सोमवार, 10 जनवरी 2022

रिश्ते 🤔

 

रिश्ते कैसे ??कैसे??


रिश्तो में निपा पोती कर 

लोग उसे आकर्षक बनाने की कोशिश में लगे हैं।

पर वह टिकाऊ कितनी है

ये तो वक्त ही बताएगा।


रिश्तो को थोप देने से

कभी भी निभ नहीं सकती।

रिश्ते तो दिल की गहराई से

पैदा होते हैं।

बाकि तो सारे बाहरी 

ढकोसले बन कर ही रह जाते हैं।


अगर किसी निम्न स्तर से रिश्ता जोड़ा है

पर दिल अगर उसे ना अपना पाया है।

फिर वह निम्न स्तर का व्यक्ति आपके लिए

जान भी अगर दे देगा।

तब भी आप उसे शायद ही दिल से 

कभी अपना पाएंगे।


रिश्ता एकतरफा नही बन सकता है।

केवल एक के मान लेने से

दूसरा भी उसे उसी दर्जे पर नहीं 

रख सकता है।


अहंकार का विष 

अक्सर रिश्तो में खाई बना देता है।

जो आगे जाकर 

दुखदाई हो जाता है।


अगर कोई झुक कर

आपका सम्मान कर रहा है।

तो ये उसके संस्कार हैं।

ये नही कि

वो कायर है।


रिश्तो को फलने फूलने के लिए

उन्हें समय देना चाहिए।

पर अक्सर लोग 

दो फूलों को एक साथ कर के।

फिर उनमें भेदभाव करना शुरू कर देते हैं।


माली को अक्सर अपने फूल की चिंता रहती है।

पर सामने वाले के 

फूल में कीड़े लगने पर

उसे कुछ ज्यादा फर्क नहीं पड़ता है।


सुशील कबीरा


रविवार, 3 अक्तूबर 2021

जिंदगी ए दास्तान

जिंदगी ए दास्तान
जिंदगी ए दास्तान



जीवन! 
आखिर क्या है?

कभी मैं आया था 
इस धरती पर
अपनी माँ के कोख में
अंकुरित हुआ था।

धीरे धीरे जब बड़ा हुआ था
हाथ - पैर चला
अपनी तकलीफ
माँ को बताया था।

पर मुझ अबोध को क्या पता था
मेरे चाल से 
कष्ट माँ को भी हुआ था।

नौ महीने के बाद
जब बाहर आया था।
इतने सारे लोगों को देख
घबराया था।

पर माँ के एक स्पर्श मात्र से
मुझे गैरों में 
कोई अपना समझ आया था।

धीरे धीरे समय बिता।
रिश्तों की समझ आई।
मम्मी-पापा दादा दादी
नाना नानी व अन्य रिश्तों को 
पहचान पाया।

फिर!
फिर एक दिन पता चला
कि मेरे दादा जी नहीं रहें।
मम्मी पापा को रोते देखा तो
मैं अपने आंसुओ को रोक ना सका।

हम सभी बैग पैक कर के
निकल पड़े थे
अपने गाँव की तरफ।
जब हम वहाँ पहुँचे 
देखा मैने तब
दादा जी थे सोए जमीन पर।

चारों ओर रोते चिल्लाते लोगों को देख
में भी रोने लगा 
फफक फफक कर।
पहली दफा किसी अपने को खोते देख
मुझे लगा जबरदस्त सदमा था।

अगर पापा या मम्मी को कुछ हो गया
तो मैं तो मर जाऊँगा।
मैं उनसे बहुत प्यार करता हूँ।
भगवान के फ़ोटो के सामने जाकर
उनकी खैरियत की हर पल दुआ मांगता।

आज इतने दिन हो गए हैं।
मेरी शादी भी हो गई है।
माँ बाबूजी अकेले हैं
मैं अनजान शहर में नौकरी कर रहा हूँ।
पर आज भी भगवान के आगे 
बस एक ही दुआ माँगता रहता हूँ।
माँ बाबूजी बहना और भार्या की
ख़ैरियत सदा तुम रखते रहना।
उनके खुशी में
मेरी खुशी है।
उनके बिन 
ये जिंदगी भी क्या जीना!


जिंदगी ए दास्तान


Sushil kabira

सफल कैसे बने?

 सफल कैसे बने?

सफल कैसे बने?


