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चाहत

हर इंसान के दिलों में,बसने की चाहत है।
दिल थम जाने के बाद भी,सभी दिलों में धड़कने की चाहत है।
इस छोटी सी दुनिया में,हर किसी के काम आने की चाहत है।
सभी की हँसी का,कारन बनने की
मन में चाहत है।
हर जगह सुख शाँति हो,किसी के दिल में  नहीं कोई निराशा हो।
ऐसे संसार की चाहत है।
अपनी आहुती देकर,दुनिया को रोशन करने की
दिल की चाहत है।



क्योंकि,हूँ मैं बहुत इमोश्नल यारों।😭😭

 नैनों से अक्ष्रुओं का रिश्ता,बहुत पूराना है यारों।

बचपन में माँ के साथ,क्योंकि सास भी कभी बहु थी का सीरीयल देखना।
और तुलसी मैया पर अत्याचार होता देख,
 आँखों से  कटोरा भर के  आँसू का निकलना।

 क्योंकि,हूँ मैं बहुत इमोश्नल यारों।😭😭

गरमी की छुट्टी,स्कूल में होना।

और दोस्तों से बिछुड़ने का गम लेकर
और यह सोचकर कि
अब मैं किसके साथ बात करुँगा,
और खेलूँगा।
अक्ष्रुओं का आँखों से निकलना।

क्योंकि,हूँ मैं बहुत इमोश्नल यारों।😭😭

बचपन में माँ और बाबू जी के साथ में
हम आपके हैं कौन देखने जाना।

प्रेम और निशा की कुरबानी को
बरदास्त  ना कर पाना।
और वहाँ भी बाल्टी भर के ,अक्ष्रुओं को बहाना।

क्योंकि,हूँ मैं बहुत इमोश्नल यारों।😭😭

और फिर कालेज में,किसी लड़की पर लट्टू हो जाना,

और फिर शातीर लड़की का मेरे करेक्टर का फायदा उठाना।

मेरे पोकेट खर्चे से,उसको आईसक्रीम और चोकलेट खिलाना।

और वेलेनटाईन डे के दिन,उसका किसी और का हो जाना।

किसी कोने में जाकर,खूब जी भर के आँसू बहाना।

फिर उसके गम को मिटाने के लिए,एक दो पेग लगाना।

क्योंकि,हूँ मैं बहुत इमोश्नल यारों।😭😭

मैं जी रहा यहाँ रुठा रूठा।

 मैं जी रहा यहाँ रुठा रूठा।
सारी दुनिया से टूटा टूटा।

कोई भी है नहीं यहाँ।
जो मेरे दर्द को समझा।

जिसे देखो बस वही
मेरे जख्म को खूरैदा।

बस हमारा इस्तेमाल यहाँ
सभी किए जा रहे हैं।

कोई तो हो,जो समझे मेरा गम
जहर के घूंट को पीये जा रहे हैं।

कतरा कतरा खून का बहा जा रहा है।
लोगों का दिल,फिर भी नहीं भरा है।

देख देख सभी लोग हमारा
मजा लिए जा रहे हैं।







अनजानी लड़की।

आज सुवह,जब मैने तुमको बस स्टोप पर देखा था।
दिल में बस गया तुम्हारा चेहरा,कितना सुन्दर सलौना था।
तुम्हारी हँसी,और तुम्हारा चहचहाना,
और तुम्हारा मुस्कुराना,
कितनी मधुर थी,वह ध्वनी।
ऐसा लग रहा था,मानो जैसे कहीं बज रही हो बाँसुरी।
हर अदा पर तुम्हारे, मैं था फिदा।
मानो तुम हो जैसे मेरी धड़कन,और
मैं तुम्हारे बिना हूँ एक कटी पतंग।




ये जिन्दगी किस काम की।

ये जिन्दगी किस काम की,जो किसी के काम ना आ सकी।
बस अपने अहम के चादर में,अपनो को बेगाना कर गई।
जिस माँ बाप ने ,तुम्हारे जिद्ध के कारन कभी तुम्हें खिलौना दिला दिया था,बचपन में।
आज वही माँ बाप तुम्हारे जिद्ध के कारन  जाने को तैयार हैं वृद्धा आक्ष्रम।
जिस माँ बाप ने तुम्हारे आँखो से कभी आँसू बहने नहीं दिया था।
उसी माँ बाप को ,आज तुम रूलाए जा रहे हो।
जाग जाओ आज तुम,वरना कल के लिए हो जाओ तैयार।
जब तुम्हारे बच्चे,तुम्हारे संस्कार पर चलकर , छोड़ आएँगे तुम्हें वृद्धा आक्ष्रम।

