21 Nov 2019

जरा संभल के रहना मुझसे।

Shayari

जरा संभल के रहना मुझसे।

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मुझे चुप देखकर
मेरे सहनशीलता को लोग
बुजदिली से नाप रहे हैं।

उनके मन में
मुझ पर हावी होने के
नए नए विचार कुलबुला रहे हैं।

वो चाह रहे हैं मुझपर
अपना हक जताने को।
अनचाहे काम भी
वो चाह रहे हैं हमसे करवाने को।

उनकी धृष्ठता देख देख
मैं मन ही मन
मुस्कुरा रहा हूँ।

क्यों चिंगारी ले
मेरे मन में दबे बारूद को
फिर से वो सुलगा रहे हैं।

जाने अनजाने कहीं भस्म ना हो जाए
मुझसे यूँही
वो खेलते खेलते।

Written by sushil kumar

Shayari

20 Nov 2019

जीत किनारे पर बैठकर नहीं मिलती है।

Shayari

जीत किनारे पर बैठकर नहीं मिलती है।

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Win
Win

हताश क्यों हो रहे हो?
सफर अभी बाकी है।
हार से परेशान क्यों हो रहे हो?
मंजिल अभी बाकी है।

माना आज तुमने
कोशिश तो भरपूर की थी।
पर ठोकर कुछ अभी बाकी है।
चोटें भी अभी कुछ ही मिली हैं
आगे पुराने जख्म तक
हरे हो जाएँगे।
पर अपना बहता लहू देख
आज जो तुम डर जाओगे।
इतिहास क्या खाक बनाओगे?
जो तुम आज खुद से ना लड़ पाओगे।

सो उठाओ कदम!
बुलन्द कर अपने हौसले को।
करो चढ़ाई अपने अंदर के डर पे
और करलो फतह अपने किले को।
Win
Win☺

Written by sushil kumar
Shayari

19 Nov 2019

कौन अपना कौन पराया

Shayari

कौन अपना कौन पराया

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कल तक जिस पर मुझे
खुद से भी ज्यादा भरोसा था।
जो अपना सबसे बड़ा
शुभचिंतक हुआ करता था।
आज वो मीर जाफर
विरोधी गुट में जाकर मिल गया है।
और आत्मघाती हमले की
योजना बना रहा है।

कौन अपना
कौन पराया
ये समझ पाना मुश्किल हो रहा है।
हर कोई यहाँ अपनेपन की
मुखौटा पहने घूम रहै हैं।
जिसे अपना समझकर
हम अपने गले लगा रहे थे
वो भी सिंहनख अपने हाथों में
कब से छुपा रखे थे।

Written by sushil kumar
Shayari






18 Nov 2019

माँ:-एक ईश्वरीय आशीर्वाद।

Shayari

माँ:-एक ईश्वरीय आशीर्वाद।

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Maa
Maa





दुनिया के भागम भाग में
भले मैं कहीं से कहीं पहुँच जाऊँ।

आसमा के आँचल में
कहीं सितारा बन
सभी तारों के संग टिमटिमाऊँ।
Maa
Maa💗

या फिर किसी शायरों के महफ़िल में
तेरी बन्दगी में
दो नगमे सुना जाऊँ।

हार से निराश ना होकर
अपनी सफलता के लिए जी जान लगा डालूँ।
और अपनी जीत का सारा श्रेय
तेरे दिए हुए अनमोल संस्कार को दे जाऊँ।

शायद ही ऐसा कोई दिन
कोई पल होगा माँ
जब तुम मेरे साथ नहीं थी।

तुम्हारे दिए हुए संस्कार ही तो
आज बोल रहे हैं।

और रब से भी कुछ ज्यादा नहीं
बस तेरा साथ और आशीर्वाद ही तो
हर लम्हा माँगा है।

Maa
Maa😊


Written by sushil kumar
Shayari





17 Nov 2019

बदलें हम,एक सकारात्मक बदलाव के लिए।

shayari

बदलें हम,एक सकारात्मक बदलाव के लिए।

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ये जीवन ऊपर वाले की देन है
इसे व्यर्थ में तू बर्बाद ना कर।

जो थोड़ा समय बचा हुआ है
तेरे खाते में।
उसे काम में ला
किसी ज़रूरतमंद के लिए।

बहुत कर ली मनमानी तूने।
खूब लुत्फ उठा लिए
जवानी के लहर को।
अब सम्भल जरा
थाम अपने कदम को।
देख तेरे साथ वाले छोड़ गए
कब के तेरे घर को।

अब उठ
खड़ा हो।
कदम बढ़ा ले आगे।
सवेरा नया तैयार है
तेरे स्वागत में।

एक नई सोच
एक नई क्रांति
लिए मन में।
चलें हम रोशन करने
दुनिया को खुशयों से।

परम सुख का एहसास करना है जो
लोगों की खुशयों के
आधार बने हम तुम।
संतृप्ति कहाँ मिलती थी
इस दुनिया में???
आज से पहले
कहाँ पता था हमें??



written by sushil kumar

shayari



15 Nov 2019

आराम से चल अभी बहुत दूर जाना।

Shayari

आराम से चल अभी बहुत दूर जाना है।

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आराम से चल
अभी बहुत दूर जाना है।
जीवन के रथ को
अभी बहुत दूर चलाना है।

पर मन कहाँ दिमाग की
सुनने वाला है।
लक्ष्य अभी दिखी नहीं है
कदम को तेजी से बढ़ाना है।

ज्यादा जल्दी ना मचा
थक जाएगा बहुत जल्दी तू।
सफर को बना सुहाना
ना स्वाहा कर
उसे जीतने की होड़ में।

हार जीत के दायरे से
खुद को तू ऊपर उठा।
हौसले को चट्टान सा
ऊँचा और अडिग रख।

गिर भले तू हज़ार बार
पर कदम को तू मजबूती से रख।
मंजिल मिले ना मिले
पर हर पग को
संगीतमय कर।



Written by sushil kabira
Shayari





13 Nov 2019

तेरे हक का है तो छीन लो।

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तेरे हक का है तो छीन लो।

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अपने हक के लिए
तुम्हें आवाज खुद उठाना होगा।
आएगा नहीं आगे कोई
तुम्हें न्याय दिलाने लिए।

वाचाल तो बहुत मिलेंगे
तुम्हे राह से भटकाने के लिए।
पर हक तो तुम्हारा है
पग आगे बढ़ा
उसे पाने के लिए।

तू जो ठान ले आज
तो क्या मजाल
कि हक तेरा
कोई छीन ले।

भीख मिलती है आज
खैरात में।
तेरे हक का है तो
छीन लो।
Snatch


Written by sushil kumar
Shayari

जरा संभल के रहना मुझसे।

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