साहसपूर्वक अपने सपनों की दिशा में आगे बढ़ें।


 लम्बे खड़े हो जाओ और दुनिया को दिखाओ कि 

तुम किस चीज से हो बने ।  

जब दुनिया आपको हरा दे, 

तो फिर से उठने का कारण खोजें।  

असफलता से कभी हार नहीं माने।


 कोशिश करो, कोशिश करो, कोशिश करो 

और फिर से कोशिश करो।  

अपने दिमाग को सफलता के विचारों से पान कराएं, 

असफलता के नहीं।


 याद रखें, आप असफल होने का एकमात्र तरीका है 

यदि आप हार मान लेते हैं।  

हर बार जब आप असफल होते हैं, 

तो आप सफलता के एक कदम और करीब आते हैं।


 तुम भयभीत नहीं हो;  

तुम साहसी हो।  

तुम कमजोर नहीं हो;  

तुम शक्तिशाली हो।  

आप साधारण नहीं हैं, 

उल्लेखनीय हैं।


 पीछे मत हटो, 

हार मत मानो।


 जब आप अपने जीवन को पीछे मुड़कर देखे, 

तो पछतावा बिल्कुल भी न करें।  

अपने आप पर विश्वास करें, 

अपने भविष्य पर विश्वास करें, 

आपको अपना रास्ता मिल जाएगा।


 तुम्हारे भीतर एक आग जल रही है 

जो बहुत ही शक्तिशाली है।  

यह उज्ज्वल जलने की प्रतीक्षा में है।  

आप महान कार्य करने के लिए ही बने हैं।


 अपने सपनों का पीछा करना 

भयानक और रोमांचक दोनों ही हो सकता है।


 साहस भय का सामना कर रहा है।  

असफलता का डर ज्यादातर लोगों को पीछे ले जाता है।  

पर आप ज्यादातर लोग में नहीं हैं।


 अपनी योजनाओं के बारे में दूसरों को सूचित रखना जारी रखें 

और उन्हें मनाएं, क्योंकि वे वास्तविक हैं।  

यह आपके सिवा कोई नहीं कर सकता।  

हमारे सपनों के आड़े कोई भी नहीं आ सकता।


 अधिकांश लोग स्पष्ट में महारत हासिल करते हैं;  

आप कुछ ऐसा बना रहे हैं जो पहले नहीं था।  

यह बोल्ड है, यह सुंदर है, और यह और कू नहीं,

आप स्वयं हैं।


 इसे अपना सर्वश्रेष्ठ दें, 

और आपके सपने साकार होते दिखेंगे।  

सफलता की कुंजी आप स्वयं है।


अपने सपनों के लिए जाओ;  

यह आपकी बारी है।


सफल कैसे बने?