ये जिन्दगी किस काम की,जो किसी के काम ना आ सकी।
यहाँ हर कोई बस अपने स्वार्थ के चादर में अपना फायदा देखे जा  रहे हैं।
दुनिया जाए भाड़ में,बस अपना पोकेट भरे जा रहे हैं।
बस हर कोई अपने पद के हिसाब से पैसे लिए जा रहे हैं।
काला धन को लोग सभी,यहाँ सफेद किए जा रहे हैं।
गैर जिम्मेदाराना धंग से,पद का दुरूपयोग किए जा रहे हैं।
क्या हमारी संस्कार हमारे बच्चों तक ही सीमित रह गई है।
क्या ऐसे कर के,हम अपने देश को खोखला नहीं कर रहे हैं।क्यों अपने स्वार्थ के लिए हमें  गुलामी के अँधेरे में धकेल रहे हैं।
जिन्दगी किस काम की,जो किसी के काम ना आ सकी।


चोपटानंद

हमारी जिन्दगी चोपटानंद हो गई है।
सच बतादूँ मेरे भाई।
हर कोई आकर खरी खोटी सुनाकर,
और ज़रा चुस्की लेकर निकल जाता है।
बाहर वाले तो मजा ले ही रहे हैं
घरवाले भी नहीं चुक रहे हैं
चुस्की लेने से हमारी।
हमारी जिन्दगी चोपटानंद हो गई है।
सच बतादूँ मेरे भाई।
अब कल की ही बात देखो,
जब रात्री में साढ़े नो बजे घर पहुँचा था मेरे भाई।
और प्यारी सी बीवी ने,तभी मजा ले ली हमारी।
बैंक में ही घर बना लिजिए ना!बैंक से घर आते ही क्यों हैं।
इन तीखे बाणों से,दिल के टुकड़े टुकड़े हो गए मेरे भाई।
सच कहता हूँ दोस्तों,मुझे लगा,मैं अगले ही पल में रो दूँ।
बैंक में इतना तनाव है,और वो कहती हैः
बैंक में ही घर बना लूँ।
फिर दिल को संभाला,और उनसे प्यार से पूछ डालाः
डार्लिंग,तुम भी चलोगी ना!साथ में रहने को।
हमारी जिन्दगी चोपटानंद हो गई है।
सच बतादूँ मेरे भाई।
बैंक में कस्टमर भी बस मौके की तलाश में रहते हैं भाई।
कहते हैं,नोटबंदी का सबसे ज्यादा फायदा हुआ है आप सभी बैंक वालो को।
नोट के लिए लाईन में खड़े होने का कष्ट तो नहीं हुआ।
मेरा मन भी एक पल में छनछना सा गया।
और मुँह से निकल पड़ा,भाई साहब आप इधर आओ और बैंक को संभालो।
और मैं  जाकर लाईन में लग जाता हूँ आपके लिए।
कस्टमर भी सकपका सा गया,कहने लगाः
साहब,हम तो आपसे मजाक कर रहे थे।
नोटबंदी की मार देखा जाए तो,
सबसे ज्यादा आप लोग ही झेल रहे हैं।
सारी भीड़ को नियंत्रित करके,
सभी का पेट जो भर रहे हैं।
हमारी जिन्दगी चोपटानंद हो गई है।
सच बतादूँ मेरे भाई।



दिल तो बच्चा है जी।

दिल तो बच्चा है जी।

बहुत दिनो से,मैं यहाँ अजीब सी तनाव में जी रहा था।

कभी हंस रहा था,तो कभी रो रहा था।

मन अंदर ही अंदर कचोट रहा था।

तभी एक बचपन का दोस्त मिला।

और दिल चला गया,बचपन  में।

वह तनाव और अजीब सी बेचैनी,जाने कहाँ चली गई यारों।

बस उन थोड़े से लम्हों में.
जी लिए हम अपने बचपन को।

अब मेरे इस तनाव से बचने का,
एक जबरदस्त फोरमूला सामने आया।

दिल को बच्चा बनाकर,फिर थोड़ा फूसलाकर।
जी लो तनाव के पल सारा।

अब जब कभी ये तनाव भरा पल
हमारे सामने ज्यों आते।

ओल इज़ वेल,ओल इज़ वेल,
कहकर दिल को अपने,बहलाते।

हमारे नरेन्द्र मोदी जी की बात ही निराली है।

हमारे नरेन्द्र मोदी जी की बात ही निराली है।
छप्पन इंच का चौड़ा सीना,और शेर सा हुंकार है।
उनकी एक आवाज पर,सारा आवाम तैयार है।
कोई भी परिस्थिति हो,उनके हर कदम पर साथ है।

