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राष्ट्रवाद

राष्ट्रवाद
kavitadilse.top द्वारा आप सभी पाठकों को समर्पित है।

कोई ऐसा तूफान नहीं
जो मेरे इरादे को हिला सके।
कोई ऐसा सैलाब नहीं
जो मेरे हौसले को बहा सके।

मैं नहीं वो महान सिकन्दर
जो मगध की विशाल सेना देख
कदम को पीछे हटा लिया।
मैं हूँ वो वीर पुरु
जो सिकन्दर के जलजले देख भी
खुद को ना रोक सका।

बहुत देखे ऐसे कायर महाबली
जो कमजोर पर राज करते हैं।
मैं आया हूँ इस धरती पर
सभी के दिलों पर राज करने को।

मैं हूँ प्रेम
मैं ही हूँ बलिदान।
अगर मैं नहीं तो
नहीं हो किसी देश का सम्मान।

मैं ही हूँ
जो सीमा पर रहता हूँ तैनात।
मैं ही हूँ
जो देश के लिए जान देने को रहता हूँ तैयार।
मैं ही हूँ
देश की विकास में।

क्योंकि मैं हूँ
वीरों की वीरगति की गाथा में
उनके बहते हुए खून और पसीने के पराक्रम में।
मैं ही हूँ।
मैं ही हूँ।
मैं ही हूँ।
।।राष्ट्रवाद।।

जय हिंद।।
जय भारत।।
Rastrawad


Written by sushil kumar



एक राष्ट्रवादी की आखिरी ख्वाहिश।

एक राष्ट्रवादी की आखिरी ख्वाहिश।

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Rastrawad

माँ आज मैं बहुत खुश हूँ।
जिस मिट्टी से मैने जन्म लिया
उस राष्ट्र की एक आखिरी सेवा करने का समय
जो आज निकट आ गया है।

मेरे भस्म को गंगा में प्रवाहित नहीं होना है।
ना ही उसे मिट्टी में मिलना है।
जिस क्षण मैं भस्म बनूँ
आँधी और तूफान मेरे भस्म को उड़ा ले जाएँ।
और सारे भारत के हवा के कण कण में उसे समाहित कर दें।
और मैं हर भारतीय के साँस में
हवा बन प्रवाहित हो जाऊँ।
उनके खून में मिल
राष्ट्रवाद की अखण्ड ज्वाला बन उनके हृदय में
सदा सदा के लिए ज्वलित हो जाऊँ।
और अपने भारत को पूर्ण राष्ट्रवादी देश बना
अपनी प्रिय माता से अलविदा ले
संसार से मुक्ति पाऊँ।
और हिंदुस्तान की सोच में
मैं सदा जीवित रहूँ
एक राष्ट्रवाद की अखण्ड क्रान्ति बनकर।

जय हिंद।।
जय भारत।।

Written by sushil kumar

राष्ट्रवाद

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