Sushil kabira

गुरुवार, 16 सितंबर 2021

कुछ बातें, मेरे हृदय के कोने से

 कुछ बातें, मेरे हृदय के कोने से


मेरी चुप्पी

लोगों में

मेरी कमजोरी का वहम पैदा कर रही है।

पर उन्हें 

नहीं पता

जिस दिन 

मेरी सहनशीलता का बांध टूट जाएगा।

उस दिन

वो सारे लोग 

उस सैलाब में कहीं बह जाएँगे।


आज अपनी ताकत पर घमण्ड करते हो।

कल जब तुम कमजोर पड़ जाओगे

तब तुम अपनी कमजोरी पर भी घमण्ड करके दिखा देना।


अगर कोई अकेला है

तो उसके साथ हो जाना

या उसे अपने संग ले आना

एक मानव होने का प्रमाण दिखाता है।


हर कोई अपने से कमजोर पर राज करना चाहता है।

पर जो कमजोर का सहारा बनने की कोशिश करे

वही असली राजा मानने योग्य होता है।


उंगुलियों में दस अंगूठियों को मात्र डाल लेने से 

भाग्य नहीं बदलता है।

भाग्य का उदय कर्म के उदय के साथ होता है।



कुछ बातें, मेरे हृदय के कोने से

द्वारा: सुशील कबीरा।।



मंगलवार, 31 अगस्त 2021

शायद

 शायद

तुम मुझे पसंद नहीं करती हो।

पर मैं तुमसे बेइंतेहा मोहब्बत करता हूँ।

शायद तुम मुझे देखकर भी

अनदेखा करती हो।

पर मैं तुम्हें 

नज़रअंदाज़ नहीं कर पाता हूँ।

शायद


मेरी सूरत अच्छी नहीं है

उतनी।

मुझे ये पता है।

पर सीरत से 

जो तूने आंका होता मुझे कभी।

तो तू शायद ही खुद को 

कभी अलग रख पाती मुझसे।


मैं नहीं कहता हूँ कि 

दुनिया की सारी खुशियों को 

तेरे कदमों में रख दूँगा।

पर हाँ, 

तेरे चेहरे के हर खुशी का

बस एक मैं ही कारण बनूँगा।


हाँ,

तेरे आँखों से आंसू 

मोती बन गिरेंगे

मेरे दामन पर जरूर।

पर वो दुख के नहीं

बल्कि वो खुशी के होंगे

मेरी पागल प्रिय।।


शायद

Written by sushil kabira


सोमवार, 30 अगस्त 2021

मेरी मुस्कान

 मेरी मुस्कान

मेरी मुस्कान

मेरी मुस्कान

पर मत जा मेरे दोस्त।

अपने दर्द को छुपाए बैठा हूँ

अरसे से।(2)


कहीं जाम छलक ना जाए 

मेरे आंखों से।

अपने जज्बात दबाए बैठा हूँ

बड़े जमाने से।(2)


लोगों को 

पता नहीं क्यों?

मैं इस दुनिया का 

सबसे खुशनसीब इंसान दिखता हूँ।(2)


फिर मुझे पता चला 

क्यों लोग मुझे 

तकदीर - ए - शहंशाह समझते हैं।(2)


फरेब जमाने से 

धोखा खाकर

अक्सर लोग अकेलेपन में

शैतान के चंगुल में फंस जाया करते हैं।(2)


और कुछ फरेबियों के चक्कर में

अपने प्रियजनों को 

जिंदगीभर के लिए अंधेरे में

धकेल जाया करते हैं।(2)


पर मैं जब भी खुद को कभी

अकेला महसूस करने लगता हूँ।

मेरी कविताएँ मुझ पर 

अक्सर हावी ही जाया करती हैं।

मैं लाख कोशिश कर लूँ

इनसे पीछा छुड़ाने को

पर वो कहाँ मुझे कभी

अकेला छोड़ पाती है।


अपने शब्दों के बाण से 

कभी मुझे झकझोरती है,

कभी हँसाती है,

तो कभी रुलाती।(2)

पर मेरी कविता

मेरा साथ

कभी छोड़ कर नहीं जाती है।

कभी छोड़ कर नहीं जाती है।



Written by sushil kabira




शनिवार, 28 अगस्त 2021

सुविचार:- एक शुरुवात

सुविचार:- एक शुरुवात

सुविचार:- एक शुरुवात


अपने आस पास बैठे लोगों को

छोटा महसूस कराके

कोई भी इंसान बड़ा नहीं बनता।

इंसान बड़ा बनता है

जब वह अपने आस पास बैठे लोगों में

अपनेपन का निशान छोड़ जाए।


इस दुनिया में अमीरी बहुत देखी है।

पर उन अमीरों से भी धनवान वो लोग हैं

जो अपने यथासामर्थ्य से 

अपने आस पास के लावारिस कुत्तों के पेट पालते हैं।


हर किसी की चाहत होती है

लम्बी आयु जीने को।

पर असली हीरो छोटी आयु को भी 

बड़ा कर चला जाता है।


इंसान आजकल नफरत में 

बहुत ही आगे निकल गया है।

समय आ गया है

मोहब्बत की बारिश से 

उसे प्यार में भिंगोने को।


लोगों की ताने सुन कर मैं

गूंगा बन जाया करता हूँ।

अपने कर्म के बल्ले से धोकर

उनकी अकड़ निकाला करता हूँ।


दुश्मन क्या! दोस्त क्या!

हर किसी की खबर मैं रखता हूँ।

सबसे पहले मैं इंसान हूँ

इंसानियत धर्म के लिए लड़ता हूँ।


Written by sushil kabira

रिश्ते 🤔

  रिश्ते कैसे ??कैसे?? रिश्तो में निपा पोती कर  लोग उसे आकर्षक बनाने की कोशिश में लगे हैं। पर वह टिकाऊ कितनी है ये तो वक्त ही बताएगा। रिश्तो...