हमारे नरेन्द्र मोदी जी की बात ही निराली है।
बात नोटबंदी की हो,या हमारे बोर्डर पर तनाव की।
कहीं भी हमारे प्रधानमंत्री हार नहीं मानते।
और मुश्किल से मुश्किल घड़ी में,रास्ता निकालना जानते हैं।
और ईंट का जवाब पत्थर से देना,भली भाँति जानते हैं।

हमारे नरेन्द्र मोदी जी की बात ही निराली है।
उनकी मात्रभूमि के लिए जज्बा,और जनता के लिए समर्पन।
यही दो गुण हैं उनके,जिससे चहिते हो जाते हैं वह सबके।
इनकी सादगी,इनकी कर्मठता के हम सभी कायल हैं।
हम नवयुवकों के लिए,वह जीता जागता प्रेरणास्रोत हैं।

पप्पू बना दिया।

हम सभी प्यासे के प्यासे ही रह गए।
मंजिल की तलाश में,हम सभी आगे बढ़ चले।
मंजिल तो नहीं मिली,जो कि किस्मत ने दगा दी हमें।
साला फिर से हमे हमारे किस्मत ने पप्पू बना दिया।
हाथों में वाईलिन की जगह,झुनझुन्ना थमा दिया।

हम सभी प्यासे के प्यासे ही रह गए।
कलक्टर बनने की शौक ने,हाथों में किताबों को पकड़ा दिया।
डिग्रियों की फौज को,हमने घर पर सजा दिया।
साला फिर से हमें हमारी किस्मत ने पप्पू बना दिया।
कलक्टर तो नहीं,लेकिन चपरासी बना दिया।

हम सभी प्यासे के प्यासे ही रह गए।
चपरासी की नौकरी ने,चलो शादी करवा दिया।
ऊमर भी ढल रही थी,चलो जीवन संगीनी से मिलवा दिया।
साला फिर से हमें हमारी किस्मत ने पप्पू बना दिया।
खोजते थे माधुरी दिक्षीत,कहाँ टुन टुन से मिलवा दिया।





जीवन

जीवन की तलाश में,फिर से निकल पड़ा हूँ मैं।

अपनी मंजिल की खोज में,इधर से उधर भटक रहा हूँ मैं।

जिन्दगी भी कैसे हमें,भौसागर में फँसाती है यूँ।

कभी हम जिन्दगी पर सवार होते हैं,तो कभी जिन्दगी हम पर सवार हो जाती है।

यह कैसी उलट फेर,जिन्दगी  दिखाती है हमें।

कभी खुशी तो कभी गम से भेंट करवाती है हमें।

कभी खुशियों के मंजर से,गुफ्तगू करवाती है हमें।

तो कभी गम की  भावना से,हृदय में भी ठेस लग जाता है हमें।

खुशी और गम जीवन के दो पहलू हैं।

जिन्दगी जीने के इस रहस्य को आप समझ लें।

तनाव

आज के तनाव में,
             जिन्दगी के इस पड़ाव पर।
हमारी उम्र कितनी बची है,
              ये तो वक्त ही बताएगा।
हर जिन्दगी तनाव में है,
                बस यही ख्याल में है।
कब मिलेंगे वह पल खुशियों के,
                 जब तनाव मुक्त होकर जी पाएँगे हम।
हमारी खुशियों पर भी नज़र लग गई है।
                  दुख और तनाव के चन्द्रग्रहन लग गए हैं।
कितनी आशाँति है मन में ,
                  दिल भी आज बेचैन सा है।
कैसे तनाव हटाएँ मन की,
                   दुविधा कैसे दूर करें इस दिल की।
कैसे खत्म करे यह कश्मकस,
                  तनाव को खत्म करें या तनाव करे खत्म हमें।
               
               

बदलाव

आज हर किसी को बदलाव चाहिए।
जीवन में कुछ खास चाहिए।
किसी को समाज में बदलाव चाहिए।
तो किसी को देश में।
पर आप कितने खास हैं,अपने ही लोगों के लिए।
जो आपके साथ में रहते हैं,आपके हित के लिए।
क्या आप उत्तम हैं,अपने लोगों के लिए।
अगर नहीं,तो उत्तम बने अपनो के लिए।
फिर आपको कोई नही थाम पाएगा।
दुनिया में बदलाव लाने के लिए।




क्या हम सही में पुरूषों कहलाने लायक हैं?

