ और बहन के सामान देखना और सम्मान देना।कभी किसी का ना बुरा सोचना, और ना किसी का बुरा करना ।सभी को साथ लेकर चलना।
                                आनंद का रोल माडल उसके पापा और मम्मी थे।वह पूरे दिल से उनकी बातों को मानता था।
                                  धीरे धीरे वह बड़ा हुआ।स्कूल के प्रधानाध्यापक,शिक्षकों और विद्यार्थियों मे प्यारा हो गया।आनंद को किताबों से इतना प्यार हो गया था,कि जब भी उसे फुरसत मिलती, वह पुस्तकालय मे जाकर बैठ जाया करता।आनंद को कभी धुंधने की बारी आती, तो सभी को मालूम था,कि आनंद महाशय स्कूल के पुस्तकालय मे गहन अध्ययन मे लीन होंगे।स्कूल के बोर्ड मे आनंद अव्वल अंक से पास हुआ।10+2 मे भी अच्छे स्कूल मे एडमिशन मिल गया।वहाँ का पढाई बहुत महँगा था,लेकिन आनंद के बोर्ड मे अच्छे रिजल्ट आने के कारण,उसे अच्छी स्कोलरशिप मिल गई।
                                  उस समय की एक घटना ने उसे काफी प्रोत्साहित किया।जैसे कि किसी महेश नाम के लड़के ने उस साल उसी स्कूल से पूरे भारत मे टाप किया था,और भारत सरकार ने उसके आगे की पढ़ाई की जिम्मेदारी अपने कँधे पर ले ली।
                                   आनंद को उसकी मंजिल पाने का जरिया मिल गया।अब वो पूरे जी जान से अपने पढ़ाई मे जुट गया।
                                   अब उसका मकसद भारत के सर्वक्ष्रेष्ठ इन्जिनीयरींग संस्थान आई आई टी से शिक्षा ग्रहण करने का था।10+2 के फाइनल का रिजल्ट आया।उसके सपने मे चार चाँद लग गए।उसने पूरे भारत मे टाप किया।भारत सरकार ने आनंद के आगे की पढ़ाई का खर्चा उठाने का फैसला लिया।
                                       आनंद आज बहुत खुश है, और आज आनंद से भी ज्यादा खुश उसके पापा और मम्मी हैं।
                                       आनंद अब आई आई टी की परीक्षा के तैयारी मे लग गया।उसे मालूम था, कि उसकी जंग अभी खत्म नहीं हुई है।सच्ची तैयारी और पुरी लगन के बदौलत उसने आई आई टी की परीक्षा भी पास कर लिया।
                                         आई आई टी से पास होने के बाद उसने एक मल्टी नेशनल कम्पनी मे जोब पाली।ये दिन आनंद और उसके परिवार के लिए जन्नत पाने वाली खुशी से कम नहीं है।
                                          आनंद को बचपन से ही माँ और पिता के द्वारा अच्छे संस्कार दिए गए।ये तो हम पाते हैं,कि आज कल के माँ और पिता अपने बच्चों को अच्छे संस्कार देते हैं, पर जब खुद पे जब उनके बारी आती है, वे उसे पालन करने से भागते हैं।
                                        आनंद के केस मे ऐसा नहीं था।उसके माँ बाबू जी जो उसे संस्कार दिए थे, उसका वह पालन भी करते थे।
                                          आनंद के माँ बाबू जी ने हमेशा से यही संस्कार दिए हैं, कि सदा जरूरतमंदो की मदद करना चाहिए।उन्होंने किसी भी जरूरतमंदो को अपने घर से खाली हाथ जाने नहीं दिया।जहाँ तक हो,उनकी मदद ही किया।
                                           पर आज कल के लोगों मे ऐसे गुण बहुत कम ही दिखते हैं।बस हर कोई अपने स्वार्थ को पूरा करने के लिए एक दूसरे का खून बहाते जा रहे हैं।
                                            आनंद के माँ बाबू जी ने हमेशा से यही संस्कार दिए कि हमेशा सभी को साथ लेकर चलना चाहिए।और सभी का हमें भला देखना चाहिए।और हमेशा से उन्होंने इसका पालन भी किया।हमेशा से उन्होंने अपने माँ बाबू जी और अपने छोटे भाईयों (जो गाँव मे रहते थे)को साथ मे लेकर चले।कभी भी घर का छोटा से छोटा व बड़ा से बड़ा काम करने के पहले अपने छोटे भाईयो व अपने माँ बाबू जी से राय लेना नहीं भूलते थे।
                                             आज कल के लोग अपनी दुनिया मे ऐसे रमे हुए हैं, कि अपने माँ बाप को भूल जाते है, तो भाई को कहाँ से याद रख पाएंगे।
                                                आज कल के माँ बाप बच्चों को सीखाते हैं कि कोई भी बुरा काम नहीं करना चाहिए।चोरी नहीं करना चाहिए, सिगरेट व शराब नहीं पिनी चाहिए।तंबाकू व खैनी का से वन नहीं करना चाहिए।ड्रग्स नहीं लेना चाहिए।जुआ नहीं खेलना चाहिए।और जाने अनजाने आप ये गलत काम बच्चे के सामने करते हैं।इससे बच्चे के मन और स्वभाव पर गलत असर पड़ता है।
                                         पर आनंद के माँ बाबू जी के साथ ऐसा नहीं था।उनके परिवार मे कोई भी गलत चीज़ो का सेवन नहीं करता था।आनंद के बाबू जी का तो बता ही चुके हैं,कि उनके पास काफी अवसर थे, जिससे वे गलत तरीकों का उपयोग कर काफी पैसे कमा सकते थे, पर दादा दादी के दिए गये संस्कार ही थे, जिसने उन्हें हमेशा सही राह पर रखा।
                                           आनंद भी आम बच्चे की ही तरह था।पर बचपन मे ही माँ बाबू जी के दिए गए अच्छे संस्कार ने और निःस्वार्थ प्रेम ने आनंद को पूरी तरह से जीवन मे आने वाले हर विघ्न से लड़ने के लिए तैयार कर दिया था।और जीवन के हर मोड़ पर राम के आदर्श पर चलकर आनंद ने रावण को हराया।खुद को पहचानो

