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तुम लिखो कुछ ऐसा

तुम लिखो कुछ ऐसा



kavitadilse.top द्वारा आप सभी पाठकों को समर्पित है।


तुम लिखो कुछ ऐसा
जिससे शांत सरोवर की शिथिल लहरों में
एक उफान सा उठ जाए।

तुम लिखो कुछ ऐसा
जिससे मृत ज्वालामुखी
पुनः जीवित हो
फिर से जाग जाए।

तुम लिखो कुछ ऐसा
जिससे बैरागी मन में
क्रान्ति की एक ज्वाला फूट जाए।

तुम लिखो कुछ ऐसा
जिससे लँगड़े घोड़े के टांग में
फिर से जान फूंक सा जाए।

तुम लिखो कुछ ऐसा
जिससे सारे मैल मनुष्य के मन से
चुटकियों में धूल जाए।

तुम लिखो कुछ ऐसा
जिससे सारी धरतीवासी
अमन और चैन से जी पाए।

तुम लिखो कुछ ऐसा
जिससे मानव
मानवता के पथ पर चल पाए।


Written by sushil kumar



तुमने कोशिश पुरजोर करी थी


तुमने कोशिश पुरजोर करी थी


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तुमने कोशिश पुरजोर करी थी
मेरी what लगाने को।
चाल तो बड़ी अच्छी चली थी
मुझे रास्ते से हटाने को।
पर एक पुरानी कहावत है
तुमने भी सुन रखी होगी।
जाको राखे साइयां
मार सके ना कोई।
बाल ना बाका कर सके
जो जग बैरी होई।

आज मैं हिमालय की चोटी पर पहुँच गया हूँ
तुम्हारे लाख अड़ंगों के बावजूद।
चले थे मुझे स्वर्गवासी करने को
खुद नरक पहुँच गए हो।

Written by sushil kumar

तुम लिखो कुछ ऐसा

तुम लिखो कुछ ऐसा kavitadilse.top द्वारा आप सभी पाठकों को समर्पित है। तुम लिखो कुछ ऐसा जिससे शांत सरोवर की शिथिल लहरों में एक उफान ...