आज फिर से,हमने एक माँ,बहन,बिटीया गँवाई है।
पृथ्वी लोक से एक और ममता ने,हमसे अलविदा लिया है।
हम सभी पुरूषों ने क्या,यही संस्कार पाई है।
क्या हमसभी सही में,पुरूष कहलाने लायक हैं।
घर के बाहर की स्त्रियों पर,हमने नजर गड़ाई है।
अपने घर के स्त्रियों पर भी,अत्याचार ढाई है।
हम सभी पुरूषों ने क्या,यही संस्कार पाई है।
क्या हमसभी सही में,पुरूष कहलाने लायक हैं
आज कल के पुरूषों की सोच में,वासना समाई है।
जहाँ भी देखा स्त्रियों को,बस सम्भोग की इच्छा आई है।
हम सभी पुरूषों ने क्या,यही संस्कार पाई है।
क्या हमसभी सही में,पुरूष कहलाने लायक हैं।

सभी माँ बहन और बिटीया को,बराबर का सम्मान मिले।
हम पुरूष तभी हैं,जब तक कि हम सभी स्त्रियों को उनका हक दें।किसी भी स्त्री के साथ गलत होने ना दे।

बिटीया

आज मैने पहली बार,
                   जब बिटीया को देखा
ऐसा लगा,
                मानो जैसे मैने खुद को है देखा।
ईश्वरीय छवि व मनमोहक हँसी देखकर
                       ऐसा लगा,मानो जैसे लक्छमी से भेंटा।      
इतना प्यारा अनुभव,
                  और ऐसी मन में शाँति
मानो इस जन्म में हमने
                   सारा जग है जीता
खुशी का तो कुछ ठिकाना नहीं है।
                   बह रही है आँखो से अश्रुओं की धारा।
आज मैने पहली बार,
                   जब बिटीया को देखा

                                                   


               

यह मैने क्या कर डाला?

यह मैने क्या कर डाला?


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यह मैने क्या कर डाला?
                      अपने आप को ही मार डाला।
ऊफ़ ऐसा क्यों किया मैने?
                      अपने परिवार के बारे में सोचा तक नहीं।

यह मैने क्या कर डाला?
                       अपने आप को ही मार डाला।

बचपन में जिस माँ बाप ने,
                        गोद में घूमाया था मुझे।
मेरे रोने धोने पर,जब मेरे पिता ने
                         प्यार कर के चुप करवाया था मुझे।
आज बूढ़ापे में जब उनके
                        सहारा बनने का समय आया था।
उनके कँधे पर निकलवा लिया अपनी अर्थी।
                         और उन्हें जीते जी मार डाला।
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यह मैने क्या कर डाला?
                           अपने आप को ही मार डाला।

बचपन में जब भी कोई तकलीफ़ होता थी मुझे।
             माँ बाबूजी के साये में जाकर,मुझे मिलती थी शुकुन।
आज जब उनके घाव में मरहम लगाने की आई थी बारी।
                     उनके घाव को खुरेद कर और हरा कर डाला।

यह मैने क्या कर डाला?
                               अपने आप को ही मार डाला।

आज मेरे पत्नी और बच्चे अकेले पड़ गए हैं।
                उनके आँखो से अश्रुओं की धारा रुक नहीं रही है।
सात जन्मों तक साथ निभाने का किया था जिससे वादा।
                         एक जन्म भी उनका साथ निभा ना पाया।
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यह मैने क्या कर डाला?
                             अपने आप को ही मार डाला।

आज मुझे अपनी करनी पर हो रहा है पछतावा।
          रह रह कर वह मनहूस दिन घूम रहा है मेरे समक्ष।
हर किसी ने मानो,मेरे गलतीयों का चिट्ठा खोल के रखा था।
घर पर बीवी,तो ऑफिस में बॉस और स्टाफ मिल कर ताना मार रहा था।
फिर मुझे यह तनाव ज्यादा झेला ना जा सका।
                      फांसी पर लटक कर,सारा खेल खत्म किया।

यह मैने क्या कर डाला?
                          अपने आप को ही मार डाला।

यह जीवन बहुत अनमोल है,दोस्तों।इसे यूँही ना गँवाओ।
हर परिस्थिति का सामना डट के करने का मन में ठानो।
दुख सुख,मान अपमान यह सब जीवन के दो पहलु हैं।
इन्हें अपना कर,जीवन निर्वाह करना सीख लो।

written by Sushil Kumar at kavitadilse.top


आँखो ही आँखो में इशारा मिल गया

आँखो ही आँखो में इशारा मिल गया

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आँखो ही आँखो में इशारा मिल गया।
जिंदगी जीने का सहारा मिल गया।।

अभी तक कोई एक अफसाना ढुँड रहे थे यहाँ।
वही दिल को,उसका आशियाना मिल गया।।

उनका शर्माना दिल में बस सा गया।
ना जाने फिर से मुझे जीने की एक  आशा दिख गया।।

हे ईश्वर मेरे अश्रुओं ने,तुम्हारा दिल को भी पिघला दिया।
मरते हुए मानव को,तुमने जीना सीखा दिया।।
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जीवन के हर पन्ने पर

जीवन के हर पन्ने पर

जीवन के हर पन्ने पर
तेरा नाम लिख जाऊँगा
रस्ते के हर मोड़ पर
बस अपना छाप छोड़ जाऊँगा।

जीवन में कहीं भी रहूँ,
तुम्हारी याद दिल में बसाऊँगा।
मर भी जाऊँ,
तो भी मैं अपने रूह को
तुम्हारे पास छोड़ जाऊँगा।

बहुत जद्दो जहद रहती है दिल में,
अभी तो तुम मेरे पास हो।
कहीं जो तुम मुझे छोड़ जाओगे,
तो जीते जी मैं मर जाऊँगा।


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जी लो।

मेरा तो हर दिन जन्मोत्सव सा होता है।

कभी माँँ बाप ,तो कभी पत्नी का साथ होता है।

हर दिन सुवह मैं रोज जन्म लेता हूँ।
कभी माँ की पुचकार,नहीं तो पक्षियों की चहचहाहट से
पुनः उठ जाता हूँ मैं।

हर दिन मैं खूब जी भर के जीने की कोशिश करता हूँँ,
किसी को मदद करने से पीछे नहीं हटता हूँ।

मेरा हरपल मेरा नहीं होता है,
कभी माँँ बाप तो,
कभी पत्नी को समय देता हूँ।

मेरे पड़ोस में भी अगर किसी को जरुरत होती है मेरी,
मैं पीछे नहीं हटता हूँ,उनकी मदद करने से।

मैं ऐसा ही हूँ,और जैसा भी हूँ
पर दिल का पूरा बच्चा हूँ।

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हर दिन की तरह

हर दिन की तरह,रूखा-सूखा सा है


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आज का दिन।
दिल में तरंगे हैं बहुत,पर कुछ फीका फीका सा है
आज का दिन।
हर पल बस दिल में,किसी की याद कचोट रहा है
आज का दिन।
किसी भी काम में,उमंग नहीं है
आज का दिन।
कैसे बयान करूँ,कैसा लग रहा है मुझे
आज का दिन।
दिल में बस खलबली सी मची है
आज का दिन।
चलो ईश्वर को दिल से याद करें
आज का दिन।
वो हमसे भक्ति चाह रहा हो
आज का दिन।

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दिल के हर धड़कन पर

दिल के हर धड़कन पर,

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दिल के हर धड़कन पर,
तुम्हारा नाम लिखा है।
रस्ते के हर मोड़ पर ,
बस तुम्हारा नाम छपा है।
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जहाँ भी देखा
जिधर भी गया।
बस तुम्हारी छवि पाई है।

हमारी हर दुआ में,
बस तुम्हारा खैरीयत आई है।

बस तुम्हारे यादों के सहारे,
तन्हाई के पल काटी है।

सच कहता हूँ
तुम्हारे बिन जी पाना
जीवन बड़ा दुखदाई हो।
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Love you
💓 से

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तेरी किस्मत तेरे हाथ में है।

तेरी किस्मत तेरे हाथ में है। kavitadilse.top द्वारा आप सभी पाठकों को समर्पित है। मैं चला जा रहा था अकेले,झुंझलाते हुए खुद से। कभी खु...