प्यार ही सब कुछ है,इस दुनिया में

आज हर किसी के दिल में,सभी के लिए प्यार ही प्यार होना चाहिए।अगर आज हमारे दिल में किसी के लिए प्यार नहीं है,तो हम उसकी गलती पर उसे हम माफ नहीं कर पाएँगे।और उसे सबक सिखाए बगैर दिल में चैन नहीं आएगा।वहीं आप इसके दूसरे साईड को देखिए,अगर किसीअपने से गलती हुई होती,तो उसे अगले ही पल माफ भी कर दिया होती।
     अपनो से प्यार है,परायों से प्यार नहीं।ऐसा क्यों और कैसे?
     जब सृष्टी की संरचना हुई,और ईश्वर ने मनुष्य को जब बनाया।तब उसने ऐसा सोचा भी नहीं होगा कि कभी ऐसा भी दिन आएगा,जब मनुष्य अपने स्वार्थ के लिए,ईश्वर को भी बाँट देगा।
     और आज तो हद्द हो गया है,मनुष्यों के दिल में प्यार कम,और द्वेष ज्यादा है।हर कोई,हर दूसरे के खून का प्यासा हो गया है।और आज धन दौलत,जमीन जायदाद का मोल खून से ज्यादा है।इसलिए आज जमीन जायदाद ,धन दौलत के लिए,आज हर कोई,हर किसी का खून बहीने से नहीं घबराता है।
    हम मनुष्य,मनुष्य तभी तक हैं,जब तक कि से आत्मा शरीर के अंदर है।जिस दिन यह आत्मा मनुष्य शरीर को त्याग देगी,किसी और योनि में प्रवेष कर जावेगी।फिर हमारी पहचान धीरे धीरे सभी के मानचित्र से हटती जाती है।बस याद रह जाते हैं,तो हमारे द्वारा किए गए अच्छे वह बुरे कर्म।

2 Oct 2016

क्या लगता है?

आज कल की भागमभाग वाली दुनिया में,किसी के पास किसी और व्यक्तियों के लिए वक्त नहीं है।सभी लोग अपनी अपनी दुनिया में व्यस्त हैं।कोई पैसे कमाने में व्यस्त है,तो कोई नाम कमाने में।बस अपनी धुन में सभी लोग लगे हुए हैं।किसी को किसी की खबर नहीं है। ऐसे ही धुन में लगे हुए कुछ लोग,इस लोक से उस लोक में पहुँच जाते है।धन-सम्पत्ती,मान-सम्मान के लिए लोग आज कुछ भी कर गुजरने के लिए तैयार हैं।सारी दुनिया क्षणभंगुर चीज के के लिए अपनी जान प्राण को दाव पर लगाने से पीछे नहीं हटते।ये कैसा पागलपन सारी दुनिया पर छाया हुआ है। जागो मानव!जागो!पहचानो,खुद को पहचानो।तुमने जब जन्म लिया,तुम्हारे जीवन के हर पल की अध्याय लिख दी गयी थी।इसलिए अपने अनमोल समय को व्यर्थ में नहीं खोते हुए,और अपने और परिवार की पेट पालन व अन्य सुख सुविधा को ध्यान में रखकर,अपना कर्म करते रहें।और बाकि बचे समय में ईश्वर को याद करना नहीं भूलें। अपने जीवन के रहस्य को समझे।जहाँ सुख है,वहाँ दुख रहेगा,जहाँ जीवन है,वहाँ मृत्यू भी होगी।सच्चाई का सामना करो,हच्चाई से दूर भागो। आपको अगर जीवन की सच्चाई का सामना करने की ताकत है,तो कोई ऐसे व्यक्ति को तलाशो,जिसकी मृत्यु उसके नजदीक हो।वो हमेशा अपने ईश्वर की याद में लगा रहता है।और उसके द्वारा किए गये,सारे अच्छे व बुरे कर्म की यादें,उसके इर्द गिर्द घूमते रहते हैं।बुरे कर्मों को याद कर,वह खुद को कोसता रहता है।और अपने ईश्वर को और भी जोर से मन ही मन प्रार्थना कर क्षमा याचना अपने बुरे कर्मों के लिए माँगता रहता है। इसलिए अगर हमें यह अनमोल मानव अंग मिला है,तो हमें इस समय को व्यर्थ में नहीं खोना है।ना ही कोई बुरे कर्म करने है,कि मरने के बाद नर्क में भाँति भाँति के कष्ट सहने पड़े। और अपने ईश्वर को सदा याद रखना चाहिए।कोई भी कर्म करें,ईश्वर को समक्ष रख कर करना चाहिए।और हमेशा यही प्रार्थना करना चाहिए,कि हमें सही राह चुनने की शक्ति दें और हमारे किए गये कार्यों से किनहीं को भी कीसी प्रकार का दुख व कलेश न हो।

Meri khamoshi mein ek sandesh hai.

Shayari मेरी खामोशी में एक संदेश है। kavitadilse.top द्वारा आप सभी पाठकों को समर्पित है। मेरी खामोशी देख तुम्हें तो आज बड़ा ही